टाटा से बोली राडिया- राजा तो कनिमोझी के पीछे पागल है

आलोक तोमर
आलोक तोमर
टाटा घराने को आम धारणा में काफी बेदाग और ईमानदार उद्योग समूह माना जाता है। मगर नीरा राडिया की दलाल सेवाएं लेने की जरूरत रतन टाटा को भी पड़ गई। वैसे नीरा राडिया भी कच्ची गोलियां नहीं खेली है और रतन टाटा के बारे में काफी कुछ जानती है। रतन टाटा जानते हैं कि नीरा जानती है इसलिए दुनिया के कोने कोने से नीरा राडिया को फोन कर के गप लड़ाते रहते हैं।

नीरा राडिया किस कदर टाटा के फायदे के लिए नीतियों को प्रभावित करने, बदलवाने का काम करती हैं, वो इन आडियो टेप को सुनकर समझा जा सकता है। धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाली नीरा राडिया के लिए रतन टाटा हर समय उपलब्ध रहते हैं. वे चाहें विदेश में हों या देश में, नीरा राडिया के फोन को वो तुरंत पिक करते हैं. साथ ही, वे नीरा राडिया के नखरे भी झेलते हैं. पहले टेप, जो 7 जुलाई 2009 का है, में हुई बातचीत के कुछ अंश का हिंदी अनुवाद दे रहे हैं.

नीरा राडिया- मीडिया में भगदड़ मची है कि रतन टाटा को एयर इंडिया की अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार समीति का अध्यक्ष बनाया जा रहा है।

रतन टाटा- सही है मगर अभी तक कुछ हुआ नहीं है। एयर इंडिया के सीईओ जाधव मिलने जरूर आए थे।

नीरा- जाधव? वही तो प्रफुल्ल पटेल का आदमी है और बोइंग वाला सौदा करने के लिए लाया गया है। इसीलिए ये लोग तुम्हारा नाम इस्तेमाल करना चाहते हैं क्योंकि इससे इनकी साख बनी रहेगी। मेरे पास टाइम्स ऑफ इंडिया से फोन आया था और मैंने कह दिया कि फिलहाल मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगी।

टाटा- सही है जब कुछ हो नहीं जाए तब तक तो यही कहना पड़ेगा। तुम बता रही थी कि प्रफुल्ल ने तो आधिकारिक तौर पर कह दिया है कि रतन टाटा को हम अपने साथ शामिल कर रहे हैं। अच्छा है, उसे खुद बोलने दो।

नीरा- हम तो बस नो कमेंट ही करते रहेंगे। तुम लंदन पहुंच गए क्या?

टाटा- अभी तो तेल अबीब में पड़ा हूं, जहाज दो घंटे लेट है और देखते हैं, कब उड़ता है।

नीरा- तुम्हें तो अपने जहाज में ही उड़ना चाहिए। वैसे भी कल कोई प्रोग्राम है न।

टाटा- लंदन में है जहां मुझे काली टाई यानी एकदम फॉर्मल सूट पहनना पड़ेगा। तुम्हे तो पता है कि मुझे ऐसे कपड़े कितने पसंद हैं।

नीरा- मुझे भी बुला लेते तो मैं अपना काला गाउन पहन सकती थी।

टाटा- अच्छा होता कि तुम ही मेरी जगह काला गाउन पहन कर चली जाती, मगर अब तो बहुत देर हो गई है।

नीरा- मुझे तो अपना काला गाउन पहनने का मौका ही नहीं मिलता, रतन तुम कुछ करो ना।

टाटा- मुंबई में मौका निकालेंगे। वहां तुम अपनी हसरतें पूरी कर लेना। वैसे गाउन रखा कहां है, लंदन में या बॉम्बे में?

नीरा- दिल्ली में मेरे पास रखा है, मैं हमेशा अपने साथ रखती हूं मगर पहनने का मौका ही नहीं मिलता।

टाटा- अब जब तुम हिलेरी क्लिंटन से मिलो या मैं बताऊंगा कि कौन काले गाउन के लिए ठीक रहेगा तब इसको पहनना। तब तक ठीक से रखो।

नीरा- मैं तो तभी पहनूंगी जब अगली तुम काला सूट पहनोगे (इठला कर)। मुझे बुलाओगे न? अरे हां, एटी एंड टी ने अनिल अंबानी के साथ सौदा खत्म कर दिया है। हुआ ये कि मुकेश ने अपना अमेरिका वाला वकील यह चिट्ठी लिख कर भेजा कि सबसे पहले इनकार करने का अधिकार मुकेश के पास है और उधर से जवाब आया कि अभी वे मामले पर विचार कर रहे हैं। मुकेश अब चाइना पावर से अपनी कंपनी के लिए बिजली की बात कर रहा है।

टाटा- चाइना पावर इस सौदे में शामिल होगा, इस पर मुझे शक है क्योंकि वो लोग काफी पुराने ढंग से सोचते हैं। वैसे भी सुना है कि मुकेश दूसरी पार्टी को दस परसेंट ही दे रखा है। अगर यही सौदा मुकेश के साथ हम कर रहे होते तो वह कभी नहीं करता। उन्हें तो हर चीज पर पूरा कंट्रोल चाहिए। वैसे भी मैं इसमें नहीं पड़ने वाला। मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है।

नीरा- लेकिन फिलहाल तो वो फंसा हुआ है। उसने टेलीकॉम स्पेस ले लिया। एंटी एंड टी ने मना कर दिया, एमटीएन ने मना कर दिया, ऑस्ट्रेलिया की टालेस्टा ने मना कर दिया। अब क्यू टेल से बात करने के अलावा और कोई चारा नहीं हैं। और हां, राजा बता रहा था कि अब तुम्हारे लिए भी स्पेक्ट्रम नहीं बचा है। जब कोर्ट का आदेश नहीं मिलेगा और रक्षा मंत्रालय स्पेक्ट्रम खाली नहीं करेगा तब तक अपना काम नहीं बनेगा। यह होना मुश्किल है, मैं आज राजा से मिली थी। वो बड़ा खुश नजर आ रहा था। चीफ जस्टिस के फैसले के बाद तो उसकी खुशी समझ में आती है। जब मैंने उसे बताया कि चिट्ठी और चेक उसके पास आ रहा है तो और खुश हो गया।

टाटा- क्या वो जानता है कि दूसरी पार्टी उसे निपटाने पर तुली है।

नीरा- उसे पता है और वो मीडिया में मुझसे मदद मांग रहा है और मैं मदद कर रही हूं। दिक्कत सिर्फ यह है कि जब भी उसकी मदद करने की कोशिश करो तो वह कहीं भी जा कर कुछ उल्टा सीधा बोल देता है। उसका अपनी जुबान पर काबू ही नहीं है। अब सबसे नई खबर यह है कि कनिमोझी और राजा का चक्कर चल रहा है।

टाटा- सही है क्या?

नीरा- एकदम नहीं। कोरी अफवाह है। वो तो राजा मीडिया के सामने कनिमोझी के बारे में बड़ी प्यार भरी बातें करता है और इसीलिए सारा लफड़ा खड़ा हो जाता है। राजा की बातों से लगता है कि वो कनिमोझी को प्यार करता है और कनिमोझी उसे भाव नहीं देती। राजा को डर भी नहीं लगता कि उसकी बीबी उसे पीटेगी। कनिमोझी मुझे कहती है कि मुझे राजा से बचाओ। राजा की आंखों में साफ नजर आता है कि वो कनिमोझी का दीवाना है। एक बात और, मेरी नई जगुआर कार शनिवार को आ रही है।

टाटा- मुबारक हो।

रतन टाटा की नीरा राडिया से पूरी बातचीत को इन दो आडियो प्लेयरों के जरिए सुनिए. दूसरे आडियो प्लेयर में शुरुआत में नीरा की किसी और से बातचीत होती है और उसके कुछ देर बाद रतन टाटा से बातचीत होने लगती है. नीरा स्पेक्ट्रम के मसले पर काफी कुछ टाटा को ब्रीफ करती दिख रही हैं.

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लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार और डेटलाइन इंडिया के संपादक हैं.

Comments on “टाटा से बोली राडिया- राजा तो कनिमोझी के पीछे पागल है

  • dada aap jab bhi likhate hain bindas likhate hain jansatta me jab stingar kye rup me kaam suru kiya thaa tabhi se aap ko padhata aa raha hun kabhi prtikriya nahin di. lekin tata aur radiya ke saath barkha ki jo pol aapne kholi hai sina chaura hogaya

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  • Sachin Bansal says:

    If there is some thing personal between Tata and Neera Radia, then media is never entitle to peep into anybodies private life. Who gave authority to media to peep into one’s personal life either Tata or anybody else ? If anybody does such kind of mistake which affects the society, then only media should raise voice.
    Sachin Bansal
    Lecturer in Remote Sensing
    Haryana Space Application Center (HARSAC)
    CCSHAU Campus
    Hisar, Haryana

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  • सुरक्षा के मद्देनजर या भ्रष्टाचार की जाँच हेतु किसी का फोन टेप किया जाना सर्वथा उचित है परंतु उसका सार्वजनिक किया जाना एक अपराध है. माननीय यशवंत जी/ आलोक तोमर जी आपके पास छापने को क्या अब आम जनता का बेडरूम और कंबल के नीचे हो रही हरकत ही बची है. कृपया कर के इन टेप्स को यथा शीघ्र हटा दे इससे आपकी संकीर्ण सोच दिखाई देती है. ये पत्रकारिता की नही गंदगी की पाराकस्ता है. किसी की निजी जिंदगी को इस तरह सार्वजनिक करना सर्वथा अनुचित है चाहे वो टाटा , अंबानी हो या आम आदमी .

    विवेक दयाल

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