झूठे दावों की मशीन हैं श्री सुब्रत रॉय

प्रकाश हिंदुस्तानीश्री सुब्रत रॉय जो भी दावा करें, कम है. उन्हें बढ़ा चढ़ाकर बातें करने का शगल है. वे जिस धंधे में हैं, वहां यह बहुत ज़रूरी है. अगर आपके पास सहारा इण्डिया की डायरी हो तो उसमें देखें, और अगर ना हो तो सहारा इण्डिया परिवार डॉट ओआरजी पर जाकर मीडिया वाले पेज पर जाएँ.

वहां सहारा समय के रीजनल न्यूज़ चैनल के लोगो के नीचे कुछ दावा किया गया है. इसमें कहा गया है कि  ‘सहारा समय राउंड दी क्लॉक ३६ सिटी स्पेसिफिक रीजनल न्यूज चैनल’. सहारा के कौन से ३६ रीजनल चैनल हैं?  कोई बताये तो सही. हमें केवल पांच के बारे में पता है :  १- एनसीआर, २- मप्र-छतीसगढ़, ३- बिहार झारखण्ड,  ४-यूपी-उत्तराखंड,  ५ मुंबई-महाराष्ट्र.

कहाँ गए ३१ रीजनल चैनल?

सवाल यह है कि अगर सहारा के ‘राउंड दी क्लॉक ३६ सिटी स्पेसिफिक रीजनल न्यूज चैनल’. हैं तो बाकी ३१ न्यूज़ चैनल कहाँ दिखाए जा रहे हैं?  भारत में या होनोलूलू में? मंगल पर या चाँद पर?  क्या वे चैनल  चोरी हो गए? सीबीआई, सेबी या आरबीआई ने ज़ब्त करवा दिए? राजस्थान का तो सुना था कि चैनल २००५ में शुरू होने को था कि वहां के किसी छोटे से अखबार ने छाप दिया कि श्री सुब्रत रॉय को एड्स हो गया है. अलबत्ता श्री सुब्रत रॉय को टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में इंटरव्यू देना पड़ा जो १० जून २००५ को पहले पेज पर  `I got an HIV test done. I do not have AIDS‘ शीर्षक से छपा था. उसके बाद  राजस्थान चैनल शुरू नहीं हुआ. अब सवाल यही है कि ये रीजनल चैनल कहाँ गए?

परिवार का ढोंग

I am very proud to be the Gaurdian or world’s largest family”  यह दावा करते हुए वे कहते हैं कि सहारा विश्व में सबसे बड़ा ‘;परिवार’ है. कौन सा  परिवार? किसका  परिवार?  यह कैसा परिवार है जिसके सदस्य प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं? अंशकालिक बताकर पूर्णकालिक  कर्मचारियों की तरह उनसे काम लेना और उनकी मौत पर जिम्मेदारी से मुंह फेर लेने का काम कौन करता है? बी एम द्विवेदी की आत्महत्या के बाद उनके वृद्ध पिता,  विधवा पत्नी और मासूम बेटी की किसी ने खोज खबर ली क्या? युवा पत्रकार अनिल सक्सेना (शाजापुर) की असमय मौत के बाद एक पैसे की मदद भी इस परिवार ने की क्या? नॉएडा के रेडिसन होटल में हुई मीटिंग में जब मैंने और मेरे साथियों ने श्री सुब्रत रॉय का ध्यान दिलाया था तो किस सफाई से उन्होंने उन्हें  स्ट्रिंगर बताकर टाल दिया था? क्या अनिल सक्सेना सहारा का पूर्णकालिक पत्रकार नहीं था? दूसरे कर्मचारियों (जिन्हें कर्मयोगी कहा जाता है, हालाँकि सभी को ‘इम्प्लाई कोड’ यानी नौकर नंबर दिया जाता है.) ने दो दो हजार करके मुट्ठीभर मात्र मदद की. कहाँ गया परिवार, कहाँ गया अभिभावक? श्री रतन टाटा से कुछ सीखें श्री सुब्रत रॉय, जिन्होंने मुंबई के ताज होटल पर आतंकी हमले के बाद हर कर्मचारी के घर खुद जाकर मदद की थी और हर मृत  कर्मचारी के परिजन को ३६ से ७५ लाख रुपये के साथ ही पूरी तनख्वाह आजीवन देने का दायित्व निभाया. सहारा में कल्पना में भी ऐसा कभी हो सकता है? दरअसल सहारा परिवार में केवल पांच ही सदस्य हैं सुब्रत रॉय खुद, उनकी पत्नी श्रीमती स्वप्ना रॉय जी, बेटे सुशांतो और सीमान्तो रॉय (जिन्हें लोग राजकुमार कहते हैं) और भाई जयब्रत. इस परिवार का एक्सटेंशन ज्यादा से ज्यादा दोनों बहुओं, बहन और बहनोई तक जाता है. बस. यह है परिवार, बाकी लोग कर्मचारी.

कंपनी या एस.आई.जी.?

सहारा कंपनी हर महीने कभी परिवार बन जाती है और कभी प्रोफेशनल कंपनी. यह कब परिवार  बने और कब प्रोफेशनल कंपनी यह इसके मालिकों पर निर्भर है. अगर कर्मचारियों से काम लेना हो अनुशासन का कोड़ा मारना हो तो प्रोफेशनल, अगर कर्मचारियों के हक में कुछ देना हो तो परिवार. दरअसल सहारा एक संगठन नहीं, एक एसआईजी (स्पेशल इन्ट्रेस्ट ग्रुप) है, जिसमें सभी के हित सीमित हैं और यह ग्रुप अपने हितों के लिए एक हो जाता है. (इसकी पुष्टि इस लेख के साईट पर आने के बाद के कमेंट्स से हो जायेगी.). सहारा में सारे अधिकार केन्द्रित हैं. लखनऊ में ही सहारा का सबकुछ है.

यूनियन ना होना गर्व या शर्म की बात?

सहारा कंपनी में इसकी स्थापना से ही दावा किया जाता रहा है कि यहाँ कभी भी यूनियन नहीं बनी. अंशकालिक – पूर्णकालिक कर्मचारियों और कमीशन एजेंटों का इतना बड़ा   समूह, मैनेजमेंट के तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ कभी बोल ना पाए, इसके लिए यूनियन ज़रूरी थी और है. दरअसल जिस बात पर श्री सुब्रत रॉय गर्व करते हैं, वह  गर्व की नहीं, शर्म की बात होनी चाहिए, लोकतान्त्रिक ना होने में कैसा गर्व? जहाँ  कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के लिए कर्तव्य कौंसिल नाम का  फर्जी गिरोह अधिकारिक रूप से बना दिया गया हो, जिसका एक और एकमात्र काम पुराने कर्मचारियों को एच आर विभाग की मदद से तंग करना है, ताकि किसी कर्मचारी को अनुशासन के नाम पर, किसी को आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप में, किसी को अक्षमता के नाम पर हटाया जा सके. कानूनी प्रावधानों से बचने का आसान तरीका पहले तबादला और फिर प्रताड़ना आम है. तीन  माह में चार चार तबादले भी किये गए हैं, कानपुर के आदमी को गुवाहाटी भेजा जाए और गृहस्थी ले जाने को तीन हजार रुपल्ली ही मिले तो कर्मचारी किससे तकलीफ बताये?  ये सब कानूनी तरीके हैं, लेकिन संवेदना इसमें कहाँ है?

सेबी को दी जानकारी यह रही :

श्री सुब्रत रॉय नॉन बैंकिग फाइनांस कंपनियों के इतने बड़े नेता हैं लेकिन वे खुद निवेशकों से शायद ही कभी मिलते हों. उनका सारा कारोबार एजेंटों और ब्रोकरों के माध्यम से चलता है. सभी इन्वेस्टर्स और ब्रोकर्स सहारा की वेबसाईट पर सेबी को भेजे गए सफाइनामे को ज़रूर पढ़ लें (http://www.saharaindiapariwar.org/sebi-pdf)  जिसमें ग्रुप के लायबिलिटीज स्टेटमेंट में बताया गया है कि ग्रुप पर ३० जून २०१० को  कुल ३४, ३२८ करोड़ रुपये की देनदारियां थीं. सहारा प्राइम सिटी का पब्लिक  इश्यु लाने  के लिए सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इण्डिया को सहारा कंपनी ने जो जानकारियां दी थीं,  वे भी दिलचस्प हैं. इंडियन कंपनीज़ एक्ट १९५६ की  धारा ६०-बी के तहत  ९ सितम्बर  २००९ को जमा किये गए  कुल ९३४ पेज के इस  दस्तावेज में (पेज १६)बताया गया है कि  श्री सुब्रत रॉय की चेयरमैनशिप वाली ग्रुप कंपनियों पर कुल १३० अपराधिक मामले आई पी सी की धारा 405, 406,408, 409, 418, 420, 467, 468, 471 और  474 के तहत चल रहे हैं. इसी रिपोर्ट में पेज २२ पर  बताया गया है कि हमारे २१७ प्रोजेक्ट्स में से १६ पर काम चल रहा है और ७७ पर भविष्य में काम होगा.  हम इनमें से कई प्रोजेक्ट  कई साल तक पूरे नहं कर पायेंगे. हमारे कई प्रोजेक्ट्स विकास की दशा में हैं और कई ख़तरो से जूझ रहे हैं. इसी दस्तावेज़ में पेज 31 पर बताया गया है कि सहारा ग्रुप की कंपनियों पर आर्बीट्रेशन  प्रॉसिडिंग के २, उपभोक्ता मामलों के ८१४, आर्थिक  अपराध के ६, श्रम मामलों के १६०, कानूनी तौर पर भुगतान रोकने के १० केस चल रहे हैं. इनकम टेक्स और दूसरे टेक्स सम्बन्धी मामलों के ३५२ प्रकरण चल रहे हैं जो  ४,574  करोड़  ३४ लाख रुपये के हैं.  सुप्रीम कोर्ट में ३ और विभिन्न  हाईकोर्ट में ६७ केस अलग हैं. इस दस्तावेज़ में सहारा कंपनी ने साफ़ साफ़ लिखा है कि ५,२४० करोड़ १६ लाख रुपये की उसके पास कोई व्यवस्था नहीं है. इसी दस्तावेज़ में आगे लिखा है कि सहारा की कंपनियों, सहायक  कंपनियों, प्रमोटर्स और फुल टाइम तथा पार्ट टाइम डायरेक्टर्स के लिए आकस्मिक दायित्व के रूप में ९,८२३ करोड़ ३६ लाख ८८ हजार की व्यवस्था ही नहीं की गयी है. यानी ३४, ३२८ करोड़ रुपये की देनदारियां तो हैं  ही, ९,८२३ करोड़ के दायित्व भी कभी भी आ सकते हैं. सहारा कंपनी ने सेबी को अपनी बुक वेल्यु के मान से ५४, ९६८ करोड़ रुपये की संपत्तियां भी बताई हैं. सहारा कंपनी ने आठ साल पहले 217 शहरों  में मकान बनाकर  बेचने के लिए बुकिंग शुरू की थी, इतने साल में कई बिल्डर्स आये और एक एक दर्जन प्रोजेक्ट्स पूरे करके मुनाफा कमाकर निकल गए, लेकिन सहारा केवल एक शहर में ही मकान बनाकर दे पाया.  सहारा एयर लाइन का जो हश्र हुआ, सबको पता ही है.

इन्वेस्टर्स के हित में रिटायर हों

श्री सुब्रत रॉय को ६० साल का हुए तीन साल हो चुके हैं. उन्होंने १८ घंटे तक रोजाना काम किया है. वे हजार साल तक जीयें, यही दुआ है, लेकिन दुआओं से कुछ होता नहीं. जिस तरह से वे अपने एजेंटों और कर्मचारियों से बर्ताव करते हैं, अपने आप को लाखों लोगों का अभिभावक कहते हैं, सुबह के दस बजे से अगली सुबह के तीन बजे तक के भाषण (या प्रवचन) देते हैं और लखनउ में सहारा शहर में सैकड़ों एकड़ के भव्य महल में सफ़ेद वस्त्रों में और घोड़े पर सवार अंगरक्षकों के बीच रहते हैं और राष्ट्रपति की तरह बिना नंबर की कार में घूमते हैं, उसे देखकर लगता है कि उन्हें अब आराम की ज़रुरत है और उन्हें अपना उत्तराधिकारी खोज लेना चाहिए. कहीं ऐसा ना हो कि एन. बी. बोंड्स के नवभारत समूह के मालिक श्री रामगोपाल माहेश्वरी के बाद जैसे वहां परिवार में संघर्ष शुरू हो गया था, वैसा ही कुछ सहारा में हो और लाखों इन्वेस्टर्स भटकते रहे. इन्डियन एक्सप्रेस ग्रुप जैस भी ना हो कि संपत्ति के विवाद कोर्ट तक जाएँ, यों भी मायावती उनके पीछे पड़ी हैं और सेबी, आरबीआई, प्रवर्तन निदेशालय में मामले पेंडिंग हैं. मुलायम, अमर, अमिताभ, अनिल सब दूर हैं और बेटों से मतभेद की खबरें भी आती रहती हैं.

लेखक प्रकाश हिंदुस्तानी इंदौर के निवासी हैं. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ और जाने-माने पत्रकार हैं. कई मीडिया हाउसों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन दिनों स्वतंत्र पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं. उनसे संपर्क 09893051400 या prakashhindustani@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

Comments on “झूठे दावों की मशीन हैं श्री सुब्रत रॉय

  • prakashji, sahara se alag hua to patrkarita jag gai varna hamne to apko isi chanel pr kailash vijayvargiya ke paksh me khabren chalate dekha ha. besirper ki khabren bhi apne khoob chalai han.

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  • असल में अब पत्रकारिता कर रहे हैं प्रकाशजी ! इतने दिन से कहाँ थे? पूरी रिपोर्ट फैक्ट्स और फिगर से भरी है. सहाराश्री को किसी ने तो आईना दिखाया. जो आदमी अपने दो बेटों को नहीं संभाल सकता वह लाखों कर्मचरियों का अभिभावक हो ही कैसे सकता है? एक बेटे कि हरकतों से तंग आकर सहाराश्री अपने घर से बेदखल कर ही चुके हैं. ….ये बात भी ठीक लगती है कि सहाराश्री कब तक सहारा परिवार को संभाले रह सकते हैं. वक्त रहते उनको रिटायर हो जाना चाहिए.
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  • जब कोई सहाराई मिलता और यह कहता कि हमारे यहां कोई मालिक नहीं तो मुझे उसकी बुद्धि पर तरस आता था..

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  • Prakash ji…lagta hai Sahara Shree apka PF kha gayein aur yeah baat aap ko pach nahi rahi hai…warna kisi zamney mein to aap bahut badey bhakat hua kartey thay inhi Subrotoy Roy key 😛

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  • Dr Matsyendra Prabhakar says:

    Sahara India Parivar ka jo kuchh such hai, vah sab usne vidhik taur par desh ke pradhikrit aur saksham sansthanon/sansthaon ke samaksh rakh diya hai, iss-men to kahin koi chhupav ya durav nahin hai, phir Prakash Hindustani jee, ab aap ko khuzalee kyon ho rahi hai? Kya aap ke vicharon men kisi ghor kuntha ki boo nahin aa rahi hai? Kahin yah Sahara se koi tukda prapt karne ka to yatna nahin hai? Sahara ke sath achha ya bura jo kuchh bhi hai, usne sab online kar rakha hai, har jankari aam logon aur desh-duniya ko dee gayi hai. Vah to na kisi vyakti vishesh ya, na hi kisi vaidhanik sanstha se hi kuchh chhupa raha hai. Aap iss prakar ke kritya se kya sabit karna chahte hain, Sahara ne jo pahle bataya hai, usko aap ke dohrane ka maqsad samajh nahin aa raha? Kya aisi koi bhi jankari aap ne khij lee hai jo Sahara ne kisi se chupayi ho? Aap padhe-likhe mane jate rahe hain, kya batane ki zaroorat hai ki Kisi bhi sanstha men sabhi log kisi ek sanche (ya frame) men to dhal kar aate nahin? Ho sakta hai kabhi kisi vyakti vishesh ke kisi karya-vyavhar se kisi kartavya-yogi/karyakarta ko koi kasht pahuncha ho, lekin usne jab apni bat oopar tak rakhi to use nyay mila hai. Yadi koi iss se mana karta hai to vah koi nirutsahi tatha darpok raha hoga, aap hi bataiye aise vyakti ko kaun-kahan rakhna chahega? Lihaza is prakar ke karyon se apne nimna hone ka saboot na deejiye, aap ko bhi bahut se log aaj bhi achha vyakti mante aaye hain. Aap ki gan-na theek-thak patrakaron men bhi hoti rahi hai? Kyon apni bhad pitwana chahte hain?

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  • Narvijay Yadav says:

    Dear Prakash ji,

    There may be some minor problems in the group, which is a normal thing in a huge corporate house like Sahara, but Subrato Roy, as a person and as a leader is a superb human being.

    Yes, he may have to compromise in certain situations, still he is a lovely person, a great leader, a great friend, a responsible guardian and a very big employer in India. I still proudly love to say “Good Sahara” and I salute him for his energy, enthusiasm and vision.

    –Narvijay Yadav
    Former World News Desk Head,
    Rashtria Sahara (1991-94)

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  • kartvaya councile chamcho ko bachane aur imandaro ko fasane ke liye bani hai. Aisa nahi hota to stringer ka commision khane wale bureau cheif shakti prakash apne pad par nahi hota.

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  • यशंवत जी आप निश्चित तौर पर बधाई के पात्र हैं। साथ ही प्रकाश जी…यशवंत आज बधाई के पात्र इसलिए हैं कि आपने हमारी बात पर गौर नहीं किया था। हमने आपको सहारा के बारे पहले काफी जानकारी भेजी थी…लेकिन आपने उन्हें प्रकाशित नहीं किया। हमने आपको जो कहां था.उसमें से अधिकांश बाते प्रकाश भाई ने लिख दि है…सुबूत के साथ…लेकिन आपने फिर भी यह नहीं बताया की सहारा के चैनलों में क्या हो रहा है…यहां तो माननीय सहारा श्री के लाए लोग…कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं भाई…लेकिन आप सहारा चैनल के बारे में कुछ नहीं छापते…राजेश कोशिश…जो उपेंद्र राय और विजय राय का दलाल है…जो इनके लिए खुशिया मांगने हर महीने बैष्णुदेवी के दरबार में जाता है…और सहारा के कर्माचारियों के ऊपर हुकम चलता है….यशवंत भाई सहारा के हर चैनल में सब लोग को समायोजित अवकाश मिल रहा है…हर चैनल में लोग आठ घंटे की ड्यूटी कर रहे है…लेकिन इस व्यक्ति ने अपने चैनल में…हर किसी को प्रताड़ित कर के रखा हुआ है। समायोजित अवकाश बंद,छुट्टी बंद,चाय पीने के लिए बाहर जाना बंद ऊपर से गंवारों की तरह गाली देता हैं। हमने आपको बताया था कि यह व्यक्ति खुलेआम लड़की बाजी की बात करता है….इसे बात करने की तमीज तक नहीं है….क्या यह सब सहारा परिवार में करने के लिए किसी ने परमिशन दी है…क्या विजय राय और उपेंद्र राय ने इन दलालों को यह कहां हैं कि कर्मचारियों को जूते मारों….जो लोग अच्छा काम करने वाले थे…उसमें से कई लोग छोड़-छोड़ कर जा रहे है…जिनमें संदीप,मनीष,कविंद्र सचान,प्रशान त्रिवेदी,रुपल,पूजा,संगीता,अमित मिश्रा,अब्बास और भी कई लोगों हैं…जो हर रोज इस व्यक्ति की गालियों और अनपढ़ता के कारण जा रहे है…..आज पुरा मीडिया जानता हैं की यूपी चैनल हेड की असलियत क्या है….वह क्या थे और आज क्या है..।
    यशवंत भाई इनसे समझदार और अनुभवी लोग आज भी सहारा में लेकिन यह एक व्यक्ति खुद को दंबग बताकर सबकी मां-बहन एक कर रहा है..बाकि सच क्या हैं…वह प्रकाश जी ने बता ही दिया है…फिर आपके यहां भी कुछ दिन पहले एक पत्र प्रकाशित हुआ था…किसी महीला मित्र का था…उसमें लिखी बांते बिल्कुल सच थी….आज प्रकाश जी की बातें पढ़ी तो सच में लगा…अब पत्रकारिता और परिवावाद सिर्फ और सिर्फ दलालीवाद रह गया है…आपने प्रकाश जी को प्रकाशित किया…उम्मीद हैं इससे लोगों की आंखे खुलेगी…खास कर उन लोगों की जो आंख बंद कर इस कंपनी में अपनी मेहनत की कमायी लगा रहे है….धन्यवाद यशवंत जी प्रकाश जी….।

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  • आदरणीय श्री प्रकाश हिन्दुस्तानी जी
    धन्यवाद

    जो आपने अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपने EX संस्थान के बारे में एवं उसके मालिक के बारे में इतनी सारी उपयोगी जानकारी दी ! इससे यह तो सिद्ध हो गया की तुम उन लोगो में से हो जो जिस थाली में खाते हैं उसी में थूक देते हैं
    क्या आप यह बता सकते हैं की आप ने यह जानकारी अपने कार्यकाल के दौरान क्यों नहीं दी उसके बाद यह बताओ की जब यह संस्थान इतना बुरा था तो आप यहाँ इतने दिनों तक क्यों अपनी कुर्सी बचाते नज़र आए जब कुर्सी नहीं बची तो कीचड उछालना शुरू कर दिया
    वाह रे स्वतंत्र पत्रकार कम से कम पत्रकारों की जात का तो लिहाज किया होता जो कम से कम आस्तीन के सांप नहीं होते ………………
    अब आप अपने लेख को देखे और यह गोर फरमाए की 36 सिटी स्पेसिफिक चैनल और 36 चैनल में क्या अंतर होता है
    बाकी यह आप तय करने वाले कौन हो की किसी परिवार में क्या होगा और क्या नहीं …..जब आप नौकरी करने आए थे तो शायद आप ने कंपनी की शर्त पर ज्वाइन किया था ना की सुब्रत जी आप के घर आए थे की भाई आप अपनी शर्तो पर मेरी कंपनी ज्वाइन कर लो ……….सब जानते हैं की आप अपने अंतिम दिनों में कितना काम करते थे…….आप को किसी संस्थान पर किसी भी प्रकार से कीचड उछालने का कोई हक नहीं है
    अब शायद कोई भी आप की इस हरकत को देख कर आप को नौकरी देने से पहले 10 बार जरूर सोचेगा

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  • असल में अब पत्रकारिता कर रहे हैं प्रकाशजी ! इतने दिन से कहाँ थे? पूरी रिपोर्ट फैक्ट्स और फिगर से भरी है. सहाराश्री को किसी ने तो आईना दिखाया. जो आदमी अपने दो बेटों को नहीं संभाल सकता वह लाखों कर्मचरियों का अभिभावक हो ही कैसे सकता है? एक बेटे कि हरकतों से तंग आकर सहाराश्री अपने घर से बेदखल कर ही चुके हैं. ….ये बात भी ठीक लगती है कि सहाराश्री कब तक सहारा परिवार को संभाले रह सकते हैं. वक्त रहते उनको रिटायर हो जाना चाहिए.

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  • हा हा हा हा यशवंत भाई और प्रकाश हिन्दुस्तानी जी, आपने हजारो वफादार पालतुओं को छेड़ दिया और अब वे भौकने, गली गलौज करने और तू तुकारा करने लग गए. ये वफादार अगर अपना नौकर नंबर ( जिसे एम्पलाई कोड बोलते हैं) लिख देते तो बेच्रों को एक आध टुकड़ा ज़रूर मिल जाता. सहाराश्री को हर प्रजाति के चौपाये बहुत पसंद हैं. इंडियन नाम के वफादार ने अपना नाम छुपाकर औकात बता दी. ये ही बता देते कि 36 सिटी स्पेसिफिक चैनल और 36 चैनल में क्या अंतर होता है? औरों को भी समझ में आ जाता. दूसरी बात याद रखना जरूरी है पत्रकारों को अपनी निष्ठा पत्रकारिता से rakha नि चाहिये, सेठों से नहीं, सेठ तो बदलते रहते हैं.

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  • veer chauhan says:

    इस पूरे लेख से मुझे कुछ लेना देना नहीं है लेकिन ये जो उमा कुमार नाम का भड़वा है जो अपनी असलियत छिपाकर लोगों का चूतिया काट रहा है उसके कमेंट पर मेरा खून खौल रहा है…इस शख्स ने राव वीरेंद्र सिंह के दत्तक पुत्र कविंद्र सचान जिसे काम करने वाला बताया है…वामा टीम की कुछ देवियां जो राव वीरेंद्र सिंह की दत्तक पुत्रियां थी उन्हें काम करने वाला बताकर ये साबित कर दिया है कि ये बहुत बड़ा चूतिया है और राव वीरेंद्र सिंह एंड चमतों के जूते साफ करने वाले लोगों में से एक है…. वो टीम जो कभी किसी के अच्छे काम को सराहने में अपनी तौहीन समझती थी वो टीम जिसने अपने अलावा किसी और के बारे में कभी सोचा ही नहीं वो टीम जो कई सालों तक सिर्फ और सिर्फ हराम की खाती रही उसे काम करने वाला बताकर इसने अपने ईमान को गाली दी है…. अबे राजेश कौशिक के बारे में ये सब बोल रहे हो कि लड़की बाज़ी करता है क्या तुम्हारी बहन को वो डेट पर ले गया… दरअसल में सख्ती बरतने वालों के लिए लोग ऐसा ही कहते हैं… अबे कहावत तो सूनी होगी लातों के भूत बातों से नहीं मानते कुछ ऐसे ही है सहारा टीवी के लोग… जिन पर सिर्फ राजेश कौशिक जैसा व्यक्ति ही काबू पा सकता है… वैसे बेटा तुम्हारी तो हकीकत मुझे पता है एक दिन सबसे पहले तुम ही राजेश कौशिक के डंडे का शिकार बनोगे…. साले कवींद्र सचान के भड़वे… चाय पीएंगे साले गेट के बाहर जाकर… अभी तो कॉप ऑफ बंद कराये हैं साले वीक ऑफ भी बंद करवा दिए जाएंगे अगर तुम जैसे लोग अब भी नहीं सुधरे तो… साले अगर बहुत बड़े काबिल हो तो जाओ ना किसी दसरी कंपनी में जाकर नौकरी की भीख मांग लो… क्यों ऐसी की तैसी करा रहे हो… सहारा में… खबरदार साले आज के बाद ऐसी गंदगी फैलाने की कोशिश की तो… नहीं तो पता चला तो अंडमान निकोबार ट्रांसफर कर दिये जाओगे… फिर समंदर के बीच बैठकर मच्छी पकड़ते रहना… और साले अपनी बाप की औलाद हो तो मुझे किसी कै चमचा कह कर कमेंट का जवाब मत देना… क्योंकि ना तो मैं सहारा का कर्मचारी हूं और ना ही राजेश कौशिक या फिर उपेंद्र राय का चमचा… ठीक है ये चेतावनी सभी कमेंट करने वालों के लिए है… क्योंकि नाम बदलकर ही सही अगर ज़रा सी भी शर्म बची हो तो अपनी आत्मा से सच्चाई पूछकर देखना पहले फिर लिखना कुछ भी गंद ।

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  • तुम जियो यशवंत भाई जी हजारों साल…सच में आंखें नम हो गयी…मेरी…आपने पहली बार सहारा में आएं उस व्यक्ति के बारे में सच्चाई छापी जो सच में सहारा की परंपरा को ही दागदार कर रहा था….मेरे कई मित्रों ने आपको सूचना दी थी…लेकिन आपने पता नहीं क्यों उनका यकीन नहीं किया….आज हमारे पत्रकार मित्र उमा ने जो कुछ लिखा हैं…वह सच है।
    यशवंत भाई ठीक हैं…यूपी चैनल हेड के शोर्स बड़े होगें….उनका अपना दायरा होगा…लेकिन भाई आप गाली क्यों दे रहे है…क्यों लोगों का अधिकार मार रहे हो…क्या कभी कोई काम दबाव में सही हुआ हैं आज तक…उमा भाई ने जानकारी दी हैं की हमारे पत्रकार भाई यूपी चैनल हेड…हर महीने माता के दरबार में जाते है…तो क्या माता रानी ऐसा बोलती हैं कि अपने सहयोगियों को मां-बहन की गाली दो…अरे भाई अभी आपका कैरियर हैं ही क्या..यह भी तो इन चैनल हेड मोहदय को देखना चाहिए ना….किस्मत से आपको एक बड़ा पद मिल गया तो…क्या आप अपने से नीचे के लोगों को मारने की धमकी दोगें….भाई राजेश कोशिश जी है…सहारा से बहार के जीवन के बारे में सोचिए…..यहां कभी किसी की दूर तक नहीं चली है…यहां से निकलते ही…पत्रकारिता के असल मायने समझ में आ जाएगें…कितनी शर्म की बात हैं…कि आपके असली चेहरे के बारे में भाड़ास जैसे बड़े मंच पर…दुनिया पढ़कर थु थु कर रही होगी….क्या यही कबिलियत हैं…जीवन की…।
    ऐसी पत्रकारिता ना करें मित्रों जो दूसरों का घर उज़ाड़ दे…लोगों को सड़क पर ला दें…घर बनाने में कई साल लग जाते है…उसे उजाड़े नहीं बनाने की सोचे मित्रों…..।
    यशवंत भाई आप सच में श्रेष्ठ हैं…मैं आपको बधाई देता हूं…कि आप मीडिया जगत से जुडे हमारे मित्रों के दुख-सुख को आम आदमी के सामने ला रहे है…दूनिया को सच देखने वाले हम लोग आज सच में एक ऐसे दलदल में फंसे हैं…जिसने निकलना बहुत भारी हो रहा है..शायद इसलिए प्रभाश जोशी जी ने कहां था…पत्रकारिता का मिज़ाज अब धीरे-धीरे…..व्यसायिक होता जा रहा है…इसे बचाया जाना चाहिए…नहीं तो कलम टूट जाएगी…बीक जाएगी…बिखर जाएगी…शायद आज के माहौल को देखकर उन्होंने ऐसा कहां होगा….।
    धन्यवाद यशवंत जी…एक बार फिर से आपका

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  • चौहन जी…इस तरह की भाषा का प्रयोग कर लगता नहीं की आप पत्रकार है…उमा ने जो लिखा है…वह उनकी अपनी सोच है…लेकिन भाषा का ध्यान निश्चित तौर पर रखा जाएं…।
    यशवंत भाई इस बात का ध्यना निश्चित तौर पर रखा जाएं….मीडिया में कौन क्या हैं,किसकी क्या औकात है…और कौन फला-फला हैं…इसकी तस्वीर बिल्कुल साफ है…राजेश कोशिक के बारे में जो कहा गया है…वह आज हर कोई जानता हैं…यदि यह सच हैं तो दुखद भी है…लेकिन गालियों का प्रयोग क्या उचित है….इस पर चर्चा होनी चाहिए..चौहान जी ने यहां तक लिख दिया हैं….कि वह उमा की बहन को डेट पर लेकर गये थे क्या…लोगों का ट्रांसफर करने की धमकी भी चौहान जी ने दी…अरे भाई आप कहते हो…आपका इस लेख से कोई मतलब नहीं है..आपको सहारा से कोई लेना-देना नहीं…तो फिर आपको इस पर तकलीब क्या है….आप सच्चे हैं तो हैं…यदि आप भी ये उमा जी के तरह गालियों को प्रयोग करेगें तो..आपमें और उमा जी क्या फर्क रह जाएगा…बात वह होनी चाहिए जिसमें दम हो…सहारा में क्या हो रहा हैं…यह सब जानते है…आज सहारा में काम करने वाले ही…बाहर आकर सहारा को गालियां देते है…यह तो लोगों की फितरत बन गयी….लेकिन चुतिया,भड़वा कौन बोलता हैं…जो कमजोर होता है…जिसे इसके अलावा कुछ नहीं आता…कृपया इस तरह के शब्दों का प्रयोग कोई न करें…अपनी बात कहें….जिसको कहने का अधिकार सभी को है…आप अपने स्तर पर काम करें….ऐसा काम जिसके लिए लोग आपको याद करें….आपके नाम को याद करें…..बाकि पत्रकारिता का आज का चेहरा क्या है…चौहान जी आप और हम सब जानते है…सच सबके सामने है..कुछ भी छुपा नहीं है….।

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  • यशवंत जी प्रकाश जी के इस लेख पर कुछ लोगों की टिप्पणी पर बड़ा दुख हुआ। मैने भी कभी सहारा से ही पत्रकारिता का जीवन शुरु किया था और आज मैं जो कुछ भी हूं…सहारा के जरिए ही हूं…सहारा में रहकर ही मैने दुनिया की पहली नयी तकनीक पर काम करना सीखा था और आज उसी के दम पर मैं एक बड़े मीडिया हाउस से जुड़ा हूं।
    लेकिन यह बहुत ही दर्द की बात हैं की अब सहारा से बाहर के लोग भी सहारा के लोगों को अपशब्द कहने लगे है.यह बहुत ही शर्म की बात हैं पत्रकारिता जगत के लिए.जबकि हम में से अधिकांश लोग सच नहीं जानते है। हम वही कहते हैं.जो हमने एक दूसरे से चर्चा के दौरान या फोन पर बातचीत के आधार पर सुना होता है।
    आपने हम लोगों का इतना बड़ा मंच दिया हैं। इसका मतलब यह नहीं होता की हम एक दूसरे पर जूते मारें। किचड़ उछालें,क्योंकि इससे बदनामी हमारी,हम सब की होती है। हमारे बीच के किसी एक बंधु ने तो इस मंच पर सहारा वालों को चुतिया,भड़वा,कुत्ते तक कह दिया है। प्रहार चाहे किसी और पर हो,लेकिन टारगेट सीधे तौर पर सहारा में काम करने वालों को किया गया है। यह बहुत ही दर्दनाक है। मैं अच्छी तरह जानता हूं। क्योंक मैं इस परिवार से जुड़ा रहा हूं। यहां बहुत अच्छे काम करने वाले लोग थे और हैं भी जो आज भी पूरी मेहनत के साथ काम कर रहे है। यह तो हर जगह होता हैं की नकारे किसम के लोग होते है। कुछ लोग गुटबाजी में काम करते है। अच्छे लोगों को आगे नहीं बढ़ने देते। यह तो हर मीडिया हाउस में होता रहा हैं और हो भी रहा है। कभी कोई सफल होता हैं,कभी नहीं।
    इसी तरह सहारा में भी हो रहा है। लेकिन हम सबको एक तराजू में तोलने वाले होते कौन है। हमने अंदर जाकर कभी देखा नहीं की राजेश कोशिश जी क्या कर रहे है। उपेंद्र जी क्या कर रहे हैं,या फिर सहारा में अंदर क्या चल रहा है,फिर हम यह कैसे मान लें की कौन क्या है।
    जहां तक राजेश कौशिक जी को लेकर कुछ लोगों ने सवाल खड़े किए है। और उनके नाम पर धमकी भी दी है। इससे तो साफ लगता हैं की जो कुछ हो रहा हैं। वह सच है,या फिर राजेश जी से जुड़े लोग ही सब लिख रहे है। यशवंत जी यह पूरा मीडिया जगत जानता हैं की राजेश जी की मीडिया क्या भूमिका रही है। उन्होंने मीडिया में अभी तक किया क्या है। या फिर सहारा में आकार सहारा के लोगों के लिए उन्होंने कौन से उपलब्धियां खड़ी की है। पहले सहारा के रीजनल चैनलों की टीआरपी सारे बड़े चैनलों से होती है। आज जीयूपी,साधना से होती है। जो पहले से ही कहीं टीआरपी की रेस में नहीं ऐसे में आप नंबर वन हो गए तो क्या हुआ। क्या लोग यह नहीं देखते है कि सहारा से समय चैनल पर जो चलता है। स्टार न्यूज़ पर जो चलता है। उसकी दूसरी कॉफी सहारा पर चलती है। इतने अंधे तो लोग भी नहीं है। इसके बात कोई सच्चाई बताने की कोशिश करता है तो उसको आपके मंच से अब देख लेने की धमकी दी जा रही है। ट्रांसफर करने की बात कही जा रही है वीक आफ बंद करने की बात की जा रही है। सच मैं बंधुओं कितना स्तर गिरता जा रहा है पत्रकारिता का। इसे बचाओं बंधु नहीं तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। तलवार टूट जाएगी। कुछ करो सच को आंच आने लगी है।
    यशवंत जी आपके इस श्रेष्ठमंच का कई लोग बहुत गलत फ्यादा उठा रहे है। ऐसा होना नहीं चाहिए। किसी एक व्यक्ति विशेष पर चोट नहीं करनी चाहिए। सहारा के लोग पहले ही बहुत पीड़ित और प्रताड़ित हो रहे है। उन्हें अब बाहर के लोग भी प्रताड़ित करेगें तो यह कहां तक उचित है। हां इतना सच हैं सौ फिसदी की सहारा में गालियां दी जा रही है लोगों का शोषण हो रहा है…और जिन लोगों के नाम लिए जा रहे है.वह उसमें शामिल है।
    लेकिन हम सब जानते हैं। सहारा में एक लंबी यात्रा कोई नहीं कर पाया हो। चाहे वह कितना बड़ा तुरमखां क्यों न हो। यह सहारा का इतिहास रहा हैं,इसलिए हमें पत्रकारित की उस सोच की बात करनी चाहिए। जो समाज को बदले,समाज में नयी चेतना लाएं। वैसे भी आज पत्रकारिता किसकी कटपुतली है,व्यापारियों की,बाजारवाद की जिसमें सब कुछ बिकता है। कम से कम अपनी मां-बहनों को तो हमें बक्स देना चाहिए। कुछ लोग तो इन्हें भी नहीं बक्स रहे है। कौन नहीं जानता हैं की इस बाजारु पत्रकारिता में एमएमएस जैसे कांडा खुलेआम बडे-बड़े हाउसों में हो रहे है। हम खुद अपनी आंखों से इन्हें देखते है। यही तो आज पत्रकारिता का बाजार है।
    इसे आप कैसे भुल सकते है। बड़ी बात करने से पहले सच को परखे की हिम्मत आज हम में हैं ही नहीं। तभी तो हम किसी की बहन को डेट पर भेज देते है। किसी को चुतिया,भड़वा और साले कुते कह देते है। यह सब भी तो आज बाजार की मांग है। लुट लो जितना लुट सकते हो। पत्रकारिता के नाम पर,कर लो जो कर सकते है। भूलना नहीं समय बहुत जल्द करवट लेगा और हम सब नंगे हो जाएगे। फिर कोई नहीं आएगा हमें नंगेपन से ढकने वाला और हम खुद पर ही हंसते रहेगें।

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  • veer chauhan says:

    रमेश जी शालीनता का पाठ पढ़ाने के लिए शुक्रिया…लेकिन एक बात आप भी समझ लें कि जो व्यक्ति किसी पर कीचड़ उछाल रहा हो उसके चरित्र पर उंगली उठा रहा हो… वो भी बिना असलियत जाने उसके लिये गालियां तो बहुत कम है घर में घुसकर जूते चप्पलों से उसके परिवार के सामने उसकी धुनाई करनी चाहिए… ये व्यक्ति कहता है कि खुलेआम लड़की बाजी की बात करता है… इससे ये पूछो कि भला इसने क्या समाज सुधारने का ठेका ले रखा है… और इसकी कौन सी रिश्तेदार को राजेश कौशिक ने छेड़ दिया…ये वयक्ति कहता है कि राजेश कौशिक उपेंद्र राय और विजय राय का दलाल है इससे ये पूछो कि इसने कब उसे दलाली करते देखा है और अगर दलाली करते देखा है तो किस किस के बीच… अगर सच्चा पत्रकार है और ईमानदारी से काम करता है सहारा के लिए तो बताए… लेकिन नहीं ये सब एक व्यक्ति को बदनाम करने की साज़िश है और वो इसलिए कि ये खुद सहारा के यूपी चैनल में ही काम करता है और काफी पुराना है शायद राव वीरेंद्र सिंह का शागिर्द है जिसकी जुदाई के गम को ये बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है… और रही बात चाय पीने की तो यार एक बात बताओ कि चाये पीने के लिए दफ्तर के भीतर दो कैंटीन हैं वहां चाय क्यो नहीं पीते… दो दो सौ छुट्टियां लोगों के पास पड़ी है उन्हें क्यों नहीं इस्तेमाल करते… बस समायोजित अवकाश बंद कर दिये तो मिर्चें लग रही है… दूसरी बात ये कि ये साले नौ घंटे शिफ्ट कराने की बात कर रहा है… इससे पूछो कि इसने खुदने कितनी बार नौं घंटों की शिफ्ट की है… बात करता है… इसको साले को गाली ना दूं तो और क्यां दूं…रमेश जी आप ही बताएं… वैसे कहीं ना कहीं आप भी इसके सुर में सुर मिला रहे हैं आप क्या जवाब देंगे… अरे माना कि सहारा में सैलरी नहीं बढ़ रही है… लेकिन राजेश कौशिक के हाथ में नहीं है जब कंपनी के मालिक ही सहारा मीडिया को सबसे गिरा हुआ डिपार्टमेंट मानते हैं तो इसमें राजेश कौशिक का क्या कुसूर

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  • मान्यवर यशवंत जी नमस्कार,मैं उमा कुमार चुतिया,भड़वा,कुता माननीय चौहान जी के अनुसार। मेरी 40साल के पत्रकारिता के पड़ाव को इससे बड़ा सम्मान और मिल भी क्या सकता था। मैं जानता था…आज की युवा पीढ़ी मुझे इससे ज्यादा क्या दे सकती है। यह भी मैं जानता हूं।
    ये चौहान जी शायद मेरे बेटों के उम्र के होगें…अगर ये वास्तव में हैं तो। मैं चौहान जी को आपके माध्यम से सूचित करना चाहता हूं की मैं बंसत कुंज 812-B11,A दिल्ली में पिछले 42 सालों से रह रहा हूं। हिन्दुस्तान,जनसत्ता,राष्ट्रीय सहारा,नवभारत जैसे कई पत्र-पत्रिकाओं से मेरा संबंध रहा है। और चौहान जी जैसे कई बच्चों को भविष्य की शिक्षा दे रहा हूं। मैंने अपना पता इसलिए दिया हैं कि इन मोहदय ने मुझे घर में घुसकर जुते चप्पलों से मारने की धमकी दी है। मैं पुरे दिन घर पर रहता हूं। मेरा निवेदन हैं इनसे की कृपया आएं और अपने जुते-चप्पलों से मेरा स्वागत करें। ये न कहें की मेरा पता गलत है।
    चौहान जी मेरे आपके जैसे दो बच्चे है। जिनमें से एक(छोटा बेटा) जेएनयू से पत्रकारिता का कोर्स कर रहा हैं और बड़ा बेटा मुंबई में टाईम्स से जुड़ा है। मेरे कुछ शिष्य हैं जो सहारा इंडिया परिवार से जुड़े है। मैं भी समय-समय पर सहारा में जाता हूं। आपको ध्यान होगा सन् 2008 में सुब्रतराय सहारा जी का एक इंट्रव्यू नवभारत टाईम्स में प्रकाशित हुआ था। वह मेरे ही संपादन में प्रकाशित हुआ था। सहारा के पुस्तकालय में आपको मिल जाएगा।
    मैं आपको यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं की मैं ना किसी राव को जानता और ना ही उन लोगों को जो सहारा से निकाले गए। लेकिन सहारा में क्या हो रहा हैं उसकी जानकारी मुझे मेरे शिष्यों के माध्यम से मिलती रहती है….और मैने स्वयम् भी पिछले दिनों सहारा में अपने मित्र से मिलने पर जो देखा उसके आधार पर मैंने जो लिखा वह पूर्ण सत्य है जिसकी प्रति मै माननीय सहाराश्री जी को सहारा शहर प्रेषित कर रहा हूं..मैं भड़ास की इन प्रतिक्रियों को भी अवश्य पहुंचा चाहुंगा। जो आप लोगों ने की है।
    मान्यवर चौहान जी,मैं आपको ना ही कभी गाली दी और ना ही किसी भी तरह से कोई बतमीजी आपके साथ की,लेकिन आपने अपने युवा खुन का जलवा देखाते हुए जो कुछ कहा। मैं उसमें कुछ नहीं कर सकता है। मैं तो उस दिन का इंतजार कर रहा हूं आप मेरे निवास पर आएं और मुझे लात-घुसों से मारे। यदि आपने इस मंच पर अपनी पहचान सही दी हैं तो।
    मुझे नहीं मालूम की आप कौशिक जी की विचारधारा पर इतने खिन्न क्यों हुए। लेकिन आपके विचारों से यह स्पष्ट हैं कि आप कौशिक जी के प्रिय अवश्य है। हम सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि भाषा पर ध्यान दिया जाएं। आपने कभी पुछा कौशिक जी से की….बौसिड़ वालों,जूते मारुंगा सालों को…क्या यह एक पत्रकार की जुबान होती है। आपने तो पूरे सहारा परिवार को ही गाली दे दी की सहारा वाले ऐसे हैं,जो लातों के भुत हैं…।
    बहराल,आप जो भी हैं। मैं ईश्वर से आज से लगातार प्रार्थना करुंगा की…आप जैसे लोगों को ऐसा दंड दे,जिसकी मांफी कही ना हो….मैं हमेशा आपके लिए आपके परिवार के लिए प्रार्थी रहूंगा की जो पीड़ा आपने मुझे पहुंचायी हैं। वह आपको भी पहुंचे।
    यशवंत जी, मुझे मांफ करें मैंने गलती से आपके इस मंच को देख लिया था। आज के बाद मैं इस मंच पर कभी प्रतिक्रिया नहीं दूंगा…जिसे जो कहना हैं कहें…जो करना हैं करें..हां मुझे चौहान जी का इंतजार अवश्य रहेगा…। आप सभी लोगों को मेरा इस मंच पर अंतिम प्रणाम…। उमाकुमारा यादव

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  • veer chauhan says:

    माननीय श्री श्री श्री 1008 के सिंह जी बड़े ही शातिर किस्म के दोगले लेखक हैं आप एक तरफ सहारा को तेल लगा दिया दूसरी तरफ सहारा की मौजूदा टीम को गाली भी दे दी… आप किसी अच्छे मीडिया हाऊस से तो जुड़े नहीं है ये बात तो तय है क्योंकि किसी अच्छे मीडिया हाउस के पत्रकार के पास इतना वक्त नहीं होता कि वो भड़ास पर आ कर अपने लेखनुमा कमेंट छापे… दूसरी बात ये कि राजेश कौशिक किस को गाली देते हैं और क्यों देते हैं इस बात के पीछे वजह जाननी हो तो ज़रा एक बार सहारा यूपी के न्यूज़रुम में जाकर नज़र दौड़ाईये शायद आप खुद दी जान जाएंगे की कौन सही है न्यूज़रुम में आने वाले 60 लोग या फिर राजेश कौशिक…रही बात राजेश कौशिक से जुड़े लोगों के ये सब लिखने की तो बिल्कुल ठीक पहचाना आपने वीर चौहान भी राजेश कौशिक से जुड़ा है और अक्सर उनके पास जाता रहता है लेकिन मैंने कभी किसी की दलाली करते नहीं देखा राजेश कौशिक को… अगर वो व्यक्ति किसी खबर को खुद गंभीरता से लेकर अपने केबिन से बाहर निकलकर दौड़ता है… ये उसकी दलाली नहीं है… अगर वो व्यक्ति अपने चैनल पर चल रहे गलत स्लग सुपर और टॉप बैंड को ठीक कराने के लिये न्यूज़रूम से निकलकर रनडाऊम पर बैठे 10 साल के वरिष्ठ अनपढ़ को डाटता फटकारता है या गाली देता है तो उसमें गलत क्या है अबे दस साल में तुम्हें हिंदी लिखनी नहीं आई जो बोलते हो वही लिख भी देते हो तो गालियां नहीं खाओगे तो और क्या खाओगे…एक पैकेज किसी को लिखने के लिए दे दो तीन तीन घंटों तक उसे लेकर घूमते रहते हैं… एक दो को छोड़कर कोई भी सहारा यूपी चैनल का कर्मचारी नया आईडिया लेकर राजेश कौशिश के पास नहीं जाता.. चैनल पर क्या चलेगा कौन सा प्रोग्राम कितने बजे चलेगा ये सब राजेश कौशिश को डिसाइड करना पड़ता है बंधू… ऐसे में अगर अपने निकम्मे कर्मचारियों को कोई बॉस गाली ना दे तो क्या सुबह सुबह फूल मालाओं से उनका स्वागत करे…एक मर्तबा बैठकर तो देखो उस कुर्सी पर जनाब तब मालूम चलेगा कि कितने कांटों पर बैठता है राजेश कौशिक… चैनल के लिए विज्ञापन भी लाओ… ऊपर बैठे लोगों की गालियां भी सुनो… फिर चैनल पर क्या जाएगा कौन सी हैडलाइन जाएगी… कौन सा प्रोग्राम जाएगा… ये भी डिसाइड करो… उसके बाद निकम्मे कर्मचारियों से मोहब्बत से बात भी करो… तो भाई ये अपेक्षा तो किसी भी बॉस से नहीं की जानी चाहिए…यशवंत जी आप तो खुद राजेश कौशिक को पर्सनली जानते हो… अगर ऐसे में उनके बारे में कोई शख्स गलत टिप्पणी करेगा तो मेरी तरफ से उसे ऐसे ही शब्दों में जवाब दिया जाएगा…ये माननीय श्री श्री श्री 1008 के सिंह जी खुद लिख रहे हैं कि सहारा में गुटबाजी चलती है और सकता है कि ये माननीय भी किसी गुट का हिस्सा रहे हों… लेकिन क्यों भैय्या आखिर क्यों करते हो गुटबाजी क्या ये राजनिती का अखाड़ा है क्या या फिर सहारा वर्कर एसोसिएशन बना रखी है जो गुट बाजी करते हो… भाई मेरे निकम्मे और नाकारे लोग जिनके पास करने के लिए कुछ नहीं होता वो ही गुटवाजी करते हैं और वो ही संस्थान के अधिकारियों के बारे में चर्चा करते हैं और उन्ही को गेट के बाहर चाय पीने से रोकने पर सबसे ज्यादा तकलीफ होती है… एक बात तो बता दो यारों किसी की नौकरी तो नहीं खाई ना राजेश कौशिक ने… कविंद्र सचान का तबादला किया…प्रशांत त्रिवेदी का तबादला किया दोनों स्वेच्छा से दूसरी जगह चले गये… रही बात पूजा दूबे एंड पार्टी की उनका भी तबादला किया राजेश कौशिक चाहते तो नौकरी से निकाल सकते थे लेकिन नहीं किया क्योंकि वो आदमी दिल का साफ है जो ज़ुबा पर है वही दिल मे भी है राव वीरेंद्र सिंह की तरह नहीं कि परेशानी में फंसे लोगों का फोन तक ना उठाये… उनसे बात करना तो दूर उनकी परेशानियों को सुनकर भी अनसुना कर दे… सिर्फ एक ही व्यक्ति पर मेहरबानी दिखाए… अरे राजेश कौशिक ने तो हर किसी को मौका दिया है…बस तन्ख्वाह नहीं बढ़ रही है तो लोग इस तरह से कीचड़ उछाल रहे हैं… आज सहारा में तनख्वाह बड़ जाए 20-20 हज़ार सबकी तब देखना माननीय श्री श्री श्री 1008 के सिंह जी… कि यही गिने चुने लोग जो राजेश कौशिक के बारे में इस तरह की गंद फैला रहे हैं किस तरह से भड़ास पर ही राजेश कौशिक को तेल लगाते नज़र आएंगे.. शुक्रिया अपने कीमती वक्त में से मेरे कमेंट को पढ़ने का वक्त निकालने के लिए ।

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  • veer chauhan says:

    माननीय उमा कुमार जी(जिनके लिए भड़वा चूतिया और कुत्ता जैसी शब्दावली का इस्तेमालल किया) मेरा आपसे निवेदन है कि कृपया मुझे अपना फर्ज़ी पता ना दें..क्योंकि मैं आपके बारे में बहुत अच्छे ढंग से जानता हूं और रही बात मेरी उम्र की तो जनाव एक बात मैं भी आपको बता दूं कि आप बहुत बड़ी गलत फहमी में हैं ना तो मैं कोई कल का लौंडा हूं और ना ही मेरी उम्र के आपके बालक होंगे… माइक पांडे जैसे लोगों को बनाया है मैंने.. जानते हो कौन माइक पांडे… महज़ सिगरेट की दो डिब्बियां लेकर.. और ना जाने कितनी डॉक्यूमैंट्रिज़ आज तक बना चुका हूं… रही बात राजेश कौशिक के बारे में इस तरह की बातें सुनकर खिन्न हो जाने की तो बुज़र्ग आदमी एक बात बतादूं अगर तुम भी राजेश कौशिक की जगह बैठे होते और नाकारे लोगों को गालियां देते… तो तुम्हारे बारे में कोई व्यक्ति इस तरह की टिप्पणी करता तो भी मैं खिन्न होता… बहरहाल तुम झुठे हो और एक नंबर के मक्कार हो इस बात का सुबुत तो तुमने दे ही दिया ये कहकर कि तुम राव वीरेंद्र सिंह को नहीं जानते अरे यार कविंद्र सचान प्रशांत त्रिवेदी पूजा रुपल को तुम जानते हो उनके चमचों को नहीं जानते ऐसा भला कैसे हो सकता है… कविंद्र जिसके पिता जी थे राव वीरेंद्र सिंह पांच हज़ार इंटर्न से सहारा ज्वाइन करने वाला लड़का 80 हज़ार तनख्वाह पर जिसकी बदौलत पहुंचा तुम उसे नहीं जानते…झूठ एक दम झूठ जलते हुए तवे पर बैठकर भी बोलोगे तब भी कोई नहीं मानेगा…रही बात तुम्हारे पते की तो यार अगर ये सही है तो इसे हटवा दो क्योंकि मेरे पास तो टुच्चे लोगों से मिलने का वक्त है नहीं लेकिन कहीं राजेश कौशिक ने इस पते को पढ़ लिया तो बेटा तुम्हारी खैर नहीं और अगर ये पता किसी और का निकला (वैसे उम्मीद तो पूरी है क्योंकि पत्रकार में इतना गूदा होता नहीं कि वो अपना पता इस तरह से सार्वजनिक कर दे) तो बेवजह वो राजेश कौशिक के गुस्से का शिकार बन जाएगा… इसलिए यशवंत भाई तुमसे मैं ही गुज़ारिश करता हूं कि ये पता हटा दो चाहे जिसका भी है…और अब रही बात मेरे से मिलने की तो डीयर मैं कुछ महीनों के लिए दुबई में हं और दुबई का पता है ई-47 बैंक स्ट्रीट न्यू दुबई..यूएई…अगर यहां तक पहुंचपाना तुम्हारे लिए मुमकिन हो तो आ जाओ… अन्यथा मैं शायद तीन महीने बाद वापस लौटूंगा और गाज़ियाबाद के पते पर तुम मुझसे मिल सकते हो… पता है..डी 702 कावेरी अपार्टमेंट अहिंसा खंड इंदिरापुरम गाज़ियाबाद…लेकिन डीयर मत किया करो ऐसा कोई व्यक्ति माता के दरबार में जाता है ये खबर भी तुम्हे है… ऐसा कौन सा चेला है तुम्हारा सहारा में जो तुम्हे पल पल की खबर देता है कब चाय बंद हुई कब छुट्टियां बंद हुई कब राजेश कौशिक ने किसी को गाली दी… यार लोगों का चूतिया क्यों बना रहे हो… तुम खुद ही कहते हो कि तुम्हें ये खबरे किसी और से मिलती है तो फिर कानोसूनी बात पर तुम किसी के चरित्र पर कैसे उंगली उछाल सकते हो… मैने तुम्हें चूतिया भड़वा जैसे शब्द कहे तो तुम्हे मिर्चें लग गई तुम किसी के चरित्र पर उंगली उठा रहे हो और ये जानते हुए भी कि भड़ास जैसा मंच कितना अहम है मीडिया जगत के लिए यहीं से ना जाने कितने लोगों के भविष्य तय होते हैं फिर भी…इस तरह की बात करते हो… और सुनो मेरे परिवार के बारे में दुआ करने की कोई ज़रुरत नहीं है… राजपूत हैं हम किसी की दुआओं से ज्यादा खुद के बाज़ुओं पर यकीन रखते हैं…समझे तुम अपनी फिक्र करो.. और तुम्हारी बद्दुआओं से भी लड़ने के लिए बहुत ताकत है इन बाज़ुओं में…इस धरती पर अभी कोई पैदा नहीं हुआ जो डॉ वीर चौहान को दंडित कर सके..खबरदार ।

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  • veer chauhan says:

    एक और बात डीयर तुम इतने वरिष्ठ तो कतई नहीं हो जितना तुमने फ़र्ज़ी बखान किया है क्योंकि तुम्हें तो हिंदी लिखनी ही नहीं आती… मात्राओं का रत्तीभर ज्ञान तुम्हें नहीं है… इसलिेए नवभारत, हिंदुस्तान, जनसत्ता जैसे अखबारों का नाम लेकर उन्हें तो गाली ना दो क्योंकि इससे ग़लत संदेश जाएगा ना…कि एक ऐसे व्यक्ति को इन अखबारों ने पाला जिसे ना तो हिंदी ठीक से लिखनी आती है और ना ही मात्राओं की ही ज्ञान है…खैर छोड़ीये मगर ग़ौर फ़रमाइयेगा ।

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  • kumar kalpit says:

    BHAI MASHTENDRA PRABHAKAR JEE AAPSE AYASHEE UMMEED NAHEE THII. KAYA AAP WHII MASHTENDRA PRABHAKAR HAI JOO SAHARA BHAWAN LAKHNAWOO MEE BHREE MEETIING MEE SHUUBRATUU RAI KUU RAI SHAHAB KAHA THAA. AAJ BHEE KEESHEE MEE YAH HEEMMAT NHHEE KEE KOEE UNKA NAAM LEY LEY. BAHARHALL JUU RASHTA AAB AAPNE CHOONA HAI VAH AAPKO BAHOOT AAGE LAE JAYEGA

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