इसी पेड़ पर टेक लगाकर हमलोगों की समस्‍याएं सुलझाते थे

आलोक जी अक्सर सीएनईबी के बाहर इस पेड़ पर टेक लगाकर इसी अंदाज़ मे खड़े होते थे. ऑफिस के लोगों के साथ यहीं बतियाते थे तथा यहीं खड़े होकर ऑफिस के लोगों की व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाते थे. पहली बार मेरी उनसे भेंट भी इसी पेड़ के नीचे हुई थी. काफी देर बात हुई थी. अब मैं जब भी ऑफिस जाऊंगा इस पेड़ पर टेक लगाये आलोक जी मुझे हर बार नज़र आएंगे. उनकी यही सरल अदा लोगों को अपना दीवाना बना लेती थी.

सेक्स चैट की आंधी, वोडाफोन की चांदी

अरविंद सुधाकरसेक्स चैट से संबंधित सभी काल रिसीव करने के लिए गरीब व मजबूर महिलाओं को मोबाइल व पैसे देकर धंधे के दलदल की ओर धकेला : बड़ी कंपनियां रुपये कमाने के लिए किस तरह के नीच काम धड़ल्ले से करती रहती हैं और अपने देश का मीडिया सब जानकर भी विज्ञापन व रेवेन्यू के लालच में अनजान बना रहता है, यह जानना हो तो सिर्फ इस दास्तान को पढ़ लीजिए। इस सच्ची कहानी को पढ़ने के बाद आप दो पल के लिए हक्के-बक्के रह जाएंगे। सोचेंगे, क्या ऐसा भी होता है। जी हां, इस देश में कंपनियों, कारोबारियों, नेताओं, अफसरों, मीडियावालों…. इन क्षेत्रों के ज्यादातर लोगों का उद्देश्य सिर्फ ज्यादा से ज्यादा माल पीटना है। इस माल पीटने की प्रक्रिया में देश व समाज की इज्जत पिट जाए, इज्जत उतर जाए, तो भी चलेगा। लीजिए, वोडाफोन की काली करतूत पढ़ शर्म से सिर झुकाइए….

सच्चा शो है ‘सच का सामना’

कमलेश मेघनानी पता नहीं कौन हैं! बिना कुछ जाने-सुने आवेश में अनर्गल बातें लिख गए हैं। एक शो के प्रसारण से न जाने कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा, न जाने किस परिवार की पगड़ी उछाल दी गई! भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित मेघनानी के लेख को पढ़कर लगता है कि वह भी उन बच्चों की तरह रैली का हिस्सा बनना चाहते हैं, जिनको इतना तक नहीं पता हो कि रैली का अर्थ क्या होता है? बस विरोध करने के लिए विरोध करना है। खैर, नादान हैं। जल्द समझ जाएंगे। यहां मैं बात कर रहा हूं ‘सच का सामना’ की। एक विनोद काम्बली कह देता है कि सचिन ने उसका साथ नहीं दिया तो बवाल हो जाता है, क्योंकि सचिन तो क्रिकेट के भगवान हैं। उनकी शान में गुस्ताखी क्यों। और अगर काम्बली की जगह सचिन से ये सवाल पूछा जाता, तब क्या जवाब होता उनका? यूसुफ़ साहब ने जितना सफाई से हर उस बात का जवाब दिया, जो उनके जीवन में गलती के रूप में हुई, वो वाकई काबिलेतारीफ था। उम्र के उस पड़ाव पर जब आदमी मोक्ष चाहता है, स्वीकारोक्ति से उन्होंने जीवन के सारे पापों से निजात पा ली है। बात शो की नहीं, हर उस बात की है, जिस पर कुछ बेवकूफ व समाज के झूठी ठेकेदार बवाल मचा कर सस्ती लोकप्रियता पाना चाहते हैं।