ब्यूरो चीफ के गाने से दुखी हैं उनके अधीनस्थ!

[caption id="attachment_18488" align="alignleft" width="91"]जुहैर जैदीजुहैर जैदी[/caption]जो दुखी आत्मा हैं, वे दुखी ही रहेंगे, चाहे उन्हें बॉस जैसा भी मिल जाए. बॉस अगर कम बोले और कड़क हो तो तुरंत उसे जेलर टाइप कहते हुए अमानवीय करार दिया जाएगा. बॉस अगर नरम हो और सबकी सुनता हो व सबकी राय लेकर काम करता हो तो उसे प्रबंधन में अकुशल मान लिया जाता है, बॉस अगर संगीत का प्रेमी हो और गाहे-बगाहे गाने लगता हो अपने अधीनस्थों के सामने तो दुखी आत्माएं उससे भी दुखी हो जाती हैं. दरअसल दुखी आत्माओं का कोई इलाज नहीं होता. उनका दुख ही यह होता है कि वह उस कुर्सी पर क्यों नहीं हैं जहां आज उनके बॉस बैठे हैं.