नवोन्‍मेषक : अमर उजाला के प्रिंट लाइन में अतुल माहेश्‍वरी

ऐसा लग रहा है कि अमर उजाला में वर्चस्‍व की लड़ाई में अग्रवाल परिवार की सहमति अथवा सहभागिता कमजोर होती जा रही है तथा माहेश्‍वरी परिवार का दबदबा तथा वर्चस्‍व उजाला परिवार में बढ़ता जा रहा है. अब तक अमर उजाला के प्रिंट लाइन में संस्‍थापक द्वय स्‍व. डोरी लाल अग्रवाल और स्‍व. मुराली लाल अग्रवाल तथा संपादकों का नाम प्रकाशित होता था. इनके अलावा किसी का नाम नहीं जाता था.

अब जब अमर उजाला की कमान राजुल माहेश्‍वरी ने संभाला ली है तब से एक बड़ा बदलाव देखने को अमर मिल रहा है. अखबार की प्रिंट लाइन में अखबार के एमडी रहे स्‍व. अतुल माहेश्‍वरी का नाम भी प्रकाशित होने लगा है. उजाला के सभी एडिशनों संस्‍थापक द्वय के साथ नवोन्‍मेषक के रूप में स्‍व. अतुल माहेश्‍वरी का नाम भी जाने लगा है. इसे लोग अग्रवाल परिवार की उजाला प्रबंधन में कमजोर होती पकड़ के रूप में देख रहे हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि संस्‍थापक द्वय के बाद सबसे पहले अनिल अग्रवाल ने इस अखबार को नई ऊंचाइयां तथा विस्‍तार दिया था. एक अलग पहचान दी थी. परन्‍तु उनके निधन के बाद उनका नाम किसी भी रूप में अखबार की प्रिंट लाइन में प्रकाशित नहीं हुआ. अतुल माहेश्‍वरी का नाम अमर उजाला के प्रिंट लाइन में प्रकाशित होने से साफ है कि माहेश्‍वरी परिवार की वर्चस्‍व बढ़ा है. दूसरे नए एमडी राजुल माहेश्‍वरी ने भी एक तरह से साफ कर दिया है कि वे प्रबंधन के मामले में किसी मत-विमत को महत्‍व नहीं देने वाले हैं.

Comments on “नवोन्‍मेषक : अमर उजाला के प्रिंट लाइन में अतुल माहेश्‍वरी

  • बेनामी says:

    जो इस दुनिया में नहीं हैं उनके नाम पर विवाद खड़ा ना किया जाये, दिवंगतों की आत्मा को कष्ट होगा। बल्कि इसे एक स्वस्थ्य परंपरा के तौर पर लिया जाये। जहां तक मेरी जानकारी है राजुल माहेश्वरी बहुत ही लो प्रोफाइल रहने वाले सीधे-साधे आदमी हैं। उन्होने इस नई परंपरा के ज़रिये अपने बड़े भाई को श्रद्धासुमन अर्पित किये हैं किसी दूसरे को शायद नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की होगी। राजुल जी को इस वक्त हिम्मत, ताकत और सहारे की आवश्यकता है। जो टीम उनके पास है उसमें ऐसा कोई नहीं है जो उनको व्यक्तिगत या व्यावसायिक सहारा दे सके। ऐसे में राजुल जी अपनों में ही सहारा ढूंढ रहे हैं तो इसमें भला गलत क्या है। ईश्वर उनको विपरीत हालात से जल्द निकलने और आगे बढ़ने की ताकत दे। आमीन।

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  • shubham-raghav says:

    yadi rss ney nahi bulaya to pet mey dard kyno bhiya? jab ander ki batey sutrno key hawley sey chap rahey ho to yeh bhi jod do bhi ki nahi bhulaya,yadi koi sangtan niji bathak karta hai to kya ho gaya..? ignore karo na kyno parchar kar rahey ho kynoki tum logo ko rss key virudh lihkna hai bus aur yeh bhai sahib jo rss ko dango ka doshi karrar de rahey hai jara dimag durast karkey dosh lagyey warna desh ki kitni adaltno key chaker lagney padeyne iski ginti tak nahi kar paynge……

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