सीएनईबी में ”राहुल राज” था कब?

आलोक तोमरअचानक सीएनईबी टीवी चैनल की इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी है कि अगर यह चर्चा पहले से होती रहती तो चैनल की टीआरपी कुछ और बढ़ जाती। इस खबर का शीर्षक दिया गया है कि सीएनईबी में राहुल राज का खात्मा हो रहा है। शीर्षक आपत्तिजनक भले ही न हो मगर पत्रकारिता के संदर्भों को दूसरी ओर मोड़ कर ले जाता हैं।

सीएनईबी में राहुल राज था कब? आखिर एक टीवी चैनल में या किसी भी पत्रकारिता संस्थान में एक संपादक होता है और वह नेतृत्व करता है। राहुल देव ने भी नेतृत्व किया मगर राज तो उनका था और उनका है जिन्होंने इस चैनल में निवेश किया है और घाटा सह कर भी तीन साल चलाया है। बंद करने का उनका कोई इरादा नहीं हैं और अनुरंजन झा को लाया ही इसलिए गया है कि उनकी प्रतिभा से चैनल को चलाने में साधनों और संसाधनों का विकास हो सके। वैसे आप जानते हैं कि अनुरंजन झा पत्रकार भी हैं और कम से कम उन्होंने अभी तक राहुल देव के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा है।

आपको सीएनईबी में काम करने वाले किसी पत्रकार की टिप्पणी उसके असली नाम से नहीं मिलने वाली है। लेकिन मैं डंके की चोट लिख रहा हूं कि सीएनईबी और राहुल देव का साथ कभी किसी संशय में नहीं रहा। न सीएनईबी चलाने वाले पहली बार रोजगार कर रहे हैं और न राहुल देव पहली बार किसी मीडिया समूह का नेतृत्व कर रहे है। रही बात नए लोगों के आने की तो वे हर चैनल में आते जाते रहते हैं और इस पर खबर तो बनती है मगर विश्लेषण का इतना लंबा चौड़ा आयाम नहीं बनता। खबर में लिखा गया है कि राहुल देव के करीबी अपूर्व और पंकज शुकल ऑफिस नहीं आ रहे। मुद्रा कुछ ऐसी है कि या तो इनको निकाला जा रहा है या फिर ये विरोध में छुट्टी पर हैं। अपूर्व लगातार आ रहे हैं, पंकज शुक्ल ने एक दिन बीमारी की वजह से छुट्टी ली थी और कामाक्षी लगातार काम कर रही है।

और फिर आप अगर सीएनईबी की तुलना एस वन जैसे धोखेबाज चैनल या आजाद न्यूज जैसे अदृश्य चैनल या वाइस ऑफ इंडिया जैसे ठग चैनल से करेंगे तो सीएनईबी की ओर से कम से कम मेरा ऐतराज दर्ज कर लीजिए। मै कोई पट्टा लिखवा कर नहीं आया हूं और हो सकता है कि कल आप मुझे भी सीएनईबी में न पाए लेकिन इसके पीछे बहुत सारी कहानियां बनाना नादानी हैं और यशवंत सिंह आप इस नादानी से बचिए।

अनुरंजन झा की प्रतिभा और अतीत से सब परिचित है। उसे बार बार याद दिलाने से आपका या भारतीय पत्रकारिता का कोई लाभ नहीं होने वाला। जहां तक मुझे पता है, अनुरंजन झा आपके निजी मित्र भी हैं और इसके बावजूद आपको उनके बारे में अगर सूत्रों के हवाले से लिखना पड़े तो ऐसी दोस्ती पर खाक डालिए। प्रतिक्रियाओं में जैसा कि होता है, कुछ लोग राहुल देव को कोस रहे हैं तो कुछ अनुरंजन झा को। उनके पास अपने अपने कारण होंगे।

राहुल देव के बारे में, उन्हें लगभग पच्चीस साल से जानने के बाद उनके बारे में लिखने के लिए मेरे पास बहुत सारे कारण है मगर विस्तार में नहीं जाऊंगा। हिंदी और अंग्रेजी दोनों पर और वह भी शानदार अधिकार से लिखने और बोलने वाले पत्रकारों में राहुल देव जैसे कम ही मिलेंगे। इसके बावजूद वे हिंदी को लेकर लगभग आंदोलन की मुद्रा में जूझते रहते हैं और छोटी सी गोष्ठी से लेकर वॉशिंगटन के सेमिनार तक में जाने में उन्हें कोई दिक्कत महसूस नहीं होती। चरित्र पर लांछन आज तक लगा नहीं, कोई घोटाला घपला किया नहीं मगर यदि सीएनईबी में पैसा लगाने वालों को अनुरंजन झा में संभावना दिखती है तो इसमें भाई लोगों को तकलीफ क्यों हो रही है?

सीएनईबी में राहुल देव के रहते अभिव्यक्ति का एक लोकतंत्र सदा से मौजूद है और अगर आपकी कल्पना की उड़ान आपको यह कहने पर विवश करती है कि हमारे राजनैतिक संपादक प्रदीप सिंह को आने वाले दिनों का आभास हो गया था इसलिए छोड़ कर चले गए तो आप गलत कह रहे हैं। वे अनुरंजन के आने के पहले ही जा चुके थे और अच्छे पद पर और अच्छी संभावनाओं के साथ गए थे। अपूर्व, पंकज और कामाक्षी कोई नौसिखिए नहीं हैं और काम जानते हैं और जिन्हें अपना चैनल ठीक से चलाना होगा उनके यहां अगर इन्हें जरूरत पड़ी तो पर्याप्त जगह है।

और अगर आपको तुलनात्मक अध्ययन करना ही है तो इतना तो ज्ञान होगा ही कि आयु, प्रतिभा, अनुभव और दृष्टि के हिसाब से राहुल देव और अनुरंजन झा के बीच तुलना करके आप दोनों के साथ अन्याय कर रहे हैं और दोनों का अपमान कर रहे हैं। अनुरंजन और राहुल देव एक दूसरे के कपडे सरेआम नहीं फाड़ रहे हैं। राहुल देव को अगर कोई तकलीफ है भी तो उसे वे विलाप का विषय नहीं बना रहे हैं। मामले में सुलझने के लिए अगर कुछ बचा है तो उसे सीधे मालिकों से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। सबसे बड़ी बात ये है कि राहुल देव पत्रकारिता के अपने सरोकारों से समझौता नहीं नहीं करना चाहते। अपनी शैली पर और अपनी शर्तों पर कायम रहना चाहते हैं। और शायद इसी बात पर सीएनईबी से कुढ़ने वालों को तकलीफ हो रही है। रही मालिकों की बात तो, ये उन पर निर्भर है कि उन्हें क्या पसंद है, कैसी पत्रकारिता चाहिए, और उनकी राय में कौन महान है और कौन मामूली। चैनल उनका है, फैसला भी वे करेंगे और नतीजे भी उनके हिस्से आयेंगे। बाज़ार में अमिताभ बच्चन भी हैं और शक्ति कपूर भी–पसंद अपनी अपनी।

यह हमारा मामला है, हमे जैसे सुलझाना होगा, सुलझा लेंगे और नहीं सुलझा तो बहुत सारे विकल्प खुले हैं लेकिन अगर लोगों ने अपनी कुंठाए जाहिर करना शुरू किया तो फिर नाम लेकर सामने आएं और उन्हें उनकी जन्मपत्री सहित जवाब मिलेगा।

लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार हैं और सीएनईबी न्यूज चैनल से जुड़े हुए हैं.

सीएनईबी में राहुल राज खात्मे की ओर!

: अपडेट : आम्रपाली ग्रुप ने चैनल में पैसा लगाया : लो कास्ट मोड में चैनल को लाने की तैयारी : थानेश्वर का इस्तीफा : अनुरंजन के करीबी लोग महत्वपूर्ण पदों पर काबिज : राहुल समेत उनकी टीम के कई लोग छुट्टी पर : सीएनईबी न्यूज चैनल में अंदरखाने उठापटक शुरू हो गई है. अनुरंजन झा के सीओओ के रूप में ज्वाइन करने के बाद जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, वे अब सच साबित हो रही हैं.

सीएनईबी के मालिकों ने अनुरंजन को लाकर और उनके अपने लोगों को वरिष्ठ पदों पर ज्वाइन कराकर राहुल देव व उनकी टीम को बाहर जाने का संकेत दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक अनुरंजन ने अपने दो करीबियों अंशुल मिश्रा व राकेश योगी को वरिष्ठ पदों पर ज्वाइन कराया है. अंशुल आउटपुट का काम देखेंगे और राकेश प्रोग्रामिंग संभालेंगे. अभी तक आउटपुट अपूर्व देख रहे हैं व प्रोग्रामिंग कामाक्षी. राहुल देव कई दिनों से आफिस नहीं आ रहे हैं. उनका खास प्रोग्राम महाखबर भी कई दिनों से प्रसारित नहीं हो रहा है. राहुल देव के करीबी अपूर्व व पंकज शुक्ल आफिस नहीं आ रहे हैं. उधर, सीएनईबी में काफी दिनों से साइडलाइन चल रहे थानेश्वर ने इस्तीफा दे दिया है. वे सीएनईबी में इनपुट हेड के रूप में भी काम देख चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक सीएनईबी प्रबंधन राहुल देव के बड़े कद को देखते हुए उनसे सीधे-सीधे कुछ नहीं कह पा रहा है लेकिन अनुरंजन व अनुरंजन के करीबी लोगों के हाथों में चैनल को धीरे-धीरे सौंपकर एक तरह से पुरानी टीम को किनारे करने का काम शुरू कर दिया है.

यह भी पक्की खबर है कि सीएनईबी के मालिकों ने चैनल का एक हिस्सा आम्रपाली वालों को बेच दिया है. आम्रपाली ग्रुप रीयल इस्टेट की बड़ी कंपनी है. इस विनिवेश से सीएनईबी के मालिकों को अच्छी-खासी रकम मिली है. कम से कम, चैनल पर अब तक हुए खर्च का एक बड़ा हिस्सा अर्जित करने में सफल हुए हैं. पहले ही सीएनईबी के मालिकों ने चैनल के वरिष्ठों की बैठक में कह दिया था कि वे चैनल बेचना चाहते हैं और आप लोग ऐसा समूह तलाशिए जो चैनल ले सके व आप लोगों को भी सेलरी दे सके. तभी से चैनल के बिकने की अफवाह उड़ने लगी थी. अब पता चल रहा है कि चैनल पूरी तरह नहीं बिका है बल्कि माइनारिटी का स्टेक आम्रपाली ग्रुप ने लिया है. सीएनईबी के मालिक चैनल को अब लो कास्ट मोड में रखना चाहते हैं. कह सकते हैं कि धीरे-धीरे यह चैनल एस1, आजाद न्यूज, वीओआई, हमार की कैटगरी का हो जाएगा.

उधर, अनुरंजन ने ट्रेनियों को नियमित कर संकेत दे दिया है कि वे भारी-भरकम पैकेज वालों की जगह कम सेलरी वालों से काम चलाना ज्यादा पसंद करेंगे ताकि चैनल पर पड़े रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सके. वैसे भी अनुरंजन की नियुक्ति संपादकीय लिहाज से कम, आर्थिक लिहाज से ज्यादा हुई है. वे चैनल के खर्चों में कटौती के अलावा चैनल के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट कराने पर काम करेंगे. साथ ही, इसी हिसाब से एडिटोरियल कंटेंट भी पेश करेंगे ताकि कंटेंट के जरिए बिजनेस हो सके. अंशुल व राकेश की नियुक्ति से स्पष्ट है कि अनुरंजन व उनकी टीम ही एडिटोरियल कंटेंट तय करेगी. बिहार पर आधारित नए कार्यक्रम की परिकल्पना अनुरंजन की है. इस नए कार्यक्रम के जरिए अनुरंजन बिहार चुनाव के प्रचार-प्रसार पर खर्च होने वाली भारी-भरकम विज्ञापन राशि में सेंध लगाकर चैनल को आर्थिक फायदा कराने की तैयारी कर चुके हैं.

उधर, सीएनईबी में राहुल देव की टीम फिलहाल सदमें की स्थिति में है. सीएनईबी चैनल को राहुल देव अपने नाम व साफ-सुथरे कंटेंट के जरिए अच्छा खासी पहचान दिला चुके हैं. साथ ही आलोक तोमर व प्रदीप सिंह जैसे लोगों को चैनल से जोड़कर टीवी मीडिया इंडस्ट्री में सीएनईबी का मजबूत चैनल के रूप में पेश किया. टीआरपी भी कुछ समय तक अच्छी रही लेकिन क्राइम केंद्रित खबरें न चलाने व अन्य कारणों से टीआरपी ने कुछ समय के बाद साथ नहीं दिया. प्रदीप सिंह ने विपरीत स्थितियों की आहट देखकर पहले ही इस्तीफा दे दिया और यूएनआई टीवी के हिस्से बन गए. अब देखना है कि राहुल देव व उनके लोग आने वाले दिनों में कब व किस तरह चैनल से नाता तोड़ने का ऐलान करते हैं.

: अपडेट :

सीएनईबी के सीओओ अनुरंजन झा ने फोन कर जानकारी दी कि आम्रपाली के साथ सीएनईबी का किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है. आम्रपाली ने कोई पैसा सीएनईबी में नहीं लगाया है और न ही कोई स्टेक खरीदा है. ऐसी खबरें निराधार हैं. अनुरंजन के मुताबिक सीएनईबी के भीतर किसी किस्म का कोई उथल-पुथल नहीं है और सभी लोग चैनल की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग सीएनईबी को बदनाम करने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं जो निन्दनीय है.