ये खबर सही है तो टीवी वालों को पीएम को दौड़ा लेना चाहिए

हिंदुस्तान अखबार में अंदर के पेज पर निर्मल पाठक की लिखी एक स्टोरी छपी है. इसमें उन्होंने बताया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह टीवी जर्नलिस्टों से बहुत नाराज हैं और इसी कारण वे अपनी विदेश यात्रा में टीवी वालों को नहीं ले जाएंगे. यह स्टोरी चौंकाती है. क्या पीएम उन्हीं को ले जाएंगे जो उन्हें सूट करते हैं. जो उनको सुरक्षित करते हुए लिखते हैं. टीवी वालों से उनकी नाराजगी की वजह क्या है. क्या टीवी वालों ने घपलों-घोटालों को दिखा दिया तो यह गलत काम कर दिया.

बेचारे प्रधानमंत्री की चरम बेचारगी, पर बेचारा पद न छोडे़गा

अपने देश के प्रधानमंत्री बेचारे हैं, मजबूर हैं, लाचार हैं, गल्तियां करने वाले हैं…. और ये सारी बातें वे खुद मानते भी हैं. लेकिन उन्हें शायद डाक्टर ने कह रखा है कि यह सब होने के बावजूद वे पद पर बने रहें. सच में, लाचार पीएम के लगातार पद पर बने रहने के कारण यह देश लाचार होता जा रहा है, इस देश की जनता लाचार होती जा रही है, इस देश की किस्मत में बेचारगी का भाव भरता जा रहा है.

सबसे तीखा सवाल शाजी जमां का, सबसे घटिया सवाल अनुराधा प्रसाद का

: राडिया वाले पत्रकार पीएम की पीसी में नहीं दिखे : लाचार पीएम मनमोहन की आज बेहद मजबूरी में टीवी चैनलों के संपादकों के साथ आमने-सामने सवाल जवाब की कुछ भड़ासी झलकियां… सबसे शानदार, तीखा और टू द प्वाइंट सवाल पूछा स्टार न्यूज के एडिटर शाजी जमां ने. उन्होंने पूछा कि ये जो पूरा करप्शन है, इसके लिए आप खुद को नैतिक जिम्मेदार मानते हैं या नहीं मानते हैं. इस सवाल ने सबसे ज्यादा मनमोहन को असहज किया और चिरकुटईपूर्ण और अतार्किक सफाई देते नजर आए.

पीएम की पीसी में बड़े संपादकों के छोटे सवाल

नूतन ठाकुरआज मैंने कई सारे बहुत बड़े पत्रकारों / संपादकों को प्रधानमन्त्री के प्रेस कांफ्रेंस के बाद बाहर निकल कर वहां उपस्थित मीडियाकर्मियों के सामने अपनी बात कहते सुना. डॉ प्रणव रॉय, राजदीप सरदेसाई और अर्नब गोस्वामी जैसे वे नाम हैं जो आज भारतीय मीडियाजगत के चोटी के लोगों में माने जाते हैं. इसीलिए जब ये लोग कोई बात कहते हैं तो ना सिर्फ मीडिया जगत के लोग बल्कि बाकी लोग भी बड़े ध्यान से इनकी बात सुनते हैं और उन पर विश्वास करते हैं.

महान पत्रकारों के प्रधानमंत्री से महान सवाल

[caption id="attachment_19574" align="alignleft" width="93"]कमल शर्माकमल शर्मा[/caption]प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोटालों से देश की छवि खराब होने को लेकर आज टीवी चैनलों के संपादकों को बुलाया ता‍कि वे अपनी बात को आम जन तक पहुंचा सकें। प्रधानमंत्री का कहना था कि उनकी सरकार 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेलों, इसरो और आदर्श घोटालों के संदर्भ में सभी दोषियों, चाहे वह किसी भी पद पर हों, को कानून में दायरे में लाने को लेकर गंभीर है। उन्‍होंने 1.76 लाख करोड़ के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 2007 में ही ए राजा को पत्र लिखकर चिंता जताई थी।

पीएम की पीसी : गूंगा, लाचार और बेचारा मनमोहन!

Alok Tomarप्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने छह महीने में अपनी दूसरी प्रेस कांफ्रेंस काफी डरते डरते शुरू की और कहा कि सरकार से गलतियां होती हैं मगर लोकतंत्र में मीडिया को अच्छे पक्ष भी देखने चाहिए। महंगाई और मुद्रास्फीति जैसे विषयों पर बोलने के बाद सबसे पहला सवाल ए राजा और टू जी स्पेक्ट्रम का था और मनमोहन सिंह ने पहली बार मंजूर किया कि ए राजा ने उनसे कहा कुछ और किया कुछ और।

सुमित के सवाल पर मुझे शर्म आई

ऐसे मजाकिया सवाल पत्रकारिता के गिरे स्तर की ओर इशारा करते हैं : पीसी में 55 पत्रकारों ने सवाल पूछे : 17 सवाल हिंदी में, 2 उर्दू में, शेष आंग्ल भाषा में : आलोक मेहता ने साफ पूछा कि जो लोग एनजीओ बनाकर नक्सलवादियों को मोरल सपोर्ट दे रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? : पीसी समापन की घोषणा होते ही विज्ञान भवन हाल मछली बाजार बन गया : मैं प्रधानमंत्री जी से कुछ पूछने का अधिकारी नहीं, होता तो तीन सवाल पूछता :

पीएम की पीसी के चापलूस पत्रकार

शेषजीकई ने घटिया सवाल पूछे : कुछ ने बेशर्मी से विश किया : कठिन सवाल पूछे ही नहीं गए : अब तक के किसी पीएम की सबसे घटिया पीसी : भाइयों ने भोजन किया और अपने-अपने ढर्रे चले गए : प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल की पहली पत्रकार वार्ता सकुशल संपन्न हो गयी. उन पर कुछ दैवी कृपा रही कि जो सवाल पूछे गए वे बिलकुल ऐसे लग रहे थे जैसे प्रधानमंत्री को मालूम था कि अब यह सवाल आने वाला है.

पीएम की पीसी में भी फिक्सिंग?

मानवाधिकारवादियों से दुखी आलोक मेहता ने निकाली भड़ास : जापानी जर्नलिस्ट ने पीएम को दिया उलाहना : उन वरिष्ठ पत्रकारों के दिल से पूछिए जिन्होंने बड़े-बड़े अखबारों-पत्रिकाओं में कई दशक गुजार दिए पर उन्हें आज पीएम की विज्ञान भवन में हुई पीसी में इसलिए सवाल नहीं पूछने दिया गया क्योंकि वे फ्रीलांसर के रूप में काम करते हैं. इन वरिष्ठ पत्रकारों ने ऐतराज भी जताया. चिल्लाए भी. प्रधानमंत्री जी का ध्यान भी आकृष्ट कराया.