तो आवभगत स्वीकार करते ही क्यों हैं पत्रकार?

सोमवार को अजमेर के केकड़ी कस्बे में ”शुद्ध के लिए युद्ध अभियान” के दौरान एक फर्म के विरुद्ध की गई रसद विभाग की कार्यवाही के दौरान फर्म मालिक और मीडिया कर्मियों के बीच खबर उजागर न करने को लेकर नौंक-झौंक हो गई। असल में हुआ ये कि जैसे ही मीडियाकर्मियों को पता लगा कि रसद विभाग का दल वहां पहुंच रहा है तो वे भी वहां रिपोर्टिंग करने को पहुंच गए। फर्म मालिक ने सभी की खूब आवभगत की और स्वागत-सत्कार किया।

मीडिया कर्मियों ने भी खुशी-खुशी आवभगत ऐसे स्वीकार किया, मानो यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो। आखिरकार हम जमीन से दो फुट ऊपर चलते हैं, स्वागत तो लोगों को करना ही होगा। और अगर वह अपराधी भी है तो फिर उसे जरूर करना होगा। लेकिन जैसे ही उसने खबर न छापने का आग्रह किया तो मीडियाकर्मी मुकर गए। इस पर नौंक-झोंक हो गई। नौंक-झोंक तो होनी ही थी। जो व्यक्ति आपकी चापलूसी कर रहा है तो इसका मतलब साफ है कि वह आपकी हैसियत को जानता है और खुश करके अपना काम निकालना चाहता है। आवभगत करवाते समय तो हमने सोचा नहीं कि इतना सम्मान क्यों मिल रहा है और जैसे ही उसने अपना मन्तव्य रखा तो हम बिगड़ गए। और लगे उससे उलझने।

और जब फर्म मालिक ने देख लेने की धमकी दी तो हमें बर्दाश्त नहीं हुआ। हमारे पास चूंकि खबर छापने का अधिकार है, इस कारण हमने नौक-झोंक की खबर भी छाप ली। अहम सवाल ये है कि ऐसी नौबत ही क्यों आती है? न तो हम छापे की कार्यवाही के दौरान स्वागत-सत्कार स्वीकार करें और न ही बाद में कोई हमारे साथ बुरा सलूक करे। यदि हमें बुरा सलूक पसंद नहीं तो स्वागत-सत्कार से भी बचना चाहिए। और उससे भी बड़ी बात ये कि पूरे वृतान्त को हम उजागर करके जनता की हमदर्दी की उम्मीद करते हैं तो वह बेमानी है। ये पब्लिक है सब जानती है।

अजमेर से गिरधर तेजवानी की रिपोर्ट

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Comments on “तो आवभगत स्वीकार करते ही क्यों हैं पत्रकार?

  • Piyush Rathi says:

    TEJWANI JI – us din hua yu ki apne aapko patrakaar samajhne wale local channel ke camremeno ne jamkar aavbhagat ka lutf uthaya our mouke par 1 samachar patra ka sanwaddata bhi pahucha jisne ye khabar bheji thi. our jab firm ke maalik dwara unka swaagat satkaar karne ki koshish ki gayi toh usne bhi aapki tarah hi apna patrakarita ka dharma nibhate huye aavbhagat ko thokar maar di thi.
    yadi wo patrakaar bhi un logo ki tarah hota toh khabar hi nahi chapti our baaki dusro ki tarah le dekar mamla raffa daffa kar diya hota. yaha aap bhi acche se jante hai ki KEKRI mein partakaaro ki dasha or disha kaisi hai.
    ye khabar un camerameno ki aavbhagat ki thi jinka firm ke malik dwara satkaar kia gaya tha or baad mein unhi ko firm se bahar nikal diya gaya or unhe apna kaam tak nahi kerne diya. jisse wo na ghar ke rahe na ghat ke.

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