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दिग्गज पत्रकारों को ठगा सफेदपोश नटवर लाल ने

लखनऊ। भगवान राम का 14 वर्ष में वनवास पूरा हो गया था, लेकिन स्वतंत्र भारत के कर्मचारियों का वनवास अभी भी जारी है। सफेदपोश नटवरलाल स्वतंत्र भारत के मालिक के.के. श्रीवास्तव ने अपने जालसाजी और राजनीतिक पहुंच के बल पर बड़े-बड़े दिग्गज पत्रकारों को छला है। वर्ष 1998 में स्वतंत्र भारत में तालाबंदी से सड़क पर आए सैकड़ों कर्मचारी आज भी न्याय के लिए लड़ रहे हैं।

लखनऊ। भगवान राम का 14 वर्ष में वनवास पूरा हो गया था, लेकिन स्वतंत्र भारत के कर्मचारियों का वनवास अभी भी जारी है। सफेदपोश नटवरलाल स्वतंत्र भारत के मालिक के.के. श्रीवास्तव ने अपने जालसाजी और राजनीतिक पहुंच के बल पर बड़े-बड़े दिग्गज पत्रकारों को छला है। वर्ष 1998 में स्वतंत्र भारत में तालाबंदी से सड़क पर आए सैकड़ों कर्मचारी आज भी न्याय के लिए लड़ रहे हैं।

बीते 15 वर्षों में न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते कई पत्रकारों का निधन हो गया, लेकिन न्याय नहीं मिला। स्वतंत्र भारत कर्मचारियों के निलम्बन का प्रकरण जहां श्रम न्यायालय में चल रहा है वहीं हाईकोर्ट में 10 साल से फैसला सुरक्षित है, लेकिन अभी तक फैसले की घोषणा नहीं हो पाई है।

मालूम हो कि लखनऊ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र स्वतंत्र भारत का प्रकाशन आजादी की पहली किरण (15 अगस्त 1947) के साथ जयपुरिया ग्रुप ने शुरू किया था। इसके बाद इस समाचार पत्र को थॉपर ग्रुप ने अधिग्रहण कर लिया था। थॉपर ग्रुप से 15 मई 1996 को एग्रो फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड ने खरीदकर प्रकाशन शुरू किया था। एग्रो फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के.के. श्रीवास्तव हैं। एग्रो फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड के पास स्वतंत्र भारत का प्रबंधन आते ही दुर्दिन शुरू हो गए थे। स्वतंत्र भारत के मालिक के.के. श्रीवास्तव की गलत नीतियों के चलते घाटा होने लगा था। 12/13 अक्टूबर 1998 की रात को अचानक स्वतंत्र भारत प्रबंधन ने तालाबंदी कर दी गई। इससे लगभग सैकड़ों कर्मचारी सड़क पर आ गए।

स्वतंत्र भारत के कर्मचारियों ने न्याय के लिए श्रम न्यायालय, औद्योगिक न्यायधिकरण और हाईकोर्ट की शरण में गए। लेकिन न्याय नहीं मिला। लगभग 100 दिन की तालाबंदी के बाद स्वतंत्र भारत प्रबंधन ने 22 जनवरी 1999 को तालाबंदी समाप्त करने की घोषणा की। स्वतंत्र भारत प्रबंधन ने पुराने कर्मचारियों को न रखकर नए कर्मचारियों से काम करवाना शुरू कर दिया। जिसका पुराने कर्मचारियों ने जमकर विरोध किया। लेकिन स्वतंत्र भारत प्रबंधन की सियासी पहुंच के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

यूपी न्यूज पेपर इम्प्लाइल यूनियन की अध्यक्ष श्रीमती चंद्रलेखा ने बताया कि स्वतंत्र भारत प्रबंधन की कुनीतियों के कारण कई कर्मचारियों ने न्याय की उम्मीद में संघर्ष करते-करते दम तोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि स्थायी कर्मचारियों का वेतन, डीए, एचआरए, सीसीए लाखों रुपए बकाया है। इस तरह स्वतंत्र भारत के प्रत्येक कर्मचारी का लगभग 8 लाख रुपए बकाया है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के मालिक के.के. श्रीवास्तव ने किसी भी पत्रकार का बकाया वेतन आदि नहीं दिया है। मौजूदा समय स्वतंत्र भारत के कर्मचारियों के लिए कोई भी नियम-कानून नहीं लागू हैं। अधिकतर पत्रकार और अन्य कर्मचारी ढाई से तीन हजार रुपए के वेतन पर काम कर रहे हैं। बीते छह माह से पत्रकारों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। इस संबंध में स्वतंत्र भारत के मालिक के.के. श्रीवास्तव से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। निष्पक्ष दिव्य संदेश की पहल पर श्रम विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी। जिससे कर्मचारियों को न्याय मिल सके।

15 वर्ष से वनवास काट रहे हैं स्वतंत्र भारत के पत्रकार : स्वतंत्र भारत के पीडि़त कर्मचारियों में श्रीमती चंद्रलेखा, सहदेव सिंह मलिक, उदित नारायन झा, जी.पी. निराला, किशन सिंह रावल, दिनेश सिंह, दिवंगत बाबू राम शर्मा, विजय वीर सहाय, श्याम नारायण पाण्डेय, जगदीश जोशी, आर.डी. शुक्ला, संजय शर्मा, अशोक कुमार त्रिपाठी द्वितीय, माता प्रसाद मिश्र, वेद प्रकाश शर्मा, हरीश चंद्र श्रीवास्तव, दिवंगत दिलीप कुमार पाठक, श्रीराम वर्मा, दिवंगत अशोक शर्मा, ए.के. सिद्दीकी, छवि नारायण पाण्डेय, अंजु गुप्ता, सुनीता अग्रवाल, रंजना गुप्ता, अलका पाण्डेय, श्रीमती रुक्मणी, मनोज रानी, गीता मुखर्जी, चंद्र कुमार वर्मा, अखिलेश कुमार अवस्थी, अशोक कुमार, नरेश चंद्र चौरसिया, विश्वजीत चौधरी, कृष्ण गोपाल, अशोक सिंह, मुनेश्वर सिंह, हैदर आगा, आरिफ हुसैन, शेष कुमार गुप्ता, राम सिंह, अवधेश कुमार पाण्डेय, रामशंकर मिश्र, दुखहरन सिंह, राजीव पाठक, रणजीत सिंह, राजकुमार यादव, देवराज यादव, दिग्विजय नाथ पांडेय, दिनेश कुमार पाण्डेय, मोहम्मद असलम खान, रामेश्वर मिश्र, राजेश कुमार कश्यप, अविनाश पाण्डेय, रामानंद सैनी, विश्वजीत भट्टाचार्या, अभिषेक वाजपेयी, इन्द्रमणि श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, संतोष सिंह, उमेश जोशी, एरिक थामसन, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, राकेश चौधरी ज्ञानेन्द्र कुमार पाण्डेय, राम बाबू, अनुग्रह नारायण पाण्डेय, ललित मिश्र, सिद्घनाथ त्रिपाठी, वाई.एन. पाण्डेय देवराज मौर्या, प्रतिभा कटियार, सुशील डिक्शन, विनोद जोशी, शेषमणि दुबे, मुकुल मिश्र, राकेश चंद्र शुक्ला, प्रमोद जोशी और वीर विक्रम बहादुर मिश्र हैं।  (क्रमश:)

निष्‍पक्ष दिव्‍य संदेश में प्रकाशित अब्दुल हसैनन ताहिर की रिपोर्ट.

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