अब गुरुदेव भी चले गए

विकास मिश्रगुरुदेव नहीं रहे..। उनका नाम था विनोद मिश्र..। मूल रूप से सुल्तानपुर के रहने वाले थे, इलाहाबाद में ससुराल थी और बाद में इलाहाबाद में ही बस गए। कई बरस माया में रहे। फिर मध्य प्रदेश में। इंदौर, जबलपुर, भोपाल में ज्यादा वक्त बीता। दैनिक भास्कर, स्वदेश, नई दुनिया..जैसे कई अखबारों में उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।

न्यूज24 को झटके का क्रम जारी, विवेक प्रकाश भी गए महुआ

: कहीं एक डूबते जहाज से दूसरे डूबते जहाज में तो नहीं चढ़ रहे हैं ये पत्रकार? : यशवंत राणा ने लगता है कि न्यूज24 को निपटाने की तैयारी कर ली है. आजतक से इस्तीफा देकर न्यूज24 लांच कराने वाले सुप्रिय प्रसाद के न्यूज24 से इस्तीफा देने के बाद आज तक से महुआ पहुंचे यशवंत राणा ने आजतक से न्यूज24 गए बाकी लोगों का इस्तीफा दिलवाना शुरू किया है. आरसी शुक्ला, विकास मिश्र के बाद अब एक और महत्वपूर्ण विकेट न्यूज24 से गिरा है. इनका नाम है विवेक प्रकाश.

न्यूज24 से विकास मिश्र भी गए, महुआ में प्रोग्रामिंग हेड बने

विकास मिश्रन्यूज24 वालों की करनी से संस्थान में शेष बचे गिने-चुने ठीकठाक लोग भी अपना झोला-बैग उठाकर नमस्ते कर दूसरे संस्थानों को चलते बने हैं. कल आरसी शुक्ला के न्यूज24 से इस्तीफा देने की खबर आई थी और आज पता चला है कि विकास मिश्रा ने भी टाटा बाय बाय बोल दिया. न्यूज24 की लांचिंग से ही इसके साथ जुड़े विकास शानदार स्क्रिप्ट राइटर, प्रोग्रामिंग और पैकेजिंग के आदमी हैं.

15 साल बाद गांव में मेरी होली : सम्मति-घोंघी मइया का दुबलापन और दयाराम का नौवां बच्चा

विकास मिश्र: बउरइलू छिनार बउरइलू छिनार, बाबा दुअरवा का गइलू….. : अपने भतारे के मउसी हो, पंचगोइठी द.. : सलीम बहू जब अइलिन गवनवा पतरे पीढ़ा नहायं… : करीब 15 साल बाद होली पर गांव गया था। वजह सिर्फ व्यस्तता ही नहीं रही, जहां रहा, वहां ये रंगीन त्योहार साथियों के साथ मनाने का भी अपना लुत्फ था।

न्यूज24 में डबल प्रमोशन और इनक्रीमेंट से खुशी

न्यूज24 की टीम प्रसन्न है. लंबे समय से प्रतीक्षित इनक्रीमेंट-प्रमोशन का दौर शुरू हो चुका है. खबर है कि 25 हजार रुपये और इससे कम सेलरी पाने वालों की सेलरी में 25 से 40 फीसदी तक का इनक्रीमेंट कर दिया गया है. 25 हजार से ज्यादा पाने वालों का पैसा अभी नहीं बढ़ा है लेकिन पद सभी का बढ़ा दिया गया है. एसोसिएट एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (एईपी) के रूप में कार्यरत अरुण पांडेय, शादाब मुज्तबा, मनीष कुमार को तरक्की देकर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (ईपी) बना दिया गया है.

एक जर्नलिस्ट का नास्टेल्जिया

[caption id="attachment_17895" align="alignleft" width="81"]विकासविकास[/caption]: जिंदगी की साज पर नहीं सधते अब सुर : ‘इंडियन आयडल’ पर प्रोग्राम बनाना था, सिस्टम पर सितारों के परफार्मेंस देख रहा था। कैलाश खेर की तान दिल की गहराइयों में उतरी तो दिल में एक नई सी धड़कन महसूस हुई। रिचा शर्मा ने फिल्म ‘माई नेम इज खान’ का गीत गाया.. सजदा….। सूफियाना आवाज और दिलकश तरन्नुम..। सुनते सुनते खो-सा गया। फिर शंकर महादेवन का गीत आया… झूम बराबर झूम…। आप भी सोच रहे होंगे कि मैं कहना क्या चाह रहा हूं..।

शंभू झा के साथ लूट और राग दरबारी का लंगड़

उन्हें मोबाइल मिल तो गया पर अब उसे छूने में भी डरते हैं : शंभू झा को जानना बहुत जरूरी नहीं है, आप वो जानिए जो शंभू झा के साथ हुआ। शंभू झा न्यूज 24 में प्रोड्यूसर हैं। नोएडा में दफ्तर है। बीते साल 12 नवम्बर की रात दस बजे वह दफ्तर से घर के लिए निकले थे। नोएडा टोल ब्रिज से रोजाना कैब पकड़ते थे। उस रात भी वह कैब को रुकने के लिए हाथ दे रहे थे। एक मारुति 800 रुकी, तीन लोग पहले से थे। चौथे शंभू झा सवार हुए। कार आगे बढ़ी और टोल ब्रिज पर न जाकर ग्रेटर नोएडा की तरफ मुड़ गई। शंभू ने वजह पूछी तो बगल में बैठे शख्स ने तमंचा उनकी कनपटी से सटा दिया और पिटाई शुरू कर दी। कहा-अपनी आंखों पर हाथ रख लो। एहतियात के लिए उसने अपना हाथ भी उनके चेहरे पर रख दिया औऱ तमंचे से मरम्मत जारी रही। उनका बैग खंगाल लिया, जेब खंगाल लिया। दुर्भाग्य ये था कि 20 हजार रुपये दफ्तर से उसी दिन लिए थे। हाईटेक मोबाइल था करीब 19 हजार का। कार चल रही थी, पिटाई भी चल रही थी। कार एक्सप्रेस वे की साइड में पतली सड़क पर चल रही थी। 11 किलोमीटर दूर एक सूनसान जगह पर कार रुकी और गेट खोला। पीछे बैठा शख्स बोला-सीधे भागते हुए जाओ नहीं तो गोली मार दूंगा। शंभू झा क्या करते, भागते गए।