प्रभाष जोशी ही नहीं, आलोक तोमर और उनकी पत्नी सुप्रिया का भी किया गया अपमान

प्रभाष जी के निधन के बाद उनकी स्मृति को संजोने के लिए न्यास बनाने का विचार उनके करीबी लोगों व परिजनों के दिमाग में आया तो न्यास के नामकरण का काम आलोक तोमर ने किया. आलोक तोमर के मुंह से निकले नाम को ही सबने बिलकुल सही करार दिया- ”प्रभाष परंपरा न्यास”. प्रभाष जोशी नामक शरीरधारी भले इस दुनिया से चला गया पर प्रभाष जोशी संस्थान तो यहीं है. प्रभाष जी की सोच, विचारधारा, सरोकार, संगीत, क्रिकेट, लेखन, जीवनशैली, सादगी, सहजता… सब तो है..

प्रभाषजी पर किताब लिखने के लिए स्वाति तिवारी ही मिलीं?

: अगर स्वाति तिवारी जनसम्पर्क विभाग के जुगाड़ु अपर संचालक सुरेश तिवारी की पत्नी नहीं होतीं तो क्या इस किताब का विमोचन इस गरिमापूर्ण और भव्य कार्यक्रम में हो सकता था? :  स्वाति तिवारी सरकारी कर्मचारी हैं जिन्हें लेखिका के रूप में महान बनाने के लिए सुरेश तिवारी ने अपनी पूरी जिन्दगी दॉव पर लगा रखी है : जोड़तोड़ और सरकारी विज्ञापनों के दम पर लेखक-लेखिकाएं बनाने की साजिश का भंडाफोड़ किया जाना चाहिए :

न्यास की पवित्रता में पाखंड का प्रवेश न हो

राजकुमार सोनी: वरना सरकार की गोद में बैठने में देर न लगेगी : पिछले कुछ दिनों से प्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी के नाम पर गठित किए एक ट्रस्ट (प्रभाष परम्परा न्यास) को लेकर जमकर जूतम-पैजार चल रही है। प्रभाष परम्परा न्यास को गठित करने वाला एक धड़ा मानता है कि जो कुछ वह कर रहा है शायद सही कर रहा है। न्यास के औचित्य को लेकर सवाल उठाने वाले दूसरे धड़े के भी अपने तर्क हैं।

प्रभाषजी की टीम को हाशिए पर फेकने की साजिश!

: प्रभाष परंपरा की रचनात्मक पहल : कल रात उस जमात पर लिखने बैठा जिसने कुछ सालों पहले पूरे देश में गणेश जी को दूध पिला दिया था. इनके दुष्प्रचार तंत्र का यह सबसे रोचक उदाहरण रहा है. तभी दो जानकारी मिली. उस पोस्ट को रोक दिया है. पता चला कि भगवा रंग में रंगा प्रभाष परंपरा न्यास ने काम शुरू कर दिया. कैंसर से जूझ रहे साथी आलोक तोमर को धमकाने की कोशिश हुई. दूसरी सूचना पत्रकार सुप्रिया (आलोक तोमर की पत्नी) के बारे में मिली.

मैं फच्चर अड़ाने वालों में से नहीं हूं

आलोक तोमर: किस्से कहानियां छोड़ो, काम करो : उम्मीद है कि मेरे गुरु के काम में झापड़ की नौबत नहीं आएगी, मगर आएगी तो देखा जाएगा : प्रभाष जोशी के नाम पर बहस इतनी लंबी और इतने आयामों में फैल जाएगी इसकी उम्मीद किसी को नहीं रही होगी। ऐसे ऐसे लोग बोले जिन्हें न प्रभाष जोशी से कोई मतलब था और न प्रभाष परंपरा का अर्थ ठीक से उन्हें समझ में आता है।

प्रभाष परंपरा न्यास पर अंबरीश के सवाल

अंबरीश कुमार जनसत्ता के यूपी ब्यूरो चीफ हैं. लंबे समय से जनसत्ता में हैं. प्रभाष जोशी के जमाने से. रामबहादुर राय से अंबरीश कुमार की अदावत काफी पुरानी है. रामबहादुर राय बहुत चिढ़ते हैं अंबरीश से. अंबरीश भी खूब भड़कते हैं रामबहादुर राय के नाम से. प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर प्रभाष परंपरा न्यास के बैनर तले रामबहादुर राय के नेतृत्व में जो कार्यक्रम हुआ उसमें कई लोग नहीं बुलाए गए. खफा अंबरीश ने भड़ास अपने ब्लाग ‘विरोध’ पर निकाली है, जो यूं है. -एडिटर