जब तक मैं जिंदा हूं, ब्लैकमेल करता रहूंगा : अन्ना हजारे

अन्ना हजारे को पकड़ने की होड़ मीडिया हाउसों में लगी हुई है. सब उन्हें गेस्ट एडिटर बना रहे हैं. शुरुआत की टाइम्स आफ इंडिया ने. उसके बाद भास्कर वालों ने अन्ना को पकड़ा. टाइम्स आफ इंडिया आफिस में अन्ना ने पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए. अन्ना के टीओआई व नभाटा के गेस्ट एडिटर बनाए जाने पर एक रिपोर्ट नवभारत टाइम्स में प्रकाशित हुई है. इस रिपोर्ट को पढ़ने से पता चलता है कि अन्ना का विजन व विश्वास कितना साफ है. रिपोर्ट इस प्रकार है…

अन्ना हजारे जितने तेजतर्रार हैं, उतने ही विनम्र भी। उनके चेहरे पर ज्यादातर मुस्कुराहट रहती है, खासतौर से तब जरूर, जब कोई कुछ उल्टा सवाल पूछे। 73 साल की उम्र में अन्ना बहुत सही से नहीं सुन पाते और उन्हें अक्सर मराठी में फिर से पूछना पड़ता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटर्स रूम में बैठे अन्ना गेस्ट एडिटर के तौर पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। कानून और प्रशासन की तकनीकी चीजों के बारे में उनकी बहुत रुचि नहीं दिख रही थी, वे ऐसे मुद्दों पर कम बोलते दिखे। लेकिन जैसे ही बात भ्रष्टाचार, ग्रामीण विकास या विकेंद्रीकरण पर आती उनकी आवाज तेज होकर एक लय पकड़ लेती।

जब उनसे पूछा गया कि कई लोग उन पर अनशन के जरिए सरकार को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा रहे हैं तो अन्ना हंसते हुए बोले, ‘हां, तो? जब तक मैं जिंदा हूं और जब तक इससे लोगों को फायदा होगा मैं सरकार को ब्लैकमेल करता रहूंगा। इसमें क्या दिक्कत है?’ अन्ना को पहले से अनुमान नहीं था कि उन्हें जनता से इतना बड़ा समर्थन मिलेगा। अन्ना ने कहा, ”सरकार सब कुछ समझती है। इस मुद्दे की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार तुरंत बिल के लिए जॉइंट ड्राफ्टिंग कमिटी बनाने पर राजी हो गई।”

उनसे वर्तमान सिस्टम के असफल होने के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, ”हमने सारा ध्यान लोकसभा और विधानसभा पर लगा दिया है और ग्रामसभा को पूरी तरह भुला दिया है। वास्तव में असली सत्ता वहीं होनी चाहिए। जिस तरह मंत्री केंद्र और राज्य में व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होते हैं उसी तरह सरपंच और उपसरपंच को ग्रामसभा के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। विकेंद्रीकरण मेरा अगला बड़ा मुद्दा होगा।”

अपने गांव रालेगन सिद्धी के बारे में गर्व से बताते हुए अन्ना ने कहा, ”वहां पर शराब की 40 दुकानें थीं। अब वहां 13 साल से किसी ने न तो शराब पी और न ही सिगरेट। पहले 80 फीसदी लोग भूखे सोते थे अब हम सब्जियां बाहर भेजते हैं। पहले 300 एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं था इसलिए हमने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग शुरू की। अब हम 1500 एकड़ में दो फसलें लेते हैं। यह सब करने में न तो सरकार का कोई बड़ा खर्चा हुआ और न ही किसी करोड़पति ने पैसे लगाए। इससे यह पता लगता है कि असली स्वायत्तता से क्या हासिल किया जा सकता है। मुझे विश्वास है कि शहर केंद्रित डिवेलपमेंट मॉडल ठीक नहीं है। हमें गांवों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इकनॉमिक पॉलिसी पर फिर से सोचना चाहिए।” महाराष्ट्र में यूपीए और एनडीए दोनों के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके अन्ना ने मजाक में कहा, ”करप्शन में अगर एक ग्रैजुएट है तो दूसरा पीएचडी।”

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