टीवी9 क्यों साथ न रख पाया अजीत साही को?

: अचानक क्यों निकाल दिए गए 50 जर्नलिस्ट? : टीवी9 एक ऐसी कहानी बन गया है जो इस बाजार में ढेर सारे तरह तरह के निवेशों से तुरत फुरत आकर नंबर वन बनने की लालसा का शिकार हुआ और इसी के पलट उसने अच्छे जर्नलिस्टों को जोड़ने व जनपक्षधर पत्रकारिता करने का ढिंढोरा पीटा. लेकिन पानी का यह बुलबुला फूट चुका है. टीवी9 का असली चेहरा सामने आ चुका है, सत्यम कंप्यूटर वाले महाघोटालेबाज राजूलिंगम की तरह. केंद्रीय मंत्री शरद पवार, महाराष्ट्र की राजनीति के दबंग नेता नारायण राणे और खूंखार मुंबई पुलिस के खिलाफ टीवी9 पर लगातार चल रही  पोलखोल खबरों से किस तरह टीवी9 मैनेजमेंट के पसीने छूट गए….

तब टीवी9 मैनेजमेंट ने निर्देश के बावजूद खबरें न रोके जाते देख किस तरह इस तेवरदार टीम को आनन-फानन में किनारे करने का फैसला कर लिया…. जिन दागदारों  के खिलाफ खबरें दिखाई जा रही थीं, उनसे किस तरह समझौता कर लिया…. ये सारी जानकारियां बहुत जल्द भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित की जाएंगी. आधुनिक पत्रकारिता का भयावह रूप देखने के लिए टीवी9 के मुंबई आफिस में हुए घटनाक्रम को देखना सबसे सही होगा, जिससे पता चलता है कि पत्रकारिता अब पेजथ्री फिल्म से कहीं आगे जाकर सिर्फ और सिर्फ ढकोसला, हिप्पोक्रेसी, विशुद्ध सांठगांठ और भयावह पूंजी का खेल बन चुकी है. इंतजार करिए. लंबी कहानी की ऋंखला प्रकाशित की जाएगी भड़ास4मीडिया पर. अगर आप भी टीवी9 से जुड़े हैं या निकाले गए लोगों में से एक हैं, तो अंदर की सारी कहानी लिख भेजिए bhadas4media@gmail.com पर. अगर टीवी9 की सूचनाएं भेजने वाले अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध करते हैं तो उनके अनुरोध को स्वीकार किया जाएगा. ऐसा इसलिए कि भड़ास4मीडिया के पास पूरी कहानी, सारी सूचनाएं, संपूर्ण घटनाक्रम मौजूद है. लेकिन कोशिश ये है कि तथ्यों को आखिरी दम तक सत्यापित कर लिया जाए. इसी कारण हम कुछ वक्त ले रहे हैं. थोड़ा इंतजार कर रहे हैं.

चाहेंगे कि टीवी9 से बिना किसी वजह हटाई गई लंबी-चौड़ी टीम के किसी सदस्य का जमीर जग जाए, उसकी आत्मा उसको धिक्कारने लगे, वह हर हाल में बोलने के लिए तय कर ले. और, उसकी बातों के साथ भड़ास4मीडिया द्वारा इकट्ठा की गईं जानकारियों को पेश किया जाए. टीवी9 की असली कहानी सामने आएगी, हर हाल में सबके सामने आएगी, पूरे तथ्यों व संपूर्ण बयानों-प्रमाणों के साथ आएगी. बस एक छोटा-सा इंतजार. बस कुछ साथियों के रिस्पांस का इंतजार. याद रखिए, आपकी लड़ाई लड़ने कोई और नहीं आएगा. खुद आपको लड़ना होगा. खुद आपको बोलना होगा. वरना समय किसी को कहीं का नहीं छोड़ेगा. देश-दुनिया की बड़ी-बड़ी खबरें करने का दावा करने वाले कनिष्ठ, वरिष्ठ और पुरोधा, जब अपनी बात आती है, जब खुद की पारी आती है तो किस तरह पूंछ अपने मुंह के आसपास लाकर सिकोड़ लेते हैं, यह दुनिया जानने लगेगी. और यह बेहद शर्मनाक होगा. उम्मीद करते हैं कि कोई न कोई तो जरूर सामने आएगा. टीवी9 से निकाली गई टीम के सदस्यों का आह्वान है कि कुछ एक तो सामने आओ, अपनी बात अपनी जुबान से या अपनी पहचान छिपाकर दुनिया के सामने लाओ. भड़ास4मीडिया तैयार है पीड़ितों के साथ चलने के लिए, एक निर्णायक जंग लड़ने के लिए.

Comments on “टीवी9 क्यों साथ न रख पाया अजीत साही को?

  • भैया अब तो पत्रकारिता को डबलरोटी कंपनी की नौकरी मानकर चलो। चाहे डबलरोटी बेचौ चाहे पत्रकार होय जाओ। वैसे अब तो अफसोस होता है इस पेशे से जुड़कर। इमानदारी करो तो बाहर तो लोग चीरने के लिए तैयार है हीं भीतर भी दलाल खुराफात शुरू कर देते हैं।

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  • yaswant ji………..apne cneb wali khabar kyu hatai………bahut dukh hua yeh jankar ke apne khar hata lee hai…….letter wali khabar

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  • मैं ना तो टीवी9 का पैरोकार हूं और ना ही मैने अपनी पत्रकारिता को गिरवी रखा है. लेकिन जिन महानुभाव ने यह लेख लिखा है मैं उनसे सवाल पूछना चाहता हूं, क्या टीवी9 में नौकरी मिलने पर खुशी जाहिर की गई थी.क्या मेंनेजमेंट को कोई धन्यवाद पत्र दिया गया था. अगर नहीं दिया तो अब निकाले जाने पर स्यापा क्यों किया जा रहा है. मैं भी मानता हूं कि निकाले गए कई लोग वाकई सुलझे हुए पत्रकार थे. उनका निकाला जाना मुझे भी बुरा लगा था. लेकिन रखना और निकाला जाना हर चैनल में होता है. टीवी9 की बखिया उधेड़ने की बात करते हैं इसमें इतनी बुराई थी तो जांबाज़ पत्रकारों ने यहां ज्वाइन क्यों किया.उस वक्त आपकी जानकारी और ज्ञान क्या घास चरने गए थे. या निकाले जाने के बाद आपको इसमें कमियां दिखीं. हम ये क्यों भूल जाते हैं कि समाज सेवा के साथ यह पेशा हमारे घर का चूल्हा भी जलाता है. और अगर हम नौकरी कर रहे हैं तो मालिक को मालिक क्यों नहीं समझते. नियुक्ति से पहले हमें हर शर्त मंजूर होती है,लेकिन बाद में हम खुद को मालिक समझने लगते हैं. और मालिक को नौकर, अब ये बात तो समझ में आ ही जानी चाहिए कि नौकरी को नौकरी की तरह करना चाहिए. मैं ऐसे कई पत्रकारों को जानता हूं जिन्होंने अपनी हरकतों से कई अखबारों को बंद करा दिया.और बाद में जब घर में चूहे कलाबाजी खाने लगे तो नौकरी के लिए भटकते देखे गए. आज गिनती के पत्रकार होंगे जो पत्रकारिता के मापदंडों पर खरे उतरते हैं. वरना ज्यादातर को गिफ्ट का साइज नापते ही देखा है. मैने तो इस पेशे में अधिकतर को नाम का पत्रकार देखा है. सही और सच्ची खबर देखे अरसा हो गया. शायद अब पत्रकार बिरादरी को बड़ी तनख्वाहें और ऊंचे पद दिखने लगे हैं.सच्ची खबर नहीं. एक सवाल का जवाब चाहूंगा क्या पुलिस , और सरकारी विभागों में ही भ्रष्टाचार होता है. चिराग तले अंधेरा की तर्ज पर सबकों दूसरों की कमी दिखती है अपनी काली दाल नहीं दिखती. मेरी सलाह है कि कभी सकारात्मक पत्रकारिता का दामन थाम कर देखो आपको किसी से शिकायत नहीं रहेगी.यकीन नहीं हो तो आजमा लो. और निकाले जाने पर बदनामी करने पर लोग ये ना कहें कि यह बिरादरी ही ऐसी है,जिस थाली में खाती है उसी में छेद करती है. और सीधी सी बात है. अगर हम सच्चे पत्रकार हैं और समाज को बदलने की ख्वाहिश है तो फिर हमें कोई नौकरी पर नहीं रखेगा. क्योंकि चैनल व्यवसायी खोलते हैं पैसा कमाने के लिए, शुद्ध समाजसेवा के लिए नहीं. और ऐसे में सच्चे पत्रकार के लिए वही पुराना सा बैग और चार पेज का अखबार होता है. जो बिना विज्ञापन और कागज के कोटे के कुछ दिनों में ठंडा हो जाता है. मेरी तो सलाह है कि चैनल में नौकरी समझ कर काम करें और ऊपर वाले का शुक्रिया भी करते रहें कि हमें ऐसे पेशे में डाला जिसके जरिए हम आम आदमी की मदद कर सकते हैं. वरना भई सेठों को पिताजी नहीं लायक बेटे अच्छे लगते हैं.

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  • मौसम के साथ बदलना अच्छा है, लेकिन मौसम के खिलाफ जाना.. समझदारी नहीं.. फिर आप तो काफी सुलझे हुए पत्रकार है, और हां.. आपको ये पता होना चाहिए की सच्चाई सामने आती नहीं लाई जाती है… फिर आप क्यूं बेवजह इंतजार में हैं… आगे राह तलाशिए…

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  • YASHWANT JI DARASAL TV9 KO CHAHIYE YEK BADHIYA TEAM LEADER, JO BALANCE KARKE CHANNEL KO CHALAYE…SUNA HAI KI TV9 HINDI STATES ME PAKAD BANANE KI KOSHISH ME HAI..NISANDEH YE KAAM TV9 JAROOR KAREGA…TV9 KA ITIHAAS ACHHA RAHA HAI…BUS YEK BADHIYA HINDI KA TV LEADER MIL JAYE CHANNEL KO TO WO SABKO PACHHAD DEGA…GOOD WISHES FOR TV9

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  • Sanjay Media consultant says:

    Khisiyani billi Khambha Noche. Bhaiya ye log londiyabazi ke chakkar me nikale gaye hain. Inhe to kahin ja kar apna mih chupana chahiye. Ye to wahi baat hui CHori aur sinajori.

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  • SUJIT THAMKE says:

    TV-9 MUZE CHANNEL HEAD KARKE RAKHE AUR YE CHANNEL TV-9 MARATHI KARE AUR ACCHE MARATHI JOURNALIST LEKE DEKHE,THIK SE NEWS PLANNING BANAAYE…..HAR REGION ME EK BUREAU RAKHE JAISE NAGPUR,NASHIK,RATNAAGIRI,AURANGABAD,AKOLA AUR HAR DISTRICT AUR TAHASILO ME REPORTER RAKHE PHIR DEKHO TV-9 BAAKI MARATHI CHANNELS KO KAISE PATAKHNI DETAA HAI.ASAL ME HINDI DEKHNE VAALA VIEWERS MAHARASHTRA ME HAI KAHA.AUR JISKO HINDI DEKHNA HAI VO TV-9 MUMBAI Q DEKHEGA VO AAJ TAK,NDTV,STAR NEWS,ZEE NEWS,IBN-7 AUR BAAKI HINDI CHANNELS DEKHENGA.EISLIYE TV-9 MANAGEMENT MUZE 2 YEARS KE LIYE HEAD BANAA DE PHIR DEKHO KAISAA REVENUE AUR TRP KAISA BANAATA HAI.

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  • rignal chanal walo ne to riporter ko basuli adhikari bana diya hai…
    rooj niklo ghar se khabar mile ya na mile pr vigyapan or payment lekar jarur lana…
    khabar ho to thik warna khabardar karke wasuli to kr hi lana ye unko upar walo ne adhikar de rakha ha….
    such hi kaha jb sainya bhaye kotwal to dar kahe ka…..

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