‘पापा, कौन लाएगा हमारे लिए चाकलेट’

वरिष्ठ पत्रकार रामकृष्ण पांडेय की जिंदगी ईमानदारी और संवेदनाओं से भरी रही। उनकी संवेदनशीलता की गवाह उनकी कविताएं भी हैं जिसमें बहुत बारीक-बारीक इमोशन्स को  उकेरा गया है। उनके कविता संग्रह ‘आवाजें’ से यह एक कविता यहां प्रस्तुत कर रहे हैं–