तुलसी सेवा में जुटे हैं बनारस के ये अखबार

: पर्यवेक्षक से मारपीट के बावजूद तुलसी के प्रति नरमी दिखाई अखबारों ने :  बनारस और चंदौली में बड़े अखबारों के चहेते तुलसी सिंह राजपूत कांग्रेस से निकाल दिए गए हैं. अब्‍दुल करीम तेलगी के सहयोगी रहे और मकोका झेल चुके तुलसी सिंह राजपूत पर्यवेक्षक और महाराष्‍ट्र से एमएलसी भाई जगताप को अपने समर्थकों के साथ मिलकर ठुकाई करने तथा हवाई फायरिंग करने पर निकाला गया. युवाओं को शामिल करने का अलाप लगाने वाले महासचिव राहुल की पार्टी में तुलसी बाबा अपने पैसों के बल पर शामिल हुए थे. फिलहाल, पार्टी की तरफ से तुलसी समेत कुल दस लोगों पर मुकदमा चंदौली कोतवाली में दर्ज कराया गया है.

बनारस के तीनों बड़े अखबारों ने इसे मजबूरीवश छापा तो है साथ ही तुलसी को भी पूरा कवरेज दिया है. यानी इस मामले में पूरी तरह से ख्‍याल रखा गया कि आरोपी का बयान भी लिया जाए, जिसमें तुलसी ने आरोप लगाया है कि पर्यवेक्षक ने उनसे पचास लाख रूपये टिकट देने के नाम पर मांग की थी, लेकिन पर्यवेक्षक भाई जगताप का पक्ष नहीं लिया गया कि उन्‍होंने पैसा मांगा था या नहीं. खबर यह है कि अमर उजाला से इन दिनों तुलसी की बड़ी डील होनी थी. जिससे उसने खबर के तेवर को इतना नरम कर दिया है कि मामला बड़ा साधारण सा नजर आता है. जागरण और हिन्‍दुस्‍तान की मजबूरी भी साफ समझ में आती है. कांग्रेस की इस मीटिंग में ड्रामा, एक्‍शन तथा इमोशन सब कुछ देखने को मिला, लेकिन अखबारों ने इसे स्‍पेशल खबर की तरह ट्रीट कर तुलसी के पक्ष को ज्‍यादा महत्‍व दिया है. सीधा आरोप किसी भी अखबार ने नहीं लगाया. सबने नामजद रिपोर्ट होने के बाद की मजबूरी में ही इस खबर का प्रकाशन किया.

भ्रष्‍टाचार मिटाने का जाप करने वाले राहुल बाबा की पार्टी में तुलसी का शामिल होना भी एक कहानी है. इनको शामिल किए जाने को लेकर चंदौली के कई कांग्रेसियों ने बड़ा विरोध किया था, लेकिन दूसरे गुट के लोगों ने भारी पैसा लेकर इन्‍हें लखनऊ में पूरे धूमधाम से पार्टी की सदस्‍यता दिलवा दी थी. ये वही तुलसी सिंह राजपूत हैं, जिन्‍होंने पिछले लोकसभा चुनाव में जागरण और हिन्‍दुस्‍तान को लगभग खरीद लिया था. अगर तुलसी छींकते थे भी थे तो जागरण और हिन्‍दुस्‍तान बड़े प्‍यार से इसकी छपाई करते थे. महाराष्‍ट्र में कई तरह के रोजगार-धंधा करने वाले तुलसी सिंह राजपूत विभिन्‍न तरीकों से जब पैसा कमा लिए तो उन्‍हें पॉवर की दरकार महसूस हुई. इसके लिए इन्‍होंने अपने गृह जिले चंदौली का रूख किया.

महाराष्‍ट्र में ये समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे. चुनाव से काफी पहले ही इन्‍होंने जागरण में पूरे पेज का विज्ञापन छपवाया था, जिलेवासियों को बधाई दी थी. इसके बाद ये जिले के कुरहना ग्राम के पास राजपूत एग्रो के नाम से कृषि उत्‍पादन का व्‍यवसाय लगाया और ढोल पीटना शुरू कर दिया कि यहां के युवाओं को नौकरी देंगे. सबको रोजगार दिया जाएगा. कोई बेरोजगार नहीं रह जाएगा. इसका असर हुआ. चिपकने वाले जीव इनसे चिपकना शुरू हो गए. लोकसभा चुनाव के दौरान इनको आशा थी कि महाराष्‍ट्र में सपा के बड़े पद पर होने के चलते इन्‍हें लोकसभा का टिकट पार्टी से मिल जाएगा. परन्‍तु पार्टी ने स्‍थानीय समीकरण को देखते हुए इन्‍हें टिकट नहीं दिया. नाराज होकर इन्‍होंने क्षेत्रीय पार्टी भासपा का दामन थाम लिया.

चुनाव में भासपा से उम्‍मीदवार बने. जमकर पैसा बहाया. जिले का दैनिक जागरण और हिन्‍दुस्‍तान इन्‍हें अपने अखबारों में लोकसभा ही भेज दिया था. चर्चा थी कि इन्‍होंने दैनिक जागरण और हिन्‍दुस्‍तान को बीस से पचीस लाख रूपये विज्ञापन के लिए दिए थे. जागरण के एक केबिन वासी के तो सबसे प्रिय पात्र बन गए थे तुलसी सिंह राजपूत. सीधे डिलिंग वहीं से होती थी कि कौन सा समाचार किस पेज पर और कैसे जाएगा. विज्ञापन के अलावा भी कई मद में लाखों के वारे न्‍यारे हुए. सीधे ताकतवर सज्‍जन से डील होने के बाद तुलसी जागरण के प्रतिनिधियों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्‍यवहार करते थे. तुलसी की खबर करने वाले पत्रकारों को बाकायदा उनके सभा स्‍थलों तक टाइम से पहुंचने का फरमान ऊपर से जारी था. यानी जागरण का प्रतिनिधि पत्रकार ना होकर साहब का मजदूर हो गया था. तीन से पांच सौ में काम करने वाले बेचारे भागे-भागे पहुंचते थे तुलसी जी की सभा में. जमकर खबरों में भी तुलसी चालीसा पढ़ा जाता था. इसे अखबार की पुरानी कॉपियों में आसानी से देखा जा सकता है.

हिन्‍दुस्‍तान का भी हाल कमोवेश यही था. यहां भी अच्‍छी खासी डिलिंग हुई थी. इस अखबार के जिला प्रतिनिधि खुद तुलसी की सभा कवरेज करने पहुंचते थे. उनके लिए बाकायदा गाड़ी की भी व्‍यवस्‍था की गई थी. जिसमें अन्‍य अखबारों के इनके दोस्‍त-यार-दुश्‍मन सब बैठकर जाते थे. उस दौरान ये हिन्‍दुस्‍तान अखबार सिर्फ और सिर्फ तुलसी के गुणगान से ही रंगा रहता था. चुनाव से एक दिन पहले तो हिन्‍दुस्‍तान ने फ्रंट पेज पर ही तुलसी का ऐसा पेड न्‍यूज छाप दिया था कि लोग भौचक्‍क हो गए थे. काफी छीछालेदर हुई थी अखबार की. बाद में प्रबंधन को सफाई भी देने पड़ी थी. इसके बारे में अगले दिन विज्ञापन लिखकर छापा गया था. हां, उस दौरान अमर उजाला से कोई लम्‍बी डील नहीं हो पाने से उजाला ने इनकी खबरों को बहुत बेहतर तरीके से कवरेज नहीं दिया. इधर खबर है कि अमर उजाला से तुलसी की बड़ी डील होने वाली थी. इसे कल के घटनाक्रम के खबर की तेवर देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.

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Comments on “तुलसी सेवा में जुटे हैं बनारस के ये अखबार

  • are bhea ! rajput g ne jb chandauli se chunav lde the to yhna k bhaspa ke kayrktaon se jile bhr k 10 v paas ldko ko naukri dene ke lia markshit mangvaye the. chunav harne ke bad ldkon ki markshit mili ki nhi naukri ki to bat chhodo. es desh ka kya hoga. vhi hoga jo neta chahegne.
    jay ram.

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  • ptrakarita in dino kalam ki ptrakarita nahi balki bysai ki ptrakarita rah gai hai .tulsi rajput ke gurgo ne kya nahi kiya lekin kuchh news papero ne jo varansi se prakashit hote hai vo unhe bachane ka kam kiya hai jo akhbar padhne se pata chalta hai

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