मीडिया में प्रच्छन्न सवर्ण जातिवादी वर्चस्व है : एसपी सिंह

: एक पुराना इंटरव्यू : 27 जून को महान पत्रकार एसपी सिंह की 14वीं पुण्यतिथि है. कुछ ही दिनों में 27 जून आ जाएगा. एसपी की याद में हम यहां उनसे लिया गया आखिरी इंटरव्यू प्रकाशित कर रहे हैं. यह इंटरव्यू अजीत राय ने लिया. इसका प्रकाशन 15 जून 1997 को जनसत्ता में हुआ था.

विस्‍मृति के गर्त में अकेले जा रहे हैं हम : वाजपेयी

कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्‍यक्ष अशोक वाजपेयी आज 70 साल के हो गए. वे पिछले पचास वर्षों से अपनी रचना यात्रा में लगे हुए हैं. इस दौरान इन्‍होंने अपने जीवन और समाज में अनेक उतार-चढ़ाव देखे. सफलता-असफलता से भी दो-चार हुए. फिर भी अपने रचनाकर्म में लगातार लगे हुए हैं. इनके जन्‍मदिन के मौके पर इनकी सात किताबों का लोकार्पण होने जा रहा है.  इनकी आगे क्‍या योजनाएं हैं. क्‍या करने वाले हैं. इन सब बातों को लेकर वरिष्‍ठ पत्रकार, रचनाकार अजित राय ने अशोक वाजपेयी से विस्‍तार से बातचीत की. प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के महत्‍वपूर्ण अंश –

अरसे बाद दो भारतीय फिल्‍मों को पुरस्‍कार

इफी: अंतराराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह का समापन : पणजी, गोवा :  गौतम घोष की फिल्‍म ‘मोनेर मानुष’ को सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म का पुरस्‍कार प्रदान किया गया है। उन्‍हें इस फिल्‍म के लिए भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में स्‍वर्ण मयूर, प्रशस्ति पत्र और 20 लाख रुपये तथा इस फिल्‍म के निर्माता को भी 20 लाख रुपये प्रदान किये गये। इसके साथ ही कौशिक गांगुली की बांगला फिल्‍म ‘जस्‍ट एनादर लव स्‍टोरी’ को 15 लाख रुपये का विशेष ज्‍यूरी अवार्ड प्रदान किया गया है। यह अवार्ड इस फिल्‍म के साथ संयुक्‍त रूप से न्‍यूजीलैंड के निर्देशक टायका वैटिटी की फिल्‍म ‘बॉय’ को दिया गया। पुरस्‍कार पाने के बाद सुपरिचित फिल्‍मकार गौतम घोष ने खुशी जाहिर करते हुए कहा यह पुरस्‍कार धार्मिक कट्टरता, असहनशीलता और हिंसा से घिरे हुए हमारे समाज में शांति, सह-अस्तित्‍व और धर्म निरपेक्षता की स्‍वीकृति है।

युद्ध की हिंसा और प्रेमकथाएं

इफीपणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के प्रतियोगिता खंड में दिखाई गई पौलेंड के सुप्रसिद्ध फिल्‍मकार जान किदावा ब्‍लोंस्‍की की नई फिल्‍म ‘लिटल रोज’ एक दिलचस्‍प प्रेम कथा का त्रिकोण है। जिसमें इतिहास की कुछ कटु स्‍मृतियां शामिल हैं। इजरायल ने 1968 में जब फिलिस्‍तीन पर हमला किया था तो पौलेंड के कम्‍युनिस्‍ट शासकों ने इस अवसर का इस्‍तेमाल यहूदी और कई दूसरी राष्‍ट्रीयताओं वाले नागरिकों को देश निकाला देने में किया था। उसी दौरान 1968 के मार्च महीने में पौलेंड की राजधानी वारसा में अभिव्‍यक्ति की आजादी को लेकर लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और विश्‍वविद्यालयों के छात्रों ने एक बड़ा आंदोलन किया था जिसे सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया।

यथार्थ और कल्‍पना का विभ्रम ‘सर्टीफाइड कॉपी’

इफीपणजी, गोवा :  अब्‍बास किरोस्‍तामी की नयी फिल्‍म ‘सर्टीफाइड कॉपी’ 2010 इस वर्ष कॉन फिल्‍मोत्‍सव का एक प्रमुख आकर्षण रही है। इस फिल्म में उत्‍कृष्‍ट अभिनय के लिए जूलियट बिनोचे को कॉन फिल्‍मोत्‍सव में सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेत्री का पुरस्‍कार मिल चुका है। भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में इसे देखने के लिए दर्शक इतने उतावले हो गए कि टिकट खिड़की खुलने के तुरंत बाद ही पहला शो हाउस फुल हो गया। दर्शकों, समीक्षकों और फिल्‍म-प्रेमियों की जबर्दस्‍त मांग पर आयोजकों को रात के 10 बजे वाले शो में इसका दोबारा प्रदर्शन रखना पड़ा।

‘फिल्‍म सोशिएलिज्‍म’ – भविष्‍य के सिनेमा का ट्रेलर

पणजी, गोवा : विश्‍व के सबसे महत्‍वपूर्ण फिल्‍मकारों में से एक ज्‍यां लुक गोदार की नयी फिल्‍म ‘फिल्‍म सोशिएलिज्‍म’ का प्रदर्शन भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह की एक ऐतिहासिक घटना है। पश्चिम के कई समीक्षक गोदार को द्वितीय विश्‍वयुद्ध के बाद का सबसे प्रभावशाली फिल्‍मकार मानते हैं। इस 80 वर्षीय जीनियस फिल्‍मकार की पहली ही फिल्‍म ‘ब्रेथलैस’ (1959) ने दुनिया में सिनेमा की भाषा और शिल्‍प को बदल कर रख दिया था। ‘फिल्‍म सोशिएलिज्‍म’ गोदार शैली की सिनेमाई भाषा का उत्‍कर्ष है। इसे इस वर्ष प्रतिष्ठित कॉन फिल्‍मोत्‍सव में 17 मई 2010 को पहली बार प्रदर्शित किया गया।

विश्‍व सिनेमा में इतिहास से जुड़ी यादें

पणजी, गोवा। भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में विश्‍वप्रसिद्ध फिल्‍मकार रोमन पोलांस्‍की की नयी फिल्‍म ‘द घोस्‍ट राइटर’ राजनैतिक कारणों से इन दिनों दुनिया भर में चर्चा में है। पोलांस्‍की ने इस फिल्‍म की पटकथा पिछले वर्ष तब पूरी की थी, जब स्विटजरलैंड पुलिस ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के आग्रह पर उन्‍हें गिरफ्तार किया था।

यातना, संघर्ष और स्‍वप्‍न का नया सिनेमा

[caption id="attachment_18685" align="alignleft" width="147"]नई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’(राइजिंग ड्रीम्‍स) का एक दृश्यनई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’(राइजिंग ड्रीम्‍स) का एक दृश्य[/caption]पणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के पैनोरमा खंड में दिखाई गई सुप्रसि‍द्ध फिल्‍मकार गिरीश कासरवल्‍ली की नई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’ (राइजिंग ड्रीम्‍स) अपने विषय और बर्ताव के कारण हमारा ध्‍यान खींचती है। भूमंडलीकरण के बाद भारतीय समाज में उपभोक्‍तावाद की नकली चमक-दमक के पीछे लगभग 80 करोड़ लोगों के जीवन की यातना, संघर्ष और स्‍वप्‍न को यह फिल्‍म सामने लाती है। अब तक 12 फिल्‍में बना चुके गिरीश कासरवल्‍ली को 4 बार सर्वश्रेष्‍ठ फीचर फिल्‍म एवं निर्देशन का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुका है।

दुविधा के बीच गुदगुदाती ‘सोल किचन’

इफी पणजी, गोवा। इस समय दुनिया भर में नयी पीढ़ी के जिन फिल्‍मकारों का जादू चल रहा है, उनमें तुर्की मूल के जर्मन फिल्‍मकार फतिह अकीन का नाम प्रमुख है। अपनी फिल्‍म ‘हैड-ऑन’ (2004) के लिए बर्लिन फिल्‍मोत्‍सव में गोल्‍डन बीयर तथा यूरोपियन बेस्‍ट फिल्‍म का यूरोपियन फिल्‍म अवार्ड पाने वाले इस फिल्‍मकार को ठीक तीन साल बाद ‘द एज ऑफ हैवन’ (2007) के लिए कॉन फिल्‍मोत्‍सव में सर्वश्रेष्‍ठ पटकथा का पुरस्‍कार मिल गया। गोवा फिल्‍मोत्‍सव में विशेष रूप से दिखाई गई उनकी नयी फिल्‍म ‘सोल किचन’ (2009) को भी बर्लिन फिल्‍मोत्‍सव में स्‍पेशल ज्यूरी अवार्ड मिल चुका है।

धर्मांधता के खिलाफ सिनेमाई हस्‍तक्षेप

इफीपणजी। सुप्रसिद्ध भारतीय फिल्‍मकार गौतम घोष की नई फिल्‍म मोनेर मानुष (द क्‍वेस्‍ट) धर्मांधता के खिलाफ एक सशक्‍त सिनेमाई हस्‍तक्षेप है। भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के प्रतियोगिता खंड में इसे प्रदर्शित किया गया है। यह फिल्‍म भारतीय पैनोरमा खंड की भी एक विशिष्‍ट कृति है। भारत और बांगलादेश में एक साथ 3 दिसम्‍बर 2010 को रिलीज किया जा रहा है। इसमें दोनों देशों के कलाकारों ने काम किया है। 1952 के बाद पहली बार ऐसा होने जा रहा है।

विश्‍व सिनेमा में स्त्रियों का नया अवतार

[caption id="attachment_18656" align="alignleft" width="179"]ईरानी फिल्‍म  - 'इराक, इवनिंग ऑफ द टेंथ डे' का एक दृश्‍यईरानी फिल्‍म – ‘इराक, इवनिंग ऑफ द टेंथ डे’ का एक दृश्‍य[/caption]पणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में विश्‍व सिनेमा खंड में दिखाई जा रही अधिकतर फिल्‍मों में स्त्रियों का नया अवतार चकित कर देने वाला है। यह संयोग नहीं है कि ईरान, जापान और चीन से लेकर स्‍वीडन, पौलेंड, फ्रांस और जर्मनी तक की फिल्‍मों में हमें जो स्त्रियां दिखाई दे रही हैं, उनके सामने निजी सुखों से अधिक सामाजिक अस्मिता की चुनौती ज्‍यादा है।

सिनेमा का बाजार और बाजार में सिनेमा

पणजी, गोवा। भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में राष्‍ट्रीय फिल्‍म विकास निगम ने भारतीय फिल्‍मों का दुनिया भर में बाजार विकसित करने के लिए गोवा के मेरियट रिजार्ट में चार दिवसीय फिल्‍म बाजार इंडिया, 2010 का आयोजन किया है। इसमें पहली बार अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍मोत्‍सव में भारतीय फिल्‍मकारों की भागीदारी बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज लोकार्नो अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍मोत्‍सव के निदेशक ओलिवर पेरे ने घोषणा की कि अगले वर्ष गोवा में होने वाले भारत के 42वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह से लोकार्नो फिल्‍म समारोह का एक विशेष पैकेज प्रदर्शित किया जाएगा। उन्‍होंने दुनिया भर के फिल्‍मोत्‍सवों में भारतीय फिल्‍मों की कम होती भागीदारी पर चिंता व्‍यक्‍त की।

मैं इतनी खुश हूं कि मेरे पैर जमीन पर नहीं हैं

[caption id="attachment_18620" align="alignleft" width="94"]अजित रायअजित राय[/caption]: पूरब और पश्चिम की संस्‍कृतियों का संवाद है ‘वेस्‍ट इज वेस्‍ट’ :  पणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह की उद्घाटन फिल्‍म ‘वेस्‍ट इज वेस्‍ट’ इस समारोह की सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍मों में से एक है। यह फिल्‍म करीब एक दशक पहले बनी ‘ईस्‍ट इज ईस्‍ट’ का दूसरा भाग है, जिसने दुनिया भर में करीब 160 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। यह फिल्‍म भारत के सु‍प्रसिद्ध अभिनेता ओमपुरी को विश्‍व के महान अभिनेताओं की पंक्ति में ला खड़ा करती है। ब्रिटिश फिल्‍म की निर्माता लैस्‍ली एडविन ने बताया कि लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत वाली यह फिल्‍म ब्रिटेन और भारत में अगले वर्ष 25 फरवरी को एक साथ रिलीज की जाएगी। इसमें मुख्‍य भूमिकाएं ब्रिटिश कलाकारों के साथ ओमपुरी, इला अरुण, विजयराज, राज भंसाली आदि भारतीय कलाकारों ने निभाई है। उन्‍होंने कहा कि वे इस श्रंखला की तीसरी फिल्‍म ‘ईस्‍ट इज वेस्‍ट’ की पटकथा पर तेजी से काम कर रही हैं।