उपेंद्र राय बने राष्ट्रीय सहारा के प्रिंटर-पब्लिशर

प्रिंटलाइन में प्रिंटर-पब्लिशर के रूप में स्वतंत्र मिश्र का नाम हटाकर उन्हें समूह संपादक (वेब पोर्टल) के रूप में दर्ज किया गया : लखनऊ यूनिट में रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र की केबिनों में मनोज तोमर और अमर सिंह को बिठाया गया : गज़ब का मीडिया घराना है सहारा. यहां कब क्या हो जाए, कोई नहीं ठिकाना. आज का ‘राष्ट्रीय सहारा’ अखबार उठाकर प्रिंट लाइन देखिए. संपादकीय पेज पर हर रोज प्रकाशित होने वाले प्रिंटलाइन में आमूल-चूल बदलाव दिख जाएगा. प्रिंटर और पब्लिशर के रूप में कई वर्षों से जाने वाला स्वतंत्र मिश्रा का नाम हटा दिया गया है. उनका स्थान ले लिया है उपेंद्र राय ने जो अभी हाल-फिलहाल स्टार न्यूज से ग्रुप न्यूज डायरेक्टर के पद पर सहारा में लौटे हैं. स्वतंत्र मिश्रा को समूह संपादक (वेब पोर्टल) बनाकर प्रिंट लाइन में रणविजय सिंह के बाद स्थान दिया गया है. दिल्ली में राष्ट्रीय सहारा की प्रिंट लाइन में प्रबंध संपादक जयव्रत राय के नाम के बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशांतो राय हैं. फिर एडिटर इन चीफ के रूप में संजीव श्रीवास्तव विराजमान हैं. इनके बाद समूह संपादक रणविजय सिंह का नाम है. फिर समूह संपादक वेब पोर्टल स्वतंत्र मिश्र का नाम प्रिंट किया गया है. इसके बाद स्थानीय संपादक के रूप में खबरों के चयन के लिए जिम्मेदार विनोद रतूड़ी का नाम स्टार लगाकर दिया गया है. प्रिंटलाइन में सिर्फ संपादक श्रेणी में पांच पद और पांच नाम विराजमान हैं.

इस फेरबदल के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय को लाने के बाद प्रबंधन ने अपने पुराने दोनों धुरंधरों रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र को किनारे करने का अभियान, जिसे शुरू तो पहले ही किया जा चुका है, अब और तेज कर दिया है. प्रिंट लाइन में बदलाव इसी का हिस्सा है. कल राष्ट्रीय सहारा के लखनऊ आफिस में इन दोनों महानुभावों के केबिनों में अमर सिंह और मनोज तोमर को बिठाकर इन्हें स्पष्ट संकेत दे दिए गए.

दरअसल, रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र एक जमाने में लखनऊ में ही हुआ करते थे. एक स्थानीय संपादक तो दूसरा यूनिट हेड. इन दोनों की किस्मत लगातार इनका साथ देती रही. ये लखनऊ से उड़कर दिल्ली आ गए. दिल्ली में एक समूह संपादक बन गया तो दूसरा पूरे ग्रुप के एडमिन, सेल्स व मार्केटिंग का हेड. इनके उत्कट प्रभाव के वशीभूत होने के कारण किसी भी शख्स ने लखनऊ में इनके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाली केबिनों में पैर रखने की जुर्रत नहीं की. दोनों केबिन इन श्रीमानों के नाम पर खाली पड़े रहे. कल रणविजय सिंह वाली केबिन में राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के स्थानीय संपादक मनोज तोमर और स्वतंत्र मिश्र वाली केबिन में राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के नए यूनिट हेड अमर सिंह को बिठा दिया गया. कल शाम को हुए इस घटनाक्रम का लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया. रात में प्रिंट लाइन में बदलाव के आदेश राष्ट्रीय सहारा की प्रत्येक यूनिट में पहुंच गए.

कई लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि स्वतंत्र मिश्र समूह संपादक वेब पोर्टल के रूप में क्या काम देखेंगे? अगर वे वेब पोर्टल का काम देखेंगे भी तो क्या इतना जरूरी था उनका नाम प्रिंट लाइन में दिया जाना? सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन पुराने लोगों को एकदम से नाराज नहीं करना चाहता. किसी भी तरह के विद्रोह-बवाल से बचना चाहता है. मार्केट में दिखाना चाहता है कि वह सभी को साथ लेकर चलने में यकीन रखता है. इसी रणनीति के तहत स्वतंत्र मिश्रा का नाम एकदम से गायब करने की जगह किसी भी रूप में प्रिंटलाइन में रखने के बारे में विचार किया गया और ऐसा पद दे दिया गया है जिसे कोई भी पचा नहीं पा रहा है. पर इससे इतना संकेत तो स्पष्ट है कि पुराने धुरंधरों, सावधान हो जाओ, नए साहब आ गए हैं, इन्हें सलाम किया करो.

Comments on “उपेंद्र राय बने राष्ट्रीय सहारा के प्रिंटर-पब्लिशर

  • gat dino ki khabro se esa lagta hai ki sahara media ab professional media ki ore kadam badaha rha hai ,mjhe yaad hai iss sansthan ke woh din ki jab rashtriya sahara akhbar ki shuruwat 16-feb-1992 ko lucknow mein hui thi toh aisa lagta tha ki
    yeh kis uddeshya ko lekar shuru kiya gaya tha usme manniye sahara sri ke rachnatmak aandolan ki abhiwaikti dikhai deti thi yah ek nae tareeke ka akhbar ,akhbar jagat mein aaya tha jisne matra 100 din ke ander hi apne pathko mein ek nayi pehchan banai thi ,parantu samay ke sath sab kuch badalta gaya manniye sahara sri ki ati vyastta ke karad unka dhyan iss ore dheere-2 kun hua jisse iss meida house mein kaam kar rhe anubhavi ewam karmath log bhi dheere-2 alag hota gaye kuch chand logo ne iss akhbar ko apne dhang se chalaya jisse dhere-2 akhbar ki pathak sankhya niranter kum hoti gayi mjhe yeh janker bahut khushi ho rhi hai ki iss akhabar ko professional dhang se chale jane ka jo nirnaye manniye sahara sri ne liya hai woh bahut hi sunder unki soch ko darshata hai ,aisa mai isliye samajh sakta hu ki iss pariwar ke abhiwawak ke hi pariwar mein maine apne jeevan ke 14 saal 11 mahine 23 din bitaye hai unn guzre palo ko yad karte hue mjhe aaj bhi manniye sahara sri ke nirdesho ke anurrop hi jeevan jeene ki prerna milti hai ….aur mai ishwar se kamna karta hu ki sri sanjeev srivastava ji aur sri upendra rai ji apne uddesho mein safal ho
    dhanyawad
    gaya dutt tripathi”VISHAL”
    mob:-9839021608

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  • saurabh srivastava says:

    sir,
    It has been observed that noe a days the ethics ans values on which the empire of SAHARA SHREE has been built for the years ha sbeen putted aside. Now new HIGHER MANAGMENT IS TOTALLY IGNORING THE ORIGINALLY SAHARA SHRRE “S DIRECTION TO THEIR PROFITS AT THE TABLE OF RASHTRIAYA SAHARA ,LUCKNOW PLATEFORM.

    RECENTLY A SENIOR EXECUTIVE Mr. SHYAM BIHARI GUPTA , WHO IS HOLDING THE CHIAGEOF MARKETING HEAD IN RASHTRIAYA SAHARA ,LUCKNOW HA SBEEN FOUND GUILTY FOR ABUSING THE HON”BLE SAHARA SHREE ON 01/01/10 IN FRONT OF THEIR COLLEGUES IN OFFICE. AFTERTHE COMPLAINT TO THE SENORS LIKEMR.SWANTANTRA MISRA JI AND UNIT HEAD sHRI ANOOP SETH , A HIGH LEVEL ENQUIRY HAS BEEN SET BY NOIDA OFFICIALS ON 06//01/10 HAS BEN SENT TO LKO. Mr. LOKESH AND Mr. T.B. SRIVASTAVA WERE THE ENQUIRY OFFICERS. ALL THE COMPINENTS AROUND IN EIGHT IN NUMBERS HA SGIVEN THEIR VERSIONS IN WRITTEN TO THE ENQUIRY PANEL.

    BUT SURPRISGLY ON 23/02/10 THE NEW HIGHER MANAGMENT HA S ORDED TO GIVE MORE POWERS TO SHYAM BIHARI GUPTA AS MARKETING HEAD IN RASHTRIAY SAHARA ,LUCKNOW .IT SEEMS THAT THE SAHARA GROUP IS LOSING THE CHARM AND FATHERLY FIGURE OF SAHARA SHREE . NEW MANAGMENT HA S NO MORAL VALUES FOR SAHARA . INYESTERDAYS NOBODY WILL BE SPARED IN THE CHARGE OF BLAMING THE ORGANISATION BUT IT IS VERY VERY SURPRISGLY THAT A PERSON AFTER ABUSING the SAHARA SHREE IS ENJOYING THE JOB AND MENTALY HARSSING THE COOLEGUES FOR DOING THE ABOVE COMPLAINT.

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  • उपेंद्र राय को सहारा समाचार पत्र के प्रिंटर एवं पब्लिशर की भी जिम्‍मेदारी मिलने पर दिल से बधाई। हमेशा प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ते रहो, यही शुभकामना।

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  • saurabh shrivastava chamcha hai swatantra mishra ka. kyonki sabko pata hai ki shyambihari ko swatantra mishra ne hi sajish kar ke fansaya tha. jaise anil bhaskar ko fansaya tha. swatantra mishra aur ranvijaya ke khoon men sajish bhara pada hai. ye donon apas men ek hain aur sajish men expert. ab naye prabandhan ko pata chal gaya hai in donon ki kutiltawon ke bare men. to shyambihari wapas aa gaye. samjhe baccha saurabh. swatantr mishra ke champu, chamche kahin ke.

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  • क्या होगा कोई नही जानता क्योकि कोई जानना नही चाहता. सच है की अब क्रेटिविटी नही रह गयी किसी में. सब अपने घमंड में चूर है. क्या नए आये लोग क्या पुराने धुरंधर?

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  • vijay saini says:

    उपेंद्र राय को सहारा समाचार पत्र के प्रिंटर एवं पब्लिशर की भी जिम्‍मेदारी मिलने पर दिल से बधाई।

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  • उपेंद्र राय को सहारा समाचार पत्र के प्रिंटर एवं पब्लिशर की भी जिम्‍मेदारी मिलने पर दिल से बधाई।

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