टीवी9 और रवि प्रकाश का सच (एक)

: अजित साही के आने और जाने की दास्तान : टीवी9 मुंबई में जो कुछ हुआ, उसके पीछे का इतिहास पत्रकारिता और दलाली के रिश्तों की जीती जागती सच्चाई है। टीवी9 के मालिक चैनल चलाने के लिए अजित साही को लगभग पैर पकड़ कर अपने साथ लाए। सच्ची पत्रकारिता के लाख वादे किए। उनसे कहा कि एक नई किस्म की पत्रकारिता शुरू करनी है, सभी की बैंड बजा देनी है। नेता, बिल्डर, पुलिस सभी की। आम जनता के हक की लड़ाई लड़नी है। टीवी9 के मालिक रवि प्रकाश ने भरी मीटिंग में दावा किया, “हमें जर्नलिज्म नहीं, मार्किस्जम और लेनिनिज्म करना है।”

अजित साही की अगुवाई में पत्रकारिता के एक नए मिशन की रूपरेखा तैयार की गई। शाम 5.30 बजे का प्रोग्राम तय हुआ, नाम रखा गया- बीएमसी के रावण। इसमें बीएमसी के करोड़ों के फंड से मलाई खाने वाले कारपोरेटर्स को रावण का खिताब देने की परंपरा शुरू की गई। मुंबई की गंदगी, कचरा, खराब सड़क, पानी जैसी तमाम समस्याओं के लिए बीएमसी यानी मुंबई नगरपालिका के जिम्मेदार रावण तलाशे जाने लगे। कचरे की समस्या के लिए बाकायदा कचरा कारपोरेटर्स का खिताब देने की परंपरा शुरू की गई। ये प्रोग्राम सुपरहिट हुआ। चैनल सिर्फ खबरों के दम पर नंबर-1 हो गया। आजतक, स्टार, माझा, लोकमत सभी को पीछे छोड़कर।

जिस दिन अजित साही और उनकी टीम को चैनल से जाने के लिए कहा गया, उसी दिन शाम को यह प्रोग्राम बंद कर दिया गया। यानी बीएमसी के रावण बंद।

ये इस कहानी की शुरूआत है। अजित साही के जाते ही पूरी एडिटोरियल लाइन बदल दी गई। क्यों बदली गई। ये जानना बेहद ही दिलचस्प है। टीवी9 के मालिक रवि प्रकाश ने भरी मींटिंग में कहा कि मुंबई पुलिस उनके फोन टेप कर रही है। चैनल को टोन डाउन किया जाए। मुंबई पुलिस के खिलाफ दिखाना बंद किया जाए। रवि प्रकाश को अब मुंबई पुलिस के फोन टेप में किस बात का डर था, ये उन्होंने नहीं बताया। आम तौर पर जर्नलिस्ट के फोन पर पुलिस की नजर हुआ करती है, मगर रवि प्रकाश इस कदर क्यों डर गए, ये हैरानी की बात थी। टीवी9 में जिस तरह से पैसे का निवेश हो रहा है, उसका सोर्स क्या है और उसका सत्यम से क्या ताल्लुक है, इस तरह की कई बातें इसके पीछे हो सकती हैं।

रवि प्रकाश के चलते टीवी9 के नए क्राइम शो ‘चोर पुलिस मौसेरे भाई’ को बंद किया गया। अजित साही की अगुवाई में टीवी9 में जो नया क्राइम शो लांच किया गया, उसका नाम था ‘चोर पुलिस मौसेरे भाई।’ इस शो ने मुंबई पुलिस की पोल खोलकर रख दी। जर्मन बेकरी धमाके में जिस हिमायत बेग को मुंबई एटीएस ने गिरफ्तार किया, उसके पीछे एटीएस की दो दो थ्योरी की हकीकत चैनल ने बेनकाब कर दी। टीवी9 के रिपोर्टर विलास अठावले और अकेला ने मुंबई एटीएस की थ्योरी की धज्जियां उड़ा दीं। बौखलाई मुंबई पुलिस को मौका दिखा रवि प्रकाश के इंवेस्टमेंट रैकेट में कि आखिर रवि प्रकाश अपने चैनलों में जिन्हें विज्ञापन भी पर्याप्त नहीं मिलते हैं, आखिर पैसा कहां से लगा रहे हैं।

‘चोर पुलिस मौसेरे भाई’ के बाद मैनेजमेंट का अगले टार्गेट था रात 8.30 पर जाने वाला शो, ‘बिल्डर चार सौ बीस।’ इस शो में बड़े-बड़े बिल्डरों के रैकेट का भंडाफोड किया जाता था। हीरा नंदानी, दीवान बिल्डर्स, लोढ़ा जैसे बड़े बिल्डरों के खिलाफ स्टोरी की गई कि किस तरह से इन लोगों ने गरीबों  के घर छीने। फर्जी तरीके से जमीनें हथियाईं। ग्रीन जोन में घुस गए। मुंबई की समुद्री चौपाटी तक को नहीं छोड़ा। ‘बिल्डर चार सौ बीस’ का ये शो रातो-रात चर्चा का विषय बन गया। ये काम करने की कूवत किसी में नहीं थी। चैनल का नाम लोगों की जुबान पर था। मगर चैनल के मालिकों और इंवेस्टर्स की नींद हराम हो चुकी थी। दबाव पड़ने शुरू हुए कि कुछ बिल्डरों को बख्शा जाए। किस तरह से टीवी9 मैनेजमेंट ने घुटने टेके, इसका सबूत यह है कि जिस दिन अजित साही और उनकी टीम को बाहर का रास्ता दिखाया गया, उसी दिन से ही ‘बिल्डर चार सौ बीस’ का प्रोग्राम बंद कर दिया गया। यानी बिल्डरों के खिलाफ खबर बंद। रवि प्रकाश चाहते थे कि चैनल को स्टैबलिश करने के लिए शुरू में जमकर एंटी खबरें चलाई जाएं और स्टैबलिश होते ही सभी कुछ सेट कर लिया जाए। ये हो न सका और रवि प्रकाश का चैन छिनता गया।

इसी बीच लवासा का जिन्न सामने आया। खबर मिली कि पुणे के नजदीक में कई हजार करोड़ का लवासा ड्रीम सिटी का जो प्रोजक्ट तैयार हो रहा है, उसके लिए नियम कायदों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। पुणे की प्राकृतिक संपदा से खिलवाड़ किया गया। किसानों की जमीने हड़पी गईं। एक नदी की धारा को मोड़ा गया। जबरिया सरकारी क्लीयरेंस हासिल किया गया। लवासा से जुड़े हुए लोगों में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सूले शामिल थी। टीवी9 ने पूरे सात दिन इस गोरख-धंधे का खुलासा किया। इधर टीवी9 ये खुलासा कर रहा था, उधर देश के राष्ट्रीय समाचार चैनलों में लवासा के पक्ष में एड दिए जा रहे थे। मैनेजमेंट इस खबर को बर्दाश्त नहीं कर सका। दबाव पड़ने शुरू हुए कि एक बार फिर से टोन डाउन किया जाए। खबर टोन डाउन नहीं की गई, बल्कि उसके प्रोमो तक चलाए गए। रविप्रकाश इससे बेहद ही आहत हुए। ये तो फिर भी गनीमत थी।

अगली खबर ने तो रवि प्रकाश के दिमाग की सारी नसें सामने रख दीं। टीवी9 ने खबर दिखाई कि किस तरह से चिंटू शेख नाम के एक आदमी को नारायण राणे के बेटे नीतेश राणे ने गोली मारी। टीवी9 के पास चिंटू शेख का इकबालिया बयान था। उसका खून से लथपथ विजुअल था। ये खबर सिर्फ टीवी9 के ही पास थी। पूरे चार घंटे हम इस खबर पर बने रहे। आखिरकार नीतेश राणे के खिलाफ मुंबई पुलिस को 307 का मामला दर्ज करना पड़ा। महाराष्ट्र के एक कददावर मंत्री के बेटे के खिलाफ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज हो गया। इस बीच नारायण राणे के टीवी9 में करीब एक दर्जन फोन आए। खबर रूकवाने की खातिर। हैरानी की बात ये थी कि इधर राणे के फोन आ रहे थे, उधर रवि प्रकाश परेशान थे कि हम राणे का पक्ष नहीं चला रहे हैं। रवि प्रकाश ने यह भी सलाह दी की पहले इस मामले में पुलिस अपना इंवेस्टिगेशन पूरा कर ले उसके बाद हम पुलिस इंवेस्टिगेशन के आधार पर ही खबर दिखाएं। इस बार उनको निराशा हाथ लगी। ऐसा करने से संपादकों ने साफ मना कर दिया।

कोई भी कहानी सबूत मांगती है। इस कहानी का सबूत यह है कि जैसे ही अजित साही और उनकी टीम को बाहर का रास्ता दिखाया गया, अगले दिन की सुबह की पहली हेडलाइन थी कि नारायण राणे के बेटे नितेश राणे निर्दोष हैं। उनके कमरे में कोई गोली चली ही नहीं थी। ये वही टीवी9 कह रहा था जिसकी खबर के बाद राणे के बेटे के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। सवाल यह है कि जिस दिन अजित साही और उनकी टीम को बाहर का रास्ता दिखाया गया, उसी दिन चैनल की पूरी की पूरी एडिटोरियल लाइन क्यूं बदल दी गई। क्यूं सारे एंटी प्रोग्राम बंद कर दिए गए। नितेश राणे उसी दिन निर्दोष क्यूं हो गए। लवासा का प्रोमो उसी दिन क्यूं उतार दिया गया।

और तो और, ‘सच के सिपाही’ का प्रोग्राम भी बंद कर दिया गया। टीवी9 में आरटीआई डेस्क ने ‘सच के सिपाही’ का एक डेली शो शुरू किया था। इस शो में सच की लड़ाई लड़ने वाले एक्टिविस्ट, आम लोग सहित तमाम तबके से जुड़े लोगों की कहानी दिखाई जाती थी। टीवी9 मुंबई के ऑफिस में शायद ही ऐसा कोई आरटीआई एक्टिविस्ट होगा जो न आया होगा। बाकायदा टीवी9 में एक आरटीआई डेस्क बनाई गई थी। जिसका काम भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ आरटीआई का इस्तेमाल करके खबरें निकालना था। इस डेस्क ने एक से बढ़कर एक एक्सक्लूसिव खबरें दी। महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों से तमाम एक्टिवस्ट को अपने अभियान में शामिल किया।

जो काम कोई नहीं कर रहा था, वो काम भी करके दिखाया। ये प्रोग्राम भी उसी दिन बंद कर दिया गया, जिस दिन से अजित साही और उनकी टीम को विदा किया गया। साथ आरटीआई डेस्क के तहत चलने वाला पर्दाफाश भी बलि चढ़ गई। रविप्रकाश ने बिल्डर लाबी, पुलिस लाबी, नेता लाबी के आगे घुटने टेक दिए। वे अपनी कमाई के स्रोत के खुलने के डर से बेहद परेशान थे। सत्यम से जो उनका लिंक है, उसने भी उन्हें बेबस कर दिया। अफ्रीका और अमेरिका में भी उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में इंवेस्टमेंट किया है। उसके सोर्स के बारे में भी रवि प्रकाश ने एक रहस्यात्मक चुप्पी बनाकर रखी है। टीवी9 के किसी भी चैनल पर विज्ञापन बेहद ही कम हैं। फिर भी रवि प्रकाश की दुकान चल रही है। पैसे का सोर्स क्या है, रवि प्रकाश इस बात पर खामोश हो जाते हैं। ये खामोशी अपने आप में बहुत कुछ इशारा करती है। क्या सत्यम की काली कमाई टीवी9 के जरिए सफेद की जा रही है। क्या रविप्रकाश के इंवेस्टमेंट में कुछ ऐसा है जो एक दूसरे सत्यम की कहानी तैयार कर रहा है।

रवि प्रकाश के सच की कहानी आगे  भी जारी रहेगी….

आरटीआई एक्टिविस्ट अफरोज आलम साहिल टीवी9, मुंबई में बतौर स्पेशल करेस्पांडेंट कार्यरत थे. अजीत साही के साथ इस्तीफा देने वालों में साहिल भी हैं.

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Comments on “टीवी9 और रवि प्रकाश का सच (एक)

  • itne samajh k dar the.. to kya ukhadne aaye the… ye haal to tum logon k join hone se pahle bhi tha… tab tum logon ki imaandari kahan ghas chhilne gayi thi… aur ye janab jinhone ne aaj tak tv9 mein timpass karne k alawan kuchh nahin kiye… ye aaj itna bada programmes kaise likhna sikh gaye… ye wakai sochna hoga….

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  • आरटीआई एक्टिविस्ट अफरोज आलम साहिल आप तो काफी महान व्यक्ति निकले… लेकिन एक बात बताइये उस दिन कहां थे… जब प्रबंधन ने आपको लेटर दिया था, जब भी तो चैनल इसी हालत में था, कोई एड नहीं था… फिर आज अचानक आपका ईमान कहां से जाग गया.. तब भी पैसे वहीं से आते रहे होगे, जहां से आज आते है… रही बात आपकी तो आपने यहां तो कुछ उखाड़ा नहीं… लेकिन इतनी समझदारी आपके पास कहां से आई… वाकई ये गौर करने वाली बात है..

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  • @ ray

    aap jo bhii vyaktii ho…aapki jaankari se malum padta hai ki aap channel ko kaafi kareeb se jaante hai…tabhi to revenue ke details tatha afroz ji ke kaam ke details aapke paas maujud hai..aapke bhaashya se to aap androni gut ke sadasya maalum hote hai…ek salah de rahe hai, maan lijiye..

    ye jo yahan wahan taakane ka kaam aap kar rae hai na, is ke bajai agar channel ke content par dhyaan diya hota to ye naubat kabhii na aati channel par…thoda apne kaam par bhii dhyaan dijiye..dusron ne kya kiya/kya nahi kiya iska hisaab aap kyon kar rahe ho? kya isi baat ki salary deta hai tv9 aapko?

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  • well said afroz..one doesn’t need to be a rocket scientist to understand what was happening in tv9…all that you have posted here, even with an unbiased mind, appears true to me…journalism today is a sheer business…we do understand it..but did not expect a channel like [b]tv9[/b] that claimed to be against corruption and all sorts of mal-practices to be a pimp…looks like the biggies of the group have actually sold out their souls to the devil…
    god save tv9

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  • sahi farmaaya afroz bhai…

    tv9 ke haalat dekh chuke hai hum bhii…kis tarah se kuchh minutes me channel ka editorial content badal gaya, humne bhii dekha hai..badi mehnat se logon kii juban par tv9 ka naam laayaa tha…lekin ye jehen se haTate der nahi lagegi..

    sach ke sipahi, builder 420, chor-police mausere bhai aur na jaane kitne aur programmes aise the jinhone janataa ko ye dilaasaa dilaya thaa, ki janataa ki jang mein tv9 bhii shaamil hai..lekin sayaani janataa ab tak ye jaan gayii hogi, ki tv9 bhii 4 din kii chandani ban kar reh gaya…

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  • भाई आपने टीवी-9 के मालिक पर जो अंगुली उठाई है वो परेशानी मीडिया के सभी ऑगेनाइजेशन की है… मीडियाकर्मी भी इसमें शामिल हैं… ईमानदारी की बात मीडिया से बाहर के लोगों को बताने के लिए अच्छा है वरना अंदर के लोग जानते हैं कि कोई मीडिया ऑर्गेनाइजेशन कैसे चलता है और आजादी की बात करने वाले मीडियाकर्मी कैसे और कितने गुलाम होते हैं… अफरोज आपको ये हकीकत जानने की जरूरत है कि कहने को मीडिया एक समाजिक उत्पाद है और वो बीच-बीच में इसका निर्वाह भी करता है लेकिन असल में इसकी सच्चाई कुछ और ही है… दरअसल आज मीडिया एक विज्ञापन उत्पाद बन गया है और मार्केटींग डिपार्टमेंट तय करता है कि एडिटोरियल को कितना समय या जगह दी जाए… किस-किस कंपनी की काली करतूत की खबर नहीं दिखानी है,,क्योंकि वो कंपनी एड में मोटी रकम देती है… किस-किस कंपनी की झूठी खबर दिखानी है,, क्योंकि वो उस मीडिया हाउस को एड नहीं देती… यही पैमाना समाज के दबे कुचले तबकों पर भी लागू होती है,,, जो समाज सबसे पिछड़ा होता है मीडिया उसकी अनदेखी करता है और उसे खलनायक के तौर पर पेश करता है… बल्कि भारत में न्यायालय भी ग़रीबों को खलनायक के तौर पर देखता है… (सुप्रीम कोर्ट भी इससे अछूता नहूीं है…)… कहने का मतलब है कि समस्या बहुत गंभीर है…. लेकिन एक बात ध्यान रहे कि जब किसी ऑर्गनाइजेशन में काम कर रहे होते हैं तो उसकी कमी को बाहर लाने का प्रयास नहीं करते… इसपर आप भी गौर करें… वैसे इस विषय पर बात तो बहुत लंबी की जा सकती है लेकिन बस इसका ख्याल रहे कि कोई मीडिया हाउस उस समय बुरा नहीं हो जाए जब उससे अलविदा कह दिया हो… इससे बात कितनी ही दमदार क्यों न हो.. अपना असर खो जाती है…

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  • agreed with Ray. TV9 he kya almost har media house mein heavy investment ke jarorat hoto hai aur voh jahir hai idhar-udhar ke sources se ata hai. Isme koi naye baat nahi hai. Media ab mission nahi business hai, yeh simple se bat hamare kaye sathi kyun nahi samajh pate

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  • nitesh mishra says:

    अफरोज़ साहब एक कहावत है…की…
    कतरे भी बात करते हैं, समंदर की तरह
    लोग इमान बदलते हैं कलेंडर की तरह
    आपकी हालत कुछ इसी तरह की दिखाई दे रही है, टीवी-9 मे सब जानते हैं आप किसकी बदोलत स्पेशल करेस्पोडेंट बने थे, हैसियत से ज्यादा टीवी9 ने तुम्हे दिया, जब आपको नौकरी मिली तब आप क्यूं नहीं चिल्लाए की चैनल के पास रेवेन्यूं कहा से आता है, तब तो आप बहुत खुश दिखाई देते थे, ये बात भी शत प्रतिशत शत है जो शब्द आपने ने लिखे हैं वो आपके नहीं, बल्कि वो टीस किसी और की है…आप सिर्फ एक जरिया बने हैं, इतना तो हमें भी समझ आता है। रही बात टीवी-9 की वो ना तो आप जैसों का कभी मोहताज़ रहा था और ना रहेगा, पत्रकारिता के क्षेत्र में अभी तुमने कुछ नहीं देखा है, दूसरों की चटूकारिता करके नौकरी पाने वाले के मुंह से इस तरह की बातें शोभा नहीं देती…मेरे दोस्तों किसी पर उंगली उठाना बहुत आसान होता यही काम अफरोज़ आलम कर रहे हैं हालांकि उनका ये लिखा जरूर हैं लेकिन विचार किसी और के हैं…आपको एक राय दूंगा ध्यान आप इसपर दे रहे हैं उतना ध्यान नौकरी तलाशने में लगाइए, शायद कुछ भला हो जाए, ओह सॉरी ये क्या कह रहा हूं…आप ध्यान कैसे लग सकते हैं आप तो चटूकार हैं आप तो आपके लोगों को कहीं नौकरी मिले तो आप भी उद्धार हो….दुख की बात है जिसने कभी बूम भी नहीं पकड़ा वो टीवी-9 में स्पेशल करेस्पोडेंट बन कर आए थे…आप करेस्पोडेंट कैसे बने…कितने चैनलों में काम किया है, ये ज़रा बताइए..रहने दीजिए अफरोज़ साहब बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी…..और हां आपके लिए एक और कहावत…खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे……..शर्म करो अफरोज़ आलम और आपके लोग[b][/b]

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  • Tv9 became no 1 well before Mr. Sahi joined and it all happened under the leadership of Manoj Singh. What Mr Sahi did? All the concepts right from the concept of ‘RAAWAN’ to Shakha9 was brain child of Manoj Singh. All have seen his leadership and journalistic sense in his stories (Pakistan/Kashmir Reports) and deep understanding of TV in his great concepts.

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  • aap patrakar bandhu aapas mein ladiye mat,ravi prakash ka mumbai mein daav hi galat tha,aap kaise kuch din ek saath saari powerful lobbies se panga lekar chal sakte hain,trp badhai aur vapaas normal content dekhane lage,ise corporate mein market penetration policy kaha jata hai,in any case ravi prakash was riding a tiger,but he should not have spoilt the career of genuine journalist like ajit sahi,he resigned frm tahelka to join tv9,ravi prakash very well knew abourt ajit ji’s previous work background,kuch bhi ho nuksaan sirf genuine journalism ka hua hai,khoon janta ke vishwas ka hua hai,bhai log theek hi kehte hain..journalism is a business now,kyun koi apni jaan ya career ki bhent chhdhaye.LETS STOP THIS SHAM,CALL A PC AND DECLARE THAT WE TOO ARE PROFESSIONALS LIKE EVERYBODY ELSE,PAISE DO AUR KOI BHI KHABAR CHALWAO,PHIR CHAHE WO KOI BHI HO…LETS STOP THIS SHAM AND LETS CALL THE BLUFF OF SUCH CHANNEL OWNERS.

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  • ये एक दूसरे को गरियाने वाली आदत हम सब छोड़ें…और ये सोचें कि अगर नौकरी का डर वाकई नहीं हो….और कोई अच्छा…ईमानदार फाइनांसर मिले तो टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री की ताक़त क्या होगी….भैय्या बिना पैसा के घर नहीं चलेगा…और ना ही चैनल चलेगा…इसलिए समाज के हित में पहले उस पर सोचा जाय…सभी मिलकर सोचें…टीवी पत्रकारिता अगर रोटी-दाल की चिंता से मुक्त हो जाए…तो बात ही क्या…फिर कौन मुकाबला करेगा इसका। रही बात रविप्रकाश की..तो वो बहुत बड़े आदमी बन चुके हैं..पत्रकारिता की बात उनसे मत जोड़िए। टीवी-9 से निकलने के बाद ही सही…अगर अपना कोई भाई आंखों देखा सच बयान कर रहा है..तो उसे सुनो तो सही..कीचड़ उछालना अच्छा नहीं। टीवी 9 वाले भाईयों कुछ और बताओ…सच जानने का मन सभी को करता है…इससे खूबसूरत धोखे से बचने का रास्ता भी निकलता है।

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  • Shrimaanji !!! TV9 to Ajit Sahi ke aane ke kai mahinon pahele se hi no.1 channel ho chukka tha, wo bhi Manoj Singh ke netritva men jab channel re-launch hua tha. Sahi ne aakar to Laundiabaazi aur Politics shuru kar di.

    Saare concepts right from – Raawan, Kaatil Train, Shakha9, News Watch etc sab to Manoj Singh ne launch kiye they. Ajit ne to aakar sab kabada kia. Manoj Singh is an excellent journalist (Pakistan/Kashmir Reports) excellent leader – aur television ki her vidha men wo nipurn aur excellent hain. Unfortunately wo kursi ki race men interested hi nahi hote ….Warna in logon ki koi aukaat hai.

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  • Afroj Saheb Aapko shayad nahi malum nahi ki TV9 me jinhe Media ka M nahi malum usako Bade-bade post de diye gaye.Masalan usi team ke Reporter ne Mumbai ki Life line Local ko Maut ka karan batan shuru kiya .Jahir si baat hai jise Mumbai ka na to Etihas malum aur nahi bhoogol usase Bhala kya Umeed .Chhatani hone baad bhi TV9 Usi raftra me Jaari hai.Yaad rakhiye Organisation se bada kabhi bhi Aadami nahi nahi hoto .Tum nahi koi aur sahi koi aur nahi koi aur sahi.

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  • पहली बात तो ये कि इस खबर का जो स्रोत है वह खुद एक चैनल का निकाला हुआ मुलाजिम है इसलिए उसकी बात पर एकतरफा यकीन संभव नहीं है. दूसरी बात जब अजित साही को साढे चार लाख रुपए माहवार, मुंबई में फ्लैट, गाड़ी और टीवी ९ में स्टेक दिया गया तब उन्होंने कमाई का स्रोत जानने की जहमत क्यों नहीं उठाई. तीसरी बात यशवंत टीवी ९ के ध्वस्तीकरण के बाद जिस तरह से एकतरफा लेख अजित साही और उनकी चौकड़ी के पक्ष में छाप रहे हैं उससे लगता है कि वे अजित साही के पेरोल पर काम कर रहे हैं. साही की सारी खामिया दबाकर उन्हें महात्मा गांधी सिद्ध करने में लगे हुए हैं. इस घटना के पीछे आपने अजित और उनकी दिल्ली से बुलाई गई कोटरी की भूमिका जानने की कोशिश भी शायद नहीं की हो या फिर आपके हित इसकी अनुमति नहीं दे रहे होंगे. उन खबरों को सामने लाने में शायद आपकी कोई दिलचस्पी नहीं है जिसके मुताबिक ये लोग उन्हीं बिल्डरों को ब्लैकमल करके फ्लैट और पैसे हथियाने के प्रयास में लगे हुए थे, भगवान जाने इन्होंने हासिल भी कर लिया हो, भविष्य में पता चल ही जाएगा. हमेशा सिक्के के दो पहलू होते हैं. बड़ी सावधानी से भड़ास के माध्यम से शायद अजित ही सिक्के का सिर्फ एक पहलू वो भी आधा-अधूरा सामने रख रहे हैं. उम्मीद है भड़ास इस अनछुए पहलू को सामने लाने का कष्ट करेगा. संपादक और पत्रकार कोई पवित्र गऊ नहीं है जिसकी दुहाई देकर आज कसम खाई जा सके इसलिए संपादक और पत्रकारिता की दुहाई देना बंद करिए. ये प्रजाति भी उतनी ही पंकवत है जितनी मौजूदा बाजारी दौर के मनुष्यों की दूसरी प्रजातियां और साही उस कीचड़ से बिल्कुल भी बचे या अलग-थलग नहीं है बल्कि ये सिरे तक उसी में धंसे हुए हैं. पूरा ब्यौरा खंगालिए. लड़कीबाजी में भी इनका शायद ही कोई सानी हो…

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  • हमारे लिए यह बड़े शर्म की बात है कि हम सिर्फ अफरोज आलम साहिल के पक्ष-विपक्ष की ही बात कर रहे हैं। जो उनके विरोधी हैं, वो सिर्फ गरिया कर अपने मन को संतुष्ट कर रहे हैं और जो पक्ष के लोग हैं उन्हें बचाने में लगे हैं। लेकिन जो बातें उसने लिखी हैं, उसके तरफ किसी का भी ध्यान नहीं गया। आखिर टीवी9 ने ये सारे कार्यक्रम बंद क्यों कर दिए? जहां तक मुझे इन सारे कार्यक्रम का ताल्लूक मुंबई के आम लोगों से था। अफरोज को आज सारा मुंबई जानता है, औऱ उसकी बदौलत ही टीवी9 देश के सारे एक्टिविस्टों तक पहुंच पाई है। और जहां तक उखाड़ने की बात है, तो उसने इतना उखाड़ दिया है कि आप अपनी जिंदगी गुज़ार दे तब भी नहीं उखाड़ पाएंगे।

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  • bhuktbhogi of AJITSHAHI & GANG says:

    AANKDE BOLTE HAI—-Trp Mumbai- tv9- 1.98, starnews-0.89, aajtak-0.79, starmajha-0.78, ibnlok- 0.63, zee24-0.53, indiatv-0.53, ndtv-0.4, ibn-0.39, saharamum-0.23
    just for information – tv 9 was no 1 before SHAHI & GANG, WAS NO. 4 in GANESHOTSAV when that gang was active & now all time high TRP 1.98! atleast now stop barking!! WHAT ABOUT THOSE WHO WERE FORCEFULLY THROWN OUT DURING the detectorship of AJITSHAHI? NOw just 12-13 out but AJIT SAHI killed careers of more inocents!!

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  • irshad khan says:

    bohat achey afroj bhai aapne jo himmat dikhaai hai wo aghe bhi jaari reni chahiye aur kaash aapki wo baat puri ho ki media bhi rti ke daayre mein aani chahiye jab suprem court bhi rti ke dayre mein hae to sanvidaanh ka chotha stambh (fourth pillor ) kyun nahi…. aap kamaan sambhaliye raaste khud b khud bante chale jaaenge ……..

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  • Faiz gorakhpuri says:

    [b][/b]Afroz sb. ye sab band karye aur jaldi se job vob dhundo warna khane penay kay wandee ho jayenge………

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  • लेखक ने जो बातें इस लेख में लिखी है, अगर वो सच है तो फिर ये बहुत गंभीर और चिंता का विषय है। हमें इसके जांच के लिए ये देखना चाहिए कि क्या ये सारे कार्यक्रम, जिसका लेखक ने वर्णन किया है, बंद कर दिए गए हैं या नहीं। अगर बंद कर दिए गए हैं तो फिर हमें लेखक पर यकीन कर लेना चाहिए, अन्यथा इन्हें गाली देने में ही भलाई है। मैं मुंबई के पत्रकारों से विनती करूंगा कि इस बात की जांच करके लोगों के सामने सच को लाए। भड़ास इन सच्चाईयों को छुपाए नहीं। हमें इस बात पर भी सोचना चाहिए कि हम यानी मीडिया सारी दुनिया के भ्रष्टाचार को सामने लाने का काम करते हैं, पर मिडिया के हकीकतों को हर बार दबा देते हैं। जबकि जबसे ज्यादा करप्शन यहीं हैं। वैसे लेखक अफरोज़ आलम साहिल के हिम्मत की दाद देनी चाहिए।

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  • afroz bhai. aap to chha gaye is lekh ko likh kar. tv9 chodne ke baad media scan ke sampadak bhi ban gaye. iske liye badhaiiiiiiii. hamein job-wob de dijie apne magazine mein.

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  • अफरोज भाई की जय हो… अगर मेरे बस में होता तो आपके इस काम के लिेए अवार्ड देता। खैर भड़ास के पाठक आपके इस काम पर अवार्ड देने की सोच ही सकते हैं।

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  • Afroz Alam Sb Aap ne jis samasya ka zikr apne lekh me kya hai yeh na sirf Tv9 ki kaha ni hai balki yeh to “[b] Har Channel ki Kahani Hai”[/b] yeh atyant gambhir vishay hai woh media jiska kam Samaj Nirmad ka tha ab Kale dhan ko safed banane ka nayab zariya ban gaya hai , agar ek lain me kahen to Hammam me sabhi nange hain.
    Samaj aur desh ke samne bada gambhir sawal hai ki halat me sudhar kaise ho .

    Afsos ki baat hai Kuch sammanit pathkon ne lekh ka mazaq udaya hai . mere khyal me yeh lekh Media ki asal haqeeqat bayan karta hai, yeh ek perkar se sting opration hai.

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