काम करा के पगार तो देते नहीं, भीख क्या देंगे

[caption id="attachment_16679" align="alignleft"]सुभाष गुप्तासुभाष गुप्ता[/caption]यशवंत भाई, यूं तो रहीम दास ने ऐसा कुछ कहा था…रहिमन वे नर मर चुके जे कहूं मांगन जाएं… उनसे पहले वे मरे जिन मुख निकसत नाही…. लेकिन आपको सलाम करने का दिल चाहता है, इसका कारण कोई लम्बा चौड़ा नहीं है। सीधी-सी वजह है कि आपने जो कुछ किया, उसे स्वीकार करने का माद्दा आपमें है। यही पत्रकार, बल्कि असली और बहादुर इंसान वाली बात है। आपने मसूरी में भीख मांगकर गरिमामयी अंदाज में ये कबूलनामा लिखकर इस गलीच पेशे को सम्मानित अंदाज दे दिया है।

मसूरी में भीख मांगते देखे गए यशवंत

यशवंत सिंह

भीख मांगना. उर्फ भिक्षाटन करना. यह कोई नया काम नहीं है. बहुत लोग करते रहते हैं. जीने के लिए पैसे चाहिए. पैसे पाने के लिए धंधा करना पड़ता है. या फिर नौकर बनना पड़ता है. जो लोग नौकर नहीं बन पाते, वे धंधा करते हैं. जो धंधा नहीं कर पाते भीख मांगते हैं. कई धंधेबाज भीख मंगवाने का धंधा करते हैं. भीख मंगवाने वाले धंधेबाज इसी बाजार की उपज हैं. ये बाजार जो बताता है कि अगर आपके पास पैसा है तो आप किंग हैं. आपके पास पैसा है तो आपके पास सभी सुख-सुविधाएं हैं. आपके पास पैसा नहीं है तो आप के व्यक्तित्व और आपके जिस्म के साथ कुछ भी हो सकता है. हो रहा है बहुत लोगों के साथ.