अनीर्बन बागची बने मिड डे के पब्लिशर, अनिता पावसकर बनीं रेडियो वन की प्रोग्रामिंग हेड

नरेंद्र त्रिपाठी के इस्‍तीफा देकर इ‍ंडिया न्‍यूज से जुड़ जाने के बाद खाली हुए मिड डे पब्लिशर के पद पद अनीर्बन बागची को लाया गया है. बागची छह महीने पहले ही जागरण ग्रुप के अखबार मिड डे से जुड़े थे. उन्‍हें प्रमोट करके दिल्‍ली की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. बागची इसके पहले एबीपी ग्रुप, इंडिया टुडे समूह को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

जेडे हत्‍याकांड : छोटा राजन का एक और सहयोगी गिरफ्तार

मुंबई। वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या के मामले में सोमवार को मुंबई पुलिस ने एक स्थानीय नेता को गिरफ्तार किया है। जेडे की हत्या करनेवाले शूटरों को पैसा और सिमकार्ड मुहैया करानेवाला यह नेता जॉन पोल्सन जोसेफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, मुंबई का पदाधिकारी भी रह चुका है। पुलिस के अनुसार, पोल्सन अंडरव‌र्ल्ड सरगना छोटा राजन का करीबी है।

पाठकों के लिए मिड डे आयोजित करेगा टैलेंट हंट शो

मुंबई का कांपैक्‍ट अखबार मिड डे अब अपने पाठकों के लिए फिल्‍म में काम करने का अवसर मुहैया कराने जा रहा है. इसके लिए अखबार ने ‘मिड डे फेसेज’ नाम के एक टैलेंट हंट शो का आयोजन कर रहा है. इस टैलेंट हंट को जीतने वाले को लवली सिंह प्रोडक्‍शन के आने वाली फिल्‍म में काम करने का मौका दिया जाएगा.

आरटीआई डालने पर पत्रकार को डीएफओ ने बता दिया माओवादी

छत्‍तीगढ़ के कोरबा में डीएफओ ने एक पत्रकार को इसलिए माओवादी बना दिया क्‍योंकि उसने आरटीआई से उसके भ्रष्‍टाचार के बारे में जानकारी मांगी थी. डीएफओ डीएम को लिखे पत्र में पत्रकार को माओवादी और तस्‍कर बता कर कार्रवाई की मांग की. जांच में जब सारे आरोप झूठे पाए गए तो डीएम ने शासन से डीएफओ की शिकायत की. पर उसे सजा मिलने की बजाय बेहतर पोस्टिंग मिल गई.

मिडडे में छपी पत्रकार अकेला की दास्तान

मुंबई से प्रकाशित मिडडे अखबार ने पत्रकार ताराकांत द्विवेदी उर्फ अकेला की दास्तान प्रकाशित की है. अकेला ने कहा है कि अगर उनके साथ पुलिस ऐसा बर्ताव कर सकती है तो आम आदमियों की क्या दशा-दुर्दशा ये पुलिस बनाती होगी, सोचा जा सकता है. स्टोरी में अकेला ने पूरा किस्सा बताया है, पढ़िए…

बच्चन को चिकोटी मत काटिए!

‘मिड-डे’, मुंबई के तुषार जोशी की रपट ‘सिर्फ बोल बचन’ अमेरिका की उस चर्चा पर आधारित है, जिसके मूर्त रूप लेने में संशय है। अमेरिका में स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकिल (एसयूवी) प्रतिबंधित किये जाने की संभावना अभी व्यक्त की जा रही है। इसलिए क्योंकि इन वाहनों से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। अमेरिका की संसद में कब बिल आयेगा और कब पास होगा, इसका कोई अता-पता नहीं है। फिर भी पर्यावरणवादी पत्रकार तुषार जोशी को मुम्बई के पर्यावरण की चिंता होने लगी और उन्होंने आव देखा न ताव, अमिताभ बच्चन को प्रदूषण फैलाने का दोषी करार देते हुए रपट दे मारी। क्या ‘मिड-डे मेट’ शीर्षक तले इस अखबार में छापी जा रही स्त्रियों की तस्वीरें संस्कृति प्रदूषण नहीं फैला रही हैं? इनका प्रकाशित किया जाना क्या अपरिहार्य है? बेसिर-पैर की हवा में उड़ रही चिंगारी को अमिताभ बच्चन के बदन पर फेंकने की असफल कोशिश कर रहे हैं तुषार जोशी! शायद अपनी कपोल-कल्पित खबर के लिए उन्हें अमिताभ बच्चन ही सॉफ्ट टारगेट दिखाई दिये।

एहसान फरामोश और कमजोर अमिताभ

मुंबई के अंग्रेजी टैबलायड अखबार मिड-डे में अमिताभ बच्चन व उनके परिजनों द्वारा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने संबंधी जो खबर प्रकाशित हुई, उसके जवाब में अमिताभ ने अपने ब्लाग पर मिड-डे  संवाददाता तुषार जोशी के बारे में जो कुछ लिखा है, जो सलाह दी है, वो बेहद बचकाना ही नहीं, बल्कि बेमतलब भी है। मसलन उनका यह कहना कि ‘अखबारी कागज पेड़ों की छाल से तैयार किया जाता है,  अखबार पब्लिश करने के लिए हरे पेड़ों को काटकर पर्यावरण को बिगाड़ा जा रहा है, इसलिए अखबार छपने बन्द होने चाहिए।’ उन्होंने तुषार जोशी को मोबाइल इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है, क्योंकि मोबाइल के इस्तेमाल से सेहत पर गलत असर पड़ता है। अमिताभ बच्चन को क्या यह नहीं पता कि कागज पर सिर्फ अखबार ही नहीं छपता, किताबें और कापियां भी छपती हैं। क्या पढ़ना-लिखना बन्द कर देना चाहिए?

अमिताभ बाबू, तनि इहरी लखा!!!

तकलीफ हुई मिड डे की खबर पर आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर। ऐसा लगा कि प्रतिक्रिया नहीं, तिलमिला कर कोई असंवेदनशील व्यक्ति निरर्थक बहस पर उतारू हो। मैं खुद भी उस शहर का हूं जहां से आप निकले। इलाहाबाद का। पर मेरे जेहन में आपका चस्पा सन 1981 तक खत्म हो चुका था और विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद हरिवंशजी कहीं ज्यादा श्रद्य़ेय हो गए। इलाहाबाद से जब आप चुनाव लड़ रहे थे और मेडिकल कॉलेज के पीछे राजन साहब (शायद आपके मामाजी) की कोठी में आप ठहरे हुए थे और वहीं से चुनाव अभियान चला थे। उस दौर में विश्विवद्यालय के कुछ छात्रों का जत्था कोठी से आपकी चौकड़ी के निकलने का बेसब्री से इंतजार करता ताकि हरिवंश जी तक पहुंच सके। मैं उन खुशनसीबों में हूं, जिन्होंने फिराक साहब और हरिवंश जी को देखा और सुना भी।

अमिताभ ने मिड-डे की बजा दी बैंड

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अंग्रेजी टैबलायड मिड-डे, मुंबई में आठ जुलाई को एक रिपोर्ट ‘सिर्फ बोल बचन’ शीर्षक से प्रकाशित हुई। पत्रकार तुषार जोशी की यह बाइलाइन खबर बताती है कि अमेरिका में जहां स्पोर्ट्स यूटिलिटि वैन (एसयूवी) के संचालन को प्रतिबंधित करने के बारे में सोचा जा रहा है और इसके लिए बिल लाए जाने की तैयारी की जा रही है, वहीं भारत में अमिताभ बच्चन और उनके परिवार के लोग धड़ल्ले से एसयूवी गाड़ियों का इस्तेमाल कर पर्यावरण के खिलाफ काम रहे हैं।