“पाकिस्तान : समाज और संस्कृति” एक खिड़की है, जिससे पड़ोसी देश को देख सकते हैं

भारत और पाकिस्तान भले ही दो अलग-अलग भागों में बंट गया हो लेकिन दोनों देशों के रहन-सहन, संस्कृति, परंपराएं, साहित्य, संगीत, लोक-जीवन, सामाजिक व्यवस्था, आदि में अभी भी भरपूर समानताएं मौजूद हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभ लेखक फ़ीरोज़ अशरफ़ ने पिछले 25 वर्षों से प्रकाशित होने वाले अपने नियमित स्तंभ “पाकिस्ताननामा” के माध्यम से इस बात को सही साबित कर दिखाया है।

अखिल भारतीय सम्‍मेलन में बिखरा अवधी का रंग

: येऊर में जुटे कई देशों के लोग : मैं आ गया हूं बहुत दूर/ लेकिन नहीं हूं मजबूर/ महसूस हुआ मुझे पूरे हिंदुस्थान में हैं फूल/ इसे मैंने हमेशा के लिए कर लिया कुबूल/ चाहे दूर रहूं या नजदीक/ मैं हमेशा रहूंगा उनके करीब। यह प्यारी भावना सात समंदर पार के हिंदी-हिंदुस्तान प्रेमी अदम महमत येस्केइमी की है। येस्केइमी भले ही चाड गणतंत्र (दक्षिण अफ्रीका) के नागरिक हैं, पर उनका दिल हिंदुस्तानी है। उनका यह दिल ठाणे के येऊर स्थित स्वानंद बाबा आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय अवधी सम्मेलन में एकदम अवधी रंग में रंग गया।