ये हरामखोर बेइमान नेता अन्ना आंदोलन से फायदा उठाने में लग गए

सुभाष गुप्ता: खून चूसने वाले नेता अभी चेते नहीं… : अन्ना की लड़ाई देश भर के लोगों की लड़ाई  में बदल रही है। इसकी वजह भी है। दरअसल, ये लड़ाई  जन लोकपाल की लड़ाई से बहुत आगे निकल चुकी है। आजादी  के बाद नौकरशाही और नेताओं ने जिस तरह आम आदमी का खून  चूसा है…. ये लड़ाई उसी का नतीजा है।

मालिक हो तो अतुल माहेश्‍वरी जैसा

सुभाष कुछ लोग बहुत अच्छे पत्रकार होते हैं, कुछ बहुत अच्छे मालिक, कुछ लोग बेहतरीन इंसान होते हैं। ये सब मिलकर बने थे अतुल माहेश्वरी। एक बेखौफ पत्रकार, कई साल आगे की सोचकर तकनीकी और रणनीति तय करने वाले नियोजक और मानवीय गुणों – संवेदनाओं से लबालब मालिक। ऐसा ऐसा मालिक जो सिर्फ ख्वाब बुनता नहीं, अपनी पूरी टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्हें खून पसीने से सींचना और हकीकत में बदलना भी जानता था। अखबारी दुनिया में सबसे ज्यादा अच्छे तरीके से दूसरों से काम लेने और खुद काम करने के इस हुनर के पीछे को किसी शातिर प्रबंधन वाला अंदाज नहीं, बल्कि एक ऐसी मासूमियत और भोलापन हर जगह नजर आता था, जिससे हर कोई कायल हो जाता है।