काश, मृणालजी ने भी तब ऐसा किया होता

[caption id="attachment_15672" align="alignleft"]विनोद वार्ष्णेयविनोद वार्ष्णेय[/caption]टिप्पणी (2) : मृणाल जी के इस्तीफे की खबर के बाद से लगातार फ़ोन आ रहे हैं. मैं सचमुच चकित हूँ कि लोग इतने खुश हैं. निश्चित रूप से उनमें उनकी बड़ी संख्या है, जो उनके सताए हुए थे. कई की तो वे नौकरी ले चुकी हैं, मेरी भी. मुझे अपने लिए गम नहीं, मैं तो 36 साल से अधिक नौकरी कर चुका. अब मैं समय कां इस्तेमाल पढ़ने में कर रहा हूँ.  घर परिवार के लम्बे समय से उपेक्षित काम निपटा रहा हूँ, नियमित लेखन का सिलसिला शुरू होने वाला है़. पर उन्होंने कई ऐसे लोगों को निकाला जो यंग थे. पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे हुए थे. अपना बेस्ट देकर पत्रकारिता और नौकरी के बीच संतुलन कायम किए हुए थे.

मृणालजी, शशिशेखर और एचटी प्रबंधन

पदमपति शर्माटिप्पणी (1) : मृणालजी की हिंदुस्तान से दुर्भाग्यपूर्ण विदाई का समाचार भड़ास4मीडिया से पता चला। उनके जाने पर मिश्रित प्रतिक्रिया भी आपके ही माध्यम से जानी। मृणालजी का मैं भी एक शिकार रहा हूं और मेरा इस्तीफानामा भी भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हो चुका है। एक निजी पत्र को भड़ास4मीडिया ने सार्वजनिक कर दिया था, फलतः जिसने भी वो पढ़ा होगा, वो यही सोच रहा होगा कि मैं उनके खिलाफ बयान दूंगा। जबकि सच्चाई इसके सर्वथा उलट है। सच तो ये है कि मृणालजी का जाना हिंदुस्तान के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है ही, उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है उनके घोषित उत्तारधिकारी का नाम। समझ में नहीं आता है कि आखिर एचटी मैनेजमेंट के संपादक चयन का पैमाना क्या है?