जेल गए संपादक को मिला आरटीआई एवार्ड

यूपी के बस्ती जिले के हिन्दी साप्ताहिक अखबार सुदृष्टि टाइम्स के संपादक सुदृष्टि नारायन त्रिपाठी को रिसर्च काज फाउण्डेशन आफ इण्डिया, नई दिल्ली की ओर से आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में सम्मानित किया गया। उन्हें अरविन्द केजरीवाल के हस्ताक्षर युक्त प्रमाण-पत्र भी प्राप्त हुआ। इसमें श्री त्रिपाठी को द राइट आफ इनफार्मेशन (आरटीआई) एक्ट के जरिए समाज की सेवा में योगदान के लिए सराहना की गई है।

संपादक की जमानत, जेल से रिहा हुए

बस्ती जनपद के पत्रकार एवं हिंदी साप्ताहिक ‘सुदृष्टि टाइम्स’ के संपादक को अपर जिला जज के न्यायालय से जमानत मिल गई। जेल से रिहा होने के बाद संपादक सुदृष्टि नारायण तिवारी ने सबसे पहले भड़ास4मीडिया डॉट कॉम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय बी4एम ने जिस बेबाकी से मेरे प्रकरण को उठाया, इसके लिए मैं उसका जीवन भर आभारी रहूंगा।

मांगी सूचना, मिली संपादक को जेल

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के एक पत्रकार को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगना काफी मंहगा पड़ गया। बदले में उसे जेल के सीखचों में जाना पड़ा। ऐसा हुआ कि हिंदी साप्ताहिक ‘सुदृष्टि टाइम्स’ के संपादक सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने सीएमओ बस्ती से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर रामनाथ राम को नागवार लगा। आनन-फानन में सीएमओ साहब ने मातहतों की मीटिंग बुलाई और निर्णय लिखित रूप से ले लिया गया कि सुदष्टि नारायण त्रिपाठी नाम के व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज कराया जाए। इसके लिए बकाएदा शहर कोतवाल बस्ती को तहरीर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम से दी गई। कोतवाली पुलिस ने मामले में बिना किसी हीला हवाली किए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली और इस मामले में तत्परतापूर्वक कार्रवाई की।