तो इस वजह से हारा परवेज-पुष्पेंद्र पैनल!

: ये है प्रेस क्लब आफ इंडिया के नए पदाधिकारियों की अनंतिम-अनधिकृत सूची : प्रेस क्लब आफ इंडिया, दिल्ली के चुनाव नतीजे अधिकृत तौर पर घोषित नहीं किए गए हैं क्योंकि इस पर अदालत ने रोक लगा दी है. लेकिन मतों की गिनती के बात जो तस्वीर बनी है, उससे पता चलता है कि परवेज – पुष्पेंद्र पैनल से केवल दो लोग जीत सके हैं और वो भी मैनेजिंग कमेटी के मेंबर के बतौर. विजयी लोगों की जो लिस्ट भड़ास4मीडिया को प्राप्त हुई है, वह इस प्रकार है-

: PRESS CLUB OF INDIA ELECTIONS : 2010–2011 : PRESIDENT – T.R. RAMACHANDRAN (G-FILES), VICE PRESIDENT – ANIL ANAND  (DNA), VICE PRESIDENT – VINEETA PANDEY (DNA), SECRETARY GENERAL – SANDEEP DIKSHIT (THE HINDU), TREASURER – NADEEM A. KAZMI (NDTV-INDIA), FOR THE 16-MEMBER EXECUTIVE COMMITTEE- 1. AARTI DHAR (THE HINDU), 2. ADITI NIGARM (FINANCIAL WORLD, TEHELKA), 3. AVTAR NEGI (DD NEWS), 4. DINESH K. TEWARI (HINDUSTAN), 5. G. KRISHNA MOHAN RAO (EENADU), 6. JOMY THOMAS (MALAYALA MANORAMA), 7. M. K. TAYAL (THE DAY AFTER), 8. SANJAY SINGH (RASHTRIYA SAHARA), 9. RAJEEV RANJAN (NDTV INDIA), 10. NITIN A. GOKHALE (NDTV), 11. SANJEEV UPADHYAYA (DOORDARSHAN), 12. SHAMBHU NATH CHOUDHARY (ALL INDIA RADIO), 13. SUMIT MISHRA (AAJ TAK), 14. VIJAY SALUJA (PANA INDIA). उपरोक्त सभी विजेता राम – संदीप – नदीम पैनल के हैं. परवेज – पुष्पेंद्र पैनल से मैनेजिंग कमेटी के लिए दो लोग चुने गए हैं जिनके नाम हैं- Anup saxena और Narendra bhalla. ये जानकारी आफिसियल नहीं है और न ही अंतिम है क्योंकि चुनाव नतीजे की वैध घोषणा कोर्ट के जरिए होनी है.

सूत्रों का कहना है कि वोटिंग पैटर्न देखकर दो चीजों का पता चलता है. एक तो प्रेस क्लब के ज्यादातर सदस्य परवेज – पुष्पेंद्र के फिर से चुनाव में उतरने को पचा नहीं पा रहे थे. इन्हें लग रहा था कि कई बार से लगातार पदाधिकारी रहने के बाद अब तो इन लोगों को खुद तौबा कर लेना चाहिए था और दूसरों को मौका देना चाहिए था लेकिन ये लोग जाने किस प्रलोभन – महत्वाकांक्षा में फिर चुनाव लड़ने को तैयार हो गए. इस कारण ज्यादातर सदस्यों ने परवेज – पुष्पेंद्र पैनल को नकार दिया. कुछ लोगों का कहना है कि इस बार के चुनाव में ब्राह्मणवाद का भी बोलबाला रहा है. संदीप दीक्षित के पैनल को जिताने के लिए ब्राह्मण लाबी ने सारे घोड़े खोल दिए थे. परवेज – पुष्पेंद्र से नाराज गैर ब्राह्मण जातियों के पत्रकार भी संदीप पैनल के साथ हो लिए. इस तरह सब मिलाकर कुछ खेल हुआ कि परवेज – पुष्पेंद्र के लिए मुंह छुपाने की जगह नहीं बची है.

शायद, ये दोनों इस हार से सबक ले पाएं और मनुष्यों के साथ मनुष्यों जैसा बर्ताव करने की तमीज हासिल कर सकें. खासकर पुष्पेंद्र को लेकर प्रेस क्लब से जुड़े ज्यादातर लोगों का कहना था कि अहंकार और बदमिजाजी के कारण इस व्यक्ति ने अपने बहुत दुश्मन बनाए हैं. अगर यह सब कुर्सी पर आसीन होने के बाद वाले रोग थे तो माना जाना चाहिए कि कुर्सी जाने के बाद ये रोग खुद ब खुद कुछ समय में चले जाएंगे. इससे सबक नए पदाधिकारी लें. कुर्सी पर बैठने पर कुर्सी वाले रोग न लगें, ऐसी कोशिश करें.

परवेज – पुष्पेंद्र पर राम – संदीप पैनल ने भ्रष्टाचार के जो गंभीर आरोप लगाए थे, उसने भी प्रेस क्लब सदस्यों के कान खड़े किए. ऐसे आरोप पहले भी परवेज – पुष्पेंद्र पर लगते रहे हैं तब लोगों ने भरोसा नहीं किया. लेकिन जो नए खुलासे इन दोनों के बारे में हुए इससे प्रेस क्लब सदस्यों को समझ में आ गया कि इन्हें फिर मौका देने खतरे से खाली नहीं है. भड़ास4मीडिया के पास जो एक स्टिंग है, उसमें भी एक वरिष्ठ पत्रकार इन पदाधिकारियों के नाम पर प्रेस क्लब मेंबर बनाने के लिए एक सज्जन से पैसे लेकर नोट गिनते नजर आ रहे हैं. उनका स्टिंग में कहना है कि वे ये पैसे पदाधिकारियों तक पहुंचाएंगे और फिर मेंबर बनाने की औपचारिकता को पूरी करा देंगे. इस वीडियो से पता चल जाता है कि प्रेस क्लब आफ इंडिया में कितने बड़े बड़े खेल तमाशे हो रहे थे. स्टिंग करने वाले ने इस शर्त के साथ वो वीडियो भड़ास4मीडिया के पास सौंपा है कि बिना उसकी अनुमति के इसका प्रकाशन न किया जाए. पर अगर इससे संबंधित कोई मामला अदालत में पहुंचेगा तो वहां यह वीडियो पेश कर दिया जाएगा.

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Comments on “तो इस वजह से हारा परवेज-पुष्पेंद्र पैनल!

  • Now It is a big task in front of new team to revive the press Club in financial and other terms and not to follow the foot steps of old junkyard team. Otherwise they will also see the Exit door in next election. Many Conratulations to New Team.

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  • Bhanupratapnarain Mishra says:

    In Press Club of India…last six year this P and P panel like Muslim+Kayasaht.This is wrong…and working journlist defeat non working journlist…PC I need full time manager not a Secretary Gerneral..and you are right…Ego kill RAja Kans also….I hope New RAM..Anil Anand+Vinita Pandey+Sandeep dixit and Nadeem panel do wonder….and check all finacial docuemnts…and punish those guilty….

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  • क्रांतिया हुई फिर क्या हुआ । इतिहास के पन्ने पलट कर देख लिजिए क्रांतियों के बाद कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ । पीसीआई पियक्कड़ों का अड्डा है और रहेगा । चंडू खाने की गप्पे यहां होती हैं वो होती रहेंगीं । कोई भला मानुस अपने परिवार के साथ पीसीआई नहीं जा सकता । ये दलालों और शराबियों का अड्डा है चामाचंद्रन और संदीप क्या बदलाव लायेंगें आप सब देख लेना । वही ढ़ाक के तीन पात रहेंगें । 90 हज़ार रूपए दे कर जो एसोसिएट सदस्य बने हैं उनकी दलाली यहां तथा कथित प्रत्रकार करते रहेंगें ।
    रामाचंद्रन तो gfile ब जैसी एक फालतू की पत्रिका से अपना नाम जोड़े हुए हैं पत्रिका के दलाल संपादक अनिल त्यागी और वो मिल कर भले ही कुछ काम प्रैस क्लब में कर लें वो भी अपने स्वार्थ का । अनिल त्यागी ने का इतिहास आप उठाकर देख लें अगर रामाचंद्रन जैसा वरिष्ठ पत्रकार उनिल त्यागी जैसे व्यक्ति से जुड़ सकता है उनकी काबिलियत पर भी अब शक होने लगा है वैसे तो वो एक अच्छे पत्रकार रहे हैं अब उनके इतने बुरे दिन आ गये कि उन्हें gfile जुड़ना पड़ा । लेकिन संदीप दीक्षित का क्या होगा जिनके पास द हिंदू की फुल टाईम नौकरी है । क्या वो समय निकाल पायेंगें । पीसीआई में पत्रकारिता के अलावा सब कुछ होता है।
    कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा पीसीआई दारूबाजों का अड्डा है और रहेगा । ज्यादा से ज्यादा मीट द प्रैस होगा वो भी साफ नीयत के साथ नहीं . बदलाव पर ज्यादा खुश होने के ज़रूरत नहीं है बंधुओं

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  • I can not claim to have inside knowledge, but definately can claim to have my own experience with outgoing regime of the PCI. Though neither i drink nor i am in habit of partying, i wanted to apply for the membership for the reason that if needed, i could meet anyone there for professional reasons. I contacted a fellow journalist who was close to one of the office bearer from outgoing panel. Since, this person was a well-wisher of me, he told me not to apply as the membership of PCI has become “too costly”. I asked why too costly, he replied that since PCI has been allocated a piece of land, the office-bearers are asking for “extra amount”. Though i had heard about the way journalist behave inside PCI building, i was not aware about the corruption. It was sufficient for me to be satisfied with even using open dhaba across the parking for meeting then to apply for PCI membership.

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  • bahut sare log galat fahmi me rahte hain pata nahi press club ko kya dekhna chahte hain.janab yah ek kampani hai uske member paisa dekar pee kha sakte hai. aap khud peete hain aur kahte hain piyakaddo ka adda hai? chahe to aap na piyen.

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