सूखे को सैलाब बताने वाला उर्दू अखबार

: झूठी खबर या बदनाम करने की साजिश! : 9 जुलाई के उर्दू राष्ट्रीय सहारा में बिहार के पृष्ठ पर एक खबर प्रकाशित हुई। किशनगंज से लिखी गयी इस खबर में कहा गया है… ”दक्षिण बिहार के ठाकुर गंज ब्लॉक के पूबना नदी का पुश्ता टूट जाने से हज़ारों घर बह गए हैं और बेशुमार लोग खुले आसमान के नीचे ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं। तेज़ आँधी और बिजली के फ़ेल जाने की वजह से कश्ती से जो संपर्क था वह भी टूट गया है जिससे प्रभावित लोगों का जीवन बिल्कुल थम गया है।

मुसीबत की इस घड़ी में सांसद मौलाना असररुल हक कासमी की निगरानी में अल इंडिया तालीमी व मिल्ली फ़ाउंडेशन प्रभावितों को राहत पहुँचाने के लिए दिन रात लगा हुआ है। फ़ाउंडेशन के सेक्रेटरी मौलाना मसूद अख्तर कासमी ने कहा कि पानी के तेज़ बहाव ने कहर बरपा कर दिया है और हज़ारों खानदान पानी में घिरे हुये हैं और भूखे जीवन गुज़ारने को मजबूर हैं।”

अब एक नज़र दूसरी खबर पर जो इस खबर के एक दिन बाद दूसरे उर्दू अख़बार हिंदुस्तान एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई। इस खबर में बिहार के ज़िला सुपौल में एक मदरसा चलाने वाले मौलाना महफूजूर रहमान उस्मानी ने कहा कि किशनगंज में सैलाब से संबंधित जो खबर प्रकाशित हुई है, वह पूरी तरह से ग़लत है। मैंने उस इलाके में 227 किलोमीटर का सफर करके देखा मगर मुझे कहीं भी सैलाब की स्थिति नज़र नहीं आई. लोग पानी के लिए परेशन हैं और पानी के लिए मस्जिद में दुआ हो रही है। सूखे की हालत को सैलाब की हालत में बदलकर कुछ लोग मिल्लत को डसने और चूसने का काम कर रहें हैं।

आपने दो अलग अलग उर्दू के अख़बार में दो अलग अलग खबर देखी। पता नहीं मौलाना असरारुल हक कसमी पूरी तरह से सही हैं या मौलाना मुफ़्ती उस्मानी मगर, यह तो सही है कि किशनगंज में अभी स्थिति ऐसी नहीं है कि वहाँ सैलाब बताया जाये। यही कारण है कि सहारा ने अपने रिपोर्टर को ऐसी ग़लत खबर के लिए फटकार भी लगाई है। दूसरी बात यह है कि वहाँ अगर सैलाब की हालत होती और हज़ारों घर पानी में बह जाते तो इसकी खबर दिल्ली के दूसरे अखबारों में भी छपती। इस का मतलब यह है कि खबर पूरी तरह से ग़लत नहीं तो कुछ न कुछ तो ग़लत ज़रूर है।

सच्चाई यह है कि दूसरे गैर सरकारी संगठनों की तरह मुसलमानों ने भी बहुत से संगठन बना लिए हैं। इनमें कुछ तो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं मगर बहुत से ऐसे भी हैं जो ऐसी ही झूठी खबरें प्रकाशित कराते हैं और फिर उसे विदेशों में दिखाकर चंदा लाते हैं। कहीं मस्जिद के नाम पर कहीं मदरसा के नाम पर और कहीं कहीं इसी तरह के सैलाब और सूखे के नाम पर चंदा लाना और उससे मौज करने का सिलसिला जारी है।

जिस तरह सरकारी योजना का लाभ ग़रीबों को नहीं मिलता ठीक उसी तरह ऐसे संगठन ग़रीब मुसलमानों के नाम पर चन्दा लाते हैं और खुद ऐश करते हैं। मौलाना असरार साहब फिलहाल काँग्रेस के सांसद भी हैं. अगर उन्होंने ऐसी ग़लत खबर प्रकाशित कराई है तो उनके विरुद्ध कारवाई होनी चाहिए और अगर मौलाना को बदनाम करने की कोशिश की गयी है, तो इसका भी पता लगाया जाना चाहिए.

एएन शिबली की रिपोर्ट

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Comments on “सूखे को सैलाब बताने वाला उर्दू अखबार

  • shahid azmi says:

    सूखे को सैलाब बताने वाला उर्दू अखबार greatttttttttttttttttttttttttttttttttttt article

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  • Mohd. Ishaque says:

    glat khabar prakashit karna hi sabse bada gair jimmedarana harkat hai es ke liye poori tarah se akhbar zimmedar hai. rahi bat chande ki to sirf muslim sngathan me hi achcha ya bura karne wale log hain aisa nahi baki auar sangathan bhi doodh ke dhule nahi janta sab janti hai.

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