इसी पेड़ पर टेक लगाकर हमलोगों की समस्‍याएं सुलझाते थे

आलोक जी अक्सर सीएनईबी के बाहर इस पेड़ पर टेक लगाकर इसी अंदाज़ मे खड़े होते थे. ऑफिस के लोगों के साथ यहीं बतियाते थे तथा यहीं खड़े होकर ऑफिस के लोगों की व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाते थे. पहली बार मेरी उनसे भेंट भी इसी पेड़ के नीचे हुई थी. काफी देर बात हुई थी. अब मैं जब भी ऑफिस जाऊंगा इस पेड़ पर टेक लगाये आलोक जी मुझे हर बार नज़र आएंगे. उनकी यही सरल अदा लोगों को अपना दीवाना बना लेती थी.

आलोकजी

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Comments on “इसी पेड़ पर टेक लगाकर हमलोगों की समस्‍याएं सुलझाते थे

  • Kanishk Jaiswal says:

    kisi bhi baat par has kar jawab dena aur hasi karna …..kisi ke paresaan hone par santawana dena …. aur kisi bhi khabar ki bakhiya udhedna …bebak ….dabang ….ye aadaat kisi me thi to wo alok ji hi the….arvind ji ne is ped ke niche khade hone ki kahani batayi hai shayad mai bhi cneb jau to mujhe bhi ye ped aur wo chabin jaha alok ji baidha karte the kafi yaad ayega….

    -Khushiyo ki aarzo me muqadar so gaye

    Andhi aisi chali ke apne bhi kho gaye

    Kya khoob tha unka andaz

    Muskurahat dene aye the aur palke bhigo gaye

    Kuch khas alok sir ke yaad me……

    ….
    पने दिल
    को पत्थर का बना कर रखना ,
    हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
    उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
    अपने कदमों को ज़मी से मिला कर
    रखना ।
    छाव में माना सुकून मिलता है
    बहुत ,
    फिर भी धूप में खुद को जला कर
    रखना ।
    उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते
    हैं ,
    यादों में हर
    किसी को जिन्दा रखना ।
    वक्त के साथ चलते-चलते ,
    खो ना जाना ,
    खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
    रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
    अपने चेहरे को दोस्तों से
    छिपा कर रखना ।
    तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
    कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
    हर कहीं जिन्दगी एक
    सी ही होती हैं ,
    अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर
    रखना ।
    मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान
    जरुरी नहीं ,
    हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।
    मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
    हर पल में जिन्दगी का लुफ्त
    उठाये रखना ।
    दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
    अपनी आँखों में अश्को को बचा कर
    रखना….

    kuch aisa hi kaha karte the hamare alok sir………rona to bahut chata hu par apne hi sikhaya hai ….. Na Jhukna …Na darna …Jo karna Dil se karna……………………………….Alvida Sir…..

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  • Bijender Sharma says:

    He was a great Hero of Indian Journalism. He was a Fighter who lives with the ideology of Free Frank and Fearless.

    Reply

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