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दुख-दर्द

मांगी सूचना, मिली संपादक को जेल

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के एक पत्रकार को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगना काफी मंहगा पड़ गया। बदले में उसे जेल के सीखचों में जाना पड़ा। ऐसा हुआ कि हिंदी साप्ताहिक ‘सुदृष्टि टाइम्स’ के संपादक सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने सीएमओ बस्ती से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर रामनाथ राम को नागवार लगा। आनन-फानन में सीएमओ साहब ने मातहतों की मीटिंग बुलाई और निर्णय लिखित रूप से ले लिया गया कि सुदष्टि नारायण त्रिपाठी नाम के व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज कराया जाए। इसके लिए बकाएदा शहर कोतवाल बस्ती को तहरीर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम से दी गई। कोतवाली पुलिस ने मामले में बिना किसी हीला हवाली किए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली और इस मामले में तत्परतापूर्वक कार्रवाई की।

उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के एक पत्रकार को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगना काफी मंहगा पड़ गया। बदले में उसे जेल के सीखचों में जाना पड़ा। ऐसा हुआ कि हिंदी साप्ताहिक ‘सुदृष्टि टाइम्स’ के संपादक सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने सीएमओ बस्ती से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जो मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर रामनाथ राम को नागवार लगा। आनन-फानन में सीएमओ साहब ने मातहतों की मीटिंग बुलाई और निर्णय लिखित रूप से ले लिया गया कि सुदष्टि नारायण त्रिपाठी नाम के व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज कराया जाए। इसके लिए बकाएदा शहर कोतवाल बस्ती को तहरीर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम से दी गई। कोतवाली पुलिस ने मामले में बिना किसी हीला हवाली किए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली और इस मामले में तत्परतापूर्वक कार्रवाई की।

आईपीसी की धारा 381/504/506 के तहत स्थानीय पुलिस ने संपादक सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी निवासी लबनापार थाना कोतवाली, जनपद बस्ती को अरेस्ट कर लिया। बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां न्यायालय के आदेश पर श्री त्रिपाठी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। संपादक के जेल जाने की इस घटना के बाद प्रेस क्लब बस्ती के अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने इसे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जनपद के सीएमओ के इस कार्य की निंदा की और कहा कि इस तरह से मीडिया की आवाज दबाना ठीक नही है। वहीं संपादक श्री त्रिपाठी के संबन्ध में यह भी कहा जा रहा है कि उनके द्वारा जिले के लगभग सभी सरकारी दफतरों में सूचना कानून के अन्तर्गत किसी न किसी मसले की जानकारी मांगी जाती रही है। इसको लेकर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी पहले से ही खुन्नस खाए रहे और मौका लगते ही संपादक जी को अपने शिकंजे में ले लिया।

बस्ती के एक पत्रकार द्वारा बी4एम को मेल के माध्यम से भेजी गई जानकारी पर आधारित

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0 Comments

  1. kailashchandra

    June 27, 2010 at 3:22 pm

    rti act sirf aam logo ka majak udane ke liye banaya gaya hai kyoki govt. ke bharst aadhikari kabhi aam logo ko sahi jankari nahi dene wale aur unko malume hai es act se unhe koi saja nahi hone wali…..

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