सात काम सौंप गए प्रभाष जी

प्रभाष जी से मेरा पहला परिचय जेपी आंदोलन के समय में उस समय हुआ जब वे रामनाथ गोयनका के साथ जयप्रकाश नारायण से मिलने आए थे। उस समय की वह छोटी सी मुलाकात धीरे-धीरे प्रगाढ़ संबंध में बदल गई। बोफोर्स मुद्दे को लेकर जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठने लगी तब उन्होंने मुझे भारतीय जनता पार्टी में भेजने के लिए संघ के अधिकारियों से बात की। उनका मानना था कि जेपी आंदोलन के दौरान जो ताकतें कांग्रेस के खिलाफ सक्रिय थीं, उन्हें फिर से एकजुट करने में मेरी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वीपी सिंह की सरकार बनने के पहले और बाद में भी मेरा उनसे लगातार संपर्क बना रहा।

प्रभाष जोशी पर पुस्तक का लोकार्पण 28 को

प्रभाष जोशी की स्मृति में प्रकाशित संचयन ‘हद से अनहद गए’ का लोकार्पण 28 जनवरी को यहां गांधी शांति प्रतिष्ठान में होगा। लोकार्पण कुलदीप नैय्यर करेंगे। पुस्तक में प्रभाष जोशी पर लिखे गए 37 लेख संकलित हैं। तकरीबन डेढ़ सौ पृष्ठों की पुस्तक का संचयन और संपादन रेखा अवस्थी, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह और स्मित पराग ने किया है।

पत्रकारिता के नए नायक कहां से आएं

प्रभाष जोशी की मृत्यु के बाद उनके बारे में जितना लिखा गया और उन्हें भाव-भरी श्रद्धांजलियां अर्पित की गईं, वह एक ऐतिहासिक घटना है। उन सभी में यह स्वीकार किया गया कि प्रभाष जी बड़े पत्रकार और संपादक थे। इस स्थापना में यह भविष्यवाणी निहित थी कि अब ऐसा व्यक्तित्व हमें देखने को नहीं मिलेगा। जहां पहली स्थिति आत्मगौरव की भावना का संचार करती है, वहीं दूसरी स्थिति मायूसी के भंवर में डालने वाली है।

‘पिताजी के छूटे काम पूरा करने में मदद करें’

श्रद्धांजलि सभा में सोपान जोशी बोले : पत्रकार प्रभाष जोशी के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रभाष जी के बेटे सोपान जोशी ने कहा कि जो काम पिता अधूरा छोड़ गए हैं वे पूरे हो जाएं, लोग मिलकर मदद करें, यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रभाष जोशी के छोटे भाई सुभाष जोशी ने कहा कि वे जो भी काम शुरू करते थे, उसे पूरा होने तक बड़े मनोयोग से करते थे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि यही हो सकती है कि हम उनके अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में बढ़ें।

बात थी अभिनंदन की, दे रहे हैं हम श्रद्धांजलि : नामवर

प्रभाष जोशीरामनाथ गोयनका और प्रभाष जोशी में पेशेवर नहीं बल्कि जिद्दी व दृढ निश्चयी पिता-पुत्र जैसा संबंध था : जोशी को याद किया लेखकों, पत्रकारों और नेताओं ने : राजधानी के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शनिवार को हुई श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में पत्रकारों, साहित्यकारों, राजनेताओं, समाजसेवकों और बुद्धिजीवियों ने वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय प्रभाष जोशी को श्रद्धांजलि दी। इन लोगों ने भरे गले व नम आंखों से जोशी को याद किया और कहा कि उनका जाना न केवल पत्रकारिता जगत के लिए बल्कि साहित्य जगत और जन आंदोलनों के लिए भी अपूरणीय क्षति है। वक्ताओं ने उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाने की बात कही। करीब तीन घंटे चली इस सभा में वरिष्ठ पत्रकार अजीत भट्टाचार्य, सामाजवादी नेता सुरेंद्र मोहन, समाजसेवी अरुण राय, पर्यावरणविद अनुपम मिश्र, आलोचक डा नामवर सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी, वरिष्ठ साम्यवादी एबी बर्धन, महासचिव दिग्विजय सिंह, गोविंदाचार्य, डीपी त्रिपाठी और श्रीमती अनन्या गोयनका सहित अनेक वक्ता बोले। सभा में प्रभाष जोशी की पत्नी उषा जोशी, उनके छोटे भाई सुभाष जोषी, दोनों बेटे, बहु व अन्य परिजन भी मौजूद थे।