सहारा ने अपनी ही खबर का खंडन क्यों छापा? शिवराज ने गद्दार सिंधिया को क्यों बचाया??

आज दो अखबारों में दो ध्यान देने वाली खबरें छपी हैं. राष्ट्रीय सहारा में प्रथम पेज पर जोरदार खंडन व खबर है. यह खंडन व खबर उन अफसरों को खुश करने के लिए प्रकाशित किया गया है जिससे उपेंद्र राय के राज में सीधे-सीधे पंगा लिया गया था. तब भड़ास4मीडिया ने संबंधित दो खबरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें इन शीर्षकों पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं- एक आईपीएस को निपटाने में जुटा राष्ट्रीय सहारा और सहारा से भिड़े राजकेश्वर की बहन हैं मीनाक्षी.

जीवन और समाज की कहानी सुनातीं कुछ तस्वीरें

तस्वीरें सीधे दिल और दिमाग पर असर करती हैं. और कई कई बार देखने के बाद तस्वीरों से कई कई नए अर्थ निकलते हैं. फेसबुक पर कुछ ऐसी तस्वीरें मिलीं, जो ठिठक कर सोचने को मजबूर करती हैं. जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अपने एक युवा दिनों की तस्वीर डाली है, यह लिखकर- ”पुत्र डॉ मिहिर ने कहीं घर के कबाड़ से मेरा यह फ़ोटो ढूंढ़ निकाला है! पता नहीं कब किसने कहाँ खींचा था. फिर भी, सुकूते-आरज़ी … “फूल खिले शाखों पे नए और रंग पुराने याद आए!”…”

ओम थानवी और प्रकाश झा में खुला संवाद

मौर्य टीवी का पोर्टल लांच हुआ : मौर्य टीवी का पोर्टल बुधवार को लांच हो गया। यों तो लांच के दौरान कई उल्लेखनीय बातें रहीं मगर सबसे रोचक रहा जनसत्ता के संपादक ओम थानवी और फिल्म निदेशक प्रकाश झा के बीच खुला संवाद। शुरूआत ओम थानवी ने की। उन्होंने कहा कि ‘दामुल’ वाले प्रकाश झा और ‘राजनीति’ के प्रकाश झा में फर्क है।

ओम थानवी करेंगे ‘मौर्यटीवी.काम’ को लांच

करीब चार महीने पहले पटना से शुरू हुआ बिहार-झारखंड का न्यूज़ चैनल ‘मौर्य टीवी’ गुरूवार को अपना वेब पोर्टल लांच करने जा रहा है। वेब पोर्टल की लांचिंग जिस अंदाज़ में की जा रही है उससे लगता है कि ये भी मीडिया में मौर्य टीवी प्राइवेट लिमिटेड की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। इसके लिए पटना के एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट में बड़ा आयोजन रखा गया है। वेब पोर्टल का लोकार्पण जनसत्ता के संपादक ओम थानवी करेंगे। जाने-माने फिल्मकार प्रकाश झा कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। मुख्य अतिथि होंगे सुपर थर्टी के आनंद कुमार।

‘जनसत्ता’ से सहयोग क्यों बनाए रखें?

अठन्नी दाम बढ़ाकर संपादक ने पाठकों से सहयोग बनाए रखने की अपील की : जनसत्ता कभी नाम वाला अखबार हुआ करता था. क्या बनारस, क्या बेंगलूर. हर जगह इसके चाहने वाले हुआ करते थे. लेकिन आजकल का जनसत्ता उदास करने वाला होता है. कुछ अलग पढ़ने की चाहत रखने वालों को मायूसी हाथ लगती है. समाचार एजेंसियों की खबरों से भरे पड़े इस अखबार में इनके रिपोर्टरों की भी जो खबरें होती हैं, वे ऐसी नहीं होतीं कि जिससे पाठक कुछ नया पा सके या जिससे हड़कंप, कंपन या मंथन हो सके. उपर से अब इस 12 पेजी अखबार का दाम भी बढ़ा दिया गया है. तीन की बजाय अब साढ़े तीन रुपये में मिला करेगा यह. अठन्नी ज्यादा देने में किसी को दिक्कत नहीं लेकिन अठन्नी बढ़ाने के साथ क्वालिटी बढ़ाने का कोई भरोसा नहीं मिला है अखबार की ओर से.