अपनी जाति और अपने उपनाम “ठाकुर” से अलग होने के संबंध में

अमिताभ ठाकुरआज मेरे द्वारा ओ़थ कमिश्नर मेरठ के समक्ष यह शपथपत्र प्रस्तुत किया गया कि जाति-प्रथा के अहितकारी और बाधक असर को उसकी सम्पूर्णता में देखते हुए मैंने यह निर्णय लिया है कि भविष्य में मेरी कोई भी जाति नहीं होगी. इस प्रकार सभी आधिकारिक, शासकीय और सामाजिक अभिलेखों, दस्तावेजों, मान्यताओं और सन्दर्भों में किसी भी आवश्यकता पड़ने पर मेरी जाति “कोई नहीं” अथवा “शून्य” मानी जाए.