: आमरण अनशन की घोषणा के बाद हरकत में आया शासन-प्रशासन : पिछले दिनों बिलासपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन ने जर्नलिस्टों एवं कैमरामैनों के साथ दुर्व्यवहार किया था. वीआईपी की सुरक्षा के लिए कैमरामैनों को खतरा बताया गया था. पुलिस और प्रशासन के इस रवैये से नाराज पत्रकारों ने रायपुर में आमरण अनशन करने का ऐलान किया था. रायपुर और बिलासपुर के प्रेस क्लब अध्यक्षों के एक साथ 14 सितम्बर को रायपुर में आमरण अनशन पर बैठने की खबर से राज्य सरकार हरक़त में आई.
मुख्यमंत्री की पहल से बातचीत के दौर शुरू हुए. शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप पर पत्रकारों ने 13 सितम्बर की शाम को अनशन रद्द करने का अनुरोध मान लिया. पंडाल की बुकिंग कैंसल कर दी गयी. 15 सितम्बर को बिलासपुर कलेक्टरेट के सभा हाल में, दिन के 12 बजे रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल पुसदकर और बिलासपुर के शशिकांत कोन्हेर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी, स्थानीय विधायक व मंत्री अमर अग्रवाल, कलेक्टर, आईजी, एसपी और जनसंपर्क अधिकारी साथ बैठे.
आरोपों-प्रत्यारोपों को भूल, संबंधों में उपज आई कटुता को हटाने पर सहमति हुई. मीडिया बढ़ रहा है, सो कैमरे भी बढ़ेंगे ही, इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन कार्यक्रम स्थलों में मीडिया कर्मियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध कराने और मीडिया कर्मियों की आवाजाही को भी ध्यान में रखने का आश्वासन दिया. दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपेक्षा की गई.
बिलासपुर से कमल दुबे की रिपोर्ट.












gulshan saifi
September 18, 2010 at 5:24 pm
koi bat nhi achhi pahal hai……….