इन नतीजों के बाद मायावती की नींद उड़ेगी

पश्चिम बंगाल में साफ साफ दिख रहा था कि जनता ममता बनर्जी के साथ है और ममता की लहर आंधी के रूप में बह रही थी. कामरेड लोग भी सन्न की स्थिति में थे. अंततः वही हुआ. जो जन उभार ममता के पक्ष में दिख रहा था, वह उभार वोटों में भी तब्दील हुआ और ममता की जय जय हो गई. तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि, यही दो लोग बारी बारी से राज करते हैं. करुणानिधि का कुशासन खत्म होता है तो जयललिता का शासन आता है और जया का शासन जब कुशासन में तब्दील हो जाता है तो करुणानिधि का शासन आ जाता है.

तो, तमिलनाडु में भी तय था कि अबकी बारी जयललिता की है. असम में लगातार तीसरी बार कांग्रेस का सत्ता में आना उपरोक्त दो राज्यों के नतीजों से अलग परिघटना है. केरल में भी कांग्रेस भारी पड़ी है. केन्‍द्र शासित प्रदेश पांडीचेरी में कांग्रेस आगे है. इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव नतीजों के आधार पर क्या साल भर बाद यूपी में होने वाले चुनाव को लेकर कोई भविष्यवाणी की जा सकती है? यह सवाल है तो बहुत टेढ़ा लेकिन इसका जवाब लोग अपनी-अपनी तरफ से देने की कोशिश में लगे हुए हैं. बंगाल और तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टियों के खिलाफ जनता में जबर्दस्त आक्रोश था. केरल में वृद्ध अच्युतानंदन को वहां की जनता रिपीट नहीं करना चाहती थी और राहुल को अमूल बेबी कहे जाने का जनता ने बुरा माना.

खासकर नौजवान वोटर, जिनकी संख्या बहुत ज्यादा है, बुजुर्ग अच्युतानंदन के कमेंट को पचा न सके. आज जबकि दुनिया में हर कहीं हर क्षेत्र में युवा लोग शीर्ष पर कायम हैं और वही राजनीति से लेकर बाजार, समाज, साहित्य, मनोरंजन, बिजनेस आदि को दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं, युवाओं को अमूल बेबी कहना युवाओं को अच्छा नहीं लगेगा और लगा भी नहीं. दूसरे, केरल भी वामपंथ का लंबे समय से गढ़ रहा है और यहां की जनता भी बदलाव चाहती थी. बदलाव के विकल्प में जो दिखा, सो मंजूर हुआ, इस कारण कांग्रेस मजबूत पार्टी के रूप में सामने आई. तो केरल, बंगाल और तमिलनाडु में यथास्थितिवाद, एकरसता और सत्ताधारी नेताओं की जनता से दूरी ने नतीजा दिखाया और जनता ने मुख्यमंत्रियों और उनके मंत्रियों-विधायकों को पटक दिया.

यह परिघटना में यूपी में घटित होगी? जवाब है हां भी और ना भी. हां इसलिए क्योंकि यूपी में मुख्यमंत्री मायावती जैसा क्रूरतम बर्ताव प्रदेश की आम जनता के साथ कर रही हैं, और भ्रष्ट नौकरशाहों के बल पर अलोकतांत्रिक क्रियाकलाप को दिनोंदिन बढ़ावा दे रही हैं, उससे हर रोज यूपी की जनता बदला लेने की मानसिकता में आती जा रही है. उत्पीड़नों से परेशान, उगाहियों से त्रस्त, पुलिस वालों से पस्त यूपी की जनता अगर कहीं शिकायत भी करती है तो उसकी तनिक सुनवाई नहीं होती. किसी जिला का परेशानहाल आदमी जिला मुख्यालय से लेकर मंडल मुख्यालय तक बड़े अफसरों-नेताओं के यहां अरजी देकर गुहार लगा आता है लेकिन उसकी कहीं नहीं सुनी जाती. यहां तक कि लखनऊ भी वह जाता है तो दर दर भटक कर निराश होकर लौट आता है. बेहद अपमानित महसूस करने वाले ये आम लोग अपनी भड़ास सिर्फ एक तरीके से ही निकाल पाते हैं और वो तरीका है चुनाव में सत्ताधारियों को शिकस्त देना.

केवल दलित वोट बैंक (जिसमें अब फूट पड़ चुकी है और कई उप जातियों के लोग अपनी उपेक्षा से बेहद नाराज हैं और बदला लेने को तैयार बैठे हैं) के बल पर मायावती कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सकती थीं. कभी पंडित तो कभी पिछड़ा तो कभी मुसलमान, किसी न किसी अन्य जातीय वोट बैंक को उन्हें साधना पड़ा. पर इस बार मायावती ने अपने अलावा किसी भी नेता, दल, जाति की नहीं सुन रही हैं. सिर्फ अपने इर्द-गिर्द इकट्ठा चार-पांच अफसरों की सुन रही हैं. पर मायावती को ये पता होगा कि जब जनता उन्हें हरा देगी तब ये अफसर भी उनके यहां झांकने नहीं आएंगे और जो कोई नया नेता सूबे की गद्दी पर काबिज होगा, उसके यहां सलाम बजाते नजर आएंगे. पर मायावती की आंखों पर इन दिनों पट्टी पड़ी हुई है. उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा है. वे सत्ता के मद में चूर हैं. वे केवल हड़काती हुईं, चेतावनी देती हुईं, पुलिस के बल पर दूसरों की बोलती बंद करती हुईं नजर आती हैं. यह रवैया उनके दुश्मनों की संख्या दिनोंदिन बढ़ा रहा है.

ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की अंदरखाने एकजुटता हो गई, जिसकी संभावना काफी दिख रही है, तो संभव है कि मायावती का यूपी से सूपड़ा साफ हो जाए और मुलायम सिंह यादव एक बार फिर से सत्ताधारी हो जाएंगे. हालांकि मुलायम के लिए भी यूपी की सत्ता इतनी आसान नहीं है. परिवारवाद के मोह में फंसे मुलायम और अमर सिंहों को बढ़ावा देकर अपनी काफी जमीन खो देने वाले मुलायम को कांग्रेसी की बैसाखी की सख्त जरूरत है. और कांग्रेस यूपी में किसी भी तरह मायावती को बेदखल कर पावर में आना चाहती है पर कांग्रेस की दिक्कत यह है कि वह अकेले किसी कीमत पर सत्ता में नहीं आ सकती क्योंकि कांग्रेस का कोई अलग से वोटबैंक नहीं रह गया है. तो दिख ये रहा है कि सपा, कांग्रेस, लेफ्ट और अन्य छोटी पार्टीज अगर एक प्लेटफार्म पर आ पाने में सफल हो जाती हैं, जिसकी संभावना दिखने लगी है, तो मायावती को हर हाल में जाना होगा.

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ कई वामपंथी नेताओं ने एक अलग फ्रंट बनाकर काम शुरू कर दिया है. इस बारे में कुछेक जगहों पर खबरें भी आई हैं. राहुल का युवा चेहरा कांग्रेस को काफी फायदा पहुंचाएगा. वहीं, सपा का सालिड वोटबैंक और सत्ता से लगातार रही दूरी के कारण जनता के मन में साफ्ट कार्नर डेवलप होने लगा है. ऐसे वोटरों की भारी संख्या है जो मायावती को हराने के लिए किसी भी जीतती दिख रही मजबूत पार्टी या प्रत्याशी को वोट दे देगी. ये फ्लोटिंग और एंटी इस्टैबलिशमेंट वाला वोट कहीं सपा तो कहीं कांग्रेस तो कहीं किसी अन्य के खाते में जाएगा. भाजपा के साथ किसी का गठबंधन इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि कांग्रेस, सपा, लेफ्ट आदि ये सभी गैर-भाजपा पार्टियां सांप्रदायिक विचारधारा वाली भाजपा से सट नहीं सकतीं क्योंकि यहां मामला विचारधारा का हो जाता है.

इस प्रकार भाजपा को यूपी में फिर विपक्ष में रहना है. और, मायावती के राज में भाजपा जिस तरह कमजोर विपक्षी पार्टी बनी हुई है, बेजुबान बनी हुई है, सड़क व संघर्ष से दूरी बनाए हुए है, नेताओं की फूट व अहं की शिकार है, उससे इस पार्टी द्वारा जनता का दिल जीत पाना बहुत मुश्किल है. ऐसी हालत में कह सकते हैं कि यूपी में साल भर बाद मायावती और उनकी पार्टी का भरपूर सफाया होने वाला है. दलितों के बीच भी एक ऐसा तबका डेवलप हो चुका है जिसका आरोप है कि मायावती ने अपने शासन में उनके लिए कुछ नहीं किया. ये नाराजगी भी बसपा को हराने में मददगार साबित होगी. तो बहिन जी, लखनऊ के अपने राजमहल से सामान निकालने की तैयारी शुरू कर दीजिए. तमिलनाडु, बंगाल और केरल से जो इशारे मिले हैं, उससे तो यही लगता है कि आप जिस तरह जनभावनाओं का अनादर करती आ रही हैं, वह भावना आपकी महत्वाकांक्षा का दम घोटने के लिए पर्याप्त है. कहते हैं न, जब जनता की आह और हाय लगती है तो बड़े-बड़े शूरमा चारों खाने चित्त होकर जमीन पर छटपटाते नजर आते हैं. और यही आपके साथ होने वाला है.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

yashwant@bhadas4media.com

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Comments on “इन नतीजों के बाद मायावती की नींद उड़ेगी

  • Shailendra Mohan Tiwari says:

    Very Good Yahi Hone Wala Hai Police Jab Danda Chalaati Hai To Mahsoos Nahi Hota Ki Insaano Ko Maar Rahi Hai Ya Janwaro Ko Kya Ye Log Hamaare Samaaj Ke Hi Hai Ya Kahi Aur Ke Aur Mayavati Ne Inka Bhar Poor Durpyog Kiya Hai Par Janta Ke Paas Danda Nahi Vote Hai Aur Waqt Aane Woh Pahaar Jaroor Karegi:'(

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  • RAVI KUMAR says:

    Dear Yashwant ji,

    your reading of Kerla results are not proper. In fact, it is the congress which lost a golden oppurtunity in a state which changes an incumbent govt every 5 years. Even a congressman would accept. From 2009 results , it is the congress which has fallen down tremendously.Salute to CM. People no longer vote for ideologies, they vote for a leader.

    In bengal it was people’s will to get rid of Communist. Obviously, communists are not popular with youth in urban areas and villagers also didn’t vote enough for CPM.Let’s see how mamta changes the situation.

    A real slap on tha face of congress in Tamilnadu. They not only stuck with corrupt DMK but also tried to muscle more seats. Voters didn’t like either.

    A real sorry figure for BJP as well. No matter how much it try, Southrern states are tough to crack. BJP is not able to gain on congress loss.BJP must do some hard work.

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  • निशांत शर्मा says:

    यशवंत आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप बीजेपी को सांप्रदायिक पार्टी कहें…

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  • AMan Kamble says:

    I think entire media is against BSP Govt. Their r so many Devlopment work done by BSP Govt. even Human Devp.is Good in Uttar Pradesh. bt all the media & opposition parties r against BSP. Law & Order is OK in up as compare to M’tra.bt every incidence the becomes the National News.Congress is playing double game.They Favours SEZ in Country, acquiring Farmer’s Land. bt when BSP Govt.took land for Devp.purpose these people opposes. All in Caste Mentality…

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