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मुकेश, मौर्य और विदाई का मर्म

[caption id="attachment_18487" align="alignleft" width="85"]मुकेश कुमारमुकेश कुमार[/caption]: बिहार जाकर इमोशनिया गए मुकेशजी : ये बिल्कुल  अप्रत्याशित था. इसकी कतई  उम्मीद नहीं थी कि पटना से इस तरह से विदाई मिलेगी. कई नौकरियाँ छोड़ीं और छोड़ते समय कई साथी भावुक भी दिखे. मगर  मौर्य टीवी से विदा लेते समय  इतने सारे लोग भावुक हो जाएंगे कि खुद को भी भावुक  होने से रोक नहीं पाऊँगा, ये मैंने सोचा भी नहीं था। शायद ये लगभग साल भर तक एकजुट होकर काम करने और एक बड़ी उपलब्धि तक पहुँचने की सफलता से बनी निकटता का नतीजा थी।

मुकेश कुमार

मुकेश कुमार

: बिहार जाकर इमोशनिया गए मुकेशजी : ये बिल्कुल  अप्रत्याशित था. इसकी कतई  उम्मीद नहीं थी कि पटना से इस तरह से विदाई मिलेगी. कई नौकरियाँ छोड़ीं और छोड़ते समय कई साथी भावुक भी दिखे. मगर  मौर्य टीवी से विदा लेते समय  इतने सारे लोग भावुक हो जाएंगे कि खुद को भी भावुक  होने से रोक नहीं पाऊँगा, ये मैंने सोचा भी नहीं था। शायद ये लगभग साल भर तक एकजुट होकर काम करने और एक बड़ी उपलब्धि तक पहुँचने की सफलता से बनी निकटता का नतीजा थी।

एक मृतप्राय चैनल, जिसके शुरू होने की उम्मीद करनी लोगों ने बंद कर दी थी, उसके जी उठने और फिर बहुत ही कम समय में पहले से स्थापित चैनलों को पछाड़कर नंबर वन बनने की कामयाबी ने सबके आत्मविश्वास को बढ़ा दिया था। कई तरह की शिकायतों के बावजूद इस उपलब्धि से वे सब बेहद खुश थे और ऐसे में अपने एक साथी से बिछुड़ना उन्हें भावुक बना रहा था। न्यूज़ रूम में अपने त्यागपत्र की घोषणा करते वक्त मैं खुद भी भावनाओं को काबू नहीं कर पा रहा था। संक्षिप्त से वक्तव्य के दौरान ही मेरा गला भर गया था। मगर मुझे मालूम नहीं था कि और लोग मुझसे भी ज़्यादा दुखी हैं। एक के बाद एक मेरे कमरे में लोगों का ताँता लग गया।

प्रभात पांडे पूछने आए क्या करना है. मैंने कहा पहले की तरह काम करते रहिए और क्या.. बाद में पता चला वे सब कुछ वैसा का वैसा ही छोड़कर चले गए हैं. सुदामा आए तो उनके आँसू नहीं रुक रहे थे. नयन बाबू फोन पर ही रो रहे थे. श्वेतांशी की आँखें डबडबाई हुई थीं. कवि ह्दय मुरली की आँखें भी नम थीं. प्रेमजी के आँसू भी मेरी नज़रों से छिप नहीं पाए. मेकअप आर्टिस्ट सुमन और विनय दोनों रूँआसे थे. पता चला कि पीसीआर में मेरे जाने का ज़िक्र छिड़ने पर इनपुट के हिमांशुजी फूट-फूटकर रोने लगे.. मोहंती तो ऐसे चिपटकर रोया जैसे कोई बच्चा रोता है. आशुतोषजी मेरे आवास पर मिलने आए और बिना कुछ बोले आँसू पोंछते हुए चले गए…… कैमरामैन संजीव के आँसू नहीं निकले मगर रो वे भी रहे थे….. मैत्रेयी ने आकर पूछा कि क्या फैसला बदला नहीं जा सकता……. कुछ लोग कुछ और समय रुकने के लिए आग्रह कर रहे थे…..

चैनलों  में आम तौर पर प्रमुखों की विदाई कटुता के साथ होती है कि और उनकी विदाई पार्टी आयोजित ही नहीं हो पाती। प्रबंधन तो ऐसा चाहता ही नहीं…..लोग भी घबराते हैं कि कहीं प्रबंधन उन्हें उनका आदमी न समझ ले…. इसलिए चुपचाप अकेले में मिलकर अपनी भावनाएं प्रकट कर लेते हैं…… मगर मौर्य टीवी में लोगों ने ऐसा नहीं किया….. उन्होंने खुलकर अपनी भावनाओं का इज़हार किया और फिर अपनी पहल पर विदाई पार्टी भी आयोजित कर डाली….. हाँ उन्होंने इसके लिए प्रबंधन की सहमति अवश्य ली और मेरे उत्तराधिकारी मनीष झा ने उदारतापूर्वक न केवल मंज़ूरी दी बल्कि खुले दिल से वे पार्टी में शामिल भी हुए (उन्हीं से पता चला कि उनके दादा और नाना (प्रकाशजी के पिता) मेरे कार्यक्रम के नियमित दर्शक हैं और वे पूछ रहे थे कि मुझे क्यों जाने दे रहे हो)। पार्टी में एक बार फिर मैं इमोशनल हो गया….. धीरे से आँखों के कोनों में आई नमी को पोंछ लिया।

विदाई में उपहार के रूप में मिली घड़ी इस समय भी मेरी कलाई में चमक रही है…….।

लेकिन मौर्य  टीवी के बाहर भी मेरे जाने को लेकर एक भावनाओं भरी प्रतिक्रिया थी। मणिकांत ठाकुर, सुकांतजी, अजय कुमार, अमरनाथ तिवारी, शशिधर खाँ (उनकी पत्नी सुजाता भी) और प्रियरंजन भारती, सबके साथ ऐसा संबंध बन गया था कि उनसे सारे दुख-सुख बाँटते थे और उनको मेरे सारे राज़ मालूम रहते थे। सबके सब पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ अभियान में साथ थे। सब अपनी तरह से दुखी थे। सब आकर मिले, जी भरकर बातें कीं। मन में चल रहा था कि भूमंडलीकृत दुनिया में जहाँ पटना और दिल्ली के बीच की दूरी ख़त्म सी हो गई हो, और कोई भी कभी भी किसी से बात कर सकता हो तो क्या इस तरह का भावुक होना और विदाई का दुख महसूस करना भी संभव है?

यहीं राजनीतिक बिरादरी के बारे में भी मेरी मान्यता टूटी। बीजेपी नेता संजय पासवान को ख़बर मिली तो वे सीधे दफ्तर मिलने चले आए। जनता दल यूनाईटेड के राजीवरंजन और नीरज जी, आरजेडी के नवल किशोर राय, काँग्रेस के प्रेमचंद सभी ने अपने अंदाज़ में अफसोस ज़ाहिर किया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता हरेंद्र प्रतापजी लगातार फोन करते रहे कि अगर प्रकाशजी आग्रह करें तो आप लौट आइएगा, ज़्यादा सोचिएगा मत। उन्होंने खुद भी प्रकाशजी से बात करने की बात कही, जिसके लिए मैने उन्हें मना कर दिया।

सबसे बड़ी सरप्राइज़ तो मेरे लिए संस्कृतिकर्मियों की ओर से दी गई विदाई थी। आर्ट क़ॉलेज में जुटे संस्कृतिकर्मियों ने शाल भेंटकर विदाई दी, मगर विदाई की वेला में  वहाँ उपस्थित लोगों ने जो उद्गार व्यक्त किए वे मुझे हमेशा याद रहेंगे। दरअसल, मुझे एहसास ही नहीं था कि इतने कम समय में मौर्य टीवी ने सबको अपना कायल बना  लिया है। अनीस, निवेदिता झा, साद साहब, विनोद अनुपम, अविनाशज, शशिधर और अन्य दूसरे लोगों ने मौर्य टीवी की उपलब्धियों को रेखांकित करके मुझे रोमांचित कर दिया।

आप सोच रहे होंगे कि नौकरी छोड़ने के बाद मिली विदाई को मैं महिमामंडित क्यों कर रहा हूँ और क्या इस बहाने अपनी वाहवाही भी खुद नहीं किए जा रहा हूँ? हो सकता है ये हुआ हो, मगर मुझे दो वजहों से ऐसा करना ज़रूरी लगा। एक तो ये कि मैं उन सबका सार्वजनिक तौर पर आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने इतना स्नेह और आदर मुझे दिया। ये मेरे लिए अमूल्य निधि है और भविष्य में प्रेरणा की स्रोत भी बनेगी। दूसरे, इस तरह की विदाई-परंपरा अब दुर्लभ होती जा रही हैं। इसे पुष्ट बनाने के लिए ज़रूरी है कि इनका ज़िक्र सरे आम हो, ताकि तमाम व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद हम साथ काम करने वालों के बीच भावनात्मक संबंध भी मज़बूत बनें।

लेखक मुकेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई चैनलों और अखबारों में प्रमुख पदों पर रहे हैं. साहित्यिक पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं. सरोकार वाली व जनपक्षधर पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. इन दिनों मौर्य टीवी से फुरसत पाकर दिल्ली स्थित अपने आवास पर आराम फरमा रहे हैं.

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0 Comments

  1. विनय कुमार झा

    November 8, 2010 at 6:21 am

    मुकेश कुमार जैसे सरोकारी पत्रकारिता करने वाले पत्रकार की विदाई पर लोगों का भावुक होना स्वाभाविक है. व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में लोग भावनात्मकता को भूल जाते हैं. परन्तु मुकेशजी कहते हैं कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद हम साथ काम करने वालों के बीच भावनात्मक संबंध भी मज़बूत बनें। समाचार चैनल शुरू करना एक पेचीदा कवायद होती है और खासकर पटना से जहां चैनल से संबंधित गतिविधियां बहुत कम या न के बराबर हों. दिल्ली में तो इसके लिए आधारभूत संरचना आसानी उपलब्द्ध हो जाती है परन्तु पटना में नहीं. बहुत ही कम समय में उन्होंने चैनल को एक मुकाम पर पहुंचाया. ‘पेड-न्यूज़’ के खिलाफ भी उन्होंने वहां साहसिक पहल की. मेरा मुकेशजी से आग्रह कि एक बार फिर ‘देशकाल’ को सक्रिय करें.

    jhavinoy@indiatimes .com

  2. pradeep sharma

    November 8, 2010 at 7:49 am

    pure saat dino ( 1 0ct. se 7 oct ) tak dipavli ko ful enjoy kiya aur aaj hi b4m khola he…mukesh ji ki bhavnayen padi…mujhe nahi pata mukesh ji ne morya tv se vidaee kis vajah se li…patra ki bhavna pad kar lagaa ki bihaar election ke douraan shayad patrkarita ke mulyon ko marte dekh mukesh ji se nahi rahaa gaya hoga aur unhone aage aakar sevyayen chod di hogi…shayad…ho sakta me yahan thik nahi hun,par esaaa lagta he …me kisi par dosha ropan nahi kar raha hu..mera esaa manna he ki baat ped story ko ho ya trp dene vali story urf bakvaas ki ho..electronic media me jab ye canser dastak de raha tha tab isko rokne ki pahal nahi huee aur ab jab ye sare tv channels me fel gayaa he to ab ise kis tarah rokaa ja sakta he ?

    pradeep sharma
    mandsaur,mp.

  3. Amit Raikwar

    November 8, 2010 at 8:09 am

    Its difficult to find a good journalist and even more a person and a boss like you in today’s world people who have had the opportunity to work with you would sure have similar views to share…..:)

  4. shivendra parmar

    November 8, 2010 at 8:21 am

    BHAREE DOOKH HAI

  5. manish kumar

    November 8, 2010 at 9:00 am

    मुकेश जी आपसे मिलाने की तमना मेरा पटना था पर ख़त हो गया ! में एक बार आपसे मिलने अपने दोस्त के साथ गया था ,तब tak प्रकाश झा आ गए
    और हम मिलने का इंतजार करते रह गए , मेरा दोस्त ने मिलने का कारण मोर्य जॉब को लेकर किया था , क्योकि किसी भी बहाने आपसे हमे मिलाना था नही मिले तो दोस्त ने sms किया तो आपने कहा जॉब नही है भाई और हमलोग नही मिल सके ,पर आपके कार्क्रम हम सब में दो बार जाने का मोका मिला और आपको एक झलक दर्शन हुआ !जब पता लगा की आप मोर्य छोड़ रहे है ,अपसोस की हम नही मिल सके ,क्योकि हम भी किसी चैनल का कवरेज कर रहे थे .मनीष कुमार 09234282004

  6. Arvind Kumar

    November 8, 2010 at 7:34 pm

    Mukesh Ji ..hamari sirf 15 min tak baatcheet Hui thi aur emotionally main aapse jud gaya …kyun ki is yug main aapane imandaari ki bat ki thi…..

  7. Amarnath Tewary, Patna

    November 9, 2010 at 5:47 am

    Mukesh-ji, many tks for all the nice words written for me and friends…we knew that it was coming your way but our professional experience suggested, until poll is over…Opppp-ed, we’re proved wrong [professional experience be dammned, once again! Long live Paid News !!!]…BUT, doesn’t change is the constant?…you proved your point here in Patna and made graceful exit.. I hope and pray that you’ll reach to greater height in your career…Loads of best wishes…and, tons of love to Bitiya, Purvayee [I love this name for its sheer intonation.. meaning…freshness..breezee and above all, the smell of our mitti..]…Aap ki yaad aati hai, Mukesh-ji, especially at 8 pm six days a week…Amarnath Tewary

  8. Deepak

    November 9, 2010 at 6:40 am

    Sir,
    Its very sad.
    Good manpower should be retained for ever but such examples are really heart breaking and not good for the industry.

  9. Ranjit

    November 9, 2010 at 9:35 am

    koi sandeh nahin ki Mukesh jee ne Maurya ke Madhyam se sargarvit patrakarita kaa udaharan pesh kiya. umeed hai ki aagen V wo apnee tarah kee patrakarita karte rahenge… unhen maurya par nahin dekhkar nirasha hotee hai,par asha hai ki ham unhen sunte-padhte rahenge..

  10. Rajeev Ranjan Singh

    November 9, 2010 at 10:28 am

    mukesh jee ye bihar aur poorvanchal ki mitti hi esi hai ki jise bhi apnate hai dil se phir jab door honge to dookh bhi hogi, aansoo bhi bahenge

  11. Mithilesh

    November 9, 2010 at 11:54 am

    Mukesh kee ka farewell sirf ek vidai samaroh nahi tha…. yah Bihar ki sanskriti aur sadgunon ko bhi zahir karta hai… Mukesh jee ko aagami paari ke liye agrim badhai.

  12. MANISH

    November 10, 2010 at 12:23 pm

    मुकेश जी,
    मौर्या का आपने साथ छोड़ दिया…लेकिन जितना वक्त बिताया वो मील का पत्थर साबित हुआ है…चैनलों की टीआरपी के चूहे-बिल्ली के खेल में आप हमेशा आगे रहे…अब शायद अब आप किसी नए मुकाम पर जा रहे हैं…वो भी मौर्या की तरह कामयाब रहे और सभी को पछाड़ दे।

  13. brajesh

    November 10, 2010 at 12:30 pm

    mukesh jee, ab to aap jase patrakaro ko agaya anaa chahia. kam karne wale ap jase hi marta hai.

  14. N Sinha

    November 10, 2010 at 3:38 pm

    This is not just unfortunate for Maurya News but for the entire “profession” of “patrakarita”, as the whole incidence has once again proved the fact that there is no room for “value based serious journalism.” And like any other “manufacturing industry”, only an efficient “production supervisor” is required with a “proven track record” of running a “news factory” keeping the production cost at its lowest best and selling it hard… journalistic ethics and values… hardly matters… Whatever may be the reason for Mukesh ji to call it a day… no one can deny the fact that he led the “Team Maurya” from the front and established it in terms of presentation, programming and content…

  15. ashutosh kumar pandey

    November 11, 2010 at 6:03 am

    मुकेश जी को सप्रेम नमस्कार…………………………।
    आशा है आप सकुशल होंगे। इस बार का हंस देखा निराशा हाथ लगी। फोन किया। स्वीच आफ था। भड़ास के जरिए मालूम हुआ,आप आराम की मुद्रा में आ गए हैं। खैर,फिर तरोताजा होकर लौटिए इंतजार रहेगा। लेकिन कसौटी पर आपका शब्दों का सानिध्य अच्छा लगता है। इस बार पढ़ने को नहीं मिला । अगले अंक का इंतजार रहेगा। मुझे लगता है। पूरी पत्रकारिता की दुनियां में दो शब्द अभी भी खासतौर पर प्रचलित हैं बकायदा अच्छा काम भी करते हैं। एक स्ट्रींगर और बिड़ला ग्रुप में काम करने वाले सुपर स्ट्रींगर। इनकी ब्यथा आप जैसे लोग किताब या कसौटी के जरिए बयां कर सकते हैं। बहुत हुआ पूंजीपतियों के बारे में कसौटी पर कसना। जरा इनपर भी ध्यान दिजिए और अगली बार कसौटी में जरुर मिलिए आपका शुभेच्छू

  16. sanjay choudhary

    November 11, 2010 at 7:35 pm

    SIR,NAYA CHHANAL SHRU KARNA / BAND HOTE CHHANAL KO FIR SE KHADA KRNA /USSME JAN DAL DENA ………….FIR USS SE DOOR HO JANA ……………PR SIR KAB TAK ?………………..?
    BUS BHUT HUA AB APP APPNA CHHANAL SHURU KR DEY …………………….
    BHUT SARE CHAHNY WALE HI APPKE BHARAT BHAR ME ………………..
    APKA FOLLOWER
    sanjay choudhary Jabalpur M.P.

  17. pankaj jain, ranchi

    November 12, 2010 at 3:59 am

    sir,,,
    abhas tak na tha ki aap chhode denge maury ko, vajah jo bhi rahi ho, me dhundhalke me jana nahi chahta. lekin etna janta hoon ki, naram bhasa me sawaal puchhne ka andaz humen bha gaya. umeedon ke badal ye kah rahe hain ki har thahrav nai manzil ki chhalang hoti hai. thanks.
    pankaj jain, ranchi

  18. mayank

    November 13, 2010 at 5:42 am

    mukesh ji patrkarita ke be purodha jin ke jane ke baad koi bhi ro padega

  19. maurya reporter

    November 14, 2010 at 12:37 pm

    Bhaiyon
    Mukesh kumar ji ke jane ki baad koi maurya tv ke haal ke barein mai kuch to likhiye.bahut hi ganda ho gaya hai situationwa; manish ji sidhe distribution se channel head bana die gaye hain. kahin beti ko gift wala channel AZAD ki tarah haalat na ho jai.

    Any ways Miss You Mukesh Ji……………

  20. Aashish Jain,kareli,M.P.

    November 16, 2010 at 7:59 pm

    गिरते को सम्हालना बड़ी बात होती है ! आपने हमेशा उनको सहारा दिया जो बेसहारा थे और उन्हें इस लायक कर दिया की वे कईयों का सहारा बन गए ! हमे गर्व है आप पर और सदा रहेगा……! चेनलों की गन्दगी के खिलाफ एक नहीं कई चैनल आप पर कुर्बान……..! टी आर पी के लिए पत्रकारिता की बिक रही आत्मा को रोकने की इस मुहीम में मैं सदा आपके साथ हूँ !
    आपका आशीष जैन ,करेली 9425467816

  21. Catalyst Media College

    November 17, 2010 at 8:58 pm

    We admire the way you have established Maurya TV in a short span of one year, especially when the situation was complex. We wish you all the best for your future endeavors.

  22. vineet kumar

    November 17, 2010 at 9:08 pm

    पढ़कर सचमुच भावुक हो गया। आमतौर पर चैनल छोड़ते वक्त औसत से ज्यादा- मां,बहन के साथी प्रत्यय लगाकर गालियां बकने की परंपरा सी बन गयी है। लेकिन आपकी विदाई हाई स्कूल के मास्टर की तरह हुई और भावनात्मक लगाव के साथ हुई।..कोई तो उम्मीद होगी।.

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