शिवराज का लंगर और भूखे पत्रकार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सरकारी खर्चे से भोजन कराने का बहुत शौक है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री आवास का सत्कार व्यय सालाना एक से दो करोड़ के आस-पास बैठता है. वैसे यहां हम सीएम की फिज़ूलखर्ची की चर्चा नहीं कर रहे हैं. चर्चा तो उनके लंगर के आयोजन की है. हुआ यूं कि 2 सितम्बर श्री कृष्ण जन्माष्टमी को शिवराज ने पत्रकारों को रात्रिभोज पर बुलवाया. सीएम का पीआर संभालने वाले अधिकारी सभी को फोन करते हैं, इस क्षेपक के साथ…”सपरिवार आइयेगा. बहुत सेलेक्टेड लोगों को बुलाया गया है. लोकल मीडिया तक को नहीं बुलाया गया. ज़रूर आइये.”

कहीं सीएम से कोई टेढ़े-मेढ़े सवाल न पूछ ले!

: सरकारी उपेक्षा से भोपाल के बहुत सारे पत्रकार हो गए हैं नाराज : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों मीडिया का सामना करने से कतरा रहे हैं। पिछले एक वर्ष से उन्होंने मंत्रालय में कोई पत्रकार वार्ता नहीं बुलाई।

इस ‘सयाने’ टीवी जर्नलिस्ट से सब हुए परेशान

ये कैसी पत्रकारिता है मेरे भाई : भोपाल से पिछले दिनों एक खबर उड़ी कि स्वाइन फ्लू का एक संधिग्ध मरीज़ सामने आया है. उसे आगे चेकअप के लिए मेडिकल कालेज भेजा गया. बताया गया कि वो सउदी अरब से आया है. उसके कई सारे टेस्ट हुए और बाद में वो कथित रोगी गायब हो गया. आनन-फानन में ये खबर आग की तरह फैल गई. तुरंत सभी रीजनल चैनलों ने खबरें फ्लैश कर दी, फोनो होने लगे. इस बारे में नेशनल चैनलों ने संयम रखा और मामला संदिग्ध दिखने के कारण किसी ने भी अपने ऑफिस में इसकी सूचना तक नहीं दी. दरअसल ये एक नेशनल चैनल के रिपोर्टर का स्टिंग आपरेशन था जो यह तय करने के लिए किया गया था कि अस्पताल में इस बीमारी से निपटने की कितनी तैयारी है.