: वीर सांघवी के नीरा राडिया से बातचीत के कई और टेप जारी : देश के बड़े-बड़े मुद्दों पर ये ऐसे बात करते हैं जैसे सब कुछ इनके इशारे पर होता है : दलाली के टेपों ने मीडिया जगत में मचाई खलबली : वीर सांघवी मुंबई के रईस परिवार के बेटे हैं और पत्रकारिता में 22 साल की उम्र में संपादक बन गए थे। अब पचास से ज्यादा के हैं लेकिन रंगबाजी और कभी टीवी चैनलों में से किसी के लिए तो कभी शुद्ध दलाली वाले कॉलमों के लिए दुनिया के कोने-कोने में घूमते रहते हैं। इसके बावजूद जयपुर में हों या गोवा में, महादलाल नीरा राडिया के लिए मुकेश अंबानी की सेवा करने का वक्त निकाल लेते हैं। हमारे पास वीर सांघवी जैसे सफल पत्रकार के दलाली से जुड़े आठ टेप हैं। एक-एक कर के आपको पढ़वाएंगे भी और सुनवाएंगे भी। देखते जाइए कि हमारी पत्रकारिता के महानायकों के असली चेहरे कितने बदसूरत हैं। लीजिए आठ में से कुछ टेपों में हुई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट को पढ़िए और फिर सभी आठों टेपों को एक-एक करके सुनते जाइए-
वीर सांघवी- हाय नीरा
नीरा राडिया- हाय वीर, तुम कहां हो, दिल्ली में या कहीं और?
वीर- जयपुर में हूं, शाम को आ रहा हूं।
नीरा- ओके। मैं कुछ कहना चाह रही थी। असल में मैं तमिलनाडु वाले दोस्तों से बात कर रही थी। वो जरूरी भी था। मुझे नहीं मालूम कि तुम कांग्रेस में किसी से बात करने की हालत में हो या नहीं लेकिन मैंने अभी कनिमोझी से बात की। मैं उससे मिली थी।
वीर- अच्छा?
नीरा- आज शाम को या रात को हम लोग बैठेंगे तब मैं बताऊंगी। असल में समस्याएं बहुत है।
वीर- मुझे आज सोनिया से मिलना था। मैं यहां जयपुर में अटक गया हूं। अब कल ही मुलाकात होगी। मैं जब चाहता हूं, मिल लेता हूं। वैसे भी राहुल से तो चाहे जब मुलाकात होती रहती है। तुम मुझे बताओ, क्या करना है?
नीरा- मैं क्या बताऊं? कांग्रेस वाले समझ ही नहीं रहे है। वे गलत आदमी यानी दयानिधि मारन से बात कर रहे हैं। मारन गलत आदमी है। करुणानिधि ने भी उसे बातचीत करने का अधिकार नहीं दिया है मगर तुम जानते हो कि यहां तो जंगल राज है और आंधी चल रही है।
वीर- जब मारन को सब लोग नफरत करते हैं तो वो बीच में कहां से आ गया?
नीरा- वो कुछ है ही नहीं, ये मुझे पता है, तुम्हे पता है मगर कांग्रेस वालों की समझ में नहीं आती। प्रधानमंत्री भी मारन से बात कर रहे हैं और डीएमके को कमाई वाले मंत्रालय देने का वायदा कर रहे हैं मगर मारन खुद अपने लिए टेलीकॉम चाहता है। आफत यह है कि कनि का भाई अलागिरि भी चुनाव जीता हैं और भारी नेता है।
वीर- मैं जानता हूं। वो स्टालिन से ज्यादा अक्ल रखता है।
नीरा- अब मारन कांग्रेस से कह चुका है कि अलागिरि को राज्य मंत्री बना दो, स्वतंत्र प्रभार दे दो और बाकी मुझ पर छोड़ दो।
वीर- इतनी हिम्मत आ गई दयानिधि में?
नीरा- दयानिधि तो टी आर बालू को और राजा को भी गाली देता है। करुणानिधि की बेटी को सिर्फ राज्यमंत्री बनवाना चाहता है जबकि अलागिरि आधे से ज्यादा तमिलनाडु काबू में रखता है और करुणानिधि यह बात जानते हैं। वह मारन से पद और कद में दोनों में बड़ा है। उसने तो पिता से कह दिया है कि अगर आप मारन को मंत्री बनाएंगे तो मैं मंत्री नहीं बनूंगा।
वीर- अच्छा, ये तो बड़ा मजेदार है। क्या कांग्रेस इसे समझ रही है?
नीरा- वहीं तो समझाना है। कांग्रेस वालों को कनि के जरिए सीधे करुणानिधि से बात करनी चाहिए।
वीर- सोनिया ने करुणानिधि से कल बात की थी।
नीरा- नहीं, तुम्हारी जानकारी गलत है। मनमोहन ने बात की थी और कनि वहां बैठी हुई थी इसलिए सारी बात को अनुवाद कर के सुना रही थी। यह मामला अपने को सुलझाना पड़ेगा। गुलाम नबी आजाद को कनिमोझी से बात करने के लिए कहो।
वीर- ठीक हैं, मैं इंतजाम करता हूं।
नीरा- मैं मजाक नहीं कर रही। सिर्फ यही एक तरीका है और कनि ही कांग्रेस वालों को करुणानिधि के पास ले जा सकती है।
वीर- मै अभी सोनिया को इसमें नहीं डालूंगा। उसकी समझ मेंं ज्यादा आता नहीं है। मैं पहले अहमद पटेल से बात कर के देखता हूं। पटेल समझदार भी है और सोनिया उसकी सुनती भी है।
नीरा- कनि को पहले पकड़ना पड़ेगा। करुणानिधि को तीन मंत्रिमंडल सीटों से कोई दिक्कत नहीं हैं लेकिन कांग्रेस ने कबाड़ा किया हुआ है। पता नहीं क्यों कांग्रेस मारन को लगातार आगे बढ़ाती जा रही है। अगर मारन को बाहर रखा जाता तो राजा और बालू तक बात आ कर टिक जाती और हो सकता है कि राजा, अलागिर और कनि तीनों राज्यमंत्री पर राज हो जाते मगर मारन वाला चक्कर तो कांग्रेस ने डाला।
वीर- और मैं सोच रहा था कि डीएमके ने वाकर्इ्र मारन को नियुक्त किया है।
नीरा- नहीं नहीं नहीं नहीं और नहीं…। डीएमके ने अपनी लिस्ट में पांच मंत्रालय और नाम भेजे थे और मारन का नाम भी उसमें था। उन्हे उम्मीद थी कि कांग्रेस राजा के बारे में उनसे बात करेगी। आखिरकार बात तीन मंत्रालयों पर आ कर टिक जाती मगर बात ही गलत आदमी से हो रही है।
वीर- मैं समझ गया। मैं अहमद से बात करूंगा।
नीरा- कनि से बात करना ज्यादा आसान होता। कनि बेटी हैं और उसके सामने कोई भी बात की जा सकती है। कांग्रेस को कहना पड़ेगा कि उन्हें मारन नहीं चाहिए। ये इंतजाम हर कीमत पर तुम्हे करना पड़ेगा।
वीर- ठीक है, अभी से लगता हूं इसमें। अहमद से, राहुल से या सीधे सोनिया से कुछ न कुछ तो रास्ता निकालूंगा। वैसे कनि अभी कहां है?
नीरा- साउथ एवेन्यू वाले अपने घर पर।
वीर- कोई मोबाइल भी तो होगा?
नीरा- मैं अभी उससे मिल के आ रही हूं। वहां कुछ तमिलनाडु कांग्रेस के लोग भी थे जो बाहर बैठे हुए थे। वीर तुम तो गुलाम को पकड़ो, वही काम का आदमी है।
(इसके बाद सुपर दलाल नीरा और उसके एजेंट वीर सांघवी की एक और बातचीत)
वीर- नीरा तुम अभी बात कर सकती हो?
नीरा- बोलो ना, तुम्हारे लिए जान हाजिर है।
वीर- मारन सोनिया से नहीं मिला।
नीरा- मुझे पता है। मगर यह बात सबको पता नहीं लग रही।
वीर- मैंने इंतजाम कर लिया है कि मारन सोनिया से कभी नहीं मिल पाए। वो गया था मगर उसे साफ कह दिया गया कि तुम्हे हम डीएमके का प्रवक्ता नहीं मानते। मेरे पास भी उसका फोन आया था और गुलाम का भी फोन आया था। गुलाम परेशान था कि मारन हर आधे घंटे में उसे फोन कर रहा है। जहां तक अपन लोगों का सवाल है तो दो बिबियां हैं, एक भाई है, एक बहन है, एक भतीजा है और इससे चीजे और ज्यादा उलझ रही है। हमने अपना ऑफर दे दिया। अब करुणानिधि को जवाब देना है कि वे सोनिया गांधी से सीधे बात करना चाहते हैं या नहीं। अभी तक उनकी बात मनमोहन सिंह से हुई हैं, सोनिया की चाभी तो मेरे पास है। मैं बात करा सकता हूं लेकिन अब मैं पीछे नहीं पड़ूंगा। अब मारन को भी मैंने कह दिया है कि आपको हमारे प्रस्ताव का जवाब देना है।
नीरा- तुम्हारी गुलाम नबी से बात हुई?
वीर- मैंने अहमद से बात की। फैसला गुलाम नबी को नहीं, अहमद पटेल को करना है। अहमद ने मुझे बताया कि गुलाम मारन से बात कर रहा है लेकिन गुलाम भी हमारा प्रवक्ता नहीं हैं। मारन को भी अहमद ज्यादा भाव नहीं दे रहा है। ये डीएमके वाले लोग पागल हो गए हैं। पांच बड़े मंत्रालय मांग रहे हैं। अब करुणानिधि हमसे बात करें। कनि हमसे आ कर मिले, अपने पिता से जो भी बात करे या हमारी बात कराए मगर मैं मारन से बात नहीं करूंगा और उसको मैंने कह दिया है कि गुलाम को भी परेशान मत करो। मारन चेन्नई चला गया है और वहां से फोन करेगा। चेन्नई भी इसलिए गया है कि मैंने उससे कहा है कि अब हम करुणानिधि से सीधे बात करेंगे। हम बुङ्ढे की इज्जत करते हैं, मारन तो फालतू आदमी है।
नीरा- यह बात मैं सबको बताती हूं।
वीर- मैंने एम के नारायणन से भी कह दिया है कि वे प्रधानमंत्री को ठीक से समझा दे। सोनिया से बात मैं कर लूंगा।
बातचीत आप यहां सुन सकते हैं, आडियो प्लेयर पर क्लिक करें और साउंड को फुल कर लें-
लेखक आलोक तोमर देश के जाने-माने पत्रकार हैं. इन दिनों सीएनईबी न्यूज चैनल से जुड़े हुए हैं और डेटलाइन इंडिया न्यूज एजेंसी के संपादक हैं.












Pankaj
November 24, 2010 at 8:46 am
SLAM ES HOSLE KO. DESH KA AB KYA HOGA.yha Hr koi lga h apne jugad me. A saale jo dekne me kuch h’ asliat kuch h.inko to tang dena chahey
..XYZ..
November 24, 2010 at 5:45 pm
Vir to pakka Dal….. Jaisa batiya raha hai . Kya Soniya Gandhi ji ko pata hai ki Vir , unhe apni jeb mein rakhne ka daawa karta phirta hai ?
Hariom garg
November 24, 2010 at 8:04 pm
Salaam hai Alok ji aapko.
Radiya ka to maan len ki woh badjaat aurat apni gori chamdi kaa kharahi hai par is veer sanghvi ne bhi ‘BHADWAGIRI’ karke patrakaron ki aisi – taisi kardi hai.
rohitash sain
November 25, 2010 at 3:58 am
Akok sahab aapke jajbe ko salaam.aise hi bharst logon ke khilaaf likhte rahe.thanks.
rajan jahangirabad
November 25, 2010 at 3:59 am
en makkaron ko saja milni hi chahiye jo journlism ki dunia ka kala adhyay hai
sn vivek
November 25, 2010 at 4:00 am
alok ji aapki kalam yuhin chalti rahe.
sn vivek
November 25, 2010 at 4:04 am
aap hame bhi apane mission me shamil kijiye.sn vivek,news cordinetor rajsthan,8875030003/9352525103
anamisharanbabal
November 25, 2010 at 5:26 am
media ke dalalo ko samne lane ke liye vvvvvv badhaie