चंदौली में ‘आज’ के पत्रकार दिवाकर राय पर जानलेवा हमला

चंदौली जिले में दैनिक ‘आज’ के पत्रकार दिवाकर राय पर जानलेवा हमला किया गया. जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. मामला जमीनी विवाद का बताया जा रहा है. दिवाकर ने धीना थाना में चार लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी है. पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है, परन्‍तु सभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.

दिवाकर राय धीना थाना क्षेत्र में आज के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. बताया जा रहा है कि क्षेत्र के जनौली तिराहे पर वह किसी काम से जा रहे थे, इसी बीच दो बाइक पर सवार चार हमलावरों ने उन्‍हें रोक लिया तथा लाठी-डंडे से जमकर पिटाई शुरू कर दी. दिवाकर को काफी चोटें आई हैं. स्‍थानीय लोग द्वारा बीच बचाव करने के बाद हमलावर वहां से चले गए. दिवाकर के सहयोगियों ने उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज किया गया.

दिवाकर के सिर और शरीर के कई हिस्‍सों में गंभीर चोटें आई हैं. हमला करने वाले दिवाकर के जान पहचान के थे. जिनसे पत्रकार का जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. दिवाकर ने अपने साथ हुई घटना की शिकायत धीना थाने में दर्ज कराई है. पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है. पुलिस पूरे मामले की जांच और हमलावरों की तलाश में लग गई है.

‘आज’ के संपादक शार्दुल विक्रम गुप्‍त के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला!

बनारस के महेंद्रवी छात्रावास के अधिग्रहण के मामले में आज अखबार के मालिक और संपादक शार्दुल विक्रम गुप्‍त और उनके परिजनों पर प्रर्वतन निदेशालय ने चार सौ बीसी का मुकदमा दर्ज कराया है. कैंट थाने में महेंद्रवी छात्रवास के अधिग्रहण में गड़बड़ी के आरोप में उन पर तथा उनकी बहु के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है. मुकदमा बीते साल 4 नवम्‍बर को दर्ज कराया गया है.

यह मामला भी सहारा मीडिया के डाइरेक्‍टर न्‍यूज उपेंद्र राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले ईडी के असिस्‍टेंट कमिश्‍नर राजकेश्‍वर सिंह ने दर्ज कराया है. इस मामले की जांच चल रही है. इस बारे में क्‍लाउन टाइम ने विस्‍तार से एक खबर प्रकाशित की है. जिसे नीचे देखा जा सकता है.

आजआजआज

अलीगढ़ के एसपीसिटी ने दी दैनिक आज के प्रभारी को जान से मारने की धमकी

अलीगढ़ के दैनिक आज के प्रभारी आरपी शर्मा ने आरोप लगाया है कि अलीगढ़ में तैनात एसपी सिटी मानसिंह चौहान पर जान से मारने की धमकी देने तथा उनके ऊपर रिवाल्‍वर तानने का आरोप लगाया है. डीआईजी को लिखे पत्र में आरपी शर्मा ने कहा कि कि पिछले दस वर्षों से जिले में तैनात एसपीसिटी से उनकी तथा उनके परिवार की जान को खतरा है. पुलिस उनकी शिकायत नहीं लिख रही है.

आरपी शर्मा ने इस शिकायत की प्रतिलिपि राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री, एडीजी कानून व्‍यवस्‍था, मानवाधिकार आयोग सहित कई लोगों को भेजी है.

शिकायत

हजारीबाग में तीन मीडियाकर्मियों से मारपीट, कैमरे छीने गए

: घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई : हजारीबाग में न्‍यूज कवर करने गए दो पत्रकार एवं एक फोटोग्राफर के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की. इनलोगों के कैमरे, मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए. तीनों को चोटें भी आई हैं. मीडियाकर्मियों ने घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दे दी है. पुलिस ने अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया है.

हजारीबाग के सदर थाना क्षेत्र के सिंदूर गांव के पास एनएच33 पर एक सड़क हादसा हो गया. हादसे में एक उन्‍नीस साल की लड़की की मौत हो गई. मौत से गुस्‍साए ग्रामीणों ने दुर्घटना करने वाले ट्रक को फूंक दिया तथा सड़क पर जाम लगा दिया. इसकी सूचना मिलते ही दैनिक आज के वरिष्‍ठ रिपोर्टर कृष्‍ण गुप्‍ता, इंडिया टीवी राजीव रंजन तथा दैनिक भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट रवींद्र मौके पर पहुंचे. पत्रकार घटना स्‍थल पर विजुअल बनाने और फोटो लेने में लगे ही थे कि कुछ ग्रामीण उग्र हो गए तथा समाचार कवर करने से रोकने लगे.

इन लोगों ने समझाने का प्रयास किया तो तीनों से मारपीट की गई. राजीव का वीडियो कैमरा, रवींद्र का कैमरा, एटीएम कार्ड तथा उनके पर्स में रखे पैसे छीन लिए गए. कृष्‍ण गुप्‍ता का सैमसंग का मोबाइल लूट लिया गया. कुछ लोगों ने बीच बचाव करके इन लोगों को छुड़ाया. वहां से आने के बाद तीनों लोगों ने सदर कोतवाली में घटना की लिखित तहरीर दी. पुलिस ने अभी मामला दर्ज नहीं किया है.

बताया जा रहा है कि पुलिस ने आश्‍वासन दिया है कि दोनों लोगों के कैमरे तथा अन्‍य सामान पुलिस वापस करा देगी. ऐसा न होने की स्थिति में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. खबर देने तक तीनों मीडियाकर्मियों के सामान वापस नहीं मिल पाए थे.

मणि बने सहारा के एकाउंट हेड, श्रीनिवास की वीओएन से छुट्टी

दैनिक आज, वाराणसी से इस्‍तीफा देने वाले केके मणि ने अपनी नई पारी बनारस में राष्‍ट्रीय सहारा वाराणसी के साथ शुरू कर दी है. उन्‍होंने यूनिट एकाउंट हेड के पद ज्‍वाइन किया है. मणि पिछले 28 सालों से आज को अपनी सेवाएं दे रहे थे. मणि का जाना आज के लिए बड़ा झटका है. मणि ने प्रबंधन से विवाद होने के बाद 18 फरवरी को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया था. प्रबंधन ने उन्‍हें मनाने की कोशिश की परन्‍तु उन्‍होंने वापस लौटने से इनकार कर दिया. इसी बीच सहारा का ऑफर मिलने के बाद वे इससे जुड़ गए.

वॉयस ऑफ नेशन से आउटपुट हेड श्रीनिवास पंत की भी छुट्टी हो गई है. श्रीनिवास अब इस चैनल के हिस्‍से नहीं रहे. बताया जा रहा है कि मैनेजमेंट ने उनसे इस्‍तीफा देने को कहा था. दो दिन पहले मैनेजमेंट ने चैनल हेड गिरीश सेमवाल को भी बाहर का रास्‍ता दिखा दिया था. श्रीनिवास काफी समय से इस चैनल से जुड़े हुए थे.

दैनिक आज, गया के पत्रकारों को मिली दो माह की सेलरी

दैनिक आज, गया के पत्रकारों को प्रबंधन ने दो माह की सेलरी एक साथ दी है. इससे पत्रकार आंशिक रूप से खुश हैं. गया जिले में आज अखबार के कार्यरत कर्मियों का वेतन और मानदेय पिछले एक साल से ज्‍यादा समय से नहीं मिला था. किसी प्रकार यहां के कर्मचारी अपना गुजारा कर रहे थे. इस संदर्भ में भड़ास ने एक खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद प्रबंधन ने नए साल पर अपने कर्मचारियों को दो माह का वेतन देकर आंशिक राहत प्रदान की है.

गया जिले में आज के एडिटोरियल विभाग में पांच लोगों की नियुक्ति है. कम्‍प्‍यूटर सेक्‍शन में भी कुछ कर्मचारी हैं. इनको पिछले लगभग 15 माह से आज प्रबंधन ने वेतन और मानदेय नहीं दिया था. इसके चलते समस्‍त पत्रकार, गैर पत्रकार कर्मचारी परेशान थे. कर्मचारी अपने शोषण के खिलाफ आवाज भी नहीं उठा पा रहे थे. हालांकि उस समय ब्‍यूरोचीफ कमलेश सिंह ने कहा था कि 15 महीने नहीं दो-तीन महीने की सेलरी इस बार लेट हो गई है.

पिछले दिनों हॉकरों ने भी कमीशन कम होने पर ‘आज’ भी बेचने से इनकार कर दिया था. इस अखबार की कीमत एक रूपया हो जाने के बाद हॉकरों का कमीशन घट गया था. जिससे उन्‍होंने आज बेचना बंद कर दिया था. स्‍थानीय लोगों की मांग के बाद हॉकरों ने फिर से अखबार बेचना शुरू कर दिया है. इस बारे में भी एक खबर प्रकाशित हुई थी. हॉकरों ने अब आज अखबार ना बेचने के अपने फैसले को वापस ले लिया है.

पत्रकारों के सम्‍मान की धज्जियां उड़ाई दैनिक जागरण ने!

हमेशा दूसरे की हक और हुकूक की लड़ाई लड़ने वाली मीडिया आज कहां पहुंच गई है, इसकी बानगी देखने को मिला गाजीपुर में, जहां अपनी बेइज्‍जती और संगठन की लड़ाई में सहयोग देने के बजाय कुछ अखबार अधिकारियों के तलवे चाटने से बाज नहीं आ रहे हैं. जिला पंचायत अध्‍यक्ष पद के लिए नामांकन गाजीपुर कलेक्‍ट्रेट परिसर में हो रहा था. नामांकन को कवर करने के लिए कुछ मीडियाकर्मियों ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की तो वहां तैनात दरोगा ने सीडीओ के आदेश पर किसी को अंदर नहीं जाने दिया. यह बात मीडियाकर्मियों को नागवार लगी. जिसके बाद सभी मीडियाकर्मियों ने उक्‍त नामांकन का बहिष्‍कार करने का निर्णय ले लिया.

जिसमें दैनिक जागरण, हिन्‍दुस्‍तान, अमर उजाला, आज सहित कई अन्‍य अखबारों के पत्रकार एवं फोटोग्राफर शामिल थे. इन पत्रकारों के समर्थन एवं मीडिया के सम्‍मान में जनपद के अन्‍य प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों ने बहिष्‍कार का समर्थन करते हुए नामांकन का कवरेज नहीं किया. लेकिन खुद को सबसे बड़ा अखबार कहने वाला दैनिक जागरण, जो आजकल सरकारी अखबार का खिताब पा चुका है, ने पत्रकारों के सम्‍मान की धज्जियां उड़ा दी. इसके फोटोग्राफर ने अपने सहयोगियों से दगा करते हुए अपने प्रिय अधिक‍ारियों डीएम, सीडीओ एवं सूचना अधिकारी की फोटो नामांकन कराते हुए व जांच करते हुए अपने अंक में छापा डाला. एक तरफ तो उक्‍त फोटोग्राफर बहिष्‍कार में समर्थन दिया वहीं दूसरे रास्‍ते अपने साथी के सहयोग से अंदर घुसकर अपने प्रिय अधिकारियों को भी खुश कर दिया कि हम पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं. कुछ भी.

जानकारों के अनुसार उक्‍त अखबार को प्रतिमाह लाखों का सरकारी विज्ञापन मिलता है. जिसके चक्‍कर में ये आज अपना मान-सम्‍मान भी चौराहे पर बेच डाले. आगे ये विज्ञापन और अधिकारियों की चाटुकारिता के लिए क्‍या-क्‍या कर सकते हैं, कहने की जरूरत नहीं है.   जब इसकी जानकारी सुबह दूसरे मीडियाकर्मियों को हुई तो सभी उस बात पर हैरान थे. दूसरी तरफ जिला मुख्‍यालय पर चाय-पान की दुकानों पर कल के बहिष्‍कार की खबर को लोग चटकारे लेते हुए बात करते नजर आए. इन लोगों का कहना था कि आखिर इन मीडियाकम्रियों की क्‍या औकात, जो अपने संगठन का नहीं होगा वो दूसरों की क्‍या मदद करेगा, क्‍या साथ देगा. इनको बस 500-1000 का नोट दिखाओं और जो चाहो करा डालो.

गाजीपुर से एक पत्रकार की रिपोर्ट.

आज अखबार पर मीडियाकर्मियों ने किया मुकदमा

एक जमाने के नामी-गिरामी अखबार ‘आज’ को कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण बनारस के पत्रकारों/गैर-पत्रकारों के संगठन समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन ने न्यायालय में घसीटा है। वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पांडेय और कार्टूनिस्ट जगत शर्मा की तरफ से यूनियन के मंत्री और वरिष्ठ वकील अजय मुखर्जी ने श्रम विभाग में मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमें में कहा गया है कि आज अखबार का प्रबंधन दो दशक से भी ज्यादा समय से अपने यहां कार्यरत मीडियाकर्मियों को 55 साल में ही रिटायर कर देता है जबकि कानूनन 60 साल में रिटायर किया जाना चाहिए।

समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी ने भड़ास4मीडिया को बताया कि हम लोगों ने श्रम बंधु की बैठक में बनारस के जिलाधिकारी को इस मामले के बारे में अवगत कराया था। श्रम विभाग को जानकारी दी थी। श्रम विभाग ने आज अखबार प्रबंधन से पूछा था कि आज अखबार किस स्थायी आदेश के तहत मीडियाकर्मियों को 55 वर्ष की उम्र में ही रिटायर कर दे रहा है? इस आदेश की प्रति दिखाइए। जब आज अखबार को प्रकाशित करने वाली कंपनी ज्ञानमंडल प्रकाशन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं दिखाया गया और कहा गया कि उनके यहां कार्यरत किसी मीडियाकर्मी को 55 साल की उम्र में रिटायर नहीं किया गया है तो समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन ने करीब 50 मीडियाकर्मियों का नाम श्रम विभाग के पास पेश किया जिन्हें 55 की उम्र में ही आज अखबार से विदा कर दिया गया। श्रम विभाग ने यूनियन की ओर से पेश आंकड़ों, सुबूतों और दावों को देखते हुए यूनियन को आज अखबार पर मुकदमा करने की अनुमति दे दी। इसी आधार पर डिप्टी लेबर कमिश्नर के यहां मुकदमें के लिए कागजात भेज दिए गए हैं। कुछ ही दिनों में यह मामला लेबर कोर्ट पहुंच जाएगा। अजय मुखर्जी को उम्मीद है कि वे मीडियाकर्मियों के हित का यह मुकदमा भी जीत पाने में सफल हो जाएंगे।