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पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मी 17 को मनाएंगे ‘काला दिवस’

: म‍जीठिया वेतन बोर्ड को लागू करने में देरी से पत्रकार संगठन चिंतित :  पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारी संगठन जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को अधिसूचित करने में हो रही देर के विरोध में 17 मार्च को ‘काला दिवस’ मनाएंगे. दिल्‍ली ऑफ जर्नलिस्‍ट्स (डीयूजे) की पहल पर गठित दिल्‍ली यूनिटी सेंटर के तहत नगर के विभिन्‍न पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक कर सर्वसम्‍मति से यह फैसला लिया.

: म‍जीठिया वेतन बोर्ड को लागू करने में देरी से पत्रकार संगठन चिंतित :  पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारी संगठन जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को अधिसूचित करने में हो रही देर के विरोध में 17 मार्च को ‘काला दिवस’ मनाएंगे. दिल्‍ली ऑफ जर्नलिस्‍ट्स (डीयूजे) की पहल पर गठित दिल्‍ली यूनिटी सेंटर के तहत नगर के विभिन्‍न पत्रकार व गैर पत्रकार कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक कर सर्वसम्‍मति से यह फैसला लिया.

डीयूजे के महासचिव एसके पांडेय ने कहा कि सरकार की ओर नियत समय सीमा में जस्टिस मजीठिया ने अपनी सिफारिशें श्रम मंत्रालय में जमा कर दीं. इसके बाद भी अधिसूचना जारी करने में देर में अनुचित है. उन्‍होंने कहा कि इसे जानते-समझते हुए सभी पत्रकारों व गैर पत्रकार कर्मचारियों को अपनी एका बढ़ाते हुए 17 को ‘काला दिवस’ मनाकर अपना विरोध जताना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि डीयूजे ने हमेशा कन्‍फेडरेशन, एआईएनएफ, विभिन्‍न संवाद एजेंसियों और गैर पत्रकार कर्मचारी संगठनों की आपसी एकता पर जोर दिया है. उन्‍होंने चेताया कि जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के अधिसूचित करने में सरकार की ओर से जो देर की जा रही है उसके विरोध में सतत आंदोलन चलाना पड़ सकता है.

दूसरी तरफ, इंडियन जर्नलिस्टस यूनियन (आईजेयू) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आशंका व्यक्त की गई कि केन्द्र सरकार जान बूझकर अधिसूचना जारी करने में देरी कर रही है। संघ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, श्रमजीवी पत्रकार लंबे समय से वेतनमान में संशोधन का इंतजार कर रहे हैं और इसमें और अधिक देरी उन्हें आंदोलन के रास्ते पर जाने को मजबूर करेगी।

बयान में उच्चतम न्यायालय के इस आदेश पर भी चिंता व्यक्त की गई, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी श्रमजीवी पत्रकार को किसी तरह के खराब आचरण के कारण सेवामुक्त किया जाता है तो वह श्रमजीवी पत्रकार कानून के खंड 5 के तहत ग्रेच्यूटी का अधिकारी नहीं होगा। संगठन ने केन्द्र सरकार से इस कानून में तुरंत संशोधन करने की मांग की ताकि देश के श्रमजीवी पत्रकारों के हितों की रक्षा हो सके।

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0 Comments

  1. Neeraj Bhushan

    March 7, 2011 at 5:05 am

    I would wait to count how many journalists actually participate in such propaganda. They are the same people who have shamed us. Bhadas needs to be there to cover, as it becomes its responsibility after putting this ‘news’.

  2. sanyogitakumari

    March 7, 2011 at 1:45 pm

    sabhi ko us din kali shart pahan kar aana chahiye

  3. Mnaoj Kumar Kashyap

    March 7, 2011 at 1:53 pm

    Dear Sir
    I want to Join B4M Club.

    Manoj Kumar Kashyap
    News Editor
    World Sports Reporter
    (Sports News Magazine)
    Mob : 9359208274

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