ओम थानवी और प्रकाश झा में खुला संवाद

मौर्य टीवी का पोर्टल लांच हुआ : मौर्य टीवी का पोर्टल बुधवार को लांच हो गया। यों तो लांच के दौरान कई उल्लेखनीय बातें रहीं मगर सबसे रोचक रहा जनसत्ता के संपादक ओम थानवी और फिल्म निदेशक प्रकाश झा के बीच खुला संवाद। शुरूआत ओम थानवी ने की। उन्होंने कहा कि ‘दामुल’ वाले प्रकाश झा और ‘राजनीति’ के प्रकाश झा में फर्क है।

उनका सिनेमा व्यावसायिक और मनोरंजन प्रधान हो गया है। ‘मौर्य टीवी’ को इससे बचना होगा। थानवी का ये बयान आग लगाने के लिए काफी था। अपनी बारी आने पर प्रकाश झा ने पूरी तल्खी के साथ इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ज़माना बदल गया है। अब अच्छी फिल्मों को आर्थिक मदद देने वाला एनएफडीसी नहीं है। बाज़ार ने एक नई दुनिया रच दी है और इसमें मुझे सुभाष घई और यश चोपड़ा से कंपीट करना है। ऐसे में मुझे अगर मनोरजंन का सहारा लेना पड़ता है तो ये आज की ज़रूरत है। हां, मैं कोशिश करता हूं कि उसी में अपनी बात भी कह दूं। उन्होंने कहा कि आज अगर मौर्य टीवी चल रहा है तो मनोरंजन की इसी कमाई की बदौलत, वर्ना हर महीने इसे चलाने के लिए मोटी रकम कहां से और कब तक आएगी।

प्रकाश झा ने थानवी के दूसरे प्रहार का भी इसी अंदाज़ में जवाब दिया। थानवी ने मालिकों के अत्यधिक हस्तक्षेप का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रकाश झा के चरण मौर्य टीवी में न ही पड़ें तो बेहतर होगा और चैनल को उनके चंगुल से मुक्त रहना चाहिए। इस पर प्रकाश झा ने कहा कि न तो मैं किसी तरह से दखल देता हूं और न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है। अलबत्ता मैं ये ज़रूर चाहता हूं कि मौर्य टीवी प्रतिस्पर्धा करे और अपने पैरों पर खड़ा हो। लेकिन इसके लिए ग़लत उपाय किए जाएं, मैं ये कभी नहीं चाहूंगा।

पोर्टल के लांच में इस तरह का खुला संवाद पत्रकारिता के लिहाज़ से बेहद अच्छी बात है। चाहे वह मालिक-संपादक संबंध हों या फिर चैनलों में पसर रहा मनोरंजनवाद, दोनों पर खुलकर बातचीत हो और नया रास्ता निकले ये समय की ज़रूरत है।

Comments on “ओम थानवी और प्रकाश झा में खुला संवाद

  • अमित गर्ग. राजस्थान पत्रिका. बेंगलूरु. says:

    प्रकाश जी, नमस्कार.
    मौर्य टीवी को अपने पैरों पर खड़ा करना है तो आपकी ही तरह सोचने वाले उन लोगों-पत्रकारों को चैनल में लाएं जो व्यवस्था में पैर पसार रही बुराईयों पर अपनी बात शिद्दत के साथ कह सकें। ना कि बाजारवाद वाली मीडिया में चैनल को झोंक दें। अगर कार्यक्रम अच्छा है, कंटेंट अच्छा है तथा प्रस्तुतिकरण शानदार है तो निश्चित तौर पर चैनल चलेगा और ऐसा होने से काई रोक भी नहीं पाएगा। दर्शक भी उसे हाथों-हाथ लेंगे। बिना कोई अच्छा कार्यक्रम दिए हम दर्शकों के टोटे का रोना रोए, इस सोच से अपने चैनल को तो कम से कम बचाइए। उम्मीद है जिस तरह आपने हिन्दी सिनेमा को बेहतरीन फिल्में दी हैं, उसी तरह आप मीडिया जगत को भी एक अच्छा चैनल देने में सफल होंगे।

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