छह साल से बीमार मंगलजी चले गए

दीवाली का दिन। त्योहार की व्यस्तता के बीच, दिन भर के कई मिस कॉल अनदेखे रह गये। रात को देख रहा था, तो यशवंत सिंह के मिस कॉल पर नजर पड़ी। शायद दीवाली की शुभकामना के लिए कॉल किया होगा। यह सोचकर मैंने उनका नंबर मिला दिया। राम-राम और दीवाली की शुभकामना के बाद वे अचानक बोले, ‘सर, मंगलजी नहीं रहे!’ मैं अवाक रह गया।  पूछा, कब हुआ ये? ‘पिछले महीने। किसी ने मेरठ से फोन करके बताया। 15 दिन से ज्यादा हो गये।’

‘ताज्जुब है। उन्होंने मेरठ में दैनिक जागरण को जमाया और उनके निधन का उतने दिन बाद पता चल रहा है।’ ‘जिनका फोन था, वे यह कह रहे थे कि आपने जागरण में उनके साथ काम किया है। नौनिहाल की सीरीज में भी कई बार जिक्र आया है उनका… ‘

अगले दिन मैंने मंगलजी के बड़े बेटे विवेक को फोन किया। जब मंगलजी 1984 में मेरठ आये थे, तो विवेक पांचवीं क्लास में पढ़ता था। कभी-कभी दफ्तर भी आ जाता था। उसने बताया कि किस तरह 78 साल की उम्र में मंगलजी अचानक ही चले गये। 17 अक्टूबर को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, तो उन्हें धन्वंतरी अस्पताल में एडमिट किया गया। रात को उनका बीपी बढ़ता गया और हार्ट बीट घटती गयी। आधी रात के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। 29 अक्टूबर को उनकी तेरहवीं हुई।

मंगलजी पिछले छह साल से बीमार थे। 2004 में पर्किंसन के कारण उन्हें लिखने में तकलीफ होने लगी थी। तब से वे घर पर ही थे।

मूल रूप से बनारस के थे मंगलजी। ‘आज’ के जाने-माने चेहरे। आज, कानपुर में काम करते थे। वहां से एक ग्रुप ने अलग होकर अपना अखबार ‘लोकजन समाचार’ शुरू किया। वह अब भी चलता है। जब जागरण, मेरठ में भगवतजी की जगह नया संपादक लाने की बात हुई, तो नरेन्द्र मोहन ने मंगलजी को चुना। उन्हें समाचार संपादक बनाकर लाया गया। और भगवतजी के रहते मंगलजी ने कभी यह जाहिर नहीं किया कि वे अगले संपादक हैं।

मंगलजी के बहुत संस्मरण हैं। मैं 18 साल का भी नहीं था, जब मैंने 1984 में जागरण, मेरठ में जॉइन किया था। तब संपादक भगवतशरणजी थे। उनका प्रशासन सख्त था। उनके सामने ही, कुछ महीने बाद कानपुर से मंगलजी मेरठ आये। भावी संपादक के रूप में। करीब चार महीने मंगलजी ने भगवतजी के अंडर में काम किया। पर उन्होंने कभी यह जाहिर नहीं किया कि वे भावी संपादक हैं। उनके सामने वे न्यूज डेस्क पर काम करते रहे। चीफ सब की कुर्सी पर आकर बैठ जाते और एजेंसियों की खबरों की छंटाई में जुट जाते। उसी दौर में हम नौजवान उनसे छंटाई का गुर सीखते। राकेशजी, नरनारायणजी और सुनील पांडेजी के साथ जब मंगलजी न्यूज डेस्क का नेतृत्व करते, तो वह टीम देखते ही बनती।

मंगलजी का व्यक्तित्व साधारण था, पर उनका काम करने का तरीका बहुत प्रभावशाली था। वे बहुत सादगी से रहते थे। मुंह में हमेशा पान रहता था। जब किसी से कुछ कहना होता, तो मुंह ऊपर की ओर करके, गरदन हिलाकर कहते, ‘मने, क्या बात है?’

किसी के काम से खुश होते तो कहते, ‘खूब। बहुत खूब।’

किसी के काम से नाराज होते तो कहते, ‘तुमने कर ली पत्रकारी!’

पर उनका गुस्सा टिकता नहीं था। वे बहुत जल्दी अपना गुस्सा भूल जाते थे। नये पत्रावरों को पूरी तन्मयता से काम सिखाते। नौजवानों को जिम्मेदारी देते। सीनियरों को पूरा मान देते। खबरों के चयन में सबसे सलाह लेते। सबसे जूनियर की सलाह को भी पुरा महत्व देते थे। उनके संपादन में काम शुरू करने वाले जितने युवा पत्रकार आज स्थानीय संपादक हैं, संपादको की वैसी फौज शायद और किसी ने तैयार नहीं की होगी।

जागरण में लम्बी पारी खेलकर मंगलजी 1998 में रिटायर हुए। उन्होंने अपनी बेटी विभा के नाम पर विभा पब्लिक स्कूल शुरू किया था, जिसे अब विभा ही चला रही है। 1998 से 2004 तक मंगलजी ने स्थानीय न्यूज चैनल ‘मेरठ दर्शन’ में काम किया। फिर पर्किंसन होने पर वे घर पर ही रहे। इस बीच उन्होंने 1996 में विभा, 1998 में विवेक और 2002 में प्रज्ञा की शादी की। विवेक ने 1995 में जागरण में काम शुरू किया। पेज डिजाइनर के रूप में। अब वह ‘आईनेक्स्ट’ में है। सबसे छोटे बेटे अंकुर ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। कुछ दिन नौकरी भी की। पर पिछले कुछ समय से वह मंगलजी की ही देखभाल करता था।

अब पूर परिवार की जिम्मेदारी विवेक की है। और वह इसे निभाने के लिए पूरी तरह तैयार भी है…

लेखक भुवेन्द्र त्यागी लंबे समय तक मेरठ के विभिन्न अखबारों में कार्यरत रहे हैं. इन दिनों मुंबई में नवभारत टाइम्स में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं.

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Comments on “छह साल से बीमार मंगलजी चले गए

  • Rajesh Kumar Sharma says:

    Yashwant Singh zee, Namaskaar
    Mangal Jailwal ji ki deth ki suchna meney hi aapko de thi. unka samachar prakasit kerney key liyey bhi aapka dhanyawad. Bahut sharm ki baat hai ki Meerut key Patrakar bhadas4media.com ko daily read kertey hai. Lakin kisi ney bhi unkey death ki soochna aapko nahi dee.yeh patrakarita ka nimn star (position) hai.

    Mangal Ji ka is duniya sey zaana Meerut ki patrakarita Jagat key liyey bahut bari hani hai. Vivek meera dost raha hai. mai bhagwan sey prathna kerta hoo ki bhagwan unhey yeh dukh sehen kerney ki shakti dey. sath hi Mangal ji ki Attma ko bhi shanti dey.

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  • Acharya Arun Kanpuri says:

    Aaj kaphi din ke bad bhadash4media khola too yah parkar avak rahgaya ki Mangalji nahi rahey.1974 may magalji aaj kanpur may hamare cheif reporter huva karte. mane apni patkarta kee shuvat unhei key margdarsh me shuru kee thi.Aaj key bad unhone jab Lokjan Shachar nekala too may bhi unke shat tha. magalji alpbhashi they, nekdil inshan aur shabhi bhala chahney valey inshan they.Meert jagran mai mane unkey shath bhutkam shamy kam kiya likin pahley din shaubhay say voo khaber likhee joo magalji ney bayner,second leed aur battam-Kabarey thee Shalimar express train may meert may vishbhot, partapur may mig-27 gira aru shatet may pakishtani khupiya agent girftar. yahi nahee mujeyad kanpur aaj may mera pahla article-Enn Hathoo nay ab tak pach hajar logo koo kata hai mangal ji ney chapa tha.Es kay alava jab Shiv Prashad Guptaji Bhartmata Mandir koo Rashtra koo Shamerpit kaya too ushki kabar banarsh say telephoon per likhne unhoo mujhey hee chuna tha.es kaber kee khash bat yah thee ishme ager koi bhee galtee hoo jatee too noukari har hale may gai thee. Likin jab dushe din shivprashad gupta jee nai magaljee shay pucha kee kabar kishe likhee thee aur unhoney mera nam batya too gupta etna khush huye ke unhney magaljee say kaha yah enam dene kam kiya gaya hai.Yah bat mangaljee mujeh hee naheyen pure staff koo batai hee.Mangaljee key shath bahut kuch sanshmarn haiy.phir kabhi likhuga.Philhal mayri unhey shadhanjail.Bhuvendra Tyagi koo parnam joo unhoone mangalji key barey may likha.

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