बरेली में मिंटू की मौत : हिंदुस्तान अखबार और सिटी मजिस्ट्रेट खामोश क्यों?

इस हैबते-हालात पे कुछ गौर कीजिये, अब भी तो खौफ छोड़िये आवाज़ दीजिये, ग़म नहीं गुस्से की सदा बनके यशवंत जी, खामोशियों को तोडिये, आवाज़ दीजिये… प्रिय यशवंत जी, नमस्कार, आप तो जानते ही हैं कि अफसर लोग कुत्ता पालते हैं. कुछ अफसर लोग मिंटू, पिंटू, छोटू, बहादुर भी पालते हैं. ये सभी तुच्छ जीव अपने अपने पूर्व-जन्मों के कर्मानुसार फल भोगते हैं…

ये जो डिप्रेशन है…

: तीन टिप्पणियां : यशवंत भाई सबसे पहले तो फ़्लैट बुक करने के लिये बधाई. वह अत्यंत आवश्यक था. दिल्ली जैसे शहर में आपके जैसे तेवर वाले को पता नहीं कब मकान मालिक कह दे कि निकलो मेरे घर से. इसलिये यह अच्छा कदम है. दूसरी बात कि जब परिवार है तो कुछ जिम्मेवारी तो निभानी पड़ेगी, अन्यथा शादी-ब्याह ही नहीं करते. अब रह गई बात डिप्रेशन की तो मुझे लगता है इस शब्द को ही अभी तक लोग नहीं समझ पाये हैं.

बरेली में जागरण-उजाला महंगे हुए

[caption id="attachment_17231" align="alignleft"]हिंदुस्तान, बरेली में जारी है आधे दाम वाली स्कीमहिंदुस्तान, बरेली में जारी है आधे दाम वाली स्कीम[/caption]बरेली में अखबारों की आपसी लड़ाई में नया मोड़ आ गया है. हिंदुस्तान आधे दाम में पहले की तरह बिक रहा है पर अमर उजाला व दैनिक जागरण अपने पाठकों से ज्यादा पैसे वसूलने लगे हैं. 

बवाल खत्म हुआ तो आफर लेटर भी पहुंचे

बरेली में चल रहे बवाल के कारण कई लोगों के आफर लेटर लटक गए थे. अब डाक वाले चलते-फिरते नजर आने लगे हैं तो इन लोगों की अधर में लटकी हुई नौकरियों की नैया भी पार लगने की उम्मीद है.