इस सिस्टम में रांग फान्ट की तरह थे अनिल सिन्हा

: अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन का पहला आयोजन संपन्न : जनसांस्कृतिक मूल्यों के लिए काम करेगा अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन- वीरेन डंगवाल : भूमंडलीकरण के खिलाफ संघर्ष करने वालों का संबल बनेगा अनिल सिन्हा मेमोरियल फाउंडेशन : हर साल दिया जाएगा अनिल सिन्हा स्मृति सम्मान : अनिल के व्यक्तित्व में  संघर्ष की अदम्य इच्छाशक्ति थी- आनंद स्वरूप वर्मा :

ऊंचाइयां छूने के बाद भी वह भोला था, बहुतों से उसे धोखा मिला

: ‘सर,  याद होगा आपको जब हम बरेली कॉलेज में पढ़ते थे, तो आप अकसर हमारी क्लास में कहा करते थे कि मुझे इनमें से एक भी लड़के की आंख में चिनगारी नहीं दिखती, सपने नहीं दिखते, तभी मैंने सोच लिया था कि कुछ करके दिखाऊंगा, आज एक बड़े काम की शुरुआत के गवाह आप भी हैं’ : एक अजब-सी बेचैनी, अजब-सी आशंकाएं मन को घेरे हुए थीं, कई दिनों से। तो क्या वह ऐसी ही मर्मांतक, अनहोनी का संकेत थीं, सोचने को विवश हूं। अतुल नहीं रहा, उसका पार्थिव शरीर भी पंचतत्व में विलीन हो गया। किसी बुरे सपने जैसा इतना डरावना सच। इसका सामना करने का साहस अपने भीतर तलाश रहा हूं।

पोथी, पतरा, ज्ञान कपट से बहुत बड़ा है मानव

[caption id="attachment_18496" align="alignright" width="151"]कविता पाठ करते वीरेन डंगवालकविता पाठ करते वीरेन डंगवाल[/caption]: कानपुर में वीरेन डंगवाल का एकल काव्यपाठ : प्रख्यात कवि वीरेन डंगवाल ने कल दोपहर बाद कानपुर में कविता पाठ किया. एकल कविता पाठ. उसी कानपुर में जहां वे कुछ वर्षों पहले कुछ वर्ष तक रहे, अमर उजाला अखबार के संपादक के बतौर. जहां उन्होंने संपादक रहते हुए दर्जनों पत्रकारों को संपादकीय, मानवीयता, सरोकार और पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया.

रिटायर हो गए वीरेनदा

[caption id="attachment_17681" align="alignleft" width="85"]वीरेनदावीरेनदा[/caption]वीरेन डंगवाल उर्फ वीरेनदा बरेली कालेज से रिटायर हो गए. 30 जून का दिन वीरेन डंगवाल के लिए कई मायनों में न भूलने वाला रहा. एक तो यह कि उनका उनके प्यारे बरेली कालेज से कई दशकों का सीधा नाता टूट गया. अब भावनात्मक रिश्ता ही रहेगा. और, इसी 30 जून के दिन वीरेन दा ने अपने शहर बरेली में पहली बार कविता पाठ किया. गर्मी की छुट्टियों के कारण 30 जून को बरेली कालेज बंद रहा, सो, वीरेन डंगवाल के रिटायरमेंट पर कोई आयोजन नहीं किया जा सका.

वीरेन डंगवाल ने अमर उजाला को नमस्ते कहा

[caption id="attachment_14696" align="alignnone"]वीरेन डंगवालवीरेन डंगवाल[/caption]मशहूर कवि और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन डंगवाल ने अमर उजाला, बरेली के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 27 वर्षों से अमर उजाला के ग्रुप सलाहकार, संपादक और अभिभावक के तौर पर जुड़े रहे वीरेन डंगवाल का इससे अलग हो जाना न सिर्फ अमर उजाला बल्कि हिंदी पत्रकारिता के लिए भी बड़ा झटका है। मनुष्यता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र में अटूट आस्था रखने वाले वीरेन डंगवाल ने इन आदर्शों-सरोकारों को पत्रकारिता और अखबारी जीवन से कभी अलग नहीं माना। वे उन दुर्लभ संपादकों में से हैं जो सिद्धांत और व्यवहार को अलग-अलग नहीं जीते। वीरेन ने इस्तीफा भी इन्हीं प्रतिबद्धताओं के चलते दिया।