नभाटा का हाल : रखने हैं पाव भर के दो इंटर्न, लेकिन नक्शेबाजी सवा कुंतल की

नवभारत टाइम्स वालों ने अपनी वेबसाइट के लिए वैकेंसी निकाली है. दो इंटर्न इन्हें चाहिए. पर इन दो इंटर्न की नियुक्ति के लिए जितना भाषण पेल दिया है, उतना सुन-पढ़ कर तो बेचारे इंटर्न बेहोश हो जाएं, अप्लाई करना तो दूर. नभाटा की वेबसाइट पर संपादक की तरफ से दो इंटर्न की जरूरत से संबंधित जो लेख या विज्ञापन, जो कहिए, प्रकाशित हुआ है, उसे आप भी एक बार पढ़ लें.

और जरा सोचें, कि दो इंटर्न की नियुक्ति के लिए इतने सारे कड़े प्रावधान, नियम-कानून, इफ बट किंतु परंतु है तो संपादक की नियुक्ति के लिए क्या होता होगा. लेकिन माफ करिएगा, संपादक की नियुक्ति के लिए कोई वैकेंसी नहीं निकलती क्योंकि संपादक तो वही होगा जो मालिक के किचन में पक रहे खाने की खुशबू को छौंक लगने से पहले ही ताड़ जाए. यही ट्रेजडी है भारतीय पत्रकारिता की. ट्रेनी के लिए इतने नियम कानून और संपादक के लिए कुछ नहीं.

ट्रेनी से नैतिकता-ज्ञान की अपेक्षा, संपादक माने खुल्ला सांड़, जिसकी कोई योग्यता नहीं, सिवाय मालिक के लटक होने के. लीजिए, नभाटा के महान इंटर्न एप्वायंटमेंट वैकेंसी को बांचिए. यह आलेख आठ दिन पहले का है. एक मीडियाकर्मी साथी ने इस तरफ ध्यान आकृष्ट कराया तो यहां प्रकाशित किया जा रहा है. -यशवंत, भड़ास4मीडिया

NBT को जरूरत है नए युवा साथियों की

10 Aug 2011, 1143 hrs IST, नवभारतटाइम्स.कॉम

नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पाठकों की सबसे पसंदीदा हिंदी वेबसाइट बन गई है। हमने इधर पाठकों के लिए अलग ब्लॉग सेक्शन शुरू किया है और अपनी मोबाइल साइट भी लॉन्च की है जिसका भरपूर स्वागत हुआ है। हम आगे और भी नई-नई चीजें लेकर आ रहे हैं। जाहिर है, जब हम पाठकों को पहले से ज्यादा सामग्री देंगे तो हमारा काम भी बढ़ेगा। फिलहाल हमारी 13 सदस्यों की टीम रात-दिन मेहनत करके आपके लिए एक ऐसी साइट परोसती है जिसमें खबरों से लेकर मनोरंजन और विचार तक सबकुछ है। लेकिन अब काम का भार बढ़ने से हमें कुछ युवा साथियों की ज़रूरत है जो हमारे बढ़े हुए काम में मदद कर सकें।

हमें फिलहाल दो ताज़ा चेहरे चाहिए । अनुभव न हो, कोई बात नहीं लेकिन पत्रकारिता, खासकर डेस्क के काम में रुचि हो और टेक्नॉलजी से घबराता न हो। इन्हें हम इंटर्न के तौर पर रखेंगे। शुरुआती इंटर्नशिप 6 महीनों की है और काम देखने के बाद और आगे की ज़रूरत देखने के बाद उनका भविष्य तय होगा। अगर आप हमारे साथ काम करना चाहते हैं तो हमें अपना रेज़्युमे इस पते पर भेजें – nbtonline@indiatimes.co.in सब्जेक्ट लाइन में NBT Interns लिखें। साथ में 500-700 शब्दों में अपने किसी भी पसंदीदा विषय पर एक लेख लिखकर भेजें। (लेख के बगैर भेजे गए किसी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।) यह टिप्पणी मंगल फॉन्ट में हो और इन्स्क्रिप्ट (फनेटिक) कीबोर्ड का इस्तेमाल करके लिखी गई हो। अगर आप इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड से टाइप नहीं कर सकते तो आप हमारे यहां काम नहीं कर पाएंगे।

हां, इंटर्नशिप के दौरान उन्हें एक निश्चित राशि स्टाइपेंड के तौर पर दी जाएगी। और आखिर में, किसी भी तरह की सिफारिश या फोन कॉल को एंटरटेन नहीं किया जाएगा। जिस किसी की भी पैरवी हम तक पहुंची, समझिए, उसके सारे नंबर कट गए। हम यही समझेंगे कि उस व्यक्ति को या तो अपनी क्षमता पर भरोसा नहीं है या फिर हमारी निष्पक्षता पर। दोनों ही स्थितियां सही नहीं है। अगर आपको इस मामले में कोई भी जानकारी चाहिए, तो बेहिचक ऊपर दिए गए पते पर लिखें। आपको ज़रूर जवाब मिलेगा।

याद रखें, हमें काम करने वाले साथी चाहिए। न तो हमें उनके नाम से मतलब है, न धर्म से, न जाति से, न सेक्स से। हां, उम्र से ज़रूर मतलब है। हमारी चॉइस है 25 से कम उम्र के युवक-युवतियां। लेकिन अगर हमें इस उम्र में ठीकठाक कैंडिडेट्स नहीं मिले तो दो साल का ग्रेस दिया जा सकता है। तो अगर आप 27 साल तक के हैं, और हमारे साथ इंटर्नशिप करना चाहते हैं तो आप आवेदन कर सकते हैं। तरीका और पता ऊपर दिया गया है। 17 अगस्त तक आए आवेदनों के आधार पर हम छंटाई करेंगे और चुने हुए उम्मीदवारों को लिखित टेस्ट के लिए बुलाएंगे।

संपादक
नवभारत टाइम्स ऑनलाइन

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Comments on “नभाटा का हाल : रखने हैं पाव भर के दो इंटर्न, लेकिन नक्शेबाजी सवा कुंतल की

  • आपको इस विज्ञापन पर ताज्जुब नहीं होना चाहिए, क्योंकि जिस संपादक के नेतृत्व में एनबीटी की यह ‘बोल्ड’ वेबसाइट चल रही है, उनका नाम नीरेंद्र नागर है। यूं तो वे योग्य पत्रकार रहे हैं, पर बाल की खाल खींचने और ‘बिखपदई’ (कानून बांचने) में भी उनका जवाब नहीं है। उनसे कभी मिलिए, आपको ऐसा लगेगा जैसे वे न्यूयार्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट चला रहे हों। वर्षों तक नवभारत के मेन डेस्क पर थे। अपनी कुंठा तब ट्रेनियों पर झाड़कर पत्रकारिता का विशुद्धतावादी कर्मकांडी होने का दंभ मन ही मन भरा करते थे। नैतिकता और सिद्धांत की बात करने वाले नागर जी का ही कमाल है कि आज लोग काम तृप्ति के लिए एनबीटी की यह साइट खंगालते हैं। कई बार ऐसा लगता है जैसे यह साइट खबरिया पाॅर्न साइट है, जिसमें संुदरियों की अर्द्ध नग्न तस्वीरों के बहाने उन्हें साइट खंगालने का सुख दिया जाता है।

    रही बात इस पद हेतु उनकी शर्तों की, तो वे शुरू से ही ऐसी ही हास्यास्पद किस्म की ऊसूलबाजी के लिए जाने जाते हैं। दो-चार सौ रुपये की नौकरी क्या देने चले, ऐसा लग रहा है जैसे कलक्टर और एसपी की भर्ती कर रहे हैं। इस विज्ञापन को पढ़कर कोई भी समझदार उम्मीदवार शायद ही आवेदन करेगा। पर नौकरी को टोटा है तो नागर जी की टीम का हिस्सा बन जाने में भी क्या हर्ज है?

    अनाम

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  • नाम में क्या रखा है says:

    इस विज्ञापन और साइट के बारे में काफी कुछ तो अनाम भाई ने लिख दिया है एक चीज मुझे नहीं समझ में आई कि मंगल फौन्ट में टाइप किया हुआ आलेख चाहिए तो यह शर्त क्यों कि की बोर्ड ले आउट इंसक्रिप्ट (फोनेटिक) ही हो? ठीक है, इंस्क्रिप्ट थोड़ा वैज्ञानिक किस्म का ले आउट है पर जहां तक मैं जानता हूं इंसक्रिप्ट और फोनेटिक दोनों एक नहीं है। अगर कोई रेमिंगटन ले आउट से टाइप कर लेता है तो आपको क्या तकलीफ? शायद आपको की बोर्ड ले आउट बदलने की सुविधा के बारे में मालूम ही नहीं है और इसीलिए यह लल्लूपने की शर्त।

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  • Navbharat Times sankraman kaal se gujar raha hai. Aise logo ko sampadak ki kursir per baitha dia hai, jinhe kuch nahi aata.

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