खण्डूरी थे तो लोस में हारे, खण्डूरी हैं तो विस में हारेंगे!

: उत्तराखण्ड भाजपा में घमासान : बीसी खण्डूरी धनुष-बाण लिये हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को ढूंढ रहे हैं : उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री अपनी महान उपलब्धि बताते हुए कह रहे हैं कि शासन व प्रशासन में शुचिता व पारदर्शिता लाने के लिए प्रभावी पहल की गयी है। सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन व जन सेवा के नाम से अलग विभाग बनाया गया है, लोकायुक्त को और अधिक सशक्त व प्रभावी बनाने के लिए प्राविधान किए जा रहे हैं।

लोकसेवकों द्वारा अनाधिकृत तरीके से अर्जित सम्पत्ति को जब्त करने के लिए कानून बनाकर उत्तराखण्ड सरकार ने एक बड़ी पहल की है। ऐसे में आम जन में चर्चा है कि क्या इन उपायों से भाजपा की सीटों उत्तराखण्ड में बढ जाएंगी, पहले 7 की सर्वे रिपोर्ट थी, अब क्या इन उपायों से 37 हो जाएगी, इस ओर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का ध्यान भी नहीं है, वह तो धनुष-बाण लिये हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को ढूंढ रहे हैं।

सीटें बढ़ाने के नाम पर खंडूरी को लाकर भाजपा हाईकमान ने डा. रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम पद से हटा दिया। अब निशंक का भाजपा में राजनैतिक पुनर्वास कर दिया गया है। पर इन कदमों से उत्तराखण्ड में भाजपा में घमासान बढ़ जाने के आसार हैं। भाजपा में अंदरखाने घमासान की शुरुआत राज्य गठन के बाद से ही हो गई थी। इसी कारण राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी अपने कार्यकाल का पहला साल भी पूरा नहीं कर पाये। वर्ष २००७ में उत्तराखंड में सत्तासीन होने के बाद उत्तराखण्ड भाजपा ने फिर यह कहानी दोहराई। यह क्रम जारी है। और इस कारण विवाद-घमासान का बढ़ना जारी है।

तभी तो, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का स्वागत करना उचित नहीं समझा। डा. रमेश पोखरियाल निशंक के भाजपा के राष्टीय उपाध्यक्ष बनकर देहरादून भाजपा कार्यालय पहुंचने के कार्यक्रम से सीएम खंडूरी दूर रहे। इससे आम जनता को लगा कि क्या राज्य में कांग्रेस की सरकार आ गयी है, जो निशंक से दूरी बनायी गयी है। कायदे के अनुसार तो सूबे के सीएम को अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पहली बार देहरादून पहुंचने पर उपस्थित रह कर भाजपा की एकजुटता का संदेश देना चाहिए था परन्तु ऐसा नहीं हुआ और इस तरह उत्तराखण्ड की फिजां में यह साफ संदेश गया कि उत्तराखण्ड में सत्ता के दो केन्द्र बन गए हैं, और दोनों ही सत्ता केंद्र अपनी अपनी उपलब्धि गिनाने में लगे हैं। पर कोई भी भाजपा सरकार की उपलब्धि नहीं गिना रहा है।

आम जनता को यह आशा थी कि बीसी खण्डूरी एकजुटता का संदेश देंगे, परन्तु हो उल्टा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पदभार मिलने के बाद देहरादून बीजेपी कार्यालय आ रहे निशंक को उपेक्षित करते हुए मुख्यमंत्री बीसी खण्डूडी रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर चले गये। निशंक शहीद स्मारक देहरादून पहुंचकर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन करने गये। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री विजया बडथ्वाल समेत महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती सुशीला बलूनी तथा उत्तराखंड दैवीय आपदा सलाहकार समिति के अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत व उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की अध्यक्ष ऊषा रावत, आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र जुगरान तथा हरिद्वार भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील चौहान, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा रेणू गर्ग आदि मौजूद थे।

निशंक के देहरादून पहुंचने पर समर्थकों ने भरपूर शक्ति प्रदर्शन किया। इसका साफ मतलब था कि अगर विधानसभा चुनाव में डा. निशंक को उपेक्षित किया गया तो राजनीति का यह माहिर खिलाडी इसे आसानी से बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। समर्थकों ने भारी संख्या में पहुंकर और निशंक का स्वागत कर संदेश देने की कोशिश की।  हजारों की संख्या में पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं ने जॉली ग्राण्ट से लेकर भाजपा के प्रदेश कार्यालय तक भव्य स्वागत किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद डा. रमेश पोखरियाल निशंक जॉली ग्राण्ट स्थित एयरपोर्ट पर पहुंचे, तभी उनके हजारों की संख्या में समर्थक वहां पहुंच गए और उन्हें फूलमालाओं से लादकर भव्य स्वागत कर नारेबाजी शुरू कर दी जिससे डा. निशंक का चश्मा भी टूट गया।

समर्थकों का हुजूम इस कदर था कि भारी संख्या में सैकडों लोग जॉली ग्रांट के बाहर ही खडे रहे। इसके बाद डोईवाला, जोगीवाला, मोहकमपुर सहित कई स्थानों पर उनका फूलमालाओं से लादकर स्वागत किया गया। इसके बाद श्री निशंक भाजपा के प्रदेश कार्यालय पहुंचे जहां उनका भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई विधायकों व प्रदेश पदाधिकरियों ने स्वागत किया। डॉ. निशंक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पर भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर जमकर आतिशबाजी कर मिष्ठान भी वितरित किया। समर्थकों के इस संदेश को समझने में भूल करते हुए मुख्यमंत्री ने एकजुटता का कोई संदेश देने की कोशिश नहीं की। वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद अभी उनका राज्य में व्यापक दौरा भी नहीं हो पाया है जबकि निशंक ने हर विधानसभा वार अपना व्यापक दौरा कर भाजपा की जड़ों को मजबूती दे दी थी। मुख्यमंत्री के कदम से तो अभी तक यहीं संदेश गया है कि वे येन केन प्रकारेण सिर्फ मुख्यमंत्री का पद चाहते थे।

हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. निशंक ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा ही भाजपा आलाकमान की बातों को मानकर पार्टी के एक अनुशासित सिपाही की तरह उसका सम्मान किया है और जो नयी जिम्मेदारी उन्हें दी गई हैं उसका वह बखूबी निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि २०१२ के विधानसभा चुनाव में सबको साथ लेकर इस नयी जिम्मेदारी को मजबूती के साथ निभाया जाएगा और अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उनके द्वारा उत्तराखण्ड को विकास की पगडंडी पर लगातार आगे बढाया जाता रहा और देश भर के नक्शे पर राज्य का नाम विकासशील राज्य के रूप में लिया जाने लगा। राज्य के विकास को आगे बढाने के साथ-साथ उत्तराखण्ड की संस्कृति व राज्य आंदोलनकारियों को भी सम्मान राज्य सरकार द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा हाईकमान ने जिस विश्वास के साथ उन्हें नयी जिम्मेदारी दी है उस पर वह पूरी तरह खरा उतरकर भारतीय जनता पार्टी को पुनः सत्ता में वापस लाने के लिए कोई कसर नहीं छोडेंगे।

इसके बाद डॉ. निशंक ने कचहरी स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन किया तथा  गांधी पार्क स्थित महात्मा  गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प चढाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री खजानदास, विधायक पेमचन्द्र अग्रवाल, शैलेन्द्र रावत, कुलदीप कुमार, गणेश जोशी, दायित्वधारी श्री ज्योतिपसाद गैरोला, रघुनाथ सिंह नेगी, आदित्यराम कोठारी, संदीप गुप्ता, सुभाश बडथ्वाल, चमनलाल वाल्मिकि, मेजर कादिर हुसैन, डॉ. आदित्य कुमार, सूरतराम नौटियाल, पंकज सहगल, दलजीत सिंह तथा पार्टी पदाधिकारियों में सतीश लखेडा, मुकेश महिन्द्रु, विनय गोयल, पुनीत, मित्तल, राजीव गोयल, विनोद उनियाल, राजेन्द्र भण्डारी, नरेन्द्रपाल सिंह रावत, सहदेव पुण्डीर, सुनील उनियाल गामा, गोवद्धर्न भारद्वाज सहित कार्यकर्ता उनका स्वागत करने पहुंचे।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खण्डूडी रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर में शहीद स्मारक में शहीदों को पुष्पांजलि करने पहुंचे। वह डा. निशंक के कार्यक्रम में नहीं गये। भुवन चंद्र खण्डूडी ने कहा कि २ अक्टूबर को राज्य आंदोलनकारियों पर गोली चलाये जाने की घटना के समय वे स्वयं संसद सदस्य थे और उन्हें यह घटना सुनकर दुःख, पीड़ा, हताशा और आश्चर्य हुआ और उन्होंने तत्कालीन गृह राज्य मंत्री राजेश पायलट स तत्काल वार्ता की, जिन्हें उस समय इस घटना की गंभीरता का पता नहीं था।

मुख्यमंत्री बीसी खण्डूडी विश्वास जता रहे हैं कि सेवा का अधिकार कानून बनने से उत्तराखण्ड की जनता को निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी। लोक सेवकों द्वारा अनाधिकृत तरीके से अर्जित सम्पत्ति को जब्त करने के लिए कानून बनाकर उत्तराखण्ड सरकार ने एक बडी पहल की है। सरकार द्वारा विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाएगी जहां लोकसेवकों का पक्ष सुनकर अधिकतम छः माह में अवैध तरीके से अर्जित धन व सम्पत्ति का अधिग्रहण किए जाने के संबंध में आदेश दिए जाएंगे। राज्य सरकार ऐसे अर्जित धन या सम्पत्ति का अधिग्रहण करके जनकल्याण के प्रयोग में लाएगी। इससे जहां भ्रष्ट लोकसेवकों में भय व्याप्त होगा वहीं अनाधिकृत सम्पत्ति का उपयोग लोकोपयोगी कार्यों में किया जा सकेगा। इस विधेयक को भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था निर्माण में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री श्री खण्डूडी का कहना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया को उचित, भेदभाव रहित व पारदर्शी बनाने के लिए स्थानांतरण नीति के स्थान पर कानून बनाया गया है। इस बारे में जनचर्चा है कि मुख्यमंत्री को अपने पूर्वकाल का ब्यौरा भी देना चाहिए, उस समय उनकी क्या विशेष उपलब्धि रही, वह यही हो सकती है कि राज्य में पहली बार पांचों लोकसभा सीटें भाजपा ने खो दी, अब कहीं विधानसभा चुनाव में तो ऐसा माहौल तो नहीं बनता जा रहा है। यह तो समय ही बताएगा, पर भाजपा कार्यकर्ता दबी जुबान से इसकी चर्चा अवश्य कर रहे हैं।

देहरादून से जर्नलिस्ट चन्द्रशेखर जोशी की रिपोर्ट

Comments on “खण्डूरी थे तो लोस में हारे, खण्डूरी हैं तो विस में हारेंगे!

  • जोशी जी निशंक की ब्रह्मणवादी नीति के बारे में भी लिखियेगा, उत्तराखंड मे पहली बार दो गढ़वाली ब्रह्मण एक ही पार्टी मे दो गुटों मे बंट गए है I जीत क्षत्रियो की हुई है l बधाई हो

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  • चन्द्रशेखर बाबु लगता है भगत की चमचागिरी करने के बाद अब निशंक की चमचागिरी करने में आपको मजा आने लगा है…. यह बताइए खंडूरी के आने से एलर्जी हो गई क्या? लोक सभा में ५ सीते हराने में आपके भगत के साथ उनके चमचो की भी बड़ी भूमिका रही है… मंत्रियो से क्या भाजपा हाई कमान ने इस्तीफ़ा लिया? चुफाल को छोड़ दिया जाये तो अन्य सभी मंत्रियो के लोकसभा में भाजपा पिछड़ गई थी….रही बात निशंक की तो भ्रष्टाचार की गंगा बहाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी और आप जैसे पत्रकारों को पटाने में विज्ञापन देने ने भी निशंक आगे ही रहे .. पूरी मीडिया को मानेज कर लिया था… लेकिन अब खंडूरी जी के शासन में यह नहीं चलेगा…..कम से कम कोशियारी और निशंक से तो बेहतर ही साबित होंगे खंडूरी…………………

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  • ANIL THAPLIYAL says:

    निशंक की चरणवंदना और उनके उपकार चुकाने के लिए भड़ास का सहारा लेने के लिए चंद्रशेखर जोशी जी को बधाई। ऐसे शातिराना काम निशंक जी के क़रीब रहकर ही सीखे और जाने जा सकते हैं। वो तो इस गुरुकुल के आजन्म वाइस चांसलर हैं। लेकिन जोशी साहब, एक तथ्य जरा सही कर लें कि उत्तराखण्ड में अपनी साख बचाने के लिए बीजेपी आलाकमान भुवन चंद्र खण्डूड़ी की शरण में गया, ना कि खण्डूड़ी सीएम का पद लेने पार्टी हाईकमान के पास गए। निशंक की चरण वंदना में ज़रा तथ्यों का भी ख़्याल रखिएगा महाराज! बाकी निशंक जी का मीडिया मैनेजमेंट तो जगजाहिर है। वरना क्या बात थी निशंक की विदाई के पीछे के करोड़ों-अरबों के घोटालों का अख़बारों या आप जैसे मीडिया महानुभावों ने ज़िक्र तक न किया। आप अभी भी राग दरबारी गाते रहिएगा लेकिन ये मत भूलिए कि खण्डूड़ी उत्तराखण्ड में अकेले विश्वसनीय चेहरे हैं, ये बात बीजेपी हाईकमान ने भी मान ली है। रही बात मुख्यमंत्री के निशंक के कार्यक्रम में न जाकर रामपुर तिराहा जाने की…तो जो असली उत्तराखण्डी है वो शहीदों को कभी नहीं भूल सकता। 1994 के आंदोलन में तो निशंक जनता से पिट रहे थे।

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  • first remove most corrupt chief secretary
    otherwise CM will get 14 seats and finish his political future
    how a person having so many serious charges and still he is chief secretary please god save uttrrakhand

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  • PRAYAG PANDE says:

    joshi ji ! CM or ex CM ke ek din ki gatividhi per etani lambi choari khaber likh marane ka kya arth hai ? es khabar se aap sabit kya karana chahate hain ? es khabar ka mantbay kya hai ?. Mr,khandudi ke mukabale Mr. nishank ko behater sabit karana ya fir Mr. nishank ke mukabale Mr. khandudi ko behatar sidh karana ?.vajah jo bhi ho es sabase aam janta ki soch main fark nahi padane wala .Uttarakhand kie aam log Mr. khandudi,mMR, nishnk or en dono ki parti BJP .kangres yahan tak ki es rajy ke patrakaronko bhi bakhubi janane pahachanane lagi hai ,esliye aapko nek salah yah hai ki netaon ka gungan chod janta ke asal sawalon per apani kalam chalane ke himmat karo.

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  • arai bhai kyon nishank ko ro rahai ho…asli looterai to wahan baithai hain dilli main….uttarakhand ke budget ka 10% to BJP kai bade nataon ko chadhava chadhanai mai hi lag jata hai…kya nishak aur kya khadoori…ye dono to mohrai hain…mukhyamatriyon ko choosna to koi Rajnath, Venkaiya aur Sushma ji sai pooochchai…

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