ईडी अफसर राजेश्वर सिंह नाटक कर रहे हैं : सुबोध जैन

: प्रवर्तन निदेशालय भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों को संरक्षण दे रहा है : राजेश्वर को ईडी में प्रतिनियुक्ति भी नियमों में छूट देकर दी गई : प्रवर्तन निदेशक अरुण माथुर और आईजी राजीव कृष्ण के आफिसों से फोन करके मुझे धमकाया जा रहा है : करप्शन के खिलाफ कंप्लेन करने वाले की नौकरी गई, जिसकी शिकायत की उसके अधिकार बढ़ गए :

सीबीआई को उपेंद्र राय के खिलाफ नहीं मिला कोई साक्ष्य!

सहारा समूह में फिलहाल बनवास झेल रहे उपेंद्र राय के लिए खुशखबरी है. सीबीआई को अभी तक जो प्रमाण-साक्ष्य मिले हैं, उससे उपेंद्र राय पर कोई मामला नहीं बनता है. 2जी मामले और ईडी के अफसरों को धमकाने-रिश्वत देने की कोशिश करने के प्रकरण में सीबीआई ने पिछले दिनों अपना जवाब सुप्रीमकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश किया. इसमें कहा गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संबंधित सभी से पूछताछ की.

मनी लांड्रिंग मामला : कनिमोझी को ईडी ने दी मोहलत

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में आरोपी बनाई गईं द्रमुक सांसद कनिमोझी की नई तारीख पर पेश होने की गुजारिश मान ली है. साथ ही कलैंगनार टीवी के एमडी शरद कुमार को भी ईडी ने पूछताछ के लिए वक्त दे दिया है. कनिमोझी और शरद कुमार ने ईडी के अधिकारियों से मुलाकात कर चेन्नई में 12 मई को आयकर विभाग के सामने पेश होने का हवाला दिया था, जिसके बाद ईडी ने यह छूट दी.

सहारा ने खुद को बेदाग बताया

: ईडी अधिकारी पर दबाव बनाने का मामला : राजेश्वर सिंह से पत्रकार सुबोध जैन ने पूछे थे 25 सवाल : सहारा इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करता है। मामले से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी के खिलाफ वह तब तक कुछ कहने की स्थिति में नहीं है जब तक कि सुप्रीम कोर्ट से उसे इसकी इजाजत न मिल जाए। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स की ओर से लखनऊ में जारी एक बयान में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सहारा बेदाग है।

मैं सिर्फ एक बार ईडी के अधिकारी राजेश्वर सिंह से मिला : उपेंद्र राय

प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के चक्कर में बुरी तरह घिर चुके सहारा मीडिया के डायरेक्टर न्यूज उपेंद्र राय ने कहा है कि उनकी मुलाकात प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह से सिर्फ एक बार हुई है और वह भी कुछ मिनटों के लिए. बात जुलाई-अगस्त 2010 की है. तब तक नीरा राडिया के पास कोई नोटिस नहीं भेजा गया था. इस एक मुलाकात के अलावा मेरी कोई मुलाकात किसी प्रवर्तन निदेशालय अधिकारी से नहीं हुई है, इसलिए रिश्वत देने का सवाल ही नहीं उठता.