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पत्रकार की पहल : गुमनाम न रहेंगी बेगम

[caption id="attachment_16651" align="alignnone"]बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम और उनकी बिटिया के साथ पत्रकार शिवनाथ झा.बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम और उनकी बिटिया के साथ पत्रकार शिवनाथ झा.[/caption]

अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम आजाद हिन्दुस्तान में आर्थिक तंगी के चलते पश्चिम बंगाल में चाय बेचकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अभी तक इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था लेकिन अब एक पत्रकार ने इनकी मदद के लिए एक अनोखी पहल की है।

बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम और उनकी बिटिया के साथ पत्रकार शिवनाथ झा.

अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम आजाद हिन्दुस्तान में आर्थिक तंगी के चलते पश्चिम बंगाल में चाय बेचकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अभी तक इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था लेकिन अब एक पत्रकार ने इनकी मदद के लिए एक अनोखी पहल की है।

पत्रकार शिवनाथ झा और उनकी शिक्षिका पत्नी नीना झा देश को गौरवान्वित करने वाली महान हस्तियों के वंशजों को समाज में यथोचित स्थान दिलाने के लिए ‘आंदोलन एक पुस्तक से’ के नाम से आंदोलन चला रहे हैं। इसी श्रृंखला में फिलहाल वे मुगल शासक बहादुर शाह जफर की पौत्रवधू सुल्ताना बेगम को गुमनामी से बाहर निकालने के लिए अभियान चला रहे हैं।

अखबार बेचकर करियर की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ पत्रकार झा ‘द प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ इंडिया-1947-2009: भारत भाग्य विधाता’ नामक कॉफी टेबल बुक के जरिए सुल्ताना बेगम के लिए धन इकट्ठा कर रहे हैं ताकि देश के अंतिम मुगल बादशाह के वंशजों को गुमनामी के अंधेरे से बाहर निकाला जा सके। सुल्ताना बेगम फिलहाल कोलकाता के हावड़ा की एक झुग्गी-बस्ती में चाय दुकान चलाती हैं। झा ने आईएएनएस से कहा, “जब मैं वर्ष 2008 में कोलकाता गया था तो मैंने सुल्ताना बेगम को वहां एक झुग्गी बस्ती में चाय बेचते देखा। जिसके वंशज देश पर राज करते थे उसकी मौजूदा हालात को देखकर मैं अचंभित हो गया। सुल्ताना बेगम के पास कुछ भी नहीं है।”

झा ने कहा, “सुल्ताना बेगम की सहायता के लिए मैंने अब तक पांच लाख रुपये इकट्ठा कर लिए हैं और उन्हें बैंक में जमा कर दिया है। कोलकाता स्थित एक विद्यालय ने भी उन्हें नौकरी देने का वादा किया है। वहीं एक कंपनी के मालिक ने उनके लिए घर देने का भी वादा किया है।” झा ने कहा कि सुल्ताना बेगम की छोटी बेटी की शादी मार्च में होगी, जिसमें ‘आंदोलन एक पुस्तक से’ आर्थिक सहायता करेगा। ‘द प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ इंडिया-1947-2009: भारत भाग्य विधाता’ पुस्तक में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक की उपलब्धियों का जिक्र किया गया है। पुस्तक में कई यादगार तस्वीरों और स्केच को शामिल किया गया है।

झा इससे पहले ‘आंदोलन एक पुस्तक से’ के जरिए 1857 की क्रांति के क्रांतिवीर तात्या टोपे के परपौत्र का पुनर्वास करा चुके हैं। उन्होंने अमर शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां की सहायता कर ‘आंदोलन एक पुस्तक से’ की शुरुआत की थी। साभार : आईएएनएस

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0 Comments

  1. Dr. Hari Ram Tripathi

    May 25, 2010 at 4:20 pm

    SULTANA BEGHUM KA JO PARICHAY DIYA USKE SAMARTHAN ME KOI SATEEK PRAMAN PRAKASHIT KARIYE TO SAHAYATA DENE VALE BAHUT MILENGE.—[email protected]

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