सुब्रत राय सहारा, आपके मीडियाकर्मियों को भी फोर्स की जरूरत है

सुब्रत राय बड़ा दाव खेलना जानते हैं. वे छोटे मोटे दाव नही लगाते. इसी कारण उन्हें अपने छोटे-मोटे तनख्वाह पाने वाले मीडियाकर्मी याद नहीं रहते. और जिन पर इन मीडियाकर्मियों को याद रखने का दायित्व है, उन स्वतंत्र मिश्रा जैसे लोगों के पास फुर्सत नहीं है कि वे अपनी साजिशों-तिकड़मों से टाइम निकालकर आम सहाराकर्मियों का भला करने के बारे में सोच सकें. इसी कारण मारे जाते हैं बेचारे आम कर्मी.

इसी का नतीजा है कि इस दीवाली पर सहारा के मीडियाकर्मियों को सिर्फ 3500 रुपये का बोनस देने का निर्णय लिया गया है. इतना कम बोनस तो राज्य सरकार के चतुर्थ ग्रेड कर्मियों को भी नहीं मिलता. सहारा में साल भर से न कोई प्रमोशन मिला है और न ही इनक्रीमेंट. प्रमोशन-इनक्रीमेंट के लालीपाप देने के कई बार कई लोगों ने वादे किए पर अमल किसी ने नहीं किया. सहारा के पास अपने इंप्लाइज को देने के लिए पैसे नहीं होते, लेकिन जब खेलकूद की बात आती है तो इनके पास अथाह पैसा जाने कहां से आ जाता है. ताजी सूचना आप सभी ने पढ़ी होगी कि सहारा इंडिया परिवार ने विजय माल्या के स्वामित्व वाली फॉर्मूला-वन टीम में 42.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है.

इस खरीद के लिए सहारा इंडिया परिवार ने 10 करोड़ डालर का निवेश किया है. इसके बाद फोर्स इंडिया का नाम बदलकर सहारा फोर्स इंडिया कर दिया गया है. देश में खेलों के सबसे बड़े प्रमोटर और संरक्षक के रूप में सहारा इंडिया का नाम लिया जाता है. पर जब बात सहारा मीडिया की आती है तो प्रबंधन के पास पैसा नहीं होता. सहारा के लोग कई तरह की परेशानियों में जी रहे हैं. पीएफ से लेकर हेल्थ तक के मसले पर सहारा के कर्मी खुद को ठगा हुए महसूस करते रहते हैं. पर उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती क्योंकि सहारा में प्रबंधन के खिलाफ मुंह खोलने का मतलब होता है नौकरी से हाथ धोना.

उपेंद्र राय और स्वतंत्र मिश्रा के बीच की रार में आम सहाराकर्मी खुद को पिसा हुआ पा रहा है. जो लोग कथित रूप से उपेंद्र राय के खास थे, वे अब किनारे लगाए जा चुके हैं और जो लोग स्वतंत्र मिश्रा के करीबी माने जाते थे उन्हें फिर से बड़े पदों व बड़े दायित्वों से नवाजा जा रहा है. देखना है कि इन सब तिकड़मों-चालबाजियों के बीच सहारा प्रबंधन अपने कर्मियों पर धनबौछार करना याद रखता है या फिर 3500 रुपये की छोटी रकम देकर ही अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लेता है.

सहारा में कार्यरत एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर इस पत्र के मजमून पर किसी को आपत्ति हो तो वह  अपना विरोध नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए दर्ज करा सकता है या फिर bhadas4media@gmail.com के जरिए भड़ास संचालकों तक पहुंचा सकता है.

सीबीआई को उपेंद्र राय के खिलाफ नहीं मिला कोई साक्ष्य!

सहारा समूह में फिलहाल बनवास झेल रहे उपेंद्र राय के लिए खुशखबरी है. सीबीआई को अभी तक जो प्रमाण-साक्ष्य मिले हैं, उससे उपेंद्र राय पर कोई मामला नहीं बनता है. 2जी मामले और ईडी के अफसरों को धमकाने-रिश्वत देने की कोशिश करने के प्रकरण में सीबीआई ने पिछले दिनों अपना जवाब सुप्रीमकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश किया. इसमें कहा गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संबंधित सभी से पूछताछ की.

सीबीआई ने सबके बयान दर्ज किए और अपनी तरफ से प्रमाण जुटाने की कोशिश की लेकिन उपेंद्र राय पर कोई आरोप अभी तक साबित नहीं हो सका है. वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने सीबीआई की तरफ से कहा है कि हम लोग अब भी कुछ रिपोर्टों का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन अभी तक जो साक्ष्य मिले हैं, वे आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

इस बीच, एक नए घटनाक्रम में पता चला है कि उपेंद्र राय के साथ सहारा के जिस पत्रकार सुबोध जैन का नाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अफसर राजकेश्वर सिंह को धमकाने में आया, उस सुबोध जैन ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच को एक अप्लीकेशन देकर सीबीआई की तरफ से गवाह बनने की इच्छा जाहिर की है. सुबोध जैन ने यह कदम तब उठाया जब सहारा समय चैनल से उन्हें इस घटनाक्रम के बाद निकाल दिया गया. खंडपीठ ने जैन से कहा कि वे अपनी अपील के संदर्भ में सीबीआई को एप्रोच करें. इस पूरे प्रकरण के बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई ने जो खबर जाहिर की है वह इस प्रकार है-

Radia, others examined against Sahara allegation

Corporate lobbyist Niira Radia and some top officials of TV channels have been examined by the CBI in its investigations into the allegation against Sahara Group chief Subrata Roy and two scribes that they had interfered with the probe in the 2G spectrum case, the Supreme Court was told today.

However, the CBI said that it was yet to lay hands on the telephonic conversations between those TV journalists and investigators from Enforcement Directorate who were allegedly approached in connection with the probe of 2G case.

The statement was made by senior advocate KK Venugopal, who read out the findings of investigation by the CBI which filed its report in a sealed cover.

A Bench of justices GS Singhvi and A K Ganguly was also informed that CBI was probing the allegations from all angles and was looking for independent witnesses and documents.

“Niira Radia has been examined,” Venugopal said adding that they were examined more than once as there were some contradictions in their statement.

The court on May 6 had said there was a prima facie case against Roy and two journalists– Upendra Rai and Subodh Jain — of Sahara India News Network for interfering with the 2G probe and had issued notices for contempt.

The notices were issued on the petition filed by ED’s Assistant Director Rajeshwar Singh, who is the investigating officer in the 2G spectrum case.

Venugopal said CBI has also examined Singh, his elder brother Rameshwar Singh, an Indian Revenue Service officer of 1988 batch. Sharat Chaudhary, Assistant Director in the ED, has also been questioned twice by the agency, he said.

Upendra Rai and Subodh Jain have also been examined by the CBI, Venugopal said adding that Sudhir Chaudhary, CEO of TV channel Live India has also recorded his statement.

“Upender Rai denied having offered bribe to anyone, either to Sharat Chaudhary or Rajeshwar Singh,” the senior advocate said.

“We are still awaiting some reports. Evidence found till now is insufficient,” Venugopal said on behalf of the CBI, which was granted a month’s time to complete the probe on the issue.

The bench took on record the counter affidavit filed by Roy and two journalists and asked the ED to respond within two days so that rejoinders could be filed and listed the matter for August 4.

Jain brought to the notice of the bench that after the incident he has been sacked by the channel and wished to become witness for the CBI.

The bench said he could approach the CBI in this regard.

The bench had on May 6 suo motu issued contempt notices and taken serious note of the fact that after summons were issued to the CMD of Sahara group under the Prevention of Money Laundering Act, from February 2 onwards, “crude methods” were adopted to terrorise, intimidate and blackmail ED’s Assistant Director Rajeshwar Singh, who is the investigating officer in the 2G spectrum case.

The bench had also banned Sahara India News Network and its sister concerns from publishing and broadcasting any story or programme relating to Singh.

The court was anguished that after summons were issued asking Roy to appear before the ED with documents relating to some transactions regarding Chennai-based S-Tel which has come under the CBI scanner, Rai and Jain became active and tried to interfere with the investigation.

Singh, who filed the petition in his personal capacity, claimed that Jain sent him 25 questions relating to him and his families assets, contacts and others and threatened to start a campaign against him by publishing and broadcasting a series of stories. pti

सहारा ने अपनी ही खबर का खंडन क्यों छापा? शिवराज ने गद्दार सिंधिया को क्यों बचाया??

आज दो अखबारों में दो ध्यान देने वाली खबरें छपी हैं. राष्ट्रीय सहारा में प्रथम पेज पर जोरदार खंडन व खबर है. यह खंडन व खबर उन अफसरों को खुश करने के लिए प्रकाशित किया गया है जिससे उपेंद्र राय के राज में सीधे-सीधे पंगा लिया गया था. तब भड़ास4मीडिया ने संबंधित दो खबरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें इन शीर्षकों पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं- एक आईपीएस को निपटाने में जुटा राष्ट्रीय सहारा और सहारा से भिड़े राजकेश्वर की बहन हैं मीनाक्षी.

अब राष्ट्रीय सहारा ने बैकफुट पर आते हुए मीनाक्षी से माफी मांग ली है. और स्टोरी ऐसी लगाई है जिससे लग रहा है कि राष्ट्रीय सहारा रूपी अदालत ने फैसला सुना दिया है कि मीनाक्षी जी निर्दोष हैं और उनके खिलाफ कुछ दुष्ट किस्म के लोगों ने साजिश की है. दरअसल राष्ट्रीय सहारा के इस यू टर्न लेने को इससे समझा जा सकता है कि उपेंद्र राय ने अपने कार्यकाल में अतिशय तेजी के तहत सहारा समूह का हित साधने में जिन कई अफसरों व सरकारी विभागों से पंगा ले लिया, उससे सहाराश्री व सहारा समूह की धड़कने बढ़ गईं. सरकारी अफसरों और सरकारी विभागों ने मिल कर सहारा समूह की बैंड बजाने की ठान ली. उपेंद्र राय पहले से ही सुप्रीम कोर्ट से लेकर अन्य कई जांच एजेंसियों के लिए जांच के विषय बने हुए थे क्योंकि उन्होंने सहाराश्री का फेवर चाहने के चक्कर में कइयों को धमकवाया था और देख लेने की बात कह दी थी.

सहारा समूह ने अंततः अपना अस्तित्व बचाने के लिए शीर्ष स्तर पर फेरबदल कर दिया ताकि अफसरों, विभागों, एजेंसियां, न्यायालयों आदि का एक साथ शांत किया जा सके और उन्हें पुचकार कर खिलाफ बन रहे माहौल ठंडा किया जा सके. इसी के तहत स्वतंत्र मिश्रा ने आते ही डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है. सहारा समूह के बारे में कहा जाता है कि यहां सहारा के हित में या सहारा के खिलाफ, दोनों ही स्थितियों में बहुत तेज चलने वाले ज्यादा दिन टिक नहीं पाते. यही हाल उपेंद्र राय का हुआ. आज जो राष्ट्रीय सहारा में खंडन छपा है, वह यह बतला रहा है कि सहारा समूह कितना बेचैन है डैमेज कंट्रोल के लिए.

यह सभी जानते हैं कि स्वतंत्र मिश्रा और उपेंद्र राय के छत्तीस के आंकड़े रहे हैं. अब जब सत्ता स्वतंत्र मिश्रा को मिल गई है तो असंभव नहीं है कि कुछ दिनों में उपेंद्र राय के कथित घपले घोटाले सामने आने लगे. सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय के कार्यकाल के छोटे बड़े सभी फैसलों, मेलों, कागजातों की छानबीन वृहद स्तर शुरू हो गई है. इस छानबानी से ठीक पहले विभिन्न विभागों के मुखियाओं को हटा दिया गया. बताया जा रहा है कि गोरखपुर से संजय पाठक नामक कंप्यूटर इंजीनियर को नोएडा आफिस बुलाया गया है जो यहां कंप्यूटर में पड़े दस्तावेजों, मेलों आदि को छानबीन के लिए उपलब्ध कराएगा.

कहने वाले यहां तक कह रहे हैं कि उपेद्र राय को साइडलाइन तो किया ही गया है, अगर कोई घपला-घोटाला या अनियमितता पकड़ में आ जाती है तो उन्हें टर्मिनेट या सस्पेंड भी किया जा सकता है. इस टर्मिनेशन या सस्पेंशन से सहारा समूह को दो फायदा मिलेगा. एक तो असंतुष्ट अफसरों, सरकारी विभागों, जांच एजेंसियों, न्यायालयों आदि को यह बताया जा सकेगा कि जो आरोपी उपेंद्र राय हैं उनके खिलाफ समुचित कार्रवाई कर दी गई है, जिससे उनका गुस्सा खत्म हो जाए और दूसरे सहारा समूह के खिलाफ चल रही जांचों को नरम तरीके से प्रभावित करने का रास्ता खुल सकेगा.

राष्ट्रीय सहारा अखबार में फ्रंट पेज पर टाप बाक्स में कई कालम में प्रकाशित खबर व खंडन इस प्रकार है…

आयकर अधिकारी के खिलाफ फर्जी शिकायतों का मामला

फोरेंसिक जांच में फर्जी निकले जनप्रतिनिधियों के शिकायती पत्र

खुलासा : जालसाजों ने मंत्री, सांसद व विधायक के लेटर पैड हासिल कर किये थे जाली हस्ताक्षर, ईमानदार अधिकारी को फंसाने की थी साजिश, आयकर आयुक्त बीपी सिंह के खिलाफ पुलिस ने की चार्जशीट दाखिल

नई दिल्ली (एसएनबी)। लखनऊ में एडिशनल कमिश्नर इनकम टैक्स के पद पर तैनात रहीं श्रीमती मीनाक्षी सिंह के विरुद्ध की गई शिकायतों के मामले में चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में आए हैं। फोरेंसिक जांच में सामने आया है कि श्रीमती सिंह को झूठे मामलों में फंसाने के लिए मंत्री, सांसदों व विधायक के लेटर पैड पर उनके फर्जी दस्तखत पर शिकायतें की गई थीं। यह पूरा खेल महज इस वजह से खेला गया था ताकि श्रीमती मीनाक्षी सिंह को व्यावसायिक रूप से हानि पहुंचाई जा सके। जालसाजी के इस खेल में विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की हठधर्मिता और भी मददगार बन गई।

फर्जी दस्तखत वाले जनप्रतिनिधियों के लैटर पैड फोरेंसिक जांच के लिए पुलिस को समय पर नहीं दिए। फर्जीवाड़े के इस खेल का आश्चर्यजनक पहलू यह रहा कि साजिश किसी और ने नहीं विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने रची थी। जांच में सामने आए तथ्यों के बाद पुलिस ने आयकर आयुक्त बीपी सिंह, कानपुर समेत दो लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। मामले की शुरुआत श्रीमती मीनाक्षी सिंह के खिलाफ महानिदेशक सर्तकता आयकर व विभिन्न कार्यालयों में मंत्री, सांसद व विधायक के अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों के लैटर पैड पर भेजे गए शिकायती पत्रों से हुई थी। मंत्री वेदराम भाटी, सांसद जफरअली नकवी व विधायक सुन्दर सिंह स्याना आदि के लैटर पैड पर भेजी गई शिकयतों में कई आरोप लगाए गए थे।

जांच के दौरान ही सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता जनप्रतिनिधियों से सम्पर्क किया गया। पता चला कि उन्होंने श्रीमती मीनाक्षी सिंह के खिलाफ कोई शिकायत ही नहीं की है। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि उनके नाम वाले लैटर पैडों का जालसाजों ने दुरुपयोग किया है। सांसद जफर अली नकवी बताते हैं कि श्रीमती मीनाक्षी सिंह के खिलाफ कभी कोई शिकायत की ही नहीं, इससे साफ है कि किसी ने मेरे नाम वाले लैटर पैड पर मेरा फर्जी दस्तखत किया होगा। श्री नकवी के अनुसार उन्होंने यह जानकारी आयकर विभाग के जांच अधिकारियों को शुरुआती जांच के दौरान ही दे दी थी, लगभग यही कहना है मंत्री वेदराम भाटी व विधायक सुन्दर सिंह स्याना का।

यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आने पर श्रीमती मीनाक्षी सिंह ने इस मामले में अज्ञात जालसाजों के खिलाफ अपने विभाग को सूचित करते हुए हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उधर पुलिस ने भी पड़ताल शुरू की तो उसे सबसे पहले जरूरत पड़ी जनप्रतिनिधियों के उन लैटर पैडों की जिन पर फर्जी हस्ताक्षर कर श्रीमती मीनाक्षी सिंह के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराने के लिए लैटर पैड की मूल प्रति की पुलिस को सख्त जरूरत थी। इसके लिए कई बार आयकर विभाग के जांच अधिकारी से सम्बन्धित लैटर पैड मांगे गए लेकिन मिल नहीं सके। यह रवैया देख पुलिस को अंतत: अदालत की शरण में जाना पड़ा।

अदालत के आदेश के बाद भी जब लैटर पैड उपलब्ध नहीं कराए गए तब अदालत ने दस्तावेजों को हासिल करने के लिए सर्च वारंट जारी किया। अन्ततोगत्वा दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उक्त फर्जी हस्ताक्षर वाले लैटर पैड की मूल प्रति सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों को विलम्ब से उपलब्ध कराई गई। श्रीमती मीनाक्षी सिंह एक ऐसी अधिकारी हैं जिन्होंने आयकर विभाग के कई सफल सर्वे व सर्च कार्यवाहियों को बाखूबी अंजाम दिया है। यह वही कर्त्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने उत्तराखण्ड के एक बड़े स्टील ग्रुप से 10 करोड़ रुपए की अघोषित आय पकड़ी थी। श्रीमती मीनाक्षी सिंह ने लखनऊ में एक प्रमुख पान मसाला व्यवसायी के यहां छापे की कार्रवाई में 8 करोड़ की अघोषित नकदी, ज्वैलरी व एफडीआर इत्यादि जब्त किये थे और सम्बन्धित कंपनी ने करीब 17 करोड़ की अघोषित आय का सरेण्डर किया था। यह लखनऊ में अब तक की आयकर विभाग की सबसे सफल कार्यवाही रही है।

इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों के चलते ही श्रीमती मीनाक्षी सिंह का नाम एक कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार अधिकारी के रूप में विभाग में लिया जाता है, लेकिन जालसाजों ने उन्हें परेशान करने की अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन पुलिस तफ्तीश में उनकी करतूतों की कलई खुल गई। फोरेंसिक जांच में हस्ताक्षरों के फर्जी पाए जाने के साथ ही पुलिस ने जब गहराई से छानबीन शुरू की तो षडयंत्र की कहानी परत-दर-परत खुलती गई। पुलिस के जांच अधिकारी को विधायक सुन्दर सिंह स्याना से पता चला कि उनके लैटर पैड को उनके मित्र व बुलन्दशहर निवासी बृजमोहन अग्रवाल के माध्यम से आयकर आयुक्त कानपुर बीपी सिंह के पास पहुंचाया गया था।

इस तथ्य के आधार पर पुलिस ने जब और साक्ष्य एकत्र किये तो चौंकाने वाला एक और खुलासा हुआ। तफ्तीश के दौरान पता चला कि श्री बीपी सिंह ने अपने ही विभाग की एक अन्य अधिकारी के साथ 10 माह में करीब 16 सौ बार मोबाइल पर बात की है। डीआईजी (लखनऊ) के प्रवक्ता पीके श्रीवास्तव ने बताया कि सारे सबूतों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि श्रीमती सिंह के खिलाफ षड़यंत्र किसी और ने नहीं बल्कि उनके ही विभाग के अफसर व आयकर आयुक्त कानपुर ने रचा था। तमाम साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आयकर आयुक्त बीपी सिंह व उन तक लैटर पैड पहुंचाने वाले व्यक्ति के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।

खेद प्रकाश

3 जून 2011 के अंक में प्रथम पृष्ठ पर ‘ये हैं आईपीएस राजीव कृष्ण, पद का दुरुपयोग करना कोई इनसे सीखे’ शीषर्क से प्रकाशित समाचार में हमारे संवाददाता पंकज कुमार ने तथ्यों की ठीक ढंग से जांच-परख नहीं की। यह बात इस प्रकरण में बाद में की गई जांच में सामने आई। संवाददाता के इस कृत्य के लिए हमें खेद है व उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। इस समाचार से श्रीमती मीनाक्षी सिंह व उनके परिवार की प्रतिष्ठा को जो ठेस पहुंची है, उसके लिए हमें हार्दिक खेद है। – स्थानीय सम्पादक


अब दूसरी खबर. इसे प्रकाशित किया है जनसत्ता अखबार ने. वही प्रभाष जोशी वाला जनसत्ता. अब यह जनसत्ता लगभग मृतप्राय है. कभी कभार इसमें स्पार्क सा नजर आता है, बाकी दिनों में यह मुर्दा अखबार नजर आता है. ओम थानवी का नाम इतिहास में इसलिए भी दर्ज किया जाएगा क्योंकि वह एक मुर्दा अखबार को बड़ी मुर्दनी के साथ ढो पाने में सफल हैं. तो इस मुर्दा अखबार ने आज जिंदा करने वाली खबर बाटम में छापी है.

खबर है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने यहां पाठ्यपुस्तकों से सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता से वह एक लाइन हटवा दी है जिससे सिंधिया राजघराने के अंग्रेजों के मित्र होने का पता चलता है, जिससे पता चलता है कि सिंधिया राजघराने ने रानी लक्ष्मीबाई का नहीं बल्कि अंग्रेजों का साथ दिया था, जिससे पता चलता है कि सिंधिया राजघराने ने आजादी के आंदोलन के दिनों में गद्दारी की थी और गोरों का साथ दिया था.

आजादी के बाद इन्हीं सिंधियाओं ने चोला बदलकर कांग्रेस से लेकर भाजपा तक की टोपी पहन ली और सत्ता-सिस्टम के पार्ट बन गए.

चूंकि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और भाजपा में ज्यादातर राजे-रजवाड़े-सामंत किस्म के लोग ही नेता, सांसद, मंत्री बनते हैं, सो लगता है कि सिंधिया राजघराने के नए नेताओं ने शिवराज सरकार को प्रभाव में लेकर अपनी बदनामी वाली कहानी को डिलीट करा दिया है. यहां कविता की वो लाइन बोल्ड में दी जा रही है जिसे पाठ्यपुस्तक से हटाया गया है…

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

तो मध्य प्रदेश के बच्चे सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता झांसी का रानी में इस लाइन ”अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी” को नहीं पढ़ेंगे क्योंकि वहां की सरकार ने इसे हटवा दिया है. सोचिए, कितने नीच लोग हैं. अगर कविता पसंद नहीं है तो पूरा का पूरा हटा दो. या पसंद है तो पूरा का पूरा लगा लो. ये क्या कि उसमें छेड़छाड़ कर देंगे. यह घोर अपराध है और इसके लिए शिवराज सरकार की निंदा का जानी चाहिए. जनसत्ता को यह खबर छापने के लिए बधाई. अब आप सुभद्रा कुमारी चौहान लिखिति झांसी का रानी कविता का पूरा पाठ कीजिए… और सिंधियाओं के साथ साथ शिवराजों पर भी थू थू करिए…

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

yashwant@bhadas4media.com


झांसी की रानी

-सुभद्राकुमारी चौहान-

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कानपुर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

वीर शिवाजी की गाथायें उसको याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़|

महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आयी थी झांसी में,

चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।

निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।

रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात?
जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।

बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
‘नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार’।

यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी,

जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में।

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,

दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।

तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

स्वतंत्र मिश्रा ने आते ही सहारा में फेरबदल शुरू किया

सहारा मीडिया से खबर है कि स्वतंत्र मिश्रा ने मीडिया डिवीजन का हेड बनते ही फेरबदल शुरू कर दिया है. सहारा नोएडा कैंपस के सर्विस डिविजन के सर्वेसर्वा विजय वर्मा, ट्रांसपोर्ट डिविजन के हेड सैफुद्दीन, सहारा टीवी के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज वली और सहारा के नोएडा कैंपस के सिक्योरिटी इंचार्ज कुलदीप शर्मा को तत्काल प्रभाव से एचआर डिपार्टमेंट से अटैच कर दिया गया है. सहारा में एचआर से अटैच किए जाने को डिमोशन और पनिशमेंट के तौर पर लिया जाता है.

स्वतंत्र मिश्रा और उनके लोगों ने अब उपेंद्र राय के करीबियों पर तगड़ी नजर रखने का काम शुरू कर दिया है. इससे उपेंद्र राय के कार्यकाल के दौरान सहारा में भर्ती किए गए लोग खासतौर पर आशंकित हैं. विजय राय, मनोज मनु, रजनीकांत, राजेश कौशिक, प्रबुद्ध राज, संतोष राज, दुर्गेश उपाध्याय, मयंक मिश्रा आदि को उपेंद्र राय का बेहद करीबी माना जाता है और इन लोगों पर उपेंद्र ने खुलकर भरोसा किया व इन्हें कामकाज करने की पूरी छूट दी. चर्चा अब यह भी हो रही है कि सहारा के ही एक वरिष्ठ आदमी ने उपेंद्र राय की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों के जरिए कराई.

यह आदमी उपेंद्र राय के कार्यकाल के दौरान साइडलाइन कर दिया गया था और अपनी सत्ता फिर पाने के लिए प्रयासरत था. तीन-तिकड़म में माहिर इस शख्स ने उपेंद्र राय के खिलाफ शिकायतों का सही-गलत पुलिंद इकट्ठा कर यहां वहां दूसरों के जरिए शिकायत कराई और अंततः सहारा श्री पर यह दबाव बनवाने में कामयाब रहा कि अगर कुछ दिनों के लिए उपेंद्र राय को मीडिया डिवीजन से न हटाया गया तो सुप्रीम कोर्ट से लेकर सेबी तक, कई जगहों पर सहारा की किरकिरी हो सकती है.

पिछले कुछ माह से सहारा कई मोर्चों पर फंसता और पीछे हटता नजर आ रहा है. इसी कारण फौरी इलाज के तौर पर अंतरिम व्यवस्था यह की गई है कि उपेंद्र राय को कुछ दिनों के लिए सहारा मीडिया के काम से मुक्त रखा जाए और स्वतंत्र मिश्रा को अपना जौहर-जलवा दिखाने की पूरी छूट दी जाए ताकि सहारा जिन जिन जगहों पर फंसा हुआ है वहां वहां उसके संकट का शमन हो सके. अगर स्वतंत्र मिश्रा अपनी दूसरी पारी में प्रबंधन द्वारा दिए गए टारगेट को यथाशीघ्र पूरा नहीं कर पाते हैं तो उनको फिर से हटाया जाना तय है. पर यह सब इतना जल्दी नहीं होने वाला. प्रबंधन की तरफ से पूरी छूट मिलने के बाद स्वतंत्र मिश्रा अब सहारा मीडिया के हर विभाग पर अपने लोगों को आसीन कराने में लगे हैं.

इसी कड़ी में कई विभागों के हेड को एचआर से अटैच किया गया है. उधर, उपेंद्र राय ने अपने बारे में प्रबंधन के फैसले को उसी भाव से लिया है जिस भाव से उन्हें सहारा मीडिया डिवीजन का सीईओ बनाया गया. सहारा में पंद्रह सौ रुपये से अपना करियर शुरू करने वाले उपेंद्र ने सीईओ की कुर्सी मिलने के बाद भी अपना जमीनी स्वभाव जिस तरह से बचाए-बनाए रखा, और नए बदलाव को भी जिस सकारात्मक भाव से लिया, वह बताता है कि उपेंद्र किसी तात्कालिक जंग से अलग लंबी रेस का घोड़ा बनने में यकीन रखते हैं.

उपेंद्र राय वाकई ग्‍लोबल हो गए!

सहारा में उपेंद्र राय का कद वाकई बढ़ा दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय सचमुच में ग्‍लोबल हो गए हैं. वे अब सहारा मीडिया का साम्राज्‍य फैलाने के लिए विदेशों में संभावनाओं की तलाश करेंगे. वे अब नोएडा की बजाय लंदन में बैठेंगे तथा वहीं से सारा कामकाज संभालेंगे. बताया जा रहा है कि उपेंद्र के नेतृत्‍व में सहारा के ग्‍लोबल एक्‍सपेंशन की शुरुआत इंग्‍लैंड से होगी. भारत में सहारा मीडिया का प्रभार संभालने वाले स्‍वतंत्र मिश्रा उपेंद्र राय को रिपोर्ट करेंगे.

सूत्रों का कहना है कि सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय एवं स्‍वतंत्र मिश्रा की क्षमता तथा इनके पास ग्रुप की कई अहम जानकारियां होने के चलते दोनों को अपने दूर करना नहीं चाहता है. इसके चलते ही यह बीच का रास्‍ता निकाला गया है. स्‍वतंत्र मिश्रा अब सहारा मीडिया को भारत में हैंडिल करेंगे. उपेंद्र राय के करीबियों का कहना है कि वे अब सहारा मीडिया को ग्‍लोबल बनाने की कोशिश में जुटेंगे. वे 48 देशों में मीडिया से जुड़ी तमाम संभावनाओं को खंगालेंगे. किस मीडिया ग्रुप से कहां टाइअप हो सकता है, इसको देखने का जिम्‍मा उपेंद्र राय को सौंपा गया है. वे विदेश के दूसरे मीडिया माध्‍यमों से कंटेंट शेयरिंग से लेकर एड, निवेश आदि की संभावना तलाशेंगे.

उपेंद्र राय के सहारे सहारा ग्रुप अपने ग्‍लोबलाइज करने की कोशिशों में जुटा हुआ है. इसकी शुरुआत इंग्‍लैंड से होगी. उपेंद्र राय अब लंदन में बैठकर सहारा को ग्‍लोबल बनाएंगे. भारत में सहारा ग्रुप पर उनका भले ही सीधा हस्‍तक्षेप न रहे परन्‍तु यहां की भी रिपोर्ट उपेंद्र राय को दी जाएगी. यानी स्‍वतंत्र मिश्रा यहां की रिपोर्ट लंदन में बैठे उपेंद्र राय तक पहुंचाएंगे. सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों घटित हुए घटनाक्रम के बाद प्रबंधन ने अपने दोनों दिग्‍गजों को दो जगहों पर करके फिलहाल अपने लिए किसी बड़े खतरे की संभावना को टाल दिया है. क्‍योंकि माना जा रहा है कि इन दोनों के पास सहारा ग्रुप की अहम जानकारियां हैं, जिनके बाहर आने पर ग्रुप की परेशानियां बढ़ सकती हैं.

सहारा ने इस नए घटनाक्रम के बाद एक तीर से दो शिकार किया है. एक तरफ उपेंद्र राय को भारत में सहारा मीडिया से मुक्‍त करके यह दिखाने का प्रयास किया है कि अब उपेंद्र उनका यहां से कोई मतलब नहीं रहेगा. पिछले दिनों हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है.  दूसरा अपने कई अहम राज जानने वाले स्‍वतंत्र मिश्रा को प्रभार देकर उनकी क्षमताओं का सदुपयोग करने की रणनीति बनाई है. हालांकि इसके कई अर्थ लगाए जा रहे हैं. सभी लोग अपने अपने तरीके से इस बदलाव का आकलन कर रहे हैं. कोई इसे स्‍वतंत्र मिश्रा की मजबूती के रूप में देख रहा है तो कोई उपेंद्र राय की तरक्‍की के रूप में. पर वास्‍तव में सहारा ने दोनों का कद बढ़ाया है या किसी का घटाया है वो प्रबंधन ही बता सकता है.

वैसे भी सहारा के पिछले रिकार्डों को देखते हुए कुछ भी कहना मुश्किल है. सहारा कब किसका किस तरह से कैसे किसलिए इस्‍तेमाल कर ले कहा नहीं जा सकता है. यहां कभी शिखर पर रहने वाला व्‍यक्ति शून्‍य में पहुंचा दिया जाता है तो अगले ही पर फर्श पर पड़े व्‍यक्ति को अर्श पर पहुंचा दिया जाता है. ये ग्रुप किस अपने के साथ दगाबाजी कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता. माना जा रहा है कि सेबी के आदेशों से परेशान ग्रुप अपनी किरकिरी से बचने के लिए दोनों लोगों को तरीके से सलटाकर साधने की कोशिश की है. अब आगे वो किसे और खुश करेगा और किसे नाराज किसी को पता नहीं है.

अंतत: उपेंद्र राय पर गिरी गाज, स्‍वतंत्र मिश्रा को सहारा मीडिया का प्रभार

: अपडेट : सहारा से बड़ी खबर आ रही है कि उपेंद्र राय की जगह स्‍वतंत्र मिश्रा को सहारा मीडिया का हेड बना दिया गया है. अब से वो सहारा मीडिया का पूरा कामकाज देखेंगे. उपेंद्र राय को सहारा मीडिया के ग्‍लोबल मीडिया का हेड बना दिया गया है. माना जा रहा है कि प्रबंधन अब उपेंद्र राय को साइड लाइन करने की कोशिश में जुट गया है. इसी के तहत उन्‍हें नए सृजित पद का मुखिया बनाया गया है, जहां करने के लिए कुछ भी नहीं है. गोविंद दीक्षित को पूरे नोएडा कार्यालय का प्रभार सौंपे जाने की भी चर्चा है.

सहारा ग्रुप की माया भी अजब है. कुछ दिन पहले जिस स्‍वतंत्र मिश्रा को सस्‍पेंड करते हुए कार्यालय में आने पर पाबंदी लगा दी गई थी, उन्‍हें सहारा के पूरे मीडिया का प्रभार सौंप दिया गया है. स्‍वतंत्र मिश्रा के सस्‍पेंशन के बाद माना जा रहा था कि उपेंद्र राय एंड कंपनी अब सहारा में सबसे मजबूत होगई है, परन्‍तु स्‍वतंत्र मिश्रा ने जबर्दस्‍त वापसी करते हुए उपेंद्र राय को न सिर्फ तरीके से किनारे करवाया है, बल्कि खुद को मजबूत भी कर लिया है.  अभी तक जो काम उपेंद्र राय देखते थे, वो काम अब स्‍वतंत्र मिश्र संभालेंगे.

इधर,  प्रबंधन ने उपेंद्र राय को एक झटके से बाहर न करते हुए नए कारपोरेट पॉलिसी के तहत बिना काम के बड़ा पद थमा दिया है. माना जा रहा है कि प्रबंधन अब उपेंद्र राय से मुक्ति पाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा दिया है. उपेंद्र राय को जिस कथित बड़े पद पर भेजा गया है, वहां करने के लिए कुछ खास नहीं है. सहारा में सबसे मजबूत माने जा रहे उपेंद्र राय के कमजोर होने की कहानी उस समय ही चर्चा में आ गई थी, जब उनके खासमखास माने जाने वाले सहारा के नार्थ हेड अजय शर्मा को बंगलुरू भेज दिया गया था. उपेंद्र राय चाह कर भी इस आदेश को रुकवा नहीं पाए थे.

सहारा समूह का जिस तरह का इतिहास रहा है,  उसको देखते हुए किसी का भी सहारा में लम्‍बे समय तक टिक पाना मुश्किल है. उपेंद्र राय को लेकर इसके पहले यह खबर भी आई थी कि प्रबंधन ने उनका डिमोशन करते हुए सहारा श्री के एमसीसी यानी मैनेंजिंग वर्कर्स कारपोरेट कोर से सम्‍बद्ध कर दिया है. इस एमसीसी में सहाराश्री के प्रबंधन से जुड़े कोर कमेटी के लोग सदस्‍य होते हैं. एमसीसी का मुख्‍यालय लखनऊ में है.  दिल्‍ली, मुंबई और लखनऊ में इसके कैम्‍प कार्यालय भी हैं.

सूत्रों का कहना है कि सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय को बाहर का रास्‍ता दिखाकर नाराज नहीं करना चाहता. इसलिए उन्‍हें ऐसे बड़े पद पर बिठाया गया है, जहां करने के लिए कोई काम न हो. सहारा के कई राज जानने वाले उपेंद्र राय को प्रबंधन एक झटके में हटाना प्रबंधन के लिए सुविधाजनक नहीं है. लिहाजा उन्‍हें ग्‍लोबल मीडिया का हेड बना दिया गया है. इसके पीछे माना जा रहा है कि विनीत मित्‍तल मामले को जिस तरह से हैंडिल किया गया, उससे सहारा प्रबंधन खुश नहीं था. साथ ही कई मामलों में विवादित हो जाने के बाद सहारा प्रबंधन उपेंद्र से छुटकारा पाना चाहता है.

सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय का नाम 2जी स्कैम मामले में जांच प्रभावित करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी राजेश्वर सिंह को रिश्वत देने, नीरा राडिया से बात करने और 2जी प्रकरण में नाम आने के बाद प्रबंधन उपेंद्र राय से ज्‍यादा खुश नहीं था. लगातार उपेंद्र राय को लेकर तमाम चर्चाएं चल रही थीं. कई लोगों को रन आउट कराने वाले उपेंद्र राय से जुड़े विवादों को सहारा प्रबंधन अपनी सरदर्दी नहीं बनाना चाहता है. सूत्रों का कहना है अपने ही कई परेशानियों से जूझ रहा सहारा ग्रुप उपेंद्र के पक्ष में खड़ा होने की स्थिति में नहीं था, जिसके चलते उन्‍हें बड़े पद का लालीपाप पकड़ा दिया गया, जिसमें मिठास नहीं है.

इधर, गोविंद दीक्षित को पूरे नोएडा का प्रभार सौंपे जाने की चर्चा है. इस खबर की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो पाई है. पर अंदरखाने इसकी तेज चर्चा है. बताया जा रहा है कि स्‍वतंत्र मिश्रा के हाथ में प्रभार आने के बाद आने वाले कुछ समय में उलटफेर देखने को मिल सकता है. उपेंद्र राय के नजदीकी लोगों को निपटाया भी जा सकता है. हालांकि सहारा मीडिया का ट्रैक रिकार्ड देखते हुए कुछ भी अनुमान लगा पाना मुश्किल है. पता नहीं कल किसका विकेट गिर जाए और कौन छक्‍का मार दे.

ये खबर सूत्रों से मिली जानकारियों के आधार पर है. खबर पक्‍की है पर इसमें कुछ तथ्‍य अपूर्ण या गलत हो सकते हैं. जिस किसी को इस बारे में अपनी बात कहनी हो या भड़ास को जानकारी देनी हो वो अपनी बात नीचे कमेंट बाक्‍स में या bhadas4media@gmail.com के जरिए कह सकता है.

सहारा समूह से भिड़े राजकेश्वर की बहन हैं मीनाक्षी!

पिछले दिनों भड़ास4मीडिया पर एक खबर प्रकाशित हुई थी, ”एक आईपीएस को निपटाने में जुटा राष्ट्रीय सहारा अखबार” शीर्षक से. इस खबर के प्रकाशित होने के बाद कुछ सुधी पाठकों ने महत्वपूर्ण जानकारियां और फीडबैक भड़ास4मीडिया को उपलब्ध कराया है. नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर मीडिया के एक दिग्गज ने बताया कि आईपीएस राजीव कृष्ण को को निशाना बनाकर सहारा समूह ने राजकेश्वर सिंह को परेशान करना शुरू किया है.

उस राजकेश्वर को जिसने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि सहारा वालों ने दो करोड़ रुपये लेकर काम न करने पर करियर व परिवार की इज्जत तबाह कर देने की धमकी दी थी. प्रवर्तन निदेशालय के उसी अधिकारी राजकेश्वर सिंह की सगी बहन हैं मीनाक्षी सिंह जो आईपीएस अफसर राजीव कृष्ण से ब्याही हैं. मीनाक्षी सिंह भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हैं. इसलिए राष्ट्रीय सहारा ने सीधे राजकेश्वर को निशाना न बनाकर उनकी बहन और जीजा को निशाना बनाया है जिससे एक तीर से दो निशाने सध जाएं.

खबर से ऐसा लग रहा है कि मानों राष्ट्रीय सहारा अखबार देश के सभी अनैतिक लोगों को सबक सिखा कर रहेगा, उनकी पोलखोल कर रहेगा, पर इस खबर के तह में जाने पर पता चल रहा है कि सहारा समूह वही कर रहा है जो बरसों से करता आ रहा है. जो अफसर या जज सूट न करे, मन मुताबिक न हो, उसे इतना परेशान करो, उसे इतना बेइज्जत करो, उस पर इतने आरोप लगाओ कि वह अलग थलग पड़ जाए या फिर शासन से दंडित हो जाए. पर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजकेश्वर सिंह ने टूजी स्पेक्ट्रम मामले में और मनी लांडिंग की जांच को लेकर सहारा समूह की धमकियों व रिश्वत को नजरअंदाज किया तो उन्हें भी धमकी दी गई जिस कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगानी पड़ी.

राजकेश्वर ने बाकायदे उपेंद्र राय समेत दो पत्रकारों के नाम लिखकर दिए कि ये लोग उन्हें धमका रहे हैं और काम न करने पर करियर नष्ट करने व परिवार को तबाह करने की बात कह गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस रिश्वत व धमकी के प्रकरण की जांच के आदेश सीबीआई को दिए हैं. पर सीबीआई जांच व सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बावजूद सहारा समूह ने अपने अखबार के जरिए राजकेश्वर सिंह के परिजनों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है. यहां यह कहने का आशय कतई नहीं है कि राजकेश्वर सिंह, मीनाक्षी सिंह और राजीव कृष्ण कोई दूध के धुले हैं. इनकी छवि को लेकर भी कई तरह की बातें पता चली हैं. लेकिन टूजी मामले में राजकेश्वर का सहारा के प्रलोभन व धमकियों में न आना बताता है कि सहारा समूह इनसे बेहद चिढ़ा हुआ है और अपनी चिढ़ को लंबे समय तक न छुपाकर आईपीएस को निशाना बनाने संबंधी खबर छापकर सार्वजनिक कर दिया है.

सहारा से स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम सस्पेंड

: उपेंद्र राय एंड कंपनी की ताकत बढ़ी : सहारा ग्रुप से दो बड़ी खबरें हैं. स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को सस्पेंड कर दिया गया है. स्वतंत्र मिश्रा के बारे में पता चला है कि उन्हें 19 मई को ही सस्पेंड कर दिया गया था. उनके सहारा के किसी भी आफिस में प्रवेश करने पर पाबंदी लगा दी गई है. स्वतंत्र के पास कंपनी का जो कुछ सामान था, सभी ले लिया गया है.

अनिल अब्राहम के बारे में जानकारी मिली है कि उन्हें 27 मई को सस्पेंड किया गया. कल खुद अनिल अब्राहम ने अपना इस्तीफा भी प्रबंधन को सौंप दिया. स्तवंत्र मिश्रा राष्ट्रीय सहारा अखबार के प्रिंटर पब्लिशर रह चुके हैं. एक जमाने में लखनऊ में उनकी तूती बोलती थी और सहाराश्री के खासमखास माने जाते थे. बाद में उनका तबादला दिल्ली कर दिया गया और उनका कद बढ़ाते हुए उन्हें राष्ट्रीय दायित्व सौंपे गए. पर अचानक ही स्वतंत्र मिश्र को शंट करते हुए उन्हें सहारा मीडिया से बाहर सहारा की किसी अन्य कंपनी में भेज दिया गया. इससे उपेक्षित व खफा स्वतंत्र मिश्र काफी दिनों से सहारा के मेनस्ट्रीम में आने की कोशिश कर रहे थे पर उनकी रणनीति व योजना सफल न हो सकी.

सहारा प्रबंधन ने स्वतंत्र मिश्रा को हटाने का कड़ा फैसला ले लिया. अब देखना है कि स्वतंत्र मिश्रा निकाले जाने के बाद भी सहारा के प्रति निष्ठा निभाते हुए चुप्पी साधे रहते हैं या फिर अपना पक्ष व अपनी बात मजबूती से सबके सामने रखते हैं. उधर अनिल अब्राहम को निकाले जाने पर सहारा के कई लोग हैरत में हैं. सहारा मीडिया के हेड रहे इस शख्स को सहारा के जहाज वाली कंपनी से ट्रांसफर कर मीडिया में लाया गया. बाद में इन्हें मीडिया से हटा कर कोई और जिम्मेदारी दे दी गई. पर अचानक उन्हें सस्पेंड किए जाने के कारण को कोई समझ नहीं पा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि दरअसल सहारा में इन दिनों सिर्फ और सिर्फ उपेंद्र राय की तूती बोल रही है. सहाराश्री सुब्रत राय सहारा जिस पर भी भरोसा करते हैं, कुछ वर्षों तक आंख मूंद कर भरोसा करते हैं और उसे पूरा अधिकार देते हैं. बताया जा रहा है कि उपेंद्र राय और उनके करीबी जन सहारा प्रबंधन को ये समझाने में कामयाब रहे कि मुश्किलों से घिरे सहारा ग्रुप को बचाने की बजाय कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी साजिशें कर सहारा को फंसाने और बदनाम करने की कोशिशें कर रहे हैं. इससे संबंधित कुछ प्रमाण भी सहारा श्री को दिखाए गए. सूत्रों के मुताबिक इसी के बाद सहाराश्री ने स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को सस्पेंड कर देने का आदेश दिया.

सहारा के बारे में ये चर्चित है कि प्रबंधन जब किसी बड़े पद पर आसीन व्यक्ति से खफा होता है तो उनके घर का परदा, तकिया सब उठवा लेता है. ऐसा अतीत में भी हो चुका है कइयों के साथ. जानकारों का मानना है कि स्वतंत्र मिश्रा और अनिल अब्राहम को निपटाने के बाद उपेंद्र राय और ज्यादा ताकतवर होकर उभरे हैं. और, यह स्पष्ट संदेश भी सभी को चला गया है कि इस दौर में उपेंद्र राय का विरोध करने का मतलब है सहाराश्री का विरोध करना.

माना जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय वाले प्रकरण में उपेंद्र राय के फंसने को सहारा ग्रुप ने अपना नाक का मुद्दा बना लिया है. जो कुछ भी उपेंद्र राय ने किया, वह सब प्रबंधन की जानकारी और मर्जी के मुताबिक किया. इसलिए इस मामले में उपेंद्र राय को कंपनी का पूरा सपोर्ट है और दो वरिष्ठों को निकाले जाने से स्पष्ट कर दिया गया है कि जो नीतियों के साथ नहीं चलेगा, छिपकर साजिशें करेगा, उन्हें बहुत देर तक अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. फिलहाल दो बड़ों के निलंबन से सहारा ग्रुप में चर्चाओं का बाजार कई दिनों से गर्म है. कोई इन चर्चाओं को निराधार बता रहा है तो कोई इन्हें पुष्ट घोषित कर रहा है.

भड़ास के पास भी इस बारे में कई दिनों से सूचनाएं आ रही थीं पर कहीं से आधिकारिक तौर पर कनफर्म नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि इन दोनों स्वतंत्र व अनिल का सहारा में काम तमाम हो चुका है. इनके निपटने से उपेंद्र राय के कई दूसरे विरोधी खौफजदा हो गए हैं. इन लोगों को भी डर सता रहा है कि कहीं उनके दिन भी अब गिने चुने न रह गए हों.

उपेंद्र राय को लेकर अफवाहों का दौर जारी

सहारा मीडिया के डायरेक्टर न्यूज उपेंद्र राय के बारे में तरह-तरह की अफवाहें कई दिनों से उड़ रही हैं. कभी इनको सहारा से निकाले जाने की चर्चा उड़ती है तो कभी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने की. कभी चर्चा उपेंद्र राय के अंडरग्राउंड हो जाने की होती है. लेकिन अब तक सारी अफवाहें झूठ साबित हुई हैं. ताजी चर्चा उपेंद्र राय के डिमोशन की है. चर्चा के मुताबिक सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा उपेंद्र राय को सहाराश्री के एमसीसी (मैनेजिंग वर्कर्स कारपोरेट कोर) से अटैच कर दिया गया है.

इस एमसीसी में सहाराश्री के प्रबंधन से जुड़े कोर कमेटी के लोग सदस्य होते हैं. एमसीसी का मुख्यालय लखनऊ में है और इसके कैंप कार्यालय लखनऊ, दिल्ली व मुंबई में स्थित हैं. चर्चा है कि उपेंद्र राय द्वारा 2जी स्कैम मामले में जांच प्रभावित करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी राजेश्वर सिंह को रिश्वत देने के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के कोप से बचने हेतु सहाराश्री सुब्रत राय सहारा ने कार्रवाई करते हुए उन्हें मीडिया से हटाकर एमसीसी के साथ संबद्ध कर दिया है. सहारा से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्र इस खबर को कनफर्म तो कर रहे हैं लेकिन सभी का कहना है कि इस बारे में अभी तक कोई आंतरिक निर्देश या लेटर जारी न होने के कारण कुछ भी पुष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता.

वहीं, उपेंद्र राय से जुड़े करीबी लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2जी स्कैम मामले के खुद संज्ञान में लेने और जांच को मानीटर किए जाने के कारण उपेंद्र राय के फंसने की पूरी आशंका है. इसी वजह से सहारा समूह यह संदेश देना चाहता है कि उसने गलत कार्य करने वालों को दंडित कर दिया है. पर उपेंद्र राय पर कार्यवाही इतना आसान नहीं है. सहारा समूह के ढेर सारे राज जानने वाले उपेंद्र राय को सहाराश्री सुब्रत राय सहारा का विश्वस्त माना जाता है और यह भी कहा जाता है कि उपेंद्र राय ने जो कुछ किया वह सब सहारा समूह के हित में, सहारा के शीर्षस्थ लोगों के संज्ञान में लाकर किया. ऐसे में अगर सहारा प्रबंधन की कार्यवाही से नाराज होकर उपेंद्र राय मुंह खोलते हैं तो बड़ा नुकसान सहारा समूह का होगा. तब संभव है कि सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय को भरोसे में लेकर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करे ताकि सहारा की लाज भी बच जाए और उपेंद्र राय को बुरा भी न लगे.

जो भी हो, इन दिनों सहारा समूह में उपेंद्र राय की ही चर्चा है. उपेंद्र राय से पीड़ित सैकड़ों लोग जहां उपेंद्र राय को सहारा से निकलवाने में लगे हैं तो सहारा प्रबंधन उपेंद्र राय को किसी भी कीमत पर खोने को तैयार नहीं है. भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि उपेंद्र राय के खिलाफ सहारा में कोई कार्रवाई होना मुश्किल है क्योंकि उपेंद्र राय सहारा के कई मामलों को उपरी स्तर पर फैसलाकुन मोड़ पर ले जा चुके हैं और काफी कुछ अब उनके ही हाथ में है. ऐसे में सहारा उन्हें बाहर निकालकर या डिमोट कर कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता.

कुछ लोगों का कहना है कि आज रात आठ बजे तक सहारा में उपेंद्र राय की किस्मत को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ था. आईपीएल में पुणे वारियर्स का मैच होने के कारण सहारा के उच्च पदाधिकारियों की टीम दिल्ली में डेरा डाले हैं. संभव है आज देर शाम कोई फैसला उपेंद्र राय के बाबत हुआ हो. फिलहाल उपेंद्र राय को लेकर जो चर्चाएं हैं, जो अफवाह है, उसमें दम कितना है यह तो वक्त बताएगा लेकिन सहारा में इन दिनों उपेंद्र राय गले की फांस बन चुके हैं जिन्हें निगलना और उगलना, दोनों सहारा प्रबंधन के लिए काफी कष्टकारी साबित हो रहा है.

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सहारा का संकट और शिवराज का विज्ञापन

सहारा के संकट के दिनों में शिवराज सरकार के एक विज्ञापन ने उसके निवेशकों को सावधान कर दिया है. कहते हैं कि संकट आए तो अपने भी मुंह फेर लेते हैं. ऐसा ही हाल सहारा ग्रुप का है. मध्य प्रदेश में सहारा को राज्य सरकार हर महीने करीब पचास लाख का विज्ञापन देती है. और इतना ही विज्ञापन छत्तीसगढ़ से भी मिल जाता है.

स्ट्रिंगर्स भी तीस-चालीस लाख का विज्ञापन अलग से कर देते हैं. कुल मिलाकर चाँदी ही चाँदी रहती है सहारा की. लेकिन हाल ही में जबसे सहारा ग्रुप संकट में आया है, सहारा पैरा बैंकिंग के डिपाजिटर्स भागने लगे हैं. इसका एक कारण तो कुछ ”शुभचिंतकों” का यह एसएमएस था कि शायद सुब्रत रॉय भी 2जी-3जी मामले में जेल जा सकते हैं, ऐसे में सहारा से अपना पैसा निकाल लेना उचित है. बची खुची कसर प्रदेश की शिवराज सरकार ने नईदुनिया, दैनिक भास्कर और पत्रिका सहित सभी प्रमुख अख़बारों में एक विज्ञापन छपवाकर पूरी कर दी जिसमें यह बताया गया है कि किसी भी ”आयाराम गयाराम फाइनेंस कंपनी में अपना पैसा न लगाएँ क्योंकि यह सुरक्षित नहीं”.

सभी जानते हैं कि सहारा का आधार ग्रामीण इलाकों के वे निवेशक हैं जिन्होंने बैंक से ज़्यादा ब्याज के लालच में वहाँ धन लगा रखा है. विज्ञापन में कहीं भी सहारा का नाम नहीं है लेकिन लोग जानते हैं कि ब्लैकमेलिंग के शिकार शिवराज को यही बेहतर मौका मिला सहारा से हिसाब बराबर करने के लिए. विज्ञापन और एसएमएस का असर यह हुआ कि सहारा पैरा बैकिंग का नियमित होने वाला कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अब इसे कहते हैं दुबले और दो आषाढ़. विज्ञापन की प्रतिलिपि संलग्न है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

सहारा ने खुद को बेदाग बताया

: ईडी अधिकारी पर दबाव बनाने का मामला : राजेश्वर सिंह से पत्रकार सुबोध जैन ने पूछे थे 25 सवाल : सहारा इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करता है। मामले से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी के खिलाफ वह तब तक कुछ कहने की स्थिति में नहीं है जब तक कि सुप्रीम कोर्ट से उसे इसकी इजाजत न मिल जाए। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स की ओर से लखनऊ में जारी एक बयान में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सहारा बेदाग है।

2 जी स्पेक्ट्रम मामले या अन्य किसी प्रकरण में उसका मेसर्स स्वान से कोई लेना-देना नहीं है। उसने मीडिया की उन रिपोर्टों का भी खंडन किया है जिनमें कहा गया है कि सहारा ने मेसर्स स्वान में 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स ने सहारा पर लगाए गए आरोपों को निराधार और बदनीयती भरा बताया है। उसने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद वह मामले की सच्ची तस्वीर सबके सामने प्रस्तुत करेगा। उसने कोर्ट से यह भी निवेदन किया है कि यदि सहारा पर लगाए गए आरोप झूठे और निराधार साबित होते हैं तो वह इसके लिए जिम्मेदार लोगों को भी सजा दे।

उल्लेखनीय है कि सहारा ग्रुप के सीएमडी को मनी लांड्रिंग निवारण अधिनिमय के तहत दो फरवरी और उसके बाद समन जारी किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक राजेश्वर सिंह को जिस घटिया तरीके से डराया-धमकाया गया और ब्लैकमेल करने की कोशिश गई, उसे पीठ ने बहुत गंभीरता से लिया। व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी राजेश्वर सिंह ने कोर्ट से कहा है कि पत्रकार सुबोध जैन ने उन्हें 25 सवाल भेजे हैं।

ये सवाल उनकी व परिवार की संपत्ति, संपर्क और अन्य मुद्दे से जुडे़ हैं। इसके साथ ही उनके खिलाफ सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित-प्रसारित कराने का अभियान चलाने की धमकी दी। पत्रकार सुबोध जैन द्वारा सिंह को पत्र लिख कर व्यक्तिगत सवाल पूछने को अदालत ने बहुत गंभीर मामला माना है। अदालत ने कहा कि यह बहुत हास्यास्पद है कि सहारा के सीएमडी को नोटिस जारी करने के बाद जांच अधिकारी राजेश्वर सिंह की निजी जिंदगी को कलुषित करने का प्रयास किया गया। पीठ ने कहा कि मामला जितना नजर आता है, उससे कहीं अधिक है। एक अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश भी की गई। अदालत ने कहा कि सीबीआइ, ईडी और आयकर विभाग बगैर किसी से प्रभावित हुए अपनी जांच करेंगे। कितनी भी बड़ी ताकत इसमें बाधा डालने की कोशिश करेगी तो उससे कठोरता से निपटा जाएगा।

2जी स्पेक्ट्रम प्रकरण की जांच में अड़ंगेबाजी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुब्रत रॉय और दो पत्रकारों उपेंद्र राय और सुबोध जैन को अवमानना नोटिस जारी कर छह हफ्ते के अंदर जवाब तलब किया है। न्यायाधीश जीएस सिंघवी और एके गांगुली की पीठ ने कहा-‘दस्तावेजों को देखने के बाद प्रथम दृष्ट्या हमारा मानना है कि राजेश्वर सिंह द्वारा की गई जांच में हस्तक्षेप की कोशिश की गई है। इसलिए हमने स्वत: संज्ञान लिया और उन्हें नोटिस भेजा है।’

पीठ ने सहारा इंडिया न्यूज नेटवर्क और उसकी आनुषांगिक इकाइयों द्वारा राजेश्वर सिंह से संबंधित किसी भी कार्यक्रम या खबर के प्रकाशन या प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। पीठ ने कहा कि कोई भी स्टोरी प्रकाशित नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो कोई बड़ा आदमी ‘सरकारी मेहमान’ बनेगा। उन्हें मालूम होना चाहिए कि ‘लक्ष्मण रेखा’ क्या है। पीठ ने इस पर दुख जताया कि ईडी द्वारा सुब्रत रॉय को चेन्नई की कंपनी एस-टेल के साथ लेन-देन के दस्तावेजों के साथ पेश होने के लिए नोटिस जारी करने के बाद पत्रकार उपेंद्र राय और सुबोध जैन इस जांच में हस्तक्षेप करने के लिए सक्रिय हो गए। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को लेकर एस-टेल सीबीआइ के जांच के दायरे में है।

13 को सुप्रीम कोर्ट में होगी उपेंद्र राय के खिलाफ सुनवाई

: सीपीआईएल ने दायर की याचिका : सहारा मीडिया के डायरेक्‍टर न्‍यूज उपेंद्र राय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. 2जी मामले में याचिका डालने वाली स्‍वयं सेवी संस्‍था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्‍ट लेटिगेशन (सीपीआईएल) ने इस मामले में उपेंद्र राय को भी कोर्ट में खींचा है. संस्‍था ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि सहारा न्‍यूज नेटवर्क के निदेशक न्‍यूज उपेंद्र राय ने ईडी अधिकारी को नीरा राडिया का पक्ष लेने के लिए रिश्‍वत देने की कोशिश की थी.

सीपीआईएल के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने 2जी आबंटन घोटाले की जांच प्रभावित करने के लिए उपेंद्र राय के प्रयास संबंध मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 13 मई की तिथि तय की है. पीठ ने याचिकाकर्ता सीआईपीएल को इस बारे में अपने सभी दस्‍तावेज भी पेश करने को कहा है.

सीपीआईएल की तरफ प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि उपेंद्र राय ने ईडी के सहायक निदेशक से कथित तौर पर मुलाकात की थी और राडिया का पक्ष लेने के लिए उन्‍हें दो करोड़ रुपये रिश्‍वत देने की पेशकश की थी. राडिया के खिलाफ तमाम ए‍जेंसिया जांच कर रही है. उन्‍होंने घटना के बारे में ईडी के अधिकारी द्वारा उपनिदेशक को लिखे गए पत्र की प्रति भी पेश की. जिसके बाद कोर्ट ने इसकी सुनवाई को जरूरी मानते हुए सभी दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करने को कहा है.

मैं सिर्फ एक बार ईडी के अधिकारी राजेश्वर सिंह से मिला : उपेंद्र राय

प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के चक्कर में बुरी तरह घिर चुके सहारा मीडिया के डायरेक्टर न्यूज उपेंद्र राय ने कहा है कि उनकी मुलाकात प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह से सिर्फ एक बार हुई है और वह भी कुछ मिनटों के लिए. बात जुलाई-अगस्त 2010 की है. तब तक नीरा राडिया के पास कोई नोटिस नहीं भेजा गया था. इस एक मुलाकात के अलावा मेरी कोई मुलाकात किसी प्रवर्तन निदेशालय अधिकारी से नहीं हुई है, इसलिए रिश्वत देने का सवाल ही नहीं उठता.

जहां तक नीरा राडिया से संबंधों की बात है तो जब मैं एक चैनल में एडिटर इनवेस्टीगेशन के पद पर काम कर रहा था तो सिविल एविएशन से संबंधित स्टोरीज के लिए थोड़ी बहुत बातचीत नीरा राडिया से हुई. राडिया से अब तक मेरी आठ-दस बार मुलाकात हुई होगी लेकिन ये सारी मुलाकात बतौर प्रोफेशनल जर्नलिस्ट की और स्टोरीज के लिए जानकारी जुटाने के मकसद से की.  उपेंद्र राय ने कहा कि सीबीआई को मेरी ईडी के अधिकारी राजेश्वर सिंह के साथ सभी कथित बैठकों और फोन पर बातचीत की पूरी जांच करनी चाहिए. राजेश्वर और मुझसे, हम दोनों से पूछताछ होनी चाहिए. मुझे कोई दिक्कत नहीं है. मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा. मैं जरूर चाहूंगा कि प्रवर्तन निदेशालय के उन अधिकारियों को भी नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाना चाहिए जिन्होंने मेरे पर आरोप लगाए हैं.

उपेंद्र राय ने बताया कि ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह से मेरी मीटिंग पांच मिनट के करीब हुई. मेरे पर आरोप एक गहरी साजिश का हिस्सा है ताकि मेरी छवि खराब की जा सके. जो कुछ फैलाया जा रहा है, वह सब झूठ है. यह सब मेरे विरोधी करा रहे हैं. किसी भी जांच या मामले में मैंने कभी किसी व्यक्ति, अथॉरिटी से संपर्क नहीं किया है. ईडी और सीबीआई के अधिकारी आरोपों को साबित करके दिखाएं.

उपेंद्र राय ने जानकारी दी कि उन्होंने जनवरी 2010 में ईडी के एक अधिकारी की संदेहास्पद गतिविधियों के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय में शिकायत की थी. संभव है, यह सब बदला लेने की कार्रवाई हो. उपेंद्र राय ने बताया कि उन्होंने 2009 में ईडी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ खबरें प्रसारित की थीं. पिछले साल नवंबर में मैं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ विदेश यात्रा पर था. 10 दिनों तक देश से बाहर था. ईडी का पत्र नवंबर के अंत में भेजा गया. इसमें यह नहीं कहा गया है कि यह कथित मामला नवंबर में हुआ था. जो कुछ हो रहा है वह मेरे नाम और छवि को खराब करने वाला अभियान है.

(पीटीआई, हेडलाइंस टुडे और इकोनामिक टाइम्स से उपेंद्र राय की हुई बातचीत पर आधारित)

तीन महीने में हो जाएगा उपेंद्र राय की किस्मत का फैसला

सहारा न्यूज़ नेटवर्क के डायरेक्टर (न्यूज़) उपेन्द्र राय के विरुद्ध मिली शिकायत पर देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. ज्ञात हो की उपेन्द्र राय के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई की शिकायती पत्र लिखा था, जिसमे यह कहा गया था की कॉरपोरेट दलाल नीरा राडिया को बचाने के लिए सहारा न्यूज़ के उपेन्द्र राय ने निदेशालय के अधिकारियों को दो करोड़ बतौर रिश्वत का ऑफर दिया था ताकि मामले को प्रभावित किया जा सके.

यानि नीरा राडिया को बचाने के लिए उपेन्द्र राय खुलकर मैदान में उतर चुके हैं. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है कि प्रारंभिक जांच के लिए मामले को रजिस्टर्ड किया जा चुका है और जल्द ही उपेन्द्र राय को पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय से सम्मन भेजा जाएगा. पीटीआई के सूत्रों ने इस बात की भी जानकारी दी है कि प्रारंभिक जांच की समय सीमा तीन महीने राखी गयी है यानि तीन महीने के अंदर ही उपेन्द्र राय की किस्मत का फैसला हो जाएगा और इस बात का भी फैसला हो जाएगा कि उपेन्द्र राय सहारा में कितने दिन के मेहमान हैं.

हालाँकि उपेन्द्र राय अपने उपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दे रहें हो लेकिन सवालों के जच में तो वो हैं ही. आखिर आम लोगों के मन में यह सवाल तो है ही कि आखिर प्रवर्तन निर्देशालय जैसे जांच एजेंसियों को उपेन्द्र राय से कोई निजी दुश्मनी तो हो नहीं सकती कि उनके विरुद्ध सीबीआई को शिकायत करना पड़े. आखिर निदेशालय के अधिकारियों के सिर्फ उपेन्द्र राय का ही नाम क्यों लिया. हालांकि अब तो मामला सीबीआई कि जांच के दायरे में है लेकिन इसमें कहीं कोई दो राय नहीं हो सकती कि पूरे प्रकरण में मीडिया में ऊंचे पदों पर बैठे कई लोगों के दामन दागदार है. वक्त आने पर यह भी पता चल जाएगा कि हाई प्रोफाइल टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले और कॉरपोरेट दलाल नीरा राडिया को बचाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही है. लेकिन एक बात तो तय है कि मीडिया कि साख दांव पर है, और यही स्थिति रही तो मीडिया का और भी वीभत्स चेहरा नज़र आएगा.

लेखक अनंत कुमार झा झारखंड की पत्रकारिता में एक दशक से सक्रिय हैं. प्रिंट और टीवी दोनों माध्यमों में काम कर चुके हैं. इन दिनों दिल्ली में हैं.

काम न आया जोड़तोड़, उपेंद्र राय के खिलाफ सीबीआई ने केस दर्ज किया

अपनी जोड़तोड़ और काम कराने की मेधा के कारण सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा बनकर आए उपेंद्र राय ने ये सपने में भी न सोचा होगा कि एक दिन वे ही कठघरे में खड़े कर दिए जाएंगे और ऐसा होने से रोकने की उनकी तमाम कोशिशें नाकाम हो जाएंगी. जी हां. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उपेंद्र राय पर केस दर्ज कर लिया है और छानबीन शुरू कर दी है. प्रवर्तन निदेशालय के एक बड़े अधिकारी को दो करोड़ रुपये का रिश्वत आफर करके उपेंद्र राय ने नीरा राडिया का कोई काम कराने का अनुरोध किया था.

पर प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों ने रिश्वत लेने और काम करने, दोनों से इनकार कर उपेंद्र राय की हरकत की शिकायत अपने बड़े अधिकारियों और सीबीआई से कर लिखित में कर डाली. यह मामला सहारा और उपेंद्र राय के गले की फांस बन चुका है. उपेंद्र राय के खिलाफ सीबीआई द्वारा केस रजिस्टर करने से संबंधित पीटीआई द्वारा जारी की गई खबर इस प्रकार है….

CBI registers case to probe bribe offer by scribe to ED sleuth

Press Trust Of India, New Delhi

CBI has begun investigation into the alleged bribe offer made by a journalist said to be on behalf of Corporate lobbyist Niira Radia after registering a case following a complaint by Enforcement Directorate. Highly-placed sources in the agency said a Preliminary Enquiry (PE) has been registered and the journalist – Upendra Rai – will be called for questioning soon after the statement of Enforcement Directorate was recorded.

The Enforcement Directorate has asked the CBI to probe the incident claiming that Rai, working as director (News) Sahara News Network, had approached one of its officers, probing the 2G scam, with a bribe offer of Rs two crore. The sources said the probe into the PE has begun and it would be completed in three months.

When contacted, Rai denied the allegations and said that he would cooperate in the probe. “I hope that a through probe is carried out in the case which includes summoning of the ED official who made allegation against me,” he said. He acknowledged that he had known corporate lobbyist Niira Radia but that was on the professional front as he was heading the business department of another news channel.

“During the last so many years, I may have spoken or met her for not more than eight to ten times,” he said and termed it as a “deep-rooted conspiracy to malign” him. Rai said that he had met the officer in question – Assistant Director Rajeshwar Singh – merely for “five minutes”.

The allegation is that the journalist had sought an appointment with the official on the pretext of “furnishing some information” in its probe in the 2G scam. The ED is probing alleged violation of Prevention of Money Laundering Act in the spectrum scam. Denying any association with Rai or the bribe offer, a spokesperson for Vaishnavi Corporate Communications Private Limited said “we categorically deny the allegations as mentioned.

“We are not aware of any journalist acting on our behalf. It is a matter of record that we have always cooperated with all the investigative agencies and have been available for all personal appearances on intimation.

“We welcome proper and thorough investigation by the authorities to unearth the truth.  We hope that the truth will emerge and lay to rest all these wild allegations,” the spokesperson said.

ईटी में रोहिणी ने ”राडिया-राय रैकेट” का राजफाश किया

: दो करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश करने वाला पत्रकार : दी इकोनोमिक टाइम्स की पत्रकार रोहिणी सिंह ने उपेंद्र राय के चेहरे से पर्दा उठा दिया है. ईटी में रोहिणी की बाइलाइन छपी खबर में विस्तार से बताया गया है कि कैसे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को रिश्वत का लालच देकर राडिया के अनैतिक काम कराने की कोशिश की गई. और राडिया की तरफ से काम कराने में जुटे ये सज्जन कोई और नहीं बल्कि सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा हैं उपेंद्र राय.

बहुत कम उम्र में सड़क से शिखर तक पहुंचने वाले इस शख्स के कामकाज के रहस्यों पर से पर्दा उठने लगा है. सहारा की चिटफंड कंपनी के एजेंट के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले उपेंद्र राय बाद में राष्ट्रीय सहारा अखबार के लखनऊ संस्करण में संवाद सूत्र बन गए थे. धीरे धीरे वे सहारा में आगे बढ़ने लगे. बाद में मुंबई चले गए. स्टार न्यूज का साथ पकड़ा. मुंबई की दुनिया उपेंद्र राय को रास आई और वहां बड़े बड़ों के साथ रिश्ते कायम कर बड़े बड़ों के हिसाब से कामकाज करना शुरू कर दिया.

बाद में इसी प्रभाव व रूप का दर्शन कराकर सहाराश्री सुब्रत राय सहारा को मोहित किया और सहारा मीडिया में सर्वेसर्वा बन गए. तमाम तरह के कानूनी विवादों, आरबीआई की पाबंदियों, इनकम टैक्स के पचड़ों में फंसे सहारा ग्रुप को एक संकटमोचक की तलाश थी और उपेंद्र राय में यह संकटमोचक सहाराश्री को दिख गया. बस क्या था. सहारा मीडिया के शीर्ष पर आसीन सभी लोगों के सिर कलम कर कुर्सी उपेंद्र राय के लिए खाली करा दी गई और उपेंद्र राय ने कुर्सी पर बैठते ही बाकी बचे खुचे विरोधियों को निपटा दिया.

सहारा मीडिया में इन दिनों उपेंद्र राय का राज चलता है. सबने उनकी सत्ता को स्वीकार भी कर लिया है. लेकिन तभी राडिया स्कैंडल के प्रकट हो जाने से उपेंद्र राय का भी भेद खुलने लगा. उपेंद्र राय और राडिया के बीच बातचीत का टेप भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित होने के बाद उपेंद्र राय और सहारा की तरफ से एक लीगल नोटिस भड़ास4मीडिया को भिजवाया गया. कुछ और खबरों पर भी उपेंद्र राय ने लीगल नोटिस भड़ास4मीडिया को भिजवाया.

लेकिन सच्चाई देर तक छुपने वाली नहीं थी. उपेंद्र राय और नीरा राडिया के रिश्तों पर से परत हटने लगी है. अब यह पता चलने लगा है कि दरअसल उपेंद्र राय कोई और नहीं बल्कि नीरा राडिया गैंग के एक प्रमुख खिलाड़ी हैं और जिस तरह नीरा राडिया के संपर्क अनंत हुआ करते थे और कोई भी काम वह करा पाने में सक्षम हुआ करती थी, उसी चेन को पकड़कर उपेंद्र राय ने खुद को सहारा के संकटमोचक के रूप में प्रस्तुत किया. और इस झांसे में सहाराश्री सुब्रत राय सहारा आ भी गए.

वैसे भी, सुब्रत राय सहारा तो कोई दूध के धुले नहीं हैं. उन्हें ऐसे ही बंदों की जरूरत होती है जो मीडिया, ज्यूडिसिरी, ब्यूरोक्रेसी, पालिटिशियन्स आदि को सफलतापूर्वक मैनेज कर सके. और अभी तक इस खेल में उपेंद्र राय सफल दिख रहे थे लेकिन राडिया टेपकांड ने उनकी कलई खोल दी. ताजे खुलासे के बाद यह माना जा रहा है कि सहारा समूह अपनी इज्जत बचाने के लिए उपेंद्र राय को देर सबेर किनारे कर देगा क्योंकि इतने बड़े आरोप व इतने बड़े विवाद के कारण सहारा मीडिया की ब्रांड इमेज को बड़ा झटका लगा है.

जिस तरह प्रभु चावला को टीवी टुडे ग्रुप से चलता किया गया, जिस तरह वीर सांघवी को एचटी में किनारे किया गया, हो सकता है उपेंद्र राय को भी कम महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर या तबादला करके सहारा अपनी साख बचाने का काम करे. हालांकि यह भी संभव है कि जिस तरह एनडीटीवी समूह ने बड़ी ढिठाई से अब तक बरखा दत्त का बचाव किया है, उसी तरह सहारा समूह भी उपेंद्र राय के एहसानों तले दबे होने के कारण उनका अंत तक बचाव करे.  यहां हम द इकोनोमिक टाइम्स में छपी उपेंद्र राय से संबंधित खबर को स्कैन करके प्रकाशित कर रहे हैं. इस खबर में उपेंद्र राय और नीरा राडिया, दोनों का बयान है, जिसमें दोनों ने लगाए गए आरोपों से इनकार किया है.

ईटी हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित खबर

2जी मामले में पत्रकार ने की रिश्वत की पेशकश

रोहिणी सिंह

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीबीआई से एक मामले की जांच करने को कहा है, जिसमें कथित रूप से एक पत्रकार ने कॉरपोरेट लॉबीइस्ट नीरा राडिया की तरफ से ईडी के एक अधिकारी से संपर्क किया था। पिछले साल नवंबर में भेजे गए पत्र में ईडी ने कहा था कि सहारा न्यूज नेटवर्क में सीनियर एडिटोरियल पद पर काम करने वाले उपेंद्र राय ने ईडी के एक अधिकारी को काम कराने के बदले ‘भुगतान’ की पेशकश की थी। इस पत्र को गोपनीय बताया गया था।

इस पत्र में लिखी गई बातें ईटी को बताई गई हैं। ईडी के अतिरिक्त निदेशक आर पी उपाध्याय द्वारा यह पत्र सीबीआई के तत्कालीन निदेशक अश्विनी कुमार को भेजा गया था। इसे ईडी के निदेशक अरुण माथुर की इजाजत से भेजा गया था। ईटी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाबों में राय ने राडिया की तरफ से ईडी से संपर्क करने की बात खारिज कर दी। राडिया की पीआर एजेंसी वैष्णवी ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं है। 25 नवंबर को लिखे गए इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि राय ने राडिया की तरफ से ईडी अधिकारी से मदद मांगी थी और उन्होंने संकेत दिया था कि वह इसके लिए 2 करोड़ रुपए भुगतान करने को तैयार हैं। राय ने ईडी अधिकारी से यह भी कहा था कि वह राडिया को 12 साल से जानते हैं।

राय ने यह कहते हुए ईडी के अधिकारी से मिलने का समय मांगा था कि वह कुछ ऐसी जानकारियां देना चाहते हैं, जो 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच करने वाले अधिकारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। पत्र में लिखी गई बातों के मुताबिक, ईडी अधिकारी ने राय के प्रस्ताव को विनम्रता से खारिज करने के बाद इस मामले की जानकारी अपने बॉस माथुर को दी थी। उसके बाद माथुर ने ‘उचित विचार-विमर्श और जरूरी कार्रवाई’ के लिए इस मामले को सीबीआई को भेज दिया था। अधिकारी का नाम इस पत्र में नहीं बताया गया है। माथुर ने इस मामले के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सीबीआई के प्रवक्ता ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन, ईडी के एक दूसरे अधिकारी ने ईटी को बताया कि कुछ दिन पहले राय के खिलाफ शिकायत दोबारा सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर ए पी सिंह को भेजी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

राय, राडिया ने ईडी के आरोप को खारिज किया है। राय ने राडिया की तरफ से ईडी के अधिकारी से मुलाकात करने के आरोप का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह झूठी और उनकी छवि खराब करने वाली अफवाहें हैं, जो उनके विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही हैं। ईमेल से ईटी को दी गई जानकारी में राय ने कहा, ‘किसी अथॉरिटी द्वारा की जाने वाली जांच से संबंधित किसी मामले में मैंने कभी किसी व्यक्ति, अथॉरिटी से संपर्क नहीं किया है, इस मामले को तो छोड़ ही दीजिए। इस मामले में आपके पास जो भी जानकारी है या आपके द्वारा पेश की गई है, वह गलत है और ये झूठी अफवाहें हैं जो मेरे विरोधियों और मुझसे शत्रुता रखने वाले लोगों द्वारा फैलाई जा रही हैं।’

राय ने यह भी कहा कि उन्होंने अधिकारियों (ईडी और सीबीआई) को इस आरोप को सही साबित करने की खुली चुनौती दी है। राय के मुताबिक, उन्होंने जनवरी 2010 में ईडी के एक अधिकारी की संदेहास्पद गतिविधियों के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय में शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि यह उनसे बदला लेने की कार्रवाई भी हो सकती है।

राय ने यह भी कहा कि उन्होंने 2009 में ईडी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ खबरें प्रसारित की थीं। राय ने कहा कि पिछले साल नवंबर में वह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ विदेश यात्रा पर गए थे और 10 दिनों तक देश से बाहर थे। ईडी का पत्र नवंबर के अंत में भेजा गया था, लेकिन इसमें यह नहीं कहा गया है कि यह कथित मामला नवंबर में हुआ था। राय ने राडिया के साथ पुराना संबंध होने से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खबरों के बारे में राडिया से सिर्फ कुछ बार बातचीत की है।

उन्होंने कहा, ‘यह उनके नाम और छवि को खराब करने वाला अभियान है।’ ईटी को भेजी गई एक ईमेल में वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के एक प्रवक्ता ने राय के साथ राडिया के कथित संबंध को सिरे से खारिज कर दिया। राडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे लिए काम करने वाले एक पत्रकार से संबंधित आपके सवाल पूरी तरह से हमारी जानकारी और समझ से बाहर हैं। यह बात जगजाहिर है कि हमने सभी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया है और कहे जाने पर हम हमेशा व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहे हैं।’ प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह हमारी छवि को नुकसान पहुंचाने के मकसद से हमारे खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।

राडिया से रिश्ता रखना महंगा पड़ रहा, उपेंद्र राय के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू!

उपेंद्र राय: खुलने लगी पोल : ईडी ने सीबीआई को लिखा था पिछले साल पत्र : राडिया का काम कराने के लिए ईडी अधिकारी से मांगा था फेवर और बदले में दो करोड़ देने का किया था आफर : ईडी ने उपेंद्र राय के खिलाफ शिकायती पत्र फिर भेजा सीबीआई के पास : उपेंद्र राय ने आरोपों से इनकार किया और इसे विरोधियों की साजिश करार दिया :

स्टार न्यूज छोड़कर सहारा मीडिया में सबसे बड़े पत्रकार के पद पर नियुक्त होने वाले उपेंद्र राय कुछ ही महीनों बाद नीरा राडिया से बातचीत का टेप लीक होने के कारण चर्चा में आए. राडिया कई जगहों पर बातचीत में उपेंद्र राय एंड कंपनी का जिक्र करती है. राडिया से बातचीत में उपेंद्र राय भी दंडवत की मुद्रा में दिखते हैं. अब नए खुलासे से उपेंद्र राय के साथ-साथ सहारा की भी नींद उड़ी है और माना जा रहा है कि इस खुलासे के बाद उपेंद्र राय को सहारा से जाना पड़ सकता है क्योंकि सहारा इतने विवादित व्यक्ति को देर तक कांटीन्यू नहीं कर सकता. और इस नए खुलासे से यह भी स्पष्ट हो गया है कि उपेंद्र राय दरअसल नीरा राडिया के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे.

वैसे, उपेंद्र राय हर बार यही कहते हैं कि वे किसी स्टोरी के चक्कर में इनसे या उनसे बात कर रहे थे.  चलिए आपको मूल कहानी बताते हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक पत्र लिखकर उस घटना की जांच का अनुरोध किया है जिसमें एक पत्रकार ने ईडी के एक अधिकारी को एक मामले को सलटाने के लिए फेवर मांगा था और बदले में ठीकठाक पैसे देने का वादा किया था. उस पत्रकार ने जिस काम के लिए अनुरोध किया था, वह काम नीरा राडिया की तरफ से था.

पत्रकार का नाम है उपेंद्र राय. पैसे दो करोड़ रुपये तक देने के आफर किए थे. पिछले साल नवंबर में ईडी की तरफ से सीबीआई को यह पत्र लिखा गया और इस पत्र को अति गोपनीय श्रेणी दिया गया. हम आपको यहां यह भी बता देते हैं कि यह पत्र किस अधिकारी ने किस अधिकारी को लिखा था. ईडी के अतिरिक्त निदेशक आरपी उपाध्याय ने अपने निदेशक अरुण माथुर की सहमति से यह पत्र तत्कालीन सीबीआई डायरेक्टर अश्विनी कुमार को भेजा था. पत्र पिछले साल 25 नवंबर को भेजा गया. बताया जाता है कि उपेंद्र राय ने काम होने पर दो करोड़ रुपये देने की बात कही थी. सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र राय ने ईडी अधिकारियों को बताया था कि वे नीरा राडिया को करीब 12 वर्षों से जानते हैं.

सीबीआई को भेजे पत्र में कहा गया है कि उपेंद्र राय के प्रस्ताव को ईडी अफसरों ने ठुकरा दिया और इस मामले को अपने निदेशक अरुण माथुर के पास भेज दिया. तब माथुर की सहमति से उपाध्याय ने सीबीआई को जरूरी कार्रवाई व जांच के लिए इस बारे में पत्र लिखकर भेज दिया. ताजी सूचना है कि कुछ दिनों पहले ईडी अफसरों ने उस शिकायती पत्र को दुबारा वर्तमान सीबीआई निदेशक एपी सिंह के पास भेज दिया. सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने उपेंद्र राय के खिलाफ गुपचुप तरीके से जांच शुरू कर दी है.

उधर, उपेंद्र राय ने राडिया की तरफ से किसी काम की सिफारिश ईडी अधिकारी से किए जाने से इनकार किया. उपेंद्र राय का कहना है कि ऐसा कोई मामला उन्हें याद नहीं आता. संभव है वे 2जी स्कैम से संबंधित खबर के लिए कुछ सूचनाओं की बाबत मीटिंग के इच्छुक रहे हों. पर उपेंद्र राय का कहना है कि उन्होंने राडिया की तरफ से किसी से भी आजतक कोई मीटिंग नहीं की. उपेंद्र राय के मुताबिक उनके विरोधी उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं. इस प्रकरण के बाबत जो भी पत्र या दस्तावेज हैं, वे सब झूठे और आधारहीन हैं.

नीरा राडिया – उपेंद्र राय के बीच रिश्ते के जो कुछ टेप व खबरें हैं, उन्हें नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके सुन पढ सकते हैं-

उपेंद्र राय ने भी की थी नीरा राडिया से बातचीत

उपेंद्र राय और नीरा राडिया के बीच बातचीत का टेप

ये जो उपेंद्र राय का ब्रदर इन ला या कजिन ब्रदर है, प्रदीप राय, वो यही तो काम करता है

दिल्ली हाईकोर्ट के जज विजेंद्र जैन ने 9 करोड़ रुपये रिश्वत लिए थे

लंबी छुट्टी से लौटकर आफिस आ सकेंगे बर्नी साहब?

: क्या कभी लौट पाएंगे अजीज बर्नी के अच्छे दिन : सहारा मीडिया में एक बड़ी तेज चर्चा है. वो ये कि अजीज बर्नी के दिन गए. अब उनके नीके दिन, अच्छे दिन न लौटेंगे. सहारा मीडिया के उर्दू अखबारों-मैग्जीनों के ग्रुप एडिटर के रूप में कार्यरत अजीज बर्नी के बुरे दिन उपेंद्र राय के न्यूज डायरेक्टर बनने के बाद शुरू हुए. ताजी सूचना है कि उन्हें लंबी छुट्टी पर जाने को कह दिया गया है.

कुछ लोगों का कहना है कि एक तरह से उन्हें सस्पेंड किया गया है पर उनकी सेवाओं व वरिष्ठता का ध्यान रखते हुए बर्नी साहब को चुपचाप छुट्टी बढ़ा लेने को कहा गया है. माना जा रहा है कि सहारा प्रबंधन अजीज बर्नी के साथ लंबे जुड़ाव को टाटा बाय बाय बोलने वाला है. हालांकि सहारा में परंपरा है कि यहां जुड़ने वालों को जल्दी टाटा बाय बाय नहीं किया जाता. जिनसे छुटकारा पाना होता है, उन्हें साइडलाइन कर दिया जाता है. सहारा मीडिया में दिग्गज पदों पर कार्यरत रहे कई लोग इन दिनों सहारा में बनवास काट रहे हैं. इनकी लिस्ट में अब अजीज बर्नी का भी नाम शामिल हो गया है. कानाफूसी पर यकीन करें तो अजीज बर्नी का काम उनके अधीन रहे शकील हसन शम्सी और असद रजा को सौंप दिया गया है. ये दोनों पहले भी बर्नी के अंडर में कार्यरत थे लेकिन बर्नी के छुट्टी पर भेजे जाने के बाद इन दोनों का दायित्व बढ़ा दिया गया है.

अजीज बर्नी को सहारा में साइडलाइन करने की हिम्मत बड़े-बड़ों को नहीं हो पाती थी लेकिन ये बड़ा काम बेहद साधारण तरीके से उपेंद्र राय न कर दिखाया. जो लोग उपेंद्र राय को कमतर आंकते थे, वे भी अब मानने लगे हैं कि इस युवा ने कम समय में ही बेहद शांत तरीके से बहुतों के कान काट डाले हैं. कुछ का कहना है कि उपेंद्र राय ने कुछ नहीं किया, सब अपने करमों को फल पा रहे हैं. उपेंद्र ने तो बस सबको आइना दिखाने का काम शुरू किया है. बर्नी साहब को नजदीक से जानने वाले कहते हैं वे फीनिक्स पंछी की तरह हैं, जो लोग उनके अंत की भविष्यवाणी करते हैं, उन्हें बार-बार झूठा साबित होना पड़ता है क्योंकि बर्नी साहब अचानक सीन में गेस्ट अपीयरेंस की तरह प्रकट होते हैं और देखते ही देखते मुख्य कैरेक्टर को अपना लेते हैं. संभव है ये चमत्कार इस बार भी हो लेकिन बर्नी विरोधियों का कहना है कि काठ की हांड़ी आग पर बार-बार नहीं चढ़ती.

27 दिसंबर, उर्दू चैनल और उपेंद्र राय

: 27 तारीख उपेन्द्र राय के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण है या फिर मिर्जा गालिब के लिहाज से : मीडिया में ये जो नया खेल शुरू हुआ है, वो आने वाले समय में एक बेहूदा ट्रेंड को जन्म देगा : मीडिया में तारीखें ऐसी ही बदलती है, मीडिया अपना कैलेंडर इसी तरह से बदलता है :

सहारा मीडिया ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर उपेन्द्र राय ने 27 दिसंबर 2010 को दिल्ली के ली मीरिडियन होटल में उर्दू चैनल आलमी सहारा के उदघाटन के मौके पर कहा कि उनकी इच्‍छा थी कि इस चैनल को एक ऐसी तारीख से जोड़ पाएं जो वाकई एक तारीख हो और मिर्जा गालिब की जयंती से बेहतर कोई दिन हो नहीं सकता था। हमने चैनल पर भी देखा कि मिर्जा गालिब की जयंती से जुड़ी दिखाई खबरें दिखाई जा रही है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गालिब की शायरी और हवेली का जिक्र करते हुए कहा कि देखिए मिर्चा गालिब की हवेली कितनी छोटी है लेकिन उन्होंने कितनी बड़ी-बड़ी शायरी की।

इस बात को आगे बढ़ाते हुए फेसबुक पर मेरा लिखने का मन हुआ कि- देखिए,गालिब कितनी छोटी सी हवेली में रहा करते थे, खुद ही कहा करते थे कि लोग पूछते हैं गालिब कौन है और आज उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए कितने बड़े होटल में, कितने लोगों के बीच एक उर्दू चैनल लांच किया जा रहा है। उपेन्द्र राय ने मिर्जा गालिब की जयंती 27 दिसंबर को चैनल लांच करके लोगों के बीच ये संदेश देने की भरपूर कोशिश की कि उर्दू तहजीब और भाषा को वो कितना सम्मान देते हैं। उर्दू प्रेमियों को ऐसे मीडिया चैनलों के प्रति एक बार फिर प्यार उमड़ जाए। लेकिन मीडिया की शक्ल क्या वाकई इतनी खूबसूरत है कि उससे थोड़ी-बहुत किच-किच के बाद फिर प्यार हो जाए?

हम सबके लिए 27 दिसंबर मिर्जा गालिब की जयंती के तौर पर एक खास दिन है। अगर इस दिन में मीडिया के लिए न्यूज वैल्यू है तो खास दिन है, अगर नहीं है तो वैसा ही है जैसे आए दिन साहित्यकारों,नोबल पुरस्कार विजेताओं या फिर दूसरे संस्कृतिकर्मियों की जयंतियां बिना किसी आहट के गुजर जाती है। उपेन्द्र राय के वक्तव्य पर गौर करें कि वो आलमी सहारा चैनल को किसी ऐतिहासिक दिन से जोड़ना चाहते थे। ये ऐतिहासिक दिन जाहिर तौर पर उर्दू से जुड़े किसी महान शख्स का होता या फिर कोई ऐसी घटना जो कि उर्दू की तहजीब से जुड़ती हो। ये सुनने में कितना अच्छा लगता है कि उपेनद्र राय को यहां की संस्कृति और ऐतिहासिक बोध को लेकर कितनी गहरी चिंता है? लेकिन आज सुबह जब हमने उपेन्द्र राय की इस महानता और उदात्त विचारों को जानकर उनके बारे में और अधिक जानने की कोशिश की तो गूगल पर सबसे ज्यादा जिन खबरों को लेकर लिंक मिले वो यह कि- 27 दिसंबर को ही उपेन्द्र राय ने स्टार न्यूज को बाय बाय करके सहारा का दामन पकड़ा था। साथ में बीबीसी के पुराने मीडियाकर्मी संजीव श्रीवास्तव भी आए।

यानी इन लिंक्स से मिली खबरों के मुताबिक 27 दिसबंर वो तारीख है जिस दिन उपेन्द्र राय ने पहली बार सहारा प्रणाम कहा और ऐसा करते हुए उन्हें कल दो साल हो गए। उनके जीवन का यह सबसे जरुरी तारीख है जहां वो महज 28 साल की उम्र में सहारा मीडिया ग्रप के न्यूज डायरेक्टर बन जाते हैं। उपेन्द्र राय के लिए इससे बड़ा ऐतिहासिक दिन औऱ भला क्या हो सकता है कि जो शख्स कुछ साल पहले तक स्ट्रिंगर की हैसियत से मीडिया की दुनिया में कदम रखता हो, स्टार न्यूज के लिए एयरलाइंस पर स्टोरी करते वक्त कार्पोरेट लॉबिइस्ट नीरा राडिया को इन्टर्न की तरह बात-बात में मैम, मैम कहता हो, उसके हाथ में देश के एक बड़े मीडिया ग्रुप की चाबी है। अब यहां से फिर उपेन्द्र राय के वक्तव्य को जोड़ें कि क्या 27 दिसंबर वाकई कोई तारीख नहीं है? इससे बड़ी तारीख और क्या हो सकती है?

27 दिसंबर की शाम ली मेरिडियन में आलमी सहारा के मौके पर जुटे जो लोग चाय-नाश्ता कर रहे थे, मुन्नवर राणा की शायरी में डूब-उतर रहे थे,गालिब की हवेली के पास उन्हें याद कर रहे थे, पाकिस्ताम से आए मेहमान चैनल पर अपनी बाइट दे रहे थे, उपेन्द्र राय के लिए वो सबके सब उनकी ही कामयाबी का जश्न मना रहे थे। अब यहां पर आकर सोचें तो 27 तारीख उपेन्द्र राय के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण है या फिर मिर्जा गालिब के लिहाज से। अगर उर्दू के इतिहास की नजर से देखें तो इससे बड़ी तारीख खोजने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है। लेकिन अगर उपेन्द्र राय 27 दिसंबर को पहली बार सहारा प्रणाम न करके किसी औऱ तारीख को किया होता तो क्या मिर्जा गालिब को आलमी सहारा पर यही इज्जत नसीब होती? तब तो उनका ये हक कोई और मार ले जाता। ऐसे में हम ये कहें कि मिर्जा गालिब की सहारा में बस इसलिए लॉटरी लग गयी क्योंकि उपेन्द्र राय ने पहली बार सहारा प्रणाम इसी तारीख को किया। उपरी तौर पर इससे फर्क नहीं पड़ता। आखिर हममें से कितने लोगों को पता है कि उपेन्द्र राय ने ये तारीख अपनी उपलब्धि के ऐतिहासिक दिन के तौर पर तय किया? फिर स्टोरी तो मिर्जा गालिब की ही चली, उपेन्द्र राय की तो नहीं ही।

लेकिन आज प्राइवेट न्यूज चैनलों का जो आलम है, उसे देखते हुए ये अस्वाभाविक और लगभग बेहूदा हरकत की तरह नहीं लगता। मतलब ये कि अगर कल को किसी चैनल ने पंत, महादेवी वर्मा, फिरदौस, मुक्तिबोध जैसे रचनाकारों की जयंतियां मनानी शुरू कर दी तो उस दिन अनिवार्य रूप से चैनल के आकाओं के घर बच्चा पैदा हुआ होगा, उसकी पत्नी के साथ 25 सफल साल गुजर गए होंगे, आका किसी चैनल का मालिक बन गया हो आदि-आदि। राजनीति में तो खोज-खोजकर ऐसी तारीखें निकाली जाती है और उनसे जुड़े लोगों की भावनाओं के साथ खेला जाता है लेकिन मीडिया में भी कल ये जो खेल शुरु हुआ, वो आनेवाले समय में एक बेहूदा ट्रेंड को जन्म देगा। ऐसे में होटल ताज में रैदास जयंती के मौके पर किसी चैनल की शुरुआत होती है, सांगरिला में सरहपा के नाम पर कोई क्षेत्रीय चैनल की शुरुआत होती है तो ऑडिएंस को एकबारगी तो ताज्जुब जरुर होगा कि न्यूज चैनलों को अचानक से इन विभूतियों को याद करने का ख्याल क्यों आया? उन्हें भला क्या पता होगा कि इस दिन किसी चैनल के आका की जिंदगी का सबसे खास दिन है।

मीडिया में तारीखें ऐसी ही बदलती है, मीडिया अपना कलेंडर इसी तरह से बदलता है। सामाजिक तौर पर खास तारीखों में अपने मायने पैदा करता है। कन्ज्यूमर कल्चर का एक बड़ा बाजार मीडिया ने इन्हीं तारीखों के भीतर के मायने बदलकर पैदा किए हैं। जो समाज के जिस तबके के लिए खास दिन है, उसमें अपने मतलब के अर्थ भर दो, वो खुश भी हो जाएंगे और तुम्हारा काम भी हो जाएगा। उपेन्द्र राय ने 27 दिसंबर के साथ यही काम किया है।

27 दिसंबर को आलमी सहारा शुरू करके उपेन्द्र राय ने मिर्जा गालिब की आत्मा और उनके मुरीदों के दिल को सुकून नहीं पहुंचाया है बल्कि सहाराश्री के सामने अपनी दमखम को साबित किया है कि उर्दू चैनल के लांच किए जाने में हुजुर जो सबसे बड़े रोड़ा थे अजीज बर्नी, उन्हें देखिए हमने जैसे ही हटाया नहीं कि कुछ महीने बाद ही चैनल आपकी आंखों के सामने है, उसकी फुटेज देशभर में तैरनी शुरू हो गयी है। इसलिए मालिक, आप सहारा के कैलेंडर में 27 दिसबंर की तारीख को मिर्जा गालिब की जयंती से काटकर आलमी सहारा की लांचिंग डेट कर दीजिए ताकि अगले साल से लोग इसी तौर पर याद करें। इधर मैं अपने कैलेंडर में इसमें कुछ और जोड़कर बदलता हूं।

लेखक विनीत कुमार युवा मीडिया विश्‍लेषक हैं. डीयू में शोधरत. उनका यह लिखे उनके ब्लाग हुंकार से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

ये जो प्रदीप राय है, वो यही तो काम करता है…

आउटलुक मैग्जीन ने इस बार (27 दिसम्बर) वाले अंक में आईएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा और सुपर दलाल नीरा राडिया के बीच बातचीत के एक टेप का विवरण प्रकाशित किया है. इस बातचीत को आप भड़ास4मीडिया पर भी पढ़-सुन चुके हैं. लेकिन इसके एक महत्वपूर्ण अंश की तरफ आप सभी का ध्यान दिलाना रह ही गया था.  इस बातचीत के दौरान उपेंद्र राय और प्रदीप राय का भी जिक्र एक जगह आता है, नीरा राडिया के श्रीमुख से.

जब आईएएस सुनील अरोड़ा नीरा राडिया को बताते हैं कि कैसे एक बंदे ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज विजेंद्र जैन को 9 करोड़ रुपये घूस देकर फैसला अपने फेवर में करा लिया था तो राडिया कहती है कि ये उपेंद्र राय का ब्रदर इन ला या कजिन ब्रदर, जो भी है उसका, प्रदीप राय, यही तो काम करता है. हालांकि इस बातचीत से ये कहीं पुष्टि नहीं होती कि जज विजेंद्र जैन को 9 करोड़ रुपये की रिश्वत एडवोकेट प्रदीप राय ने दी थी लेकिन राडिया का यह बयान देना की एडवोकेट प्रदीप राय इसी तरह के काम करते हैं, कई सवालों को खड़ा करने वाला है.

मजेदार ये है कि इन सब खुलासों के बावजूद केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां सो रही हैं. न तो आईएएस सुनील अरोड़ा के घर छापा मारा गया है और न ही किसी जज या वकील या दिल्ली के पत्रकार के घर. इतने अहम खुलासे होने के बावजूद केंद्र सरकार की सरकारी एजेंसियां ऐसा व्यवहार कर रही हैं जैसे कि उन्हें कुछ पता ही न हों. लेकिन अगर किसी घुरहू या कतवारू का मामला होता तो जाने कबके पुलिस वाले टांग कर थाने ले आए होते और चढ़ावे चढ़ाने का दबाव बना रहे होते और चढ़ावा न मिलने पर न जाने किन किन आईपीसी की धाराओं में संगीन जुर्म बताकर गरीब बेचारों को जेल भेज चुके होते.

पर बड़े लोग तो बड़े लोग होते हैं. इनकी बड़ी बड़ी कोठियां होती हैं. बड़े बड़े मंतरी, संतरी, जज, वकील, अफसर, सिपाही इनके नजदीकी लोग होते हैं सो इन पर किसी तरह की कोई आंच आए, ये संभव ही नहीं है. चलिए, आप लोग भी एक बार सुनील अरोड़ा और नीरा राडिया के बीच बातचीत के टेप की ट्रांसक्रिप्ट को पढ़ लीजिए, जिसे आउटलुक ने प्रकाशित किया है और हिंदी अखबारों में प्रभात खबर ने प्रकाशित किया है. फिलहाल यहां बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट को अंग्रेजी में प्रकाशित किया जा रहा है.

Sunil Arora: Higher judiciary mein corruption bahut ho gayi na…

Neera Radia: Bahut zyaada, it’s like crazy situation…

SA: In the sealing cases, one chap had told me that he’ll get this judgement after one month.

NR: Haan.

SA: And he told me how much he had paid to whom.

NR: My god!

SA: I said, yaar, tum mazaak kar rahe ho. He said main aapko bata raha hoon ye judgement hai, and he broadly outlined the judgement…ki, this is to be pronounced after one month. To aap dekh lena, main khud hi copy le aaoonga uski…tab next time jab ho jayegi, woh le aaya copy…. He showed me, that order. He had paid 9 cr…as he claimed, at the residence.

NR: Kaun tha yeh?

SA: I mean this litigant had paid Rs 9 crore to that high court judge in Delhi.

NR: Good god!

SA: This is what he claimed…ki that I paid, at his home.

NR: Kaun sa judgement tha?

SA: Koi tha land deal, real estate ka.

NR: Pathetic ha? Yeh hai na, yeh Upendra Rai (a journalist) ka brother-in-law, jo bhi hai uska…cousin brother—Pradip Rai—yehi to kaam karta hai.

SA: And this gentleman ultimately became chief justice!

NR: My god!

SA: Jisne judgement diya tha…he became CJ (chief justice), abhi retire hua tha, Vijender Jain, naam bhi bataa deta hoon.

NR: Haan, I know.

SA: Jo Sabharwal (CJI Y.K. Sabharwal) ka khaas aadmi tha.

NR: Haan uske upar to problem hua tha na beech mein?

SA: Nahin par woh (Vijender Jain) to ban gaya CJ (of Punjab and Haryana High Court), ab to CJ ban ke retire bhi ho gaya hai. Kya farak pada…

पूरी बातचीत सुनने के लिए आगे दिए गए लिंक पर क्लिक करें जिसमें सुनील व नीरा की बातचीत से संबंधित खबर व आडियो टेप है- सुनील-नीरा वार्तालाप

उपेंद्र राय और नीरा राडिया के बीच बातचीत का टेप

Upendra Raiपांच मिनट 12 सेकेंड के इस आडियो टेप में नीरा राडिया और सहारा मीडिया के न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय के बीच बातचीत है. इस टेप में ज्यादातर वक्त उपेंद्र राय बोलते हैं. शुरुआती अभिवादन कुछ इस तरह होता है. उपेंद्र का फोन राडिया के पास जाता है.

राडिया फोन पिक करती. फिर बोलती है- हॉय उपेंदर.

उधर से उपेंद्र राय बोलते हैं- हॉय मैम, कैसी हैं आप.

राडिया- बस ठीक हूं.

इसके बाद बातचीत शुरू होती है. उपेंद्र राडिया को जानकारी देते हैं कि वो 5 जून तक दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं और जिस मोबाइल से उन्होंने काल किया है, वो दिल्ली का है  और ये नंबर आपके पास (राडिया के पास) होगा ही. राडिया हां हां कहती है. साथ में पूछती है कि शिफ्टिंग कैसी रही. उपेंद्र राय बताते हैं कि धीरे-धीरे सब चीजें स्ट्रीमलाइन हो रही है. यह भी बताते हैं कि बीच में 11 सितंबर को लंदन गया था, वहां अपना वो काम थोड़ा बहुत करके लौटा हूं जो काफी दिनों से पेंडिंग चल रहा था. यह भी सूचना देते हैं कि उन लोगों ने एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी राहुल गांधी पर उसे दिखाई है और यह फिल्म बहुत अच्छी बनी थी. साथ ही यह भी कहते हैं कि वो सीडी मैं आपको दूंगा. फिर कहते हैं कि वे एयर इंडिया पर एक स्टोरी करना चाहते हैं कि आज ये दशा दिशा कैसे हुई कि इसके पास आज सेलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं.

उपेंद्र राय सूचना देते हैं कि वे इस स्टोरी पर उनसे तो बात करेंगे ही, सुनील भाई साहब से. इतना सुनते ही राडिया अचानक पूछती है, किनसे, सुनील अरोड़ा से ना. उपेंद्र राय कहते हैं हां. फिर अपनी बात जारी रखते हुए  उपेंद्र राय अनुरोध करते हैं नीरा राडिया से कि अगर उनकी टीम में किसी ने इस बारे में रिसर्च किया हो तो वो रिसर्च वर्क उन्हें दे दें ताकि स्टोरी कर सकें. नीरा राडिया ने प्रफुल्ल पटेल के कार्यकाल को खराब बताते हुए पूरे पांच साल की पतन की हिस्ट्री को देने का वादा किया. नीरा से उपेंद्र राय पूछते हैं कि क्या वे कल शहर में हैं. नीरा राडिया जवाब देती हैं कि वे कल मुंबई रहेंगी. पूरी बातचीत को इस आडियो प्लेयर पर क्लिक करके सुन सकते हैं.

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उपेंद्र राय ने भी की थी नीरा राडिया से बातचीत

उपेंद्र रायनीरा राडिया से बातचीत के नए टेप जारी होने के बाद मीडिया जगत के कई नए रहस्यों पर से परदा उठता जा रहा है. कई नई परतें खुलती जा रही हैं. ताजा नाम उपेंद्र राय का आया है. जिस टेप में नीरा राडिया आईएएस अधिकारी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के परसनल सेक्रेट्री रहे सुनील अरोड़ा से बात कर रही हैं, उसमें जिस शख्स उपेंद्र का नाम आ रहा है, वह कोई और नहीं बल्कि सहारा मीडिया के डायरेक्टर न्यूज उपेंद्र राय ही हैं. मेल टुडे में आज इस बारे में एक स्टोरी प्रकाशित की गई है, JOURNALIST FIGURED IN TALKS WITH IA EX-CHIEF शीर्षक से.

इस खबर में बताया गया है कि उपेंद्र राय और राजीव सिंह जैसों से राडिया की बातचीत होती रहती थी. खबर में सुनील अरोड़ा और उपेंद्र राय का पक्ष भी प्रकाशित किया गया है. इसमें सुनील अरोड़ा तो टेपों पर ही संदेह जाहिर करके पल्ला झाड़ लेते हैं जबकि उपेंद्र राय स्वीकार करते हैं कि उनकी राडिया से बातचीत हुई थी पर वह बातचीत एक स्टोरी के सिलसिले में हुई थी, स्टार न्यूज में रहते हुए एयरलाइंस पर स्टोरी की थी. नीरा राडिया मैजिक एयरलाइंस और क्राउन एयरलाइंस की चेयरपर्सन थीं, सो उनसे एयर इंडिया पर स्टोरी के मामले में वार्ता हुई थी. नीरा राडिया से बातचीत के बारे में जानकारी मैंने स्टार न्यूज के अपने संपादकों को दे दी थी. राडिया और सुनील अरोड़ा की बातचीत के टेप को सुनिए जिसमें उपेंद्र राय और राजीव सिंह का जिक्र आ रहा है. क्लिक करें…

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उपेन्‍द्र जी, मेरी सेलरी दिलवाइए

सेवा मे, माननीय श्री उपेन्द्र राय जी, सहारा इंडिया मीडिया, एडिटर एवं न्यूज डाइरेक्टर, विषय- मुंबई ऑफिस की बदउन्वानी और बार-बार शिकायत करने के बाद भी मेरी सेलरी का चेक ना दिए जाने के सन्दर्भ में.

श्रीमान, उम्मीद करता हूं कि आप खैरियत से होंगे, मेरा नाम दानिश आज़मी है और मैं सहारा उर्दू मुंबई से अगस्त 2008 से जुड़ा हुआ था. और मेरा एप्‍वाइंटमेंट सईद हमीद जी जनवरी 2009 से काफी टाल-मटोल करने के बाद किया था. आप को बताना चाहूंगा कि मैंने 2008 में आजमगढ़ में मुफ्ती अबुल बशर और बटला हाउस एन्काउंटर की एक्सक्लूसिव तस्वीरों से लेकर इंडियन MUJAHEEDEN के नाम पैर अरेस्‍ट किये गये  मुम्बरा, भिवंडी, आजमगढ़ के नवजवानों की EXLUSIVE न्यूज़ कवर  करता रहा हूं.

मगर मुझे सेलरी के नाम पर जो मिल रहा था वो काफी कम था, इस बात की शिकायत मैंने अज़ीज़ बर्नी जी से फ़ोन पर किया था, मगर अफ़सोस  की बात ये है की इस पर कोई रदे अमल सामने नहीं आया. सईद हमीद सर से मैंने इस ताल्लुक से बात किया तो उनका एक जवाब था कि इतना ही मिलेगा काम करना हो तो करो वरना अपना आई-कार्ड जमा कर दो. इतना ही नहीं जनवरी 2009 से लेकर मार्च 2010 के दरम्यान सिर्फ पांच माह की सेलरी का चेक मुझे मिला, बाकी चेक की बात ऑफिस में फ़ोन से करता हूं तो शबाना जी कहती है सईद हमीद सर से बात करो, जब उनसे कहा तो उन्‍होंने लाइल्मी का इज़हार किया, और ये सिलसिला काफी दिनों से चल रहा है.

मुझे मजबूर होकर आप के पास शिकायत करनी पड़ रही है. सर ज्वाइनिंग के वक़्त मुझे ठाणे जिले के कल्याण और क़सारा तक क्राइम की न्यूज़ कवर करने की बात कहा गया था, और मैं ठाणे के अलावा  मुंबई की भी न्यूज़ कवर कर देता था, लेकिन मुंबई जैसे शहर में क्या खर्च होगा आप अच्छी तरह अनुमान लगा सकते हैं. इन्ही सब बातों की वजह से मैंने मार्च के बाद से काम करना बंद कर दिया है. सहारा मीडिया हक और ना इंसाफी की लड़ाई लड़ रहा है. बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है शायद आपके ही न्यूज़ पेपर में नाइंसाफी हो रही है.

बड़े ही अदब के साथ कहना चाहूंगा कि सहारा उर्दू मुंबई 2008-2009 में ऊंचाई की तरफ सबकी कोशिशों से बढ़ रहा था, मगर वक़्त के साथ आखिर गिरावट क्यों आ रही है, इस बात का आप जवाब तलाशने की कोशिश करे? मुंबई ऑफिस में 2008-2009 में काफी स्ट्रिंगर और रिपोर्टर थे, मगर अब तीन- चार ही बचे हैं. इस बात के लिए कौन ज़िम्मेदार है? शायद एक ही जवाब होगा सईद हमीद सर, जिनकी वजह से न्यूज़ पेपर आगे बढ़ कर रुक गया और सारे स्टाफ के लोग छोड़ कर चले गए.

अतः आपसे  निवेदन है कि मेरी सेलरी के बचे हुए सारे चेक दोबारा ISSUE करवाने और इस मामले में दोषी स्टाफ के लोगो को ज़रूरी तम्बीह करने के साथ ही मैं राष्ट्रीय सहारा उर्दू मुंबई में काम शुरू करूं या नहीं इस बात से अवगत करवाने का कृपा करें.

सूचनार्थ कार्यवाही हेतु प्रेषित-

श्रीमान अज़ीज़ बर्नी साहब

दानिश आजमी

एस.के. आर्केड  तीसरा माला

305 गैबी नगर भिवंडी, ठाणे, महाराष्ट्र

दर्शकों के साथ सहारा का बड़ा धोखा!

सहारा के भस्मासुर की बात सामने आ ही गई है, अब मैं इलेक्ट्रानिक मीडिया में अब तक का सबसे बड़ा फ्राड और इन भस्मासुरों की करतूत की एक बानगी बताता हूं। सहारा के नए निजाम की टोली कैसे सहारा के टॉप मैनेजमेंट को झूठ का आईना दिखाकर और टेलीविजन मीडिया के दर्शकों खासकर बिहार के लोगों को कैसे मूर्ख बना रहे हैं, इसकी भी एक बानगी बता रहा हूं।

बिहार चुनाव को लेकर सभी चैनलों ने तैयारी की है और उसका प्रोमो बनाया है। लेकिन सहारा समय का प्रोमो खास है। ये है 100 रिपोर्टर 100 कैमरे। इसमें ये बताया गया है कि चप्पे-चप्पे की खबर, हमारे रिपोर्टर यानी सहारा के रिपोर्टर, बिहार विधानसभा चुनाव की कवरेज के दौरान करेंगे। कायदे से इस प्रोमो में बिहार के रिपोर्टर या जिनका बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज से सरोकार हो, उसको होना चाहिए। सहारा के कई स्ट्रिंगरों का पीटूसी भी कई बार देखने को मिलता है।

आपको जानकर ये आश्चर्य होगा कि 100 रिपोर्टर 100 कैमरे के प्रोमो में बिहार के स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों या बिहार के एंकरों के बजाए सहारा के एचआर डिपार्टमेंट, सर्विस डिविजन के लोगों को लाइन में खड़ा कराके शूट किया गया है। कहने को तो सबसे बड़ा मीडिया ग्रुप है सहारा इंडिया, तो फिर रिपोर्टर की कमी कैसे हो गई। बिहार में टीवी और प्रिंट मीडिया को मिला ले तो 100 क्या 200 रिपोर्टर सहारा में घूमते मिल जाएंगे। आखिर प्रोमो में एचआर डिपार्टमेंट और सर्विस डिविजन के लोगों को शामिल कर के बिहार के वोटरों या दर्शकों को क्या संदेश देना चाहता है सहारा मीडिया कि अब एचआर के लोग भी रिपोर्टिंग करेंगे। यानी सहारा मीडिया का एक नया धमाका।

है तो ये छोटी सी बात, लेकिन आपको ये जानकर आश्‍चर्य होगा कि ये सब टॉप मैनेजमेंट को दिखाने के लिए किया जाता है कि कैसे हम लोग यानी उपेंद्र राय के सिपलहसार लोग एक से एक बढ़िया प्रोग्राम या प्रोमो बनाते हैं। दरअसल सहारा में एक ग्रुप जो चाहता है वैसा कर लेता है, कोई टोकने वाला नहीं है। हालांकि हर निजाम का एक ग्रुप होता है और उसकी मनमर्जी चलती रही है, लेकिन इस निजाम ने तो सारी हदें पार कर दी हैं।

खास बात ये है कि इस प्रोमो में प्रमुखता से उन लोगों के चेहरे को दिखाया गया है, जिनका बिहार चुनाव कवरेज से कोई सरोकार नहीं है। कोई भी पुराना सहारा कर्मी देखेगा तो पहचान लेगा कि उसमें एचआर के धर्मेंद्र, एनसीआर की रिपोर्टर लोगों को कैसे और किस तरीके से जबरदस्ती ठूंस दिया गया है।

चलिए प्रोमो में आप एचआर के लोगों से कराइए या वहां के चपरासी से, ये तो उनका हक बनता है क्योंकि अभी उनका निजाम और राजपाट चल रहा है। लेकिन बिहार के स्ट्रिंगर जो बिहार चैनल के आधार हैं, उनको क्यों नहीं शामिल किया गया है। जब स्ट्रिंगरों का पीटूसी दिखाया जाता रहा है तो प्रोमो में अगर उनको शामिल किया गया होता तो शायद ये अब तक सबसे बढ़िया प्रोमो होता।

साफ है कि जो काम करते हैं उनको हाशिए पर धकेल दिया जाता है और जो चमचागिरी करते हैं या प्रोमो के नाम पर अपने-अपने लोगों का चेहरा दिखाकर इसका क्रेडिट लूटते हैं, उन्‍हें तरजीह मिलती है। टेलीविजन में भूत-पिशाच तो देखा है लेकिन इतना बड़ा फ्राड नहीं दिखा है आज तक।

ये सब नए निजाम, जो सहारा के भस्मासुर बने हुए है, की सरपरस्ती मे चल रहा है। प्रोमो देखिए बड़ा मजा आएगा। ऐसे बहुत से चेहरे थे जिनको अगर बिहार चुनाव में दिखाया जाता तो शायद सहारा का ब्रांड वैल्यू बढ़ता। लेकिन भस्मासुरों को तो बस अपना काम जल्दी से जल्दी निपटाना है। 100 रिपोर्टर 100 कैमरे का प्रोमो दर्शकों खासकर बिहार के दर्शकों के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है। साथ ही टेलीविजन मीडिया में अब तक का सबसे बड़ा फ्राड।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

राजेश कौशिक को यूपी-उत्तराखंड का हेड बनाया गया

सहारा समय न्यूज चैनल से सूचना है कि पिछले दिनों स्टार न्यूज से इस्तीफा देकर सहारा समय के हिस्से बने राजेश कौशिक को उपेंद्र राय ने सहारा समय, यूपी-उत्तराखंड का चैनल हेड बना दिया है. अभी तक चैनल हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे राव बीरेंद्र सिंह को सहारा समय, एनसीआर की कमान सौंपी गई है. उधर, मनीषा शेरान का इस्तीफा सहारा समय प्रबंधन ने कुबूल कर लिया है. मनीषा लंबे समय से बतौर एंकर सहारा समय न्यूज चैनल में कार्यरत थीं. उन्होंने सीएनईबी का रुख किया है.

ज्ञात हो कि उपेंद्र राय ने सहारा में वापसी के बाद से ही पुराने लोगों को हटाने, साइडलाइन करने व अपने लोगों को भर्ती कर प्रमुख पदों पर आसीन करने का अभियान चला रखा है. प्रबंधन ने सहारा मीडिया का उद्धार करने के लिए उपेंद्र राय को कुछ भी करने का अधिकार सौंप रखा है. और, उपेंद्र राय इन अधिकारों का जोरशोर से इस्तेमाल भी कर रहे हैं. उनकी तेज स्पीड, जिसके चलते उनके साथ सहारा में आए संजीव श्रीवास्तव से लेकर सहारा में काम कर रहे अन्य कई वरिष्ठ जमींदोज हो चुके हैं, को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो चुकी हैं. कोई उनकी स्पीड के अगले एक साल तक कायम रहने का कयास लगा रहा है तो कोई नए फाइनेंसियल इयर तक को डेडलाइन बता रहा है. हालांकि सहारा की एक खूबी या खामी, जो भी कहिए, है कि वहां जो भी शीर्ष पद पर होता है, उसके खिलाफ एक बड़ा गुट गुपचुप विरोध अभियान शुरू कर देता है और इसके लिए अनामी मेंलों, अनामी कमेंटों, अनामी अफवाहों आदि का सहारा लिया जाता है.

सहारा उर्दू ई-पेपर और मैगजीन लांच

सहारा इंडिया मॉस कम्युनिकेशन ने अपने उर्दू संस्करणों, उर्दू दैनिक ‘रोजनामा’, साप्ताहिक पत्रिका ‘आलमी सहारा’ व मासिक पत्रिका ‘बज्म-ए-सहारा’ के ई-संस्करणों का आगाज कर दिया है। अब सहारा इंडिया मॉस कम्युनिकेशन का उर्दू संस्करण इंटरनेट पर भी उपलब्ध होंगे। उर्दू संस्करणों के ई-वर्जन का शुभांरभ सहारा इंडिया न्यूज नेटवर्क के डायरेक्टर उपेन्द्र राय ने किया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि उर्दू संस्करणों के ई-पेपर के लॉच होने के साथ ही सहारा इंडिया मीडिया के ई-संस्करणों का गुलदस्ता पूरा हो गया है। श्री राय ने कहा कि आज समय की मांग है कि हम तकनीकी रूप से काफी मजबूत रहें। तकनीकी रूप से हम जितना अधिक मजबूत रहेंगे, उतना ही बाजार में हमारी पहुंच और प्रगति अच्छी होगी। साभार : सहारा

अजीज बर्नी को भी निपटा दिया उपेंद्र राय ने!

: शीत युद्ध अब खुली जंग में तब्दील : सहारा उर्दू का चेहरा बन चुके अज़ीज़ बर्नी को उपेन्द्र राय ने पूरी तरह किनारे कर दिया है. इससे पूर्व यह काम कोई नहीं कर सका था. अब उपेन्द्र राय ने सहाराश्री के चहेते समझे जाने वाले बर्नी को मात देने में सफलता प्राप्त कर ली है. बर्नी से उन्होंने सारे अधिकार ले लिए हैं. बर्नी के किनारे कर दिए जाने की सूचना दीवारों पर चिपका दी गयी है. उपेन्द्र राय जल्द ही उर्दू का टीवी चैनल शुरू कर रहे हैं जो बर्नी की वजह से रुका हुआ था.

उपेन्द्र राय ने बर्नी के भर्ती किये हुए उर्दू टीवी कर्मियों को अलग कर नयी भरती भी शुरू कर दी है. इसके अतिरिक्त वह उर्दू का डेली अखबार लन्दन से भी शुरू कर रहे हैं, ऐसी चर्चा है. इस प्रोजेक्ट से भी बर्नी को अलग रखा गया है. इस तरह वह शीत युद्ध जो काफी महीनों से अन्दर ही अन्दर चल रहा है, वह खुली जंग में तब्दील हो गया है.

असल में काफी दिनों से हिन्दूवादी संगठन बर्नी के खिलाफ शिकायतें कर रहे थे परन्तु कोई सुन नहीं रहा था.  अब सुना है कि सहाराश्री ने एक सभा में बर्नी के सारे अधिकार छीन कर उपेन्द्र को दे दिए हैं और खुद बर्नी भी चुप होकर बैठ गए हैं. पिछले काफी दिनों से उर्दू में सम्पादकीय विभाग को लेकर उपेन्द्र राय परेशान थे लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे थे. लेकिन जैसे ही सहाराश्री ने इशारा किया, उनको बर्नी के पर कतरने का मौक़ा मिल गया. अब उपेन्द्र राय ने हिंदी के संपादक रणविजय सिंह को बर्नी के ऊपर बिठा दिया है ताकि उर्दू और हिंदी की पालिसी में फर्क ना होने पाए.

यह भी कहा जा रहा है कि बर्नी को राजनीतिक क्षेत्र में बहुत सम्मान प्राप्त है इस कारण उनका क़द घटाने की कोशिशें हो रही थी. मुस्लिमों में बर्नी की लोकप्रियता बहुत अधिक है क्योंकि वह मुस्लिम मुद्दों पर बड़ी चतुराई से लिखते हैं और उनकी सभा में बहुत भीड़ उमड़ती है. इस वजह से उनका क़द बहुत बड़ा हो गया है. बर्नी से अधिकार छीन लिए जाने को हिन्दू संगठनों की एक बड़ी जीत समझा जा रहा है.

आशा की जा रही है कि उर्दू सहारा की पालिसी में अगले कुछ दिनों में बड़ा परिवर्तन आएगा. ख़ासतौर पर बिहार के चुनाव में इस समाचार पत्र को मुस्लिमों का मन बदलने के लिए प्रयोग किये जाने की योजना बन रही है. इसके लिए उपेन्द्र राय बिहार की कई बार यात्रा भी कर चुके हैं और बर्नी को बिहार चुनाव से दूर रखा जा रहा है. इस समय सहारा में यह लड़ाई बहुत साफ़ तौर पर देखी जा रही है और ऐसा लगता है जिस तरह उपेन्द्र ने संजीव श्रीवास्तव को चारों खाने चित कर दिया था, वैसे ही वह बर्नी को भी पटक देंगे.

सहारा समूह में कार्यरत एक मीडियाकर्मी की चिट्ठी पर आधारित. संभव है, इस समाचार के कुछ अंश अतिरंजित हों या अनुमान पर आधारित हों, लेकिन पत्र भेजने वाले विश्वस्त सूत्र का कहना है कि अधिकतर बातें सच हैं. अगर किसी को इन तथ्यों व सूचनाओं पर आपत्ति है या खंडन-मंडन करना चाहता है तो नीचे कमेंट बाक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकते हैं.

शीतल बने राष्ट्रीय सहारा देहरादून के एडिटर

: राष्ट्रीय सहारा में कई बड़े फेरबदल : दयाशंकर राय लखनऊ के एडिटर : अमर सिंह बनारस के यूनिट हेड : स्नेह रंजन बनारस के संपादक : प्रोडक्शन हेड एलएस भाटी लखनऊ से बनारस भेजे गए : सहारा मीडिया के प्रिंट सेक्शन में कई बदलावों की खबर है. राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ यूनिट का स्थानीय संपादक दयाशंकर राय को बना दिया गया है. दयाशंकर अभी तक देहरादून यूनिट के स्थानीय संपादक थे. देहरादून में आरई पद पर एलएन शीतल को लाया गया है जो अभी तक ग्वालियर के अखबार आदित्याज के सीईओ व एडिटर इन चीफ हुआ करते थे.

एलएन शीतल पहले भी देहरादून में संपादक के रूप में एक पारी अमर उजाला अखबार के साथ खेल चुके हैं. लखनऊ में पदस्थ अमर सिंह को राष्ट्रीय सहारा की बनारस में लांच होने वाली यूनिट का यूनिट हेड बनाया गया है. एलएस भाटी, जो राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के प्रोडक्शन हेड हुआ करते थे, उन्हें बनारस यूनिट का प्रोडक्शन हेड बनाकर भेजा गया है.

पिछले 21 वर्षों से बनारस के ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत स्नेह रंजन को सहाराश्री सुब्रत राय सहारा ने निष्ठा और मेहनत का तोहफा दिया है. उन्हें बनारस में लांच होने वाले राष्ट्रीय सहारा एडिशन का स्थानीय संपादक बना दिया गया है.

लखनऊ में अभी तक कार्यवाहक स्थानीय संपादक के रूप में काम देख रहे मनोज तोमर के बारे में चर्चा है कि उन्हें राष्ट्रीय सहारा की आगरा या चंडीगढ़ में लांच होने वाली यूनिट में से किसी का चार्ज दिया जा सकता है पर इसमें अभी वक्त लगने की संभावना है. फिलहाल मनोज तोमर लखनऊ में ही दयाशंकर राय के अधीन नंबर दो की हैसियत में काम करेंगे. सूत्रों के मुताबिक इन बदलावों के बाबत फैसले नोएडा में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए.

इन बदलावों के बारे में भड़ास4मीडिया ने जब सहारा मीडिया के एडिटर व न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय से बात की तो उन्होंने फेरबदल की पुष्टि की. उपेंद्र राय ने इसे राष्ट्रीय सहारा अखबार की मजबूती की दिशा में उठाया गया कदम बताया. श्री राय के मताबिक बनारस यूनिट लांचिंग की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और उसके बाद आगरा व चंडीगढ़ से एडिशन लांच किया जाएगा.

सहारा में फिर होगी छंटनी?

टीवी व इंटरनेट के 11 लोग प्रिंट में भेजे गए : सहारा मीडिया में फिर से छंटनी की तैयारी शुरू हो गई है. इसके तहत सहारा के नोएडा स्थित आफिस में टीवी और इंटरनेट सेक्शन में कार्यरत करीब 11 लोगों को प्रिंट सेक्शन में भेज दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन ने सहारा मीडिया के टीवी, प्रिंट व इंटरनेट सेक्शन में करीब तीन सौ से ज्यादा लोगों को ‘फालतू’ कैटगरी के तहत शिनाख्त की है.

प्रबंधन का मानना है कि ये वो लोग हैं जिनके संस्थान में रहने या न रहने से संस्थान की उत्पादकता और गुणवत्ता पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है. पर इन लोगों की छुट्टी अचानक नहीं की जाएगी. इन्हें हाशिए पर डालते हुए इनसे काम लेना बंद कर दिया जाएगा और फिर धीरे से एक दिन इस्तीफा ले लिया जाएगा. ऐसा एकमुश्त छंटनी के कारण होने वाले हो-हल्ले से बचने के लिए किया जा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय ने आय-व्यय की गणित को सुधारने पर जोर दिया है. इसी के तहत अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाई जा रही है. इस कड़ी में पता लगाया जा रहा है कि किस काम के लिए कितने लोगों की जरूरत है और कितने लोग काम कर रहे हैं. पिछले दिनों इसी के तहत सहारा समय में नेशनल और रीजनल चैनलों के अलग-अलग इनपुट, आउटपुट, एसाइनमेंट को मर्ज कर एक कर दिया गया. इस कारण दर्जनों लोग एक्स्ट्रा घोषित कर दिए गए और बाद में उनमें से कई लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

सूत्र कहते हैं कि फर्स्ट राउंड में खर्चे घटाने की कवायद के बाद सेकेंड राउंड में सहारा मीडिया के एक्सपेंसन का काम शुरू होगा. चर्चा है कि कुछ नए चैनल लांच होंगे और अखबार के नए एडिशन शुरू किए जाएंगे. पर इस काम में अभी वक्त लग सकता है.

सहारा में बहुत कुछ बदल रहा है

‘हस्तक्षेप’ मंगल की बजाय शनिवार को मिलेगा : टैबलायड परिशिष्ट अब ब्राडशीट शेप में आएंगे : कुछ बंद परिशिष्ट फिर शुरू होंगे : बीबीसी हिंदी से पाणिनी आनंद इस्तीफा देकर सहारा आएंगे : सहारा मीडिया की प्रिंट व टीवी की वेबसाइटों का विलय होगा : संजीव श्रीवास्तव ने बैठने का स्थान बदला : सहारा मीडिया में नए संपादकीय नेतृत्व के आने से बह रही बदलाव की बयार धीरे-धीरे तेज हो रही है.

सहारा मीडिया से कई तरह की खबरें आ रही हैं. शुरुआत करते हैं प्रिंट से. एक अप्रैल से राष्ट्रीय सहारा अखबार के साथ आने वाले परिशिष्टों में कुछ बदलाव किया जा रहा है. ‘हस्तक्षेप’ जो अभी तक प्रत्येक मंगलवार को आता था, अब शनिवार को आया करेगा. शुक्रवार को पहले ‘मूवी मसाला’ नामक परिशिष्ट आता था लेकिन काफी दिनों से यह बंद है. अब इसे फिर जिंदा किया जा रहा है. ‘मूवी मसाला’ प्रत्येक शुक्रवार को पाठकों के घर में अवतरित होगा. अभी तक शुक्रवार को बच्चों के लिए ‘जेन एक्स’ आता था, आगे से यह बृहस्पतिवार के दिन आया करेगा. बच्चों के लिए ‘जेन एक्स’ और महिलाओं के लिए ‘आधी दुनिया’ परिशिष्ट अभी तक टैबलायड फार्म में आते थे. इन्हें अब ब्राडशीट स्वरूप दिया जाएगा. हस्तक्षेप, मंथन और संपादकीय पेज का जिम्मा डा. दिलीप चौबे के पास रहेगा तो बाकी सभी फीचर पेजों संडे उमंग, मूवी मसाला, जेन एक्स, आधी दुनिया की इंचार्ज मनीषा रहेंगी.

एक अन्य जानकारी के अनुसार बीबीसी हिंदी में कार्यरत पाणिनी आनंद ने इस्तीफा का नोटिस दे दिया है. वे संभवतः अप्रैल मध्य तक बीबीसी हिंदी से रिलीव हो जाएंगे. उनके बारे में चर्चा है कि वे सहारा मीडिया के साथ नई पारी शुरू करेंगे.

सहारा मीडिया से मिली एक अन्य जानकारी के अनुसार इस समूह के जितने भी मीडिया पोर्टल हैं, उन्हें अब एक करने की तैयारी चल रही है. अभी प्रिंट और टीवी वालों की वेबसाइटें अलग-अलग हैं. नया फैसला यह लिया गया है कि एक ही डोमेन नेम पर सभी वेबसाइट ले आई जाएं और सभी कंटेंट एक ही पोर्टल पर डाला जाए ताकि वेब के मोर्चे पर सहारा मीडिया की वेबसाइट बाकी मीडिया हाउसों की वेबसाइट से टक्कर लेने लायक हो जाए.

उधर, सहारा मीडिया के सीईओ संजीव श्रीवास्तव ने आफिस में अपने बैठने के स्थान को बदल लिया है. न्यूज चैनल की टीम से इंटरेक्शन बढ़ाने के लिहाज से संजीव श्रीवास्तव एसाइनमेंट डेस्क के सामने बने चेंबर में बैठने लगे हैं. सूत्रों का कहना है कि संजीव श्रीवास्तव व उपेंद्र राय के आने के बाद से सहारा के न्यूज चैनलों में खबर की जगह धंधा लाने पर जोर देने वाले वरिष्ठों को साइड लाइन कर काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे संपादकीय टीम के ज्यादातर लोगों का मनोबल ऊंचा है. संजीव श्रीवास्तव व उपेंद्र राय द्वारा अखबार व न्यूज चैनल की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में रुचि लेने व सार्थक हस्तक्षेप करने से भी पूरी टीम बेस्ट देने के मूड में आ गई है. संस्थान को प्रोफेशनल व परफार्मर बनाने के लिए भविष्य में भी कई बदलावों की तैयारी है. देखना है यह टेंपो कितने दिन बना रहता है.

उपेंद्र राय बने राष्ट्रीय सहारा के प्रिंटर-पब्लिशर

प्रिंटलाइन में प्रिंटर-पब्लिशर के रूप में स्वतंत्र मिश्र का नाम हटाकर उन्हें समूह संपादक (वेब पोर्टल) के रूप में दर्ज किया गया : लखनऊ यूनिट में रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र की केबिनों में मनोज तोमर और अमर सिंह को बिठाया गया : गज़ब का मीडिया घराना है सहारा. यहां कब क्या हो जाए, कोई नहीं ठिकाना. आज का ‘राष्ट्रीय सहारा’ अखबार उठाकर प्रिंट लाइन देखिए. संपादकीय पेज पर हर रोज प्रकाशित होने वाले प्रिंटलाइन में आमूल-चूल बदलाव दिख जाएगा. प्रिंटर और पब्लिशर के रूप में कई वर्षों से जाने वाला स्वतंत्र मिश्रा का नाम हटा दिया गया है. उनका स्थान ले लिया है उपेंद्र राय ने जो अभी हाल-फिलहाल स्टार न्यूज से ग्रुप न्यूज डायरेक्टर के पद पर सहारा में लौटे हैं. स्वतंत्र मिश्रा को समूह संपादक (वेब पोर्टल) बनाकर प्रिंट लाइन में रणविजय सिंह के बाद स्थान दिया गया है. दिल्ली में राष्ट्रीय सहारा की प्रिंट लाइन में प्रबंध संपादक जयव्रत राय के नाम के बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशांतो राय हैं. फिर एडिटर इन चीफ के रूप में संजीव श्रीवास्तव विराजमान हैं. इनके बाद समूह संपादक रणविजय सिंह का नाम है. फिर समूह संपादक वेब पोर्टल स्वतंत्र मिश्र का नाम प्रिंट किया गया है. इसके बाद स्थानीय संपादक के रूप में खबरों के चयन के लिए जिम्मेदार विनोद रतूड़ी का नाम स्टार लगाकर दिया गया है. प्रिंटलाइन में सिर्फ संपादक श्रेणी में पांच पद और पांच नाम विराजमान हैं.

इस फेरबदल के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय को लाने के बाद प्रबंधन ने अपने पुराने दोनों धुरंधरों रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र को किनारे करने का अभियान, जिसे शुरू तो पहले ही किया जा चुका है, अब और तेज कर दिया है. प्रिंट लाइन में बदलाव इसी का हिस्सा है. कल राष्ट्रीय सहारा के लखनऊ आफिस में इन दोनों महानुभावों के केबिनों में अमर सिंह और मनोज तोमर को बिठाकर इन्हें स्पष्ट संकेत दे दिए गए.

दरअसल, रणविजय सिंह और स्वतंत्र मिश्र एक जमाने में लखनऊ में ही हुआ करते थे. एक स्थानीय संपादक तो दूसरा यूनिट हेड. इन दोनों की किस्मत लगातार इनका साथ देती रही. ये लखनऊ से उड़कर दिल्ली आ गए. दिल्ली में एक समूह संपादक बन गया तो दूसरा पूरे ग्रुप के एडमिन, सेल्स व मार्केटिंग का हेड. इनके उत्कट प्रभाव के वशीभूत होने के कारण किसी भी शख्स ने लखनऊ में इनके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाली केबिनों में पैर रखने की जुर्रत नहीं की. दोनों केबिन इन श्रीमानों के नाम पर खाली पड़े रहे. कल रणविजय सिंह वाली केबिन में राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के स्थानीय संपादक मनोज तोमर और स्वतंत्र मिश्र वाली केबिन में राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के नए यूनिट हेड अमर सिंह को बिठा दिया गया. कल शाम को हुए इस घटनाक्रम का लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया. रात में प्रिंट लाइन में बदलाव के आदेश राष्ट्रीय सहारा की प्रत्येक यूनिट में पहुंच गए.

कई लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि स्वतंत्र मिश्र समूह संपादक वेब पोर्टल के रूप में क्या काम देखेंगे? अगर वे वेब पोर्टल का काम देखेंगे भी तो क्या इतना जरूरी था उनका नाम प्रिंट लाइन में दिया जाना? सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन पुराने लोगों को एकदम से नाराज नहीं करना चाहता. किसी भी तरह के विद्रोह-बवाल से बचना चाहता है. मार्केट में दिखाना चाहता है कि वह सभी को साथ लेकर चलने में यकीन रखता है. इसी रणनीति के तहत स्वतंत्र मिश्रा का नाम एकदम से गायब करने की जगह किसी भी रूप में प्रिंटलाइन में रखने के बारे में विचार किया गया और ऐसा पद दे दिया गया है जिसे कोई भी पचा नहीं पा रहा है. पर इससे इतना संकेत तो स्पष्ट है कि पुराने धुरंधरों, सावधान हो जाओ, नए साहब आ गए हैं, इन्हें सलाम किया करो.

सहारा मीडिया में पुराने आदेश रद, 6 सदस्यीय टीम बनी

संजीव के आने के बाद माहौल सुधरा : बड़े-बड़े लोग भी चेंबर से बाहर निकल कर काम करते दिख रहे : सहारा मीडिया में संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय के पहुंचने से कई तरह के बदलाव की खबरें हैं. इनके आने के बाद शीर्ष स्तर से एक आदेश जारी कर पहले जारी किए गए सभी नोटिसों को रद्द किए जाने की सूचना दी गई है. इसका आशय यह लगाया जा रहा है कि यूनिट हेड बनाए गए विजय कौल फिर अपनी खोल में वापस लौटा दिए गए हैं.

संजीव श्रीवास्तव ने प्रिंट और टीवी के तीन-तीन लोगों की छह सदस्यीय एक विशेष टीम बनाई है जो छह टीवी चैनलों और प्रिंट के छह एडिशनों की खबरों का आपस में आदान-प्रदान करने के साथ-साथ कोआर्डिनेशन का काम कर रही है. संजीव श्रीवास्तव दिन में खुद टीवी, प्रिंट और वेब के लोगों की एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर दिन भर की कार्ययोजना को अंतिम रूप प्रदान करते हैं.

संजीव के आने के बाद से रणविजय सिंह समेत सभी वरिष्ठ अपने-अपने केबिनों से बाहर निकल कर कामधाम करते दिखाई पड़ जा रहे हैं. पहले जो केबिन संस्कृति छाई हुई थी, वह अब धीरे-धीरे खत्म होने लगी है. सहारा के लोग भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं और काम करने वाले लोग इसका स्वागत कर रहे हैं.

रजनीकांत ने स्टार न्यूज छोड़ा, सहारा समय में बने ईपी

रजनीकांत सिंहस्टार न्यूज के सीनियर प्रोड्यूसर रजनीकांत सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. वे नई पारी की शुरुआत सहारा समय के साथ करने जा रहे हैं. ज्ञात हो कि उपेंद्र राय ने स्टार न्यूज से इस्तीफा देकर पिछले दिनों न्यूज डायरेक्टर पद पर सहारा समय ज्वाइन किया. इसके बाद अब वे अपनी टीम बनाने के काम में लग गए हैं. इसी के तहत रजनीकांत सिंह को लाया गया है. रजनीकांत का सहारा समय में पद होगा एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का. वे स्टार न्यूज में सात वर्षों तक कार्यरत रहे. तीन साल से दिल्ली में हैं. चार वर्षों तक मुंबई में स्टार न्यूज की लांचिंग टीम के साथ रहे.

इससे पहले उन्होंने आज तक में काम किया. वे आजतक की भी लांचिंग टीम के हिस्सा रह चुके हैं. आजतक में वे करीब ढाई साल रहे. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से मास्टर आफ ब्राडकास्ट जर्नलिज्म की डिग्री लेने वाले रजनीकांत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट हैं. यूपी के गोरखपुर जिले के मूल निवासी हैं. रजनीकांत को उपेंद्र राय का करीबी माना जाता है. उपेंद्र और रजनीकांत, दोनों ने ही स्टार न्यूज में मुंबई और दिल्ली में साथ-साथ काम किया है. ऐसा माना जा रहा है कि रजनीकांत के आने के बाद सहारा समय में दूसरे न्यूज चैनलों से आने वालों का सिलसिला तेज होगा.

संजीव और उपेंद्र ने सहारा मीडिया ज्वाइन किया

संजीव श्रीवास्तवबीबीसी को गुडबाय बोल चुके संजीव श्रीवास्तव ने कल सहारा मीडिया के सीईओ और एडिटर के रूप में कल ज्वाइन कर लिया। रविवार होने के बावजूद संजीव श्रीवास्तव की कल ज्वायनिंग करा दी गई। उनके साथ स्टार न्यूज से इस्तीफा देने वाले उपेंद्र राय ने भी ज्वाइन किया। उपेंद्र न्यूज डायरेक्टर के पद पर आए हैं। प्रबंधन ने इन लोगों को सहारा के वरिष्ठों से इंट्रोड्यूस करा दिया है।

सूत्रों के मुताबिक संजीव और उपेंद्र की ज्वायनिंग के बाद प्रबंधन ने नोएडा आफिस में नोटिस चिपका दिया है जिसमें इन दोनों की ज्वायनिंग और इनके दायित्व के बारे में जानकारी दी गई है। साथ ही पूरे ग्रुप में मेल के जरिए सभी को इस डेवलपमेंट से अवगत करा दिया गया है। संजीव और उपेंद्र के आने के उपेंद्र रायबाद सहारा मीडिया में कई उलटफेर होने की संभावना बढ़ गई है। इन लोगों के साथ इनकी टीम के लोगों के आने की भी संभावना है। साथ ही सहारा के टीवी व प्रिंट में शीर्ष पदों पर कार्यरत लोगों के दायित्व में फेरबदल के भी कयास लगाए जाने लगे हैं।

उधर, कुछ लोगों का कहना है कि संजीव और उपेंद्र अपने-अपने संस्थानों में अभी नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं इसलिए आफिसियली ज्वायनिंग नहीं की है। इन लोगों को इंट्रोड्यूस करा दिया गया है और कामधाम शुरू करने के लिए भी कह दिया गया है पर आधिकारिक तौर पर ज्वाइन पहली या दूसरी तारीख को करेंगे।