जो हुआ, उसे मैं कभी भूल नहीं सकता

आज बहुत दिनों बाद मैं आपलोगों को याद कर रहा हूँ… मुश्किल और कठिनाई भरी जिंदगी से निकलकर आपलोगों को याद कर रहा हूँ… मैंने जो जिंदगी जी है, वो भगवान किसी को न दे… एक ऐसी जिंदगी जिसमें मैंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया… उस समय ऐसा लग रहा था कि मैं अब इससे शायद बाहर नहीं आ पाउँगा पर हमेशा ऊपर वाले और खुद पर विश्‍वास करता था, हमेशा भगवान से यही कहता था कि मै अगर सही हूँ तो मुझे इस दुःख से आप ही निकालोगे… और हुआ भी ऐसा ही… सच्चाई की ही जीत हुई…

हाँ इतना होना मेरे साथ जरुरी भी था, क्योंकि मुझे ये मालूम नहीं था कि ये दुनिया कैसी है? अपने क्या होते हैं और पराये क्या होते हैं… अब इस सच्चाई को मैं जान गया हूँ… अपने पर आये हर मुश्किल का मैंने बहादुरी से मुकाबला किया… कभी भी अपने आप को कमजोर नहीं होने दिया, क्योंकि मैं जनता था कि ये लड़ाई मुझे ही लड़नी है और अगर मैं कमजोर हो जाऊंगा तो वो मेरे लिए नुकसानदेह होगा… मेरे साथ जो भी हुआ उसका जिम्मेदार मैं खुद था, क्योंकि मैं वो हासिल करना चाहा जो कभी मेरा था ही नहीं… मैं हमेशा यही सोचता था कि मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान हूँ, जिसे सबकुछ मिला है… लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था… मेरे साथ जो भी हुआ वो मैं कभी भी नहीं भूल सकता हूँ…

हाँ लोगों को सीख जरूर दे सकता हूँ… मैं हर तरह टूट गया था… लेकिन मैं झूठ से लड़ा और आज अपना सब कुछ हासिल कर लिया… आप लोगों की दुआ से आज मैं ऐसे मुकाम पर हूँ जहां हर कोई जाना चाहता है… आज एक बार फिर मेरे पास सब कुछ है… फिर भी आज मैं ख़ाली हूँ… कारण है कि अपनी पिछली जिंदगी की वो कड़वी सच्चाई, जो मुझे उपहार स्वरुप किसी ने दिया है… आज मैं आपलोगों के पास अपनी बात इसलिए रख रहा हूँ क्योंकि मेरे दिल पे बोझ है, जिसे आप लोगों के सामने मुझे रखना था… जिसके लिए मैं काफी समय से कोशिश भी कर रहा था, पर उस समय मैं झूठ से लड़ रहा था…

मेरी कहानी मीडिया संसार में किसी से छुपी नहीं है… मेरे उस मुश्किल घड़ी में सभी लोगों ने मेरा साथ दिया, जिसका आभारी मै जिंदगी भर रहूँगा… जिन्होंने मुझे सही माना मैं उनका तो आभारी हूँ ही, क्योंकि मुझे उस झूठ से लड़ने की जो शक्ति मिली वो उनलोगों का मुझपर विश्वास ही था… मैं उनका भी आभारी हूँ जिन्होंने मुझे गलत माना…

ख़ास तौर से मैं अपने वर्तमान संस्थान का आभारी हूँ, जिसने मुझ पर विश्वास करके मुझे इतनी बड़ी जिम्मेवारी दी… मुझे अपने काम और अपने आप पर भरोसा है कि मैं अपने संस्थान और मुझ पर भरोसा रखने वालों का विश्वास कभी मरने नहीं दूंगा… यही मेरी और आपकी जीत है जो मैं चाह रहा था… अब मै कह सकता हूँ कि जीत हमेशा सच्चाई की होती है… हाँ अब कुछ बातों में मै जल्द किसी पर भरोसा नहीं कर पाउँगा, क्योंकि अभी भी मैं उस जख्म को भूला नहीं हूँ…

लेखक अभिजीत सिन्हा सीएनईबी, नोएडा में कार्यरत रहे हैं. इन दिनों टाइम न्यूज रफ्तार, पटना में असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं

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Comments on “जो हुआ, उसे मैं कभी भूल नहीं सकता

  • I had read your previous story also.From that time i was thinking that what type of people are there in this diverse world.They can play so badly with one’s faith and emotions that is beyond imagination.You faced a lot of difficulties bravely and lastly came out of this toughtime safely with the grace of almighty.this shows that god is always with truth even in this kaliyug also.lot of your wellwisher including me prayed for you.iI m happy to see you out of all difficulties and again starting a new journey.I wish u All The Best for your new job.may this opporunity be a benchmark in you successful &prosperous life.

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