कोर्ट की छत्रछाया में हुए पीसीआई इलेक्शन

: 1100 से अघिक वोट पड़े : रिजल्ट की घोषणा पर पाबंदी : पत्रकारों का ‘मक्का’ कहे जाने वाले प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव शनिवार को संपन्न हो गए लेकिन क्लब के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि रिजल्ट के लिए माडिया वालों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। वजह, दिल्ली उच्च न्यायालय ने  रिजल्ट की घोषणा पर प्रतिबंध लगा दिया है। इतना ही नहीं न्यायालय ने चुनाव में कथित धांधली की आशंका जताए जाने के मद्देनजर ऑब्जर्वर भी नियुक्त कर दिया है। उन्हीं की देखरेख में शनिवार को क्लब में वोटिंग हुई और आगे की प्रक्रिया भी ऑब्जर्वर की देखरेख में ही संपन्न होगी।

प्रेस क्लब के सदस्यों के एक बड़े वर्ग को वोटिंग के दौरान कुछ गड़बड़ी की आशंका थी। इसलिए मामला अदालत में जा पहुंचा है। शिकायतकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि 28 मई 2008 को मैनेजिंग कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रस्ताव में यह कहा गया था कि जब तक क्लब का नया भवन बनकर तैयार नहीं हो जाता तब तक सामान्य श्रेणी (पत्रकार) के तहत नए सदस्य नहीं बनाए जाएंगे। आरोप है कि मौजूदा पदाधिकारियों ने इस प्रस्ताव की परवाह नहीं की और सामान्य श्रेणी के तहत सदस्यता दी है। शिकायतकर्ता के मुताबिक जिस वक्त प्रस्ताव पास हुआ था उस समय प्रेस क्लब के सदस्यों की कुल संया 5966 थी। 30 सितंबर 2009 को सदस्यों की संया बढ़कर 6037 तक जा पहुंची और फिलहाल एसोसिएट सदस्यों सहित कुल संया 6163 है।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के आग्रह को गंभीरता से लिया और निष्पक्ष चुनाव के लिए एडवोकेट डी.के. रस्तोगी को ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया। चुनाव उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुआ। इस बार चुनाव में दो अलग-अलग मत पेटी ‘ए’ और ‘बी’ रखी गई थी। निर्देशानुसार 30 सितंबर 2009 के बाद जिन लोगों को क्लब की सदस्यता दी गई थी उन्होंने अपना मत पेटी-बी में डाला जबकि इससे पहले के सदस्यों ने अपना मत पेटी-ए में डाला।

वोटिंग समाप्त हो जाने के बाद दोनों पेटियों को कोर्ट ऑब्जर्वर की देखरेख में सील कर दिया गया। मतगणना अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक रविवार यानि 14 नवंबर को होगी। लेकिन परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे। मतों को गिनने के बाद परिणाम बंद सील लिफाफे में कोर्ट के सामने पेश किए जाएंगे। गणना के बाद मत पत्रों को उन्हीं पेटियों में रख सील कर दिया जाएगा। इन पेटियों को तब तक सुरक्षित रखा जाएगा, जब तक मामले का फैसला नहीं हो जाता। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

हमारा महानगर, दिल्ली के मेट्रो एडिटर संदीप ठाकुर की रिपोर्ट

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