प्रयास यह होना चाहिए कि हिंदू धर्म का ही नाश हो

Shambhunath Shukla : मुझे समझ नहीं आ रहा कि फेसबुक में ब्राह्मणवाद पर जितना अधिक हमला होता है उतना ही अधिक वह और मजबूत होता जाता है ठीक चीनी पुराणों के फीनिक्स पक्षी की तरह जो अपनी राख से ही फिर पैदा हो जाता है। दरअसल सच्चाई तो यह है कि फेसबुक के दलित पुरोधा ब्राह्मणवाद की बजाय उन लोगों पर हमला करते हैं जो दुर्भाग्य से ब्राह्मण घरों में पैदा हो गए हैं। पूजा और पुजापा अब दलित और पिछड़ों में अधिक है। हाथ देखना और भाग्य बांचने का धंधा अब तमाम पिछड़ी जातियों के लोग कर रहे हैं।

जो जेल रुपराम ने बनाई थी, उसका पहला कैदी भी रुपराम ही बना

Rajen Todariya : टिहरी के राजा की भी कई दिलचस्प कहानियां है। यह उस समय की बात है जब सुदर्शन शाह के समय में टिहरी की जेल का निर्माण हो रहा था। इस जेल बनाने का ठेका रुपराम को दिया गया था। रुपराम ने अच्छी जेल बिल्डिंग का निर्माण किया। इस जेल के निर्माण के बाद जो सामान बचा था उससे रुपराम ने अपना बंगला बनवा लिया। जब राजा ने जेल देखी तो वह रुपराम द्वारा किए गए बेहतर काम से बेहद खुश हुआ और उसने रुपराम की खूब तारीफ की। राजा के मुंह से अपनी प्रशंसा सुनकर रुपराम के उत्साह का ठिकाना नहीं रहा।

सफदर की याद में ‘चौराहे पर’ नुक्‍कड़ नाटक

नये साल का पहला दिन था। चारो तरफ कोहरा फैला था। हाड़ कंपाती ठंडी हवा हड्डियों को छेद रही थी। लखनऊ में गोमती नदी के किनारे शहीद स्मारक पर इस ठण्ड व कोहरे का असर कुछ ज्यादा ही था। पर इस क्रूर मौसम की तरफ से बेपरवाह नगाड़े की ढम..ढम.. और ढपली पर थाप देते अमुक अर्टिस्ट ग्रुप के कलाकार अनिल मिश्रा ’गुरुजी’ के नेतृत्व में शहीद स्मारक पर जुटे थे। इनके द्वारा नुक्कड़ नाटक ‘मुखौटे’ का मंचन होना था। कलाकारों के हाथों में जो बैनर था, उस पर लिखा था ‘हम सब सफदर, हमको मारो’। कलाकार अपने नाट्य प्रदर्शन के माध्यम से हमें याद दिला रहे थे कि पहली जनवरी के दिन ही सफदर हाशमी शहीद हुए थे। सफदर आज नहीं हैं, पर वह सांस्कृतिक संघर्ष आज भी जारी है। अपने नाटक ‘मुखौटे’ के द्वारा कलाकार हमें यह आभास दे रहे थे कि हम जिस सांस्कृतिक अंधेरे में जी रहे हैं, वह मौसम के कोहरे से कही ज्यादा घना है। जरूरत तो कला को मशाल बनाने की है जो इस अंधेरे को चीर सके।

भारत में रेप सात गुना बढ़ गए हैं

कोई अपना हमें कितना ही बुरा कहे, जब पड़ोसी हमें ताना मारता है तो हृदय के टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। दिल्ली गैंग रेप कांड की जिस बात ने दिल के टुकड़े कर दिए वह है ग्लोबल टाइम्स में चीन की यह टिप्पणी कि भारत सामाजिक विकास में अभी चीन से 30 साल पीछे चल रहा है। कोई अमरीका, कोई इंग्लैंड, कोई यूरोप हमें पिछड़ा कहे तो चलता है, लेकिन चीन, जिसने 1948 में हमारे साथ ही यात्रा शुरू की थी, उसकी आज यह मजाल कि हमें इस तरह ताना मारे! पिछले एक दशक से भारत पश्चिम का दुलारा रहा है। हमारी आर्थिक प्रगति की दर को देखकर इसे आशा जगी थी कि चीन के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भारत का ही उत्साह बढ़ाना होगा। भारत एशिया में नई ताकत बनकर उभरे तो हमारे लिए ज्यादा अच्छा है, भारत हमारी भाषा समझता है, हम भारत की भाषा समझते हैं। चीन तो दुर्बोध्य है। वहां की लिपि एक रहस्य है। लेकिन यह क्या! चीन के इस सच का हम क्या उत्तर दें। 2012 के अंतिम दिन इसने यह क्या कह दिया। भारत में 40 सालों में रेप सात गुना बढ़ गए!

बलात्‍कार और छेड़खानी में मीडिया में प्रकाशित अश्‍लील विज्ञापनों की भूमिका

मीडिया का नैतिक कर्तव्य है कि समाज में फैली हुई कुरीतियों से समाज को सजग करे, देश और समाज के हित के लिए जनता को जागरूक करें, परन्तु ऐसा लगता है कि धन कमाने की अंधी दौड़ में लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपनी सभी मर्यादाओं को लाँघ रहा है। सभी समाचार पत्रों में संपादक प्रतिदिन बड़ी-बड़ी पांडित्यपूर्ण सम्पादकीय लिख कर जनमानस को अपनी लेखनी की शक्ति से अवगत करते हैं परन्तु व्यावहारिक रूप में ऐसा लगता है कि पैसा कमाने के लिए सभी कायदे कानूनों को तक पर रख दिया गया है। सभी समाचार पत्रों में अश्लील एवं अनैतिक विज्ञापनों की भरमार है, जिससे समाज के लोग गुमराह होते हैं। समाचार पत्र केवल एक लाइन लिखकर लाभान्वित हो जाता है। क्या कभी किसी समाचारपत्र ने ऐसे विज्ञापनों की सत्यता को जांचने की कोशिश की? क्या ऐसे अश्लील और अनैतिक विज्ञापनों को समाचार पत्रों में छपने भर से वह अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो सकता है?

सहारा इंडिया की चालाकी कहीं उसे डूबा ना दे

बिहार शरीफ : सहारा इंडिया दोबारा कोर्ट में अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है. निवेशकों की जमा राशि लौटने के बजाय उसे कन्वर्जन किया जा रहा है. कहीं सहारा इंडिया की यह चाल उसे डूबा न दे. प्राप्त जानकारी के अनुसार बाज़ार नियामक सेबी ने सहारा इंडिया की सहारा हाऊसिंग तथा सहारा रियल स्टेट की दो योजनाओं के मार्फ़त वसूल की गए राशि को अवैध करार दिया था. जानकर बताते हैं कि आदेश के समय लगभग 96000 करोड़ रुपये दो योजनाओं में जनता ने निवेश किया था. दो योजनाओं को सेबी द्वारा अवैध ठहराने के बाद सहारा इंडिया अपने अन्न योजनाओं में उक्त राशि को कन्‍वर्जन करवाना शुरू कर दिया था. अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर सहारा इंडिया ने अपना हित साधने का काम किया है. बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसला आने तक सहारा इंडिया ने लगभग 17400 करोड़ रुपया ही उक्त दोनों योजनाओं में जमा रहने की बात बतायी गयी है.

कई महीनों से कर रहा था ब्‍लैकमेल कर दुराचार, विरोध करने पर सर काट डाला

बाराबंकी। जिले के रामनगर में एक नाबालिग गरीब लड़की को पहले अपने जाल में फंसाया फिर करता रहा बलात्कार। जब दिल्ली की लड़की ने लड़ाई का हौसला दिलाया तो इस नाबालिग लड़की ने जब विरोध किया तो बांके से प्राथमिक विद्यालय ग्राम बिन्दौरा में काटकर मार डाला। परिजनों को सूचना दी तो पुलिस ने रात भर टाल दिया। सुबह हत्यारे की शिनाख्त पर लाश बरामद की। जानकारी के अनुसार महादेवा क्षेत्र के रामनगर में एक जालिम ने अपने जुल्म की इंतेहा खत्म कर दी। जहां देश एक लड़की के बलात्कार को अभी भूल भी न पाया था और उसकी मौत के गम में आंसू बहा रहा था। उसी शाम एक हैवान ने ग्राम बिन्दौरा परसपुर निवासी कल्लू की 15 वर्षीय पुत्री रीना (दोनों काल्पनिक नाम) से प्रवेश पुत्र गनेश प्रसाद रावत उम्र 22 वर्ष कई दिनों से अपनी बातों से बरगलाकर उसके साथ हैवानियत का खेल खेलकर उसके साथ बलात्कार करता रहा।

सड़क हादसे में चंदौली के एएसपी और गनर की मौत

जौनपुर। जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र में आज सड़क हादसे में चंदौली जिले के अपर पुलिस अधीक्षक और उनके गनर की मौत हो गयी, जबकि उनका चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार अम्बेडकरनगर जिले के मूल निवासी चंदौली जिले में अपर पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात राम चंद्र यादव …

फांसी नहीं, लंबी कैद दो रेपिस्ट को : राजेंद्र यादव

Rajendra Yadav : आज 31 दिसंबर यानी वर्ष का अंतिम दिन। ना जाने कब से मैं नये साल का स्वा्गत दोस्‍तों के साथ मिलकर करता रहा हूं। खाना-पीना, हंसी-मजाक के साथ हमलोग 12 बजे के बाद अपने-अपने घरों की राह लेते थे। मगर आज मेरा मन किसी को बुलाने का नहीं है और मैं अकेले ही अपने भीतर रहकर यह वर्षांत मनाने जा रहा हूं। दा‍मिनी की मत्यु ने मुझे अवसन्न कर दिया है। कितनी यातनायें भुगत कर उसने अंतिम सांस ली होगी। तय नहीं कर पा रहा हूं कि उसके हत्यारों को क्या सज़ा दी जाए। फांसी एक आसान समाधान है। वह अपराध की नहीं, अपराधी की समाप्ति का प्रतीक है। हमारी कोशिश अपराध को समाप्त करने की है। अगर रेप के अपराधी को फांसी की सज़ा होगी तो निश्चय ही वह रेप के बाद लड्की की हत्या कर देगा।

दामिनी कह गई- अब सोना नहीं

दु:खद, बेहद दु:खद २०१३ का आखिरी शनिवार। दामिनी चली गई। हमेशा के लिए इस बेदर्द दिल्ली से। बेहया दुनिया से, जहां उसे सिर्फ मांस की तरह देखा गया। भेडिय़ों ने नोंचा था, १३ दिन पहले उसका जिस्म। १३ दिन बाद मौत हो गई भारत की अस्मिता की। घनघोर शर्मनाक दिन था १६ दिसंबर, जब भारत के दिल में महज रात १० बजे, चलती बस में दामिनी की आत्मा का बलात्कार किया ६ हरामखोर भेडिय़ों ने। १७ दिसंबर की सुबह लज्जा से सिकुड़ गया था सारा देश (युवा), जमा हो गया राजपथ पर, इंडियागेट पर और संसद के माथे पर। आक्रोशित, उदेलित, बेबस देश अपनी ही सरकार से पूछ रहा था- नारी को पूजने वाले देश में अब नारी कहां सुरक्षित रह गई है? सरकार आखिर करती क्या है? कब तक यूं ही तार-तार होती रहेगी मर्यादा, आजादी और दामिनी?

प्रतिभा पाटिल ने दी थी सात रेपिस्टों को माफ़ी

दिल्ली रेप कांड को लेकर नौजवानों खासकर युवतियों में जबरदस्त आक्रोश है. ” रेपिस्टों को फांसी दो” और “वी वांट जस्टिस” के नारे के साथ देश भर में लड़कियां सड़कों पर हैं। इस अभूतपूर्व विरोध से देश का राजनीतिक नेतृत्व हक्का-बक्का और सहमा हुआ है. लम्बी-लम्बी बोलनेवाले नेताओं के बोल नहीं फूट रहे. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री खुद बेटियों का बाप होने की दुहाई दे रहे हैं. लेकिन बलात्कारियों को फांसी देने का कानून बनाया जायेगा, यह वादा नहीं कर रहे, जानते हैं क्यों? क्योंकि बलात्कारियों को माफ़ी देने की केंद्र सरकार की नीति है. यह मैं नहीं कह रहा बल्कि केंद्र सरकार के दस्तावेज यह रहस्योद्घाटन कर रहे हैं. जी हाँ, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति होने का गौरव पानेवाली प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल में 7 बलात्कारियों की फांसी की सजा माफ़ की थी. नीचे उसका ब्योरा है.

गुन्डागर्दी में रिलायंस को पीछे छोड़ा आदित्य बिरला ने

सिंगरौली के विभिन्न जन संगठनों के सहयोग से और लोकविद्या आश्रम के संयोजकत्व में आदिवासी किसान कामगार एकता के लिए निकली लोकसंघर्ष यात्रा के चैथे दिन बरगवां क्षेत्रा मे लग रहे हिन्डालको के एल्युमिनियम प्लान्ट और कैप्टिव पावर प्लान्ट के उन क्षेत्रों में पहुंची जहां कम्पनी सैकड़ों परिवारों को उजाड़कर जले हुउ कोयले की राख रखने का बांध बना रही है। ओरगड़ी और गिधेर गांव को उजाड़कर ये सारा उपक्रम किया जा रहा है जो मूलतः खेती किसानी करने वाले लोग रहे हैं। जमीन के उर्वरता का आलम यह है कि गांव में किसी को भी अनाज और सब्जियां खरीदने की जरूरत कभी नहीं पड़ी। लेकिन अब सभी लोग बाजार पर निर्भर हैं। सब कुछ खरीदना है और आमदनी का जरिया कोई नहीं। लोगों से बातचीत में आदित्य बिरला समुह द्वारा दूसरी कम्पनियों की तुलना में जारी क्रूरता की सभी हदें तोड़ देने की अंधी दौड़ के भी कई प्रमाण मिले। केवल मौखिक आश्वासनों से आजि़ज आ चुके भोले भाले किसान जब सभी आश्वासन लिखित तौर पर दिये जाने कि मांग पर अड़ गये तो कम्पनी के अधिकारियों ने गुन्डों का इस्तेमाल किया और लिखित आश्वासन के बजाय गोलियों का सहारा लिया।

दामिनी की ऊर्जाशक्ति का नववर्ष!

प्रदूषित मानसिकता की शिकार ‘दामिनी’ दमक कर मानवीय चेतना को अपरिमित ऊर्जा-शक्ति देकर विलीन हो गई, जो नववर्ष 2013 के नव प्रभात की सुखद उमंग लेकर आ रहा है, जो मानसिक प्रदूषण को क्षार-क्षार कर सके। दामिनी का अर्थ है- बिजली, जिसकी ऊर्जाशक्ति असीम होती है। घनघोर घटा के बीच दमककर जब दामिनी गिरती है, तो अपनी ऊर्जाशक्ति से वातावरण को झकझोर देती है, ऐसा ही वर्ष 2012 के अंतिम दौर में चिकित्सा विज्ञान की छात्रा दामिनी आसुरी प्रवृत्ति की प्रदूषित सामाजिक चेतना की शिकार होकर शांत हो गई। विद्युत-छंटा की प्रतीक छात्रा दामिनी की ऊर्जा-शक्ति ने समूचे मानव समाज को झकझोर दिया। आज नव-वर्ष के स्वागत में दामिनी की ऊर्जा क्या मानवीयता की सुप्त-चेतना जागेगी। वर्ष 2012 के अंतिम पखवाड़े में कितनी ही ‘दामिनियां’ उस दामिनी के बाद अमानवीयता के मानसिक प्रदूषण की शिकार हुई। स्वार्थ और महत्वाकांक्षा से सराबोर राजनैतिक कारोबारियों से व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद छोड़कर अब नववर्ष की नूतन बेला में शक्ति स्वरूपा दामिनियों (महिला-वर्ग) को ही खड्ग और खप्पर लेकर अपने वास्तविक रूप में आना होगा।

तुम्हारी बेटी होती तो भी क्या इसी तरह के सवाल पूछते?

भारत में बलात्कार या सामूहिक बलात्कार कोई नई या कभी-कभार होने वाली घटना नहीं है. बलात्कारों की इन घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? किसे सजा दी जाये? क्या सिर्फ बलात्कारियों को फांसी पर टांगने से समस्या सुलझ जाएगी? बलात्कार के आरोपियों को तो देर-सबेर सजा मिल ही जाएगी. लेकिन क्या वे छह लोग ही दोषी हैं? उन लोगों ने मिलकर चीखों के साए में हवस की प्यास बुझाई थी. वह रोयी होगी, गिड़गिड़ाई होगी, चीखी होगी, चिल्लाई होगी. चंडी सा रौद्र रूप दिखाया होगा. काली सा रौद्र रूप भी दिखाया होगा. लेकिन कामांधों को मन की पीड़ा, आत्मा का दर्द दिखाई नहीं देता. उन्हें तो सिर्फ लड़की का शरीर दिखाई दे रहा होगा. यह शरीर उन्हें वैसा ही लग रहा होगा जैसा वे फिल्मों के सेक्स दृश्यों में देखते है. या शायद उस अबला में उन्हें अंग प्रदर्शन करने वाली अदाकाराएँ दिख रही होंगी. क्या कारण है की भारत जैसे सशक्त मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों वाले राष्ट्र में बलात्कार जैसे घृणित अपराध बढ़ रहे है?

फैजाबाद में आनंद पटवर्धन की फिल्म ‘राम के नाम’ पर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का बवाल

फैज़ाबाद शहर में इधर एक अजीब सा विवाद पैदा हुआ है जिसे सुनकर सोच-समझ वाले लोग माथा पीट लेंगे। वे यह समझ नहीं पायेंगे कि इस मसले पर रोयें या हॅंसे। उन्हें इस बात पर भी आश्चर्य होगा कि लोगों की जानकारियां किस कदर कम हैं और वे इसी कम जानकारी के आधार पर कैसे-कैसे विचित्र निर्णय ले लेते हैं? हमें इस तरह के पूर्वाग्रहों पर भी आश्चर्य होगा कि लोग साहित्य, कला और सिनेमा के प्रति कभी-कभी कैसे अजीबोगरीब ढर्रे अपना लेते हैं। राजनीतिक पूर्वाग्रह और संकीर्ण धार्मिक भावनाएं कभी-कभी हमारी दृष्टि को ऐसा छेंक लेती हैं कि हमारी विवेकशीलता तक बाधित हो जाती है।

बेबस बाला, बर्बर बलात्कार और देश के दर्द की दास्तान

मुंबई। खेत रोए, खलिहान रोए। पेड़ रोए, पखेरू रोए। हर आंख में आंसू और हर दिल में दर्द का दावानल। पूरा देश आहत। हर मन मर्माहत। सबसे बड़ी नेता सोनिया गांधी सोई नहीं। तो, मजबूर होकर मनमोहन सिंह भी एयरपोर्ट भागे। एक विशेष विमान में सिंगापुर से उस युवती की लाश शनिवार की रात यानी रविवार को तड़के भारत आई। तो, उसको लेने दोनों दिल्ली के हवाई अड्डे पर हाजिर थे। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। पहली बार हुआ। जब उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, तो वह जिंदा थी। पर, लौटी तो लाश। सदा के लिए सो गई, पर पूरे देश को जगा गई। सारा देश दुखी। जया बच्चन जार जार रोईं। तारा भंडारी तार तार दिखीं। शबाना आजमी सुबक कर रोईं। गिरिजा व्यास गमगीन। और स्मृति इरानी सन्न हैं।

दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी से ही मिल गई है थाने की पुलिस

देवरिया। कोतवाली थाना अन्तर्गत मुहल्ला नेहरू नगर की एक युवती की मां ने एक युवक द्वारा दुष्कर्म करने के प्रयास किए जाने की शिकायत पुलिस से की है। लेकिन कुछ पुलिस वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के स्थान पर शिकायतकर्ता को ही परेशान कर रहे हैं तथा समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। शिकायतकर्ता की मां ने शनिवार को इस मामले की शिकायत कोतवाली थाने जाकर कोतवाल से की। उनका आरोप है कि पुलिस के सामने ही आरोपी तथा उसके साथ आए दर्जनों लोगों ने मां बेटी के साथ बदसलूकी और गाली गलौज की। जब मां बेटी कोतवाली में ही रोने लगी तब जाकर पुलिस ने थोड़ी सी संवेदना दिखाई और आरोपी युवक को दो चार थप्पड़ और डंडे लगाए। 

आखिरकार! हमें इन प्रश्‍नों के उत्‍तर ढूंढ़ने ही होंगे

आखिरकार 29.12.12 की काली गहरी रात। समय 2 बजकर 15 मिनट माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल। ‘‘दामिनी’’ हॉं हमारी बहन, हमारी बेटी, हमारा हिस्सा! हमें सदा-सदा के लिए छोड़, मुक्ति को प्राप्त हो गई। न्यूज चैनलों पर प्रसारण का नया दौर शुरू। नेताओं के चेहरे एवं सांत्वना एवं दुखःदर्शाती बाइट। शायद यही हश्र है, एक दुखी, पीड़ित एवं त्रस्त आत्मा के मोक्ष का। मुनारिका का बस स्टॉप, समय रात के 9:00 बजे, समय उस काली रात का गवाह बना जिसने दामिनी जैसी होनहार पैरामेडिकल की छात्रा का सबसे बुरा हश्र देखा। पिछले 13 दिनों से कुछ तथा कथित जनप्रतिनिधियों का दुस्साहसपूर्ण टीवी उवाच, पुलिसिया दमन का वीभत्स चेहरा एवं टीवी चैनलों द्वारा पैनलों के नोंक-झोंक का प्रसारण आखिर क्या मिला। सिर्फ सतही आश्‍वासन, ठोस कदम, उठाने के वादे, मंत्रियों की खीझ एवं पत्रकारों के चुभते प्रश्‍न। खोया क्या-2 एक साहसी मां की दुलारी, पिता के ऑंखों का तारा, भाई की प्यारी बहना एवं परिवार की उम्मीदें-‘‘दामिनी’’। इन्हीं हालत को देखकर मानसिक झंझावात से उठते सवाल। हमें इन प्रश्‍नों का उत्तर ढूंढ़ना होगा।

गम में डूबा गैंगरेप पीडिता का पूरा गांव

बलिया। पूरे देश को झकझोर देने वाले दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड की पीड़ित लड़की की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत की खबर से उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित उसके पुश्तैनी गांव मेड़वरा कलां में शोक की लहर है और गमगीन लोगों के घरों में शनिवार को चूल्हे नहीं जले। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से सटे मेड़वरा कलां गांव में रेप पीड़ित लड़की की मौत की खबर के बाद मातम का माहौल है और घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। करीब 13 दिन तक जिंदगी के लिये संघर्ष करने वाली उस लड़की के चाचा लालजी ने बताया कि उनकी भतीजी गरीबी में जी रहे अपने परिवार के लिये उम्मीद की किरण थी। उन्होंने बताया कि बेहद गरीब परिवार में जन्मी उनकी भतीजी बहुत जहीन और संघर्षशील थी। उसकी योग्यता और लगन को देखते हुए उसके पिता रूप नारायण (काल्पनिक नाम) ने उसे उंची तालीम दिलाने के लिये अपना पुश्तैनी खेत भी बेच दिया था।

दामिनी के जिस्म को नंगा करने वालों की असफलता ने नेताओं को नंगा कर दिया

: इस खोमोशी की गूँज बहुत लंबी होनी चाहिए : शरीर के अंगों और सांसों ने तो दामिनी का साथ छोड़ दिया मगर उस हिम्मत जो उसने दरिंदों से जूझने में दिखाई थी देश के करोडो नौजवानों में बिखर गयी. साँसें थम गयी और जिस्म बेजान हो गया मगर उसके एक संघर्ष ने देश की आत्मा को झकझोर दिया और साथ ही सियासतदानों की फर्जी संवेदना के कपडे भी उतार दिए. दरअसल दामिनी के जिस्म को नंगा करने वालों की असफलता ने राजनीतिज्ञों को नंगा कर दिया. जिस तरह देश कि संसद ने घटना के तुरंत बाद प्रतिक्रिया दी थी उससे न चाहते हुए भी एक आस जगाई थी. हालांकि दिल गवाही तो नहीं दे रहा था कि इन घडियाली आंसुओं पर यकीन करे मगर फिर भी लगा था कि शायद कुछ संवेदना बची हो.